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Sunday, 30 August 2020

गुरु

🌻 गुरु एवं विभिन्न भाव🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नवग्रहों में गुरू को देवताओं का गुरु माना जाता है। गुरु को बृहस्पति के नाम से भी जाना जाता है। बृहस्पति ग्रह कर्क राशी में उच्च भाव में रहता है और मकर राशि में नीच बनता है। सूर्य चंद्रमा और मंगल ग्रह बृहस्पति के लिए मित्र ग्रह है, बुध शत्रु है और शनि तटस्थ है। बृहस्पति के तीन नक्षत्र पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपदश होते हैं।गुरु को वैदिक ज्योतिष में आकाश का तत्त्व माना गया है। इसका गुण विशालता, विकास और व्यक्ति की कुंडली और जीवन में विस्तार का संकेत होता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का बड़ा महत्व होता है। वैवाहिक सुख के लिए भी गुरु का मजबूत होना आवश्यक है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्मकुंडली में गुरु (बृहस्पति) यदि बलवान है तो व्यक्ति ज्ञान, सत्कर्म, ईमानदारी, विद्या, बुद्धि, प्रसिद्धि और संपदा के मामले में श्रेष्ठ होता है, लेकिन यदि गुरु कमजोर हो तो व्यक्ति का जीवन संकटपूर्ण रहता है। गुरु अलग-अलग भाव में अपने शुभ और अशुभ प्रभाव से आदमी के व्यक्तित्व को बनाता है। मेरा यह मानना है कि गुरु जिस किसी भी भाव में बैठता हैं उस भाव की हानि भी करता हैं।
जीव क्षेत्रे यदा शनि: शनि क्षेत्रे यदा जीव:।
स्थान हानि करौ जीव: स्थानवृद्धि करो शनि।। 
जो इस श्लोक से स्पष्ट है।गुरु के अलग अलग भाव में बैठने पर विभिन्न लक्षण परिणामस्वरूप दिखाई देते हैं जो निम्नलिखित हैं-
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रथम भाव अर्थात लग्न मे बैठा गुरु व्यक्ति को ज्ञानी और सही व उपयोगी परामर्शदाता के साथ सुस्त या आलसी बनाता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार दूसरे भाव में गुरु वाणी में गंभीरता देता है और आपको अच्छा प्रवक्ता तथा वक्ता बनने में मदद करता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार तीसरे भाव में गुरु साहित्य प्रेमी,पराक्रम,परिश्रम से धनार्जन करने और धार्मिक प्रवृत्ति के साथ ऐश्वर्य (वाहनधारक)भी प्रदान करता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार चतुर्थ भाव में गुरु रूपवान,बलवान,बुद्धिमान निष्कपट हृदय,मजबूत मेधावी शक्ति,और वाक्पटुता प्रदान करता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पंचम स्थान का गुरु बुद्धिमान,गुणवान,तर्कशील,आराम पंसद,विलासी और श्रेष्ठ एवं विद्वानों द्वारा पूज्यनीय बनाता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार छठे स्थान का गुरू मधुर भाषी,विवेकी, प्रसिद्ध, विद्वान,उदार,प्रतिष्ठित, धैर्यवान,रोगी और शत्रुहन्ता बनाता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सातवें भाव में गुरु भाग्यवान, धार्मिक,नम्र, धैर्यवान और उधार बनाता है पर भाग्योदय शादी के बाद ही होता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आठवें भाव का गुरु दीर्घायु आकर्षक व्यक्तित्व कंजूस लालची और सुदृढ़ शारीरिक संरचना प्रदान करता है तथा आठवें भाव का गुरु व्यक्ति को अधिक समय तक पिता के घर में नहीं रहने देता है। और ज्योतिष में भी रुचि जगाता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नवें भाव का गुरु धार्मिक सत्यवादी, नीतिमान, विचारशील, सम्माननीय, शास्त्र ज्ञानी,विद्वान, दानी और कुलदीपक बनता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार दसवें भाव का गुरु चरित्रवान,स्वतंत्र विचारक, विवेकी न्यायी, सत्यवादी, सत्कर्मी, ज्ञानी, वाहनसुख और मकान सुखदायक बनाता है।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ग्यारहवें भाव का गुरु निरोगी दीर्घायु ,संतोषी,उदार परोपकारी,ऐश्वर्यवान,कुशाग्र बुद्धि ,व्यापार में दक्ष,और विचारवान बनाता हैं।
❁पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बारहवें भाव में गुरु आलसी, मितव्ययी, दुष्ट प्रवृत्ति, लोभी और लालची बनाता है।
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Saturday, 29 August 2020

कन्या राशि के बारे में

🌻कन्या राशि के बारें में🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कन्या राशि की (नामतलिका ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)है। कन्या राशिफल चक्र की छठी राशि है। इस राशि का स्वरूप हाथ में फूल की डाली लिए एक कुुुुवांरी कन्या है। इस राशि का स्वामी बुध है। यह दीर्घााकार, स्त्री संज्ञक, दक्षिणी दिशा की स्वामिनी सौम्य तथा द्विस्भाव प्रवृति वाली है। यह जलाश्रयी राशि है जो कि लग्न में बली मानी गई है। कन्या राशि वैश्य वर्ण, जीव एवं चर संज्ञक है। इसके अन्तर्गत उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण,चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार उत्तराफ़ाल्गुनी के दूसरे चरण के स्वामी सूर्य और शनि है। जो आदमी को उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यों के प्रति अधिक महत्वाकांक्षा पैदा करते है। तीसरे चरण के स्वामी भी उपरोक्त होने के कारण दोनो ग्रहों के प्रभाव से घरऔर बाहर के बंटवारे को आदमी के मन में उत्पन्न करती है।चौथा चरण भावना की तरफ ले जाता है और आदमी दिमाग की अपेक्षा हृदय से काम लेना चालू कर देता है। 🌼स्वभाव🌼
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस राशि के व्यक्ति सौम्य, गुणी, वाकपटु, चतुर, चालाक व हर काम करने में निपुण होते हैं। हर बात में बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से तर्क करने की आदत होती है। बुध के प्रभाव के कारण कन्या राशि वाले जातकों का स्वभाव अस्थिर होता है। वे लंबी कद-काठी वाले होते हैं। संकोची और शर्मीले प्रभाव के साथ झिझकने वाले जातक कन्या राशि के ही देखे जाते है। मगर अपनी भावनाओं पर ज्यादा देर नियंत्रण नही रख पाते।
👱चारित्रिक विशेषताएं👱
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कन्या राशि के व्यक्ति मेहनती और व्यवस्थित होते हैं। इन्हें हर कार्य अपनी देखरेख में कराना पसंद होता है। ये बहुत अच्छे कर्मचारी और विश्वसनीय लोग होते हैं। इनकी लीडरशिप बहुत अच्छी होती है और अपनी टीम में ये लोग काफी मेहनती और प्रगतिशील रवैये के लिए जाने जाते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कन्या राशि के जातक में भाषण और लेखन के साथ संवाद क्षमता खास होती है। कन्या राशि के जातक हमेशा सेवा करना और दूसरों को खुश रखना चाहते हैं। इसलिए वे अक्सर देखभाल करने वाले काम को चुनते हैं। कभी-कभी इस राशि का जातक बहुत समालोचक और अत्यधिक चिंतित रहते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कन्या राशि का प्रतीक चिन्ह एक युवती है जो सुख समृद्धि का प्रतीक है। इस राशि का राशि स्वामी बुध ग्रह है। कन्या राशि का तत्व भूमि होता है। जिसके कारण आप सभी काम धरातल पर रहकर करते हैं।कन्या राशि वाले प्रायः देखने में सुन्दर और नजाकत वाले होते है। बुध का प्रभाव होने के कारण आपकी वाणी प्रभावी होती है।आप बुद्धिमान,बड़ी मित्रमंडली वाले, विख्यात और बात के मर्म को समझने वाले होते हैं।आप पूर्ण आस्तिक और धर्म-कर्म में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले होते हैं।आप सदैव ऊर्जावान बने रहते हैं और स्वयं को किसी से कभी कम नहीं समझते हैं। लेकिन आप सदा ही दूसरों की सहायता करने को भी तत्पर रहते हैं। आप सामाजिक प्राणी होते हैं और समाज के दायरे में रहकर आगे बढ़ते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार छोटी से छोटी बात को भी गंभीरता से लेकर आगे बढ़ते हैं और उस पर भी चिन्तन मनन करते हैं। आपके संबंध कम लोगो से बनते हैं लेकिन जिनसे भी बनते हैं मजबूत ही बनते हैं। कन्या राशि का होने से आप एक सच्चे मित्र साबित होते हैं जो सदा अपने दोस्तों की सहायता के लिए तत्पर रहता है। परिवार के प्रति भी आप समर्पित रहते हैं और सभी सदस्यों को बहुत प्यार करते हैं।घर के बुजुर्गों की तो आप बहुत सेवा करते हैं।यदि वह बीमार भी पड़ जाते हैं तब सबसे अधिक सेवा भावना आप में ही होती है।आप खाने के भी बहुत शौकीन होते हैं और भांति-भांति के व्यंजन आपको बहुत पसंद होते हैं।आपके भीतर दया का भाव होता है। व्यवहारिक व वफादार भी होते हैं।किसी भी बात का विश्लेषण व मूल्याँकन करने के बाद ही नतीजे पर पहुंचते हैं।जानवरो व पशुओ से प्यार होता है, किताबे पढ़ने के शौकीन होते हैं और प्राकृतिक नजारों से प्रेम होता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप कुछ संकोची तथा शर्मीले स्वभाव के होते हैं।कन्या राशि के लोग बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं। भावुक भी होते हैं और वह दिमाग की अपेक्षा दिल से ज्यादा काम लेते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस राशि के लोग संकोची, शर्मीले और झिझकने वाले होते हैं।मकान, जमीन और सेवाओं वाले क्षेत्र में इस राशि के जातक कार्य करते हैं।स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में शीत, पाचनतंत्र एवं आंतों से संबंधी बीमारियां जातकों मे मिलती हैं। इन्हें पेट की बीमारी से प्राय: कष्ट होता है। पैर के रोगों से भी सचेत रहें।बचपन से युवावस्था की अपेक्षा जातकों की वृद्धावस्था अधिक सुखी और ज्यादा स्थिर होता है।इस राशि वाल पुरुषों का शरीर भी स्त्रियों की भांति कोमल होता है। ये नाजुक और ललित कलाओं से प्रेम करने वाले लोग होते हैं।ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंचते हैं। विपरीत परिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकतीं और ये अपनी सूझबूझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है।बुध का प्रभाव इनके जीवन मे स्पष्ट झलकता है। अच्छे गुण, विचारपूर्ण जीवन, बुद्धिमत्ता, इस राशि वाले में अवश्य देखने को मिलती है।शिक्षा और जीवन में सफलता के कारण लज्जा और संकोच तो कम हो जाते हैं, परंतु नम्रता तो इनका स्वाभाविक गुण है। इनको अकारण क्रोध नहीं आता, किंतु जब क्रोध आता है तो जल्दी समाप्त नहीं होता। जिसके कारण क्रोध आता है, उसके प्रति घृणा की भावना इनके मन में घर कर जाती है।इनमें भाषण व बातचीत करने की अच्छी कला होती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार संबंधियों से इन्हें विशेष लाभ नहीं होता है, इनका वैवाहिक जीवन भी सुखी नहीं होता। यह जरूरी नहीं कि इनका किसी और के साथ संबंध होने के कारण ही ऐसा होगा।इनके प्रेम सम्बन्ध प्राय: बहुत सफल नहीं होते हैं। इसी कारण निकटस्थ लोगों के साथ इनके झगड़े चलते रहते हैं।ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में आस्था तो रखते हैं, परंतु किसी विशेष मत के नहीं होते हैं। इन्हें बहुत यात्राएं भी करनी पड़ती है तथा विदेश गमन की भी संभावना रहती है। जिस काम में हाथ डालते हैं लगन के साथ पूरा करके ही छोड़ते हैं।इस राशि वाले लोग अपरिचित लोगों मे अधिक लोकप्रिय होते हैं, इसलिए इन्हें अपना संपर्क विदेश में बढ़ाना चाहिए। वैसे इन व्यक्ति की मैत्री किसी भी प्रकार के व्यक्ति के साथ हो सकती है।
🤒स्वास्थ्य🤧
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इनका शरीर स्थूल होता है। अनियमित दिनचर्या एवं समय-असमय भोजन खाने के कारण पेट संबंधी रोगों से ग्रस्त रहते हैं। त्रिदोष (वात-पित्त-कफ) चर्म रोग, कर्ण रोग, भ्रांति, गले या नासिका रोग, उदर-विकार, मधुमेह, वायु-विकार, मंदाग्नि, संग्रहणी, चेचक, जड़ता, वाक्‌ रोग, कुष्ठ, दाद, पक्षाघात, पीठ का दर्द व जोड़ों का दर्द आदि रोगों से पीड़ित होते हैं। इस राशि वाली नारियों के बाल काले होते हैं और शीघ्र झरने भी लग जाते हैं। कइयों के बाल सुंदर भी देखे गए हैं। इनको सिरदर्द की तकलीफ होकर आंखों की ज्योति कमजोर हो जाती है। कभी-कभी अधिक विचार करने की आदत से या अकस्मात दर्द भरी घटना से मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है तथा याददाश्त कमजोर हो जाती है। मानसिक थकान से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर होता रहता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार दमा, मोतियाबिंद, रक्तचाप, खांसी, पेट विकार आदि रोगों में से कोई एक अवश्य ही देखा गया है। इन्हें मानसिक श्रम की अपेक्षा शारीरिक श्रम को भी महत्व देना चाहिए। भोजन संतुलित एवं समय पर लें, तभी स्वस्थ हो सकेंगे। थोड़ा व्यायाम करें या प्रातः या संध्या समय सैर करें। शरीर की स्वस्थता पर ध्यान दें क्योंकि इसी पर आपकी उन्नति निर्भर है। हरी सब्जियां व फलों का रस आपके स्वास्थ्य के लिए अत्यावश्यक है। धूम्रपान एवं मांसाहार के सेवन से बचें। मट्ठा एवं दही स्वास्थ्यवर्द्धक है। विटामिन्स डी, बी तथा कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ अवश्य लें। मनोरंजन और विनोदमय जीवन व्यतीत करेंगे तो स्वस्थ ही रहेंगे।
👩‍🎓व्यवसाय👨‍🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आदमी अच्छे लेखक हो सकते हैं इसके अलावा आप कूतनीतिज्ञ, संचार व गणित व आंकड़ो से जुड़े कामो में रुचि रख सकते हैं। आप ज्योतिष विज्ञान को भी अपने व्यवसाय का क्षेत्र चुन सकते हैं।अकाउंटस, क्लर्क, संपादक आदि भी हो सकते हैं। मनोवैज्ञानिक, वायुयान चालक अथवा चिकित्सक भी हो सकते हैं। व्यापार आदि में भी रुचि रह सकती है।आप एक अच्छे विश्लेषक भी बन सकते हैं। 
👨‍👨‍👧‍👧दांपत्य जीवन और परिवार👨‍👨‍👧‍👧
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कन्या राशि के जातकों का मकर और वृश्चिक राशि की पत्नी या पति से संबंध अत्यन्त सुखद होता है। इनकी संतान भी अत्यन्त मेधावी होती है। कन्या राशि वालों के प्रेम की परिभाषा में उनके परिवार विशेषकर जीवनसाथी तथा बच्चे भी सम्मिलित होते हैं। उनका प्रेम पारिवारिक होता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रमुख बात यह है कि स्त्री जाति के सहयोग से ही इनका जीवन बनता है।कन्या राशि के जातक कुटुम्बियों के साथ ही रहते हैं, फिर भी इनकी इज्जत घर में कम ही रहती है। ये कुटुम्ब का विघटित नहीं होने देते हैं। आध्यात्मिक बातों की तरफ ही इनका ध्यान रहता है। राजनीति में भी काफी अधिकार रखते हैं। यदि कुटुम्ब में बड़े हों, तो सारी जवाबदारी इन्हें ही उठाना पड़ती है, फिर भी उसे निभाते हैं। पास-पड़ोस के व्यक्ति कभी इन्हें बेहद तंग करते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ये घर के लोगों का हमेशा ख्याल रखते हैं। उन्हें सुख देने का प्रयत्न करते हैं। स्वयं दुःख पाकर भी परिवार के लोगों का भला करते हैं, फिर भी परिवार के लोग सम्मान नहीं करते हैं लेकिन ये हमेशा अपना कर्तव्य करते रहते हैं। भाई-बंधु व रिश्तेदार इनसे स्वार्थ-भरा प्रेम रखते हैं। इन्हें घर या बाहरी लोगों से अच्छा सहयोग मिलता रहता है।
❌कमियां❌
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपमें कुछ निम्नलिखित स्वभाविक कमीयां  हैं-  
कन्या राशि वाले अत्यधिक स्वार्थी होते हैं। 
ये दूसरों की सलाह को भी महत्व नहीं देते हैं जिसकी वजह से नुकसान उठाते हैं। 
इन्हें दूसरों की खिल्ली उड़ाने में बड़ा मजा आता है जो संबंधों को खराब करता है। 
बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहने की आदत इनके लिए कभी-कभी हास्यास्पद स्थिति पैदा कर देती है। 
उतावलेपन और जल्दबाजी के कारण मुसीबत में फंस जाते हैं। 
इनके लिए आंतरिक व्यक्तित्व के तर्क, आज्ञा एवं स्पष्टता की कामना यदि चरम सीमा पर न पहुंचे तो वह आत्म प्रतिकार का रूप ग्रहण कर लेती है। 
आलोचना के द्वारा वह अपने निकटवर्तियों से दूर हटता चला जाता है तथा संकटों की सृष्टि कर लेता है।  
🌹उपाय🌹 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कन्या राशि के लिए उपाय निम्नलिखित हैं-
आपको गणेश, दत्तात्रेय, भगवान शिव या इष्ट देव का जप करना चाहिए तो जिससे दुःख दूर होगा। 
धन के लिए लक्ष्मी की उपासना लाभकारी है। 
बुधवार का व्रत हमेशा लाभकारी होता है। 
'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' मंत्र का 9,000 जाप करना मनोकामना पूर्ति करने में सहायक है।
 मूंग, हरा वस्त्र, कपूर, फल-फूल एवं हरी वस्तुओं का बुधवार को दान देना उत्तम फलप्रद है।
आप अगर भावुकता में न बहकर निश्चयी बनकर प्रयत्न करेंगे तो सफलता इनके कदम चूमेगी। 
📖विवेचना📖
 नामाक्षर - ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
राशि स्वरूप- कन्या। राशि - छठी
राशि स्वामी- बुध।
नक्षत्र - उत्तराफ़ाल्गुनी, हस्त एवं चित्रा 
स्वभाव - सौम्य। दिशा -  दक्षिण
वर्ण - वैश्य। लिंग - स्त्री
गुण - सतो। तत्त्व - भूमि
योनि - मनुष्य। प्रभुत्व - उदर
रंग -  हरा।रत्न -  पन्ना
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Wednesday, 26 August 2020

ग्रहण योग के बारे में

🌻ग्रहण योग🌻
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार जन्म कुंडली के किसी भी भाव में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु या केतु बैठे हों तो ग्रहण योग बनाते हैं। सूर्य और चन्द्रमा के साथ ही ग्रहण योग का संयोग बनता है।सूर्य के ग्रहण योग का प्रभाव अलग होता है जबकि चन्द्रमा के ग्रहण योग का प्रभाव बिलकुल अलग होता है। ग्रहण योग होने से जीवन की शुभता पर ग्रहण लग जाता है।पंडित अंजनी कुमार के अनुसार ग्रहण योग से व्यक्ति की मानसिक स्थिति को प्रभावित होती है। इस योग के कारण जीवन में स्थिरता नहीं होती। उसे न चाहते हुए भी नौकरी और व्‍यवसाय में बार-बार बदलाव करते रहना पड़ता है। 
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार अगर सूर्य के ग्रहण योग हो तो व्‍यक्ति किसी विषय पर गंभीरता से विचार किये बिना कार्य बैठते हैं जिसका इन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे लोग भी विषयों को अधिक समय तक याद नहीं रख पाते हैं। पिता से प्राप्त होने वाले सुख एवं सहयोग में कमी आती है। ऐसे लोग पैतृक स्थान से दूर जाकर कैरियर बनाते हैं। 
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार चन्द्रमा के ग्रहण योग हो तो वह व्‍यक्ति निराशावादी हो जाता हैं। ऐसे व्यक्ति की याद्दाश्त कमज़ोर होती है। इनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होती है जिससे छोटी-छोटी बातों को लेकर यह तनाव में आ जाते हैं। ऐसे लोगों को नेत्र संबंधी रोग होने की आशंका रहती है। अगर राहु के साथ चन्द्रमा पहले अथवा आठवें घर में होता है तो व्यक्ति को मिरगी एवं दूसरे मानसिक रोग होने की भी संभावना रहती है।पंडित अंजनी कुमार के अनुसार जिस व्यक्ति की कुण्डली में एक ही घर में सूर्य,चन्द्रमा एवं राहु साथ होते हैं उनकी कुण्डली में ग्रहण योग का प्रभाव अधिक होता है। इन्हें कैरियर में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अकारण ही किसी बात को लेकर भयभीत रहते हैं। पंडित अंजनी कुमार के अनुसार जीवन में कई बार गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। सूर्य या चन्द्रमा की महादशा के साथ जब भी राहु की प्रत्यंतर दशा आती है तो वो समय इनके लिए कष्टकारी बितता है।
🌼ग्रहण योग के उपाय🌼
ग्रहण योग के उपाय निम्नलिखित हैं जिनको करने से ग्रहण योग के दोषों का निवारण या उन्हें कम किया जा सकता है -
❁ सूर्य जनित ग्रहण योग की शांति के लिए सूर्य की पूजा करनी चाहिए। प्रतिदिन भगवान सूर्य को "ओम् घृणि सूर्यायः नम:"मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दे साथ ही आदित्‍यहृदय स्‍तोत्र का नि‍यमित पाठ करना चाहिए। इससे ग्रह दोष का प्रभाव कम होता है। तांबे का दान करना चाहिए। 
❁ चन्द्रमा जनित ग्रहण योग की शांति के लिए सोमवार और प्रदोष को भगवान शिवजी का जलाभिषेक कर पुजा करनी चाहिए तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करे तथा व्रत रखें।पुर्णिमा को चन्द्रमा के दर्शन कर "ओम्  चन्द्रमसे नम:" मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य देना  चाहिए। श्वेत वस्त्रों का दान करना चाहिए।
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Monday, 24 August 2020

मूलांक 9 के बारे में

🌻मूलांक नौ के बारे में🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि आपका जन्म किसी भी महीने के दिनांक 9,18,और 27 को हुआ है तो आपका मूलांक 9 होगा। मूलांक नौ का स्वामी ग्रह मंगल हैं इसलिए मूलांक 9 के व्यक्तियों पर मंगल ग्रह की विशेषताओं का विशेष प्रभाव होता है।मूलांक 9 वाले व्यक्ति बहुत ही परिश्रमी, और क्रोधित होते है।
⚓स्वाभाविक विशेषताएँ⚓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 वाले व्यक्ति हरफनमौला स्वभाव के होते है। मंगल ग्रह उत्साह और ऊर्जा का कारक ग्रह है अत: मूलांक 9 वाले जातक उत्साही,उर्जावान एवं चुलबुल स्वभाव के होते हैं।आप शरीर से बलिष्ठ होते है।आपको हंसी-मजाक पसंद है।आप अपने मित्रो में काफी लोकप्रिय होते हैं।आप अपनी समस्याओं का समाधान खुद ही ढूंढने की हरसंभव  कोशिश करते हैं।आप किसी भी परिस्थिति से निबटने का हिम्मत रखते हैं।आप सैद्धान्तिक तथा अनुशासन प्रिय हैं। आपका प्रारम्भिक काल संघर्षपूर्ण व्यतीत हो सकता है परन्तु संघर्ष ही जीवन है जैसे मूलमंत्र को अपनाकर आप अजेय बन जाते है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 वाले जातक विरोध का सहन नहीं कर पाते है। आपके के स्वभाव में  मंगल ग्रह का प्रभाव होता है। आप जैसे लोग खेल कूद,सेना, पुलिस सेवा प्रशासनिक सेवा से संबंधी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। आप साहसिक और दृढ इच्छा शक्ति के बल पर अनेक उपलब्धियाँ हासिल करते हैं।
आप हमेशा मान सम्मान की चाहत रखते है और अगर मान सम्मान न मिले तो आप बौखला जाते है।आप चैलेंज को हमेशा स्वीकार करते है भागते नहीं है।आपके जीवन में दुर्घटना भी बहुत आती है। आप किसी के अधीन काम करना पसंद नही करते।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 का स्वामी मंगल है।मूलांक नौ के लोग मान सम्मान और मर्यादा को ध्यान रखने वाले होते हैं।इनमें नेतृत्व का गुण होता है और भले ही ये उच्च स्थान पर हों या न हों,ऐसा ये हमशा महसूस करते हैं।जिस भी स्थान पर हों,ये हर चीज़ का ख़याल रखने वाले होते हैं।मूलांक ९ के जातक मानवता में यकीन रखते हैं।ये किसी को मुसीबत में देखकर उसकी भरसक मदद करने में तत्पर रहते हैं।दूसरों के लिए अपनी ऊर्जा,समय और धन लगाने से ये कभी नहीं कतराते।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 के जातक अपने माता पिता का पूरा ख्याल रखते हैं।अपने भूतकाल से कभी भी ये विलग नहीं होते। आप किसी भी चीज़ का अंत नहीं करना चाहते।और अगर आप अंत भी करते हैं तो अपने शर्तों पर।आपको अपनी मान मर्यादा का पूरा ख्याल रहता हैं और आप चाहते हैं की लोग आप का पूरा सम्मान करें।आप चाहे जिस भी ओहदे पर हों,इस बात का आपको हमेशा ख्याल रहता है।आप जैसे झुकना जानते ही नहीं।दूसरे ही आप का सम्मान करें।
👪पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन 👪
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 वाले जातक का प्रारम्भिक जीवन कष्टमय होता है।आपको गिरने से चोट अवश्य ही लगता है। आप अपने सगे संबंधियों को खूब लाभ पहुंचाते हैं।भाई-बहनों के साथ वैचारिक  भिन्नता तथा उसके कारण मनमुटाव होने की भी स्थितियां बनती रहती है।आप विपरीत लिंग(स्त्री या पुरुष)के प्रति शीघ्र ही आकर्षित हो जाते है।आपके प्रेम सम्बन्ध स्थाई नहीं होते।अहंकार के कारण संबंधों में दरार होते हुए देखा गया है।आप  सुन्दर नारी के तलाश में रहते है यदि सुन्दर स्त्री न मिले तो विवाहेतर सम्बन्ध से नकारा नहीं जा सकता। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  आप ऐसा जीवन साथी चाहते है जो हमेशा आपके अनुसार चले। आप भोग विलास में ज्यादा विश्वास रखते है इस कारण दाम्पत्य जीवन में परेशानियां आती हैं। संतान सुख का भी अभाव देखा गया है। गृहस्थ जीवन में अपने जीवनसाथी के साथ प्रेमपूर्ण सम्बन्ध रहता है।
💰आर्थिक स्थिति💰
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 वाले आर्थिक दृष्टि से मजबूत होते है। इनके पास जमीन जायदाद खूब होती है।  आपको विरासत में जो जमीन मिलती है प्रायः आप उसमे वृद्धि ही करते है। स्थिति की बात की जाय तो इनकी आर्थिक स्थिति परिवर्तनशील रहती है।आपको ससुराल पक्ष से भी धन मिलते हुए देखा गया है। आपको लड़ाई झगड़े वाले जमीन से भी धन मिल सकता है। आप खर्च करने में भी नही चूकते कभी कभी तो दिखाने के लिए अपने हैसियत से ज्यादा भी खर्च कर देते है।
🌼स्वास्थ्य🌼
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार स्वास्थ्य की दृष्टि से मूलांक 9 वाले जातक मुख्यतःसिर दर्द, चोट, रक्तविकार, बुखार, पेट का रोग आदि से परेशान होते हैं। मंगल अग्नि का कारक है अतः आपको जलने का खतरा बना रहता है और इस कारण आपको त्वचा सम्बंधी समस्या आ सकती है।आप में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है। इस कारण जब जब मौसम में परिवर्तन होता है आपको स्वास्थ्य से सम्बंधित कोई न समस्या आ ही जाती है। आपको किसी न किसी वजह से चोट अवश्य ही लगते रहता है। दुर्घटना के भी शिकार हो सकते है।
🎓शिक्षा🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 वाले जातक तीक्ष्ण बुद्धि के होते है।आपकी तार्किक शक्ति बहुत ही प्रबल होती है।इस कारण आप अध्ययन में हमेशा अव्वल होते हैं।आप अपनी बौद्धिकता के बल पर जीवन में बहुत तरक्की करते हैं। मूलांक 9 जातक वर्तमान समय में कम्प्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल से संबंधित शिक्षा प्राप्त करते हुए देखा गया है।आप टेक्निकल डिग्री जैसे इंजीनियरिंग इत्यादि की पढाई में ज्यादा सफल होते है।आप उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करने में सफल रहते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रारंभिक शिक्षा में थोड़़े व्यवधान के साथ ही पूर्ण होती है।कई बार तो आपको शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड जाती है। विज्ञान में आपकी रुचि ज्यादा होती है। कला के क्षेत्र में भी आप अपना अध्ययन पूरा कर लेते है।
🔥कार्यक्षेत्र🔥
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 9 वाले जातक टेक्निकल क्षेत्र में बहुत अच्छा करते है।ऐसे जातक प्राय  इंजिनियर अथवा डाक्टर के क्षेत्र में अच्छा नाम कमाते हैं। आप अग्नि या बिजली से सम्बंधित कामों से जुड़ कर अच्छा लाभ कमा सकते है।आप साहस अथवा जोखिम भरा कामो में सफलता प्राप्त कर सकते है। राजनीति, टूरिज्म, घुड़सवारी से जुडे काम भी कर सकते हैं।अध्यापन के क्षेत्र  में ट्रेनिंग देने वाले कार्य में आप अच्छा नाम कमा सकते है।आप पुलिस तथा डिफेन्स में नौकरी करते हुए देखे गए है।आप व्यापार के क्षेत्र में अपना भाग्य अजमा सकते है निश्चित ही आपको सफलता मिलेगी।
❌कमियाँ❌
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक नौ के लोग हर चीज़ का ख़याल तो रखते हैं परन्तु इनके लोगों से बोलने और दूसरों को सम्मान देना सीखना चाहिए।दूसरों की मदद करने के चक्कर में कभी कभी आप लोग अपनी धन दौलत बर्बाद करके आर्थिक रूप से विपन्न हो जाते हैं।दूसरों की मदद ज़रूर करें,पर अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखके।आप में गुण तो बहुत हैं परन्तु आप किसी एक पर कभी ध्यान नहीं दे पाते।इसके वजह से आप किसी ख़ास क्षेत्र में एक्सपर्ट नहीं बन पाते।आपको अपने सम्मान, मान मर्यादा का पूरा ख्याल हैं, पर आप दूसरों के साथ वही व्यवहार नहीं करते।आप चाहते हैं कि दूसरे आपके आगे झुकें पर आप नहीं झुकना चाहते।याद रखें,सम्मान पाने के लिए सम्मान देना भी ज़रूरी होता है।क्रोध पर नियंत्रण नही कर पाना आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है। स्वभाव अहंकारी होने के कारण कभी कभी मित्र भी आपके शत्रु बन जाते है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप साहसिक और जोखिम भरा काम करने में विशवास रखते है यह अच्छी बात है परन्तु कभी कभी परेशानी का कारण भी बन जाता है।आप गाड़ी तेज रफ़्तार से चलाते है जिसके कारण हमेशा दुर्घटना की सम्भावना बनी रहती है। दुश्मन या शत्रु को कमजोर न समझे।
🌹सलाह🌹
आपको मंगल की उपासना करनी चाहिए।
हनुमान जी की उपासना करने से सभी समस्या शीघ्र ही समाप्त हो जायेगी।प्रतिदिन नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करने से आर्थिक समृद्धि,मान सम्मान तथा यश की प्राप्ति होगी।
यदि स्वास्थ्य से परेशान है तो हनुमान अष्टक का पाठ करे।घर में यदि क्लेश है तो मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करे सब ठीक हो जाएगा।
धूम्रपान एवं शराब का बिलकुल भी सेवन नहीं करे तो अच्छा रहेगा यदि इसका सेवन करते है तो अचानक कोई न कोई दुर्घटना घट सकती है।
मूलांक 9 का मूलांक 6 वाले व्यक्ति के साथ मित्रता रहती है। मूलांक 4 वाले व्यक्ति से आपको सचेत रहना चाहिए। इस अंक वाले व्यक्ति से आपकी मित्रता शत्रुता में भी बदल सकती है।
इनके लिए 9, 18 व 27 तारीखे और रविवार, मंगलवार, सोमवार और गुरुवार के दिन शुभ रहते हैं।
आपके लिए शुभ रंग लाल, नारंगी व गुलाबी हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।
आपके लिए शुभ दिशा है दक्षिण।
आपके लिए शुभ धातु है सोना।
👓विवेचना👓
ग्रह स्वामी- मंगल
श्रेष्ठ समय- 21 मार्च से 27 अप्रैल, 21 अक्टूबर से 27 नवम्बर
श्रेष्ठ तिथियां- 9, 18, 27
श्रेष्ठ वर्ष-9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72
अनुकूल तिथियां- 3, 12, 21, 30 एवं 6, 15, 24
अनुकूल वर्ष- 3, 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66, 75 एवं 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60, 69
निर्बल समय- मार्च, मई, जून तथा 18 नवम्बर से 31 दिसम्बर
विपरीत तिथियां- 1, 10, 19, 28
शुभ दिन- मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार
शुभ रंग- लाल, गुलाबी
शुभ रत्न- मूंगा
धातु- सुवर्ण
रोग- रक्तचाप, दुर्घटना, चोट, शरीरिक शिथिलता, हृदय रोग
देव- हनुमान जी
व्रत- मंगलवार
दान पदार्थ- मूंगा, स्वर्ण, गेहूं, रक्त चंदन, लाल वस्त्र, गुड़, घी, कनेर पुष्प, केशर
विवाह संबंध- 15 अक्टूबर से 14 दिसम्बर तथा 15 मई से 14 जून के मध्य जन्मे जातकों से
अनुकूल अंक- 1, 2, 3, 4, 6, 7
प्रतिकूल अंक- 5, 8
व्यवसाय- संगठन, संघ संचालन, नियंत्रण, चिकित्सा, ज्योतिष, धर्मोपदेश, सैन्य विभाग, गोला-बारूद, वकालत, औषधि कार्य, धातु कार्य आदि
अनुकूल दिशा- पूर्व, उत्तर-पूर्व
प्रतिकूल दिशा- दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम।
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Sunday, 23 August 2020

सुलेमानी हकीक

🌻सुलेमानी हकीक के लाभ🌻 

 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सोभाग्य वृद्धि का कारक सुलेमानी हकीक एक ऐसा रत्न है जो शनि, राहु और केतु के दोषों का निवारण करने में सहायक होता है। हकीक सभी रत्नों के उप रत्नों के विकल्प रुप में मौजूद होता है। सुलेमानी हकीक को कोई भी पहन सकता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हकीक कई रंगों का होता है जैसे काला, सफेद, दुधिया सफेद, ग्रे, पीला नीला, हरा, गुलाबी व भूरा आदि ज्यादा चलन में है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार काला रंग राहु का और नीला रंग शनि का है। पीला रंग गुरु का तो सफेद रंग चंद्र एवं शुक्र का है। हर पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हकीक रत्न का अलग अलग उपयोग है जो निम्नलिखित हैं-
❖काला हकीक मानसिक संतुलन और तनाव के लिए उपयोग लिया जाता है। 
❖सफेद हकीक आध्यात्मिक शांति और वैराग्य के लिए उपयोग किया जाता है। 
❖पीला हकीक निर्मिकता, धन और सुख समृद्धि के लिए उपयोगी है। 
❖नीला हकीक अच्छी नींद और बुरे सपने से बचने के लिए होता है।
❖जिस हकीक में सफेद पट्टियां पाई जाती हैं उसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
☀कैसे पहनें☀ 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यह रत्‍न शनि‍वार के दिन चांदी की अंगूठी में मध्यमा अंगुली में धारण करते हैं। इसे चांदी में लॉकेट में गले में भी धारण किया जा सकता है। इसे कोई भी व्‍यक्‍ति पहन सकता है। 🌹सुलेमानी हकीक के लाभ🌹
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सुलेमानी हकीक के लाभ निम्नलिखित हैं जो वर्णित है-
✾सुलेमानी हकीक काले जादू और बुरी नज़र से रक्षा करता है।
✾इस रत्‍न को धारण करने के बाद व्यक्ति के अन्दर आकर्षण पैदा होने लगता है और लोग आपको महत्‍व देते हैं।
✾अगर व्‍यापार में बाधाएं उत्‍पन्‍न करने के लिए किसी ने जादू टोने का प्रयोग किया है तो उसे काटने के लिए आपको सुलेमानी हकीक धारण करना चाहिए। इस रत्‍न के प्रभाव से व्‍यापार में वृद्धि भी होती है।अगर व्‍यापार में किसी भी तरह की परेशानी आ रही है तो आपको सुलेमानी हकीक जरूर धारण करना चाहिए।
✾घर में बरकत और समृद्धि के लिए भी  इस रत्‍न को धारण कर सकते हैं।
✾शत्रुओं से छुटकारा पाने और जादू-टोने से बचाव के लिए भी सुलेमानी हकीक को पहना जाता है।
✾इसके अलावा अगर कोई लंबी बीमारी है और सेहत ज्‍यादातर खराब ही रहती है तो भी आपको सुलेमानी हकीक से फायदा होगा।
✾सुलेमानी हकीक की माला का जप करने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं।
✾सुलेमानी हकीक को धारण करने से सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं। 
✾इससे किसी भी प्रकार का संकट नहीं रहता और शनि, राहु एवं केतु के दोष दूर हो जाते हैं।
✾सुलेमानी हकीक को घर में या पास में रखने से सौभाग्य की वृद्धि होती है अर्थात भाग्योदय होता है। 
✾जिसके पास असली सुलेमानी हकीक होता है वह कभी गरीब नहीं रहता और उसकी दरिद्रता का नाश हो जाता है।
🚫 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी रत्न किसी ज्योतिषी की सलाह पर पहने वरना हानि भी पहुँचा सकता है। 
Pandit Anjani kumar Dadhich
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गुरु चांडाल योग के बारे में

🌻गुरु चांडाल योग के बारे में🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में जब गुरु के साथ राहु एक ही स्थान में बैठ जाए तो इस युति को गुरु चांडाल योग कहते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जब दोनों ग्रह कुंडली के अलग-अलग भाव में बैठकर एक-दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देखते हों तब भी गुरु चांडाल योग बनता है।इस दोष के निर्माण में राहु को चांडाल प्रवृत्ति का कारक माना गया है जो गुरु की शुभता को खत्म कर देता है। 
🌹गुरु चांडाल योग का प्रभाव🌹
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरु चांडाल योग के कारण व्यक्ति के जीवन में हमेशा अस्थिरता बनी रहती है। उसका चरित्र भ्रष्ट हो जाता है और ऐसा व्यक्ति अनैतिक अथवा अवैध कार्यों में संलग्न हो जाता है। व्यक्ति को जुआरी, सट्टेबाज, चोर डकैत और तस्कर बना देता है। किसी कुंडली में राहु का गुरु के साथ संबंध जातक को बहुत अधिक भौतिकवादी बना देता है जिसके चलते वह जातक अपनी हर इच्छा को पूरा करने के लिए गलत कार्यों से धन अर्जित करने में भी परहेज नहीं करता।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हालांकि ऐसे योग में यदि गुरु प्रबल हो तो जातक की किस्मत पलट भी सकती है। वह धनवान जरूर बनता है।गुरु चांडाल योग में राहु के कारण गुरु अपना शुभ प्रभाव नहीं दिखा पाता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस योग का बुरा असर शिक्षा, धन और चरित्र पर होता है। जातक बड़े-बुजुर्गों का निरादर करता है और उसे पेट एवं श्वास के रोग हो सकते हैं। मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, वृश्चिक, कुंभ व मीन राशि के लोगों पर गुरु-चांडाल योग का प्रभाव अधिक पड़ता है।
 🙏उपाय🙏
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस योग के निम्नलिखित उपाय है जिनके करने से गुरु चांडाल योग के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है -
❁यदि चांडाल योग गुरु या इसके मित्र ग्रह की राशि में बन रहा हो तो राहु को शांत करने के उपाय करना होते हैं ताकि राहु का बुरा प्रभाव कम हो और गुरु का शुभ प्रभाव बढ़े। इसके लिए राहु के वैदिक मंत्रों का जाप करवाया जाता है। इसके बाद कुल मंत्र संख्या का दशांश हवन करवाना होता है। किसी योग्य व्यक्ति से राहु शांति का उपाय अवश्य करवाने चाहिए। 
 ❁यदि यह दोष गुरु की शत्रु राशि में बन रहा हो तो राहु और गुरु दोनों की शांति के उपाय किए जाते हैं। गुरु-राहु से संबंधित मंत्र-जाप, पूजा, हवन तथा दोनों से सम्बंधित वस्तुओं का दान करवाना होगा।
❁नियमित रूप से गाय को चारा खिलाना एवं भगवान शिव जी की आराधना करना चाहिए और प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
❁अपने गुरु की सेवा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से भी गुरु चांडाल दोष का प्रभाव कम होता है। 
❁अपने व्यवहार में संयम लाना, सबसे प्रेम-पूर्वक मिलना और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए।
❁अपनी बुद्धि से कोई निर्णय लेने का प्रयास न करें व अपने से बड़ों व अनुभवी व्यक्ति की राय जरूर लें साथ ही माता-पिता व बुजूर्गों का सम्मान करने से भी गुरु चाण्डाल दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
❁पवन सुत श्री राम भक्त हनुमान की पूजा से भी राहु नकारात्मक प्रभाव नहीं डालते हनुमान चालीसा का पाठ करना गुरु चांडाल दोष में संजीवनी का काम कर सकता है।
❁गरीब जरुरतमंदों की भोजन, अन्न, वस्त्र, धन आदि से सहायता करेंने से भी गुरु चाण्डाल योग के नकारात्मक प्रभावों से आप बच सकते हैं।
❁श्री गणेश की पूजा करने व मंत्र जाप करने से भी शुभ फल मिलते हैं व गुरु चांडाल दोष दूर होता है।
❁कच्चे दूध को बरगद की जड़ में अर्पित करने से भी इसमें लाभ मिलता है।
❁गुरु की मजबूती के लिए केले का पूजन करें लाभ होगा। केला पूजन से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं तथा राहु को भय होता है।प्रत्येक गुरुवार को पूर्ण व्रत रखें। 
❁माथे पर नित्य केसर, हल्दी या चंदन का तिलक लगाएं।
 ❁ तालाब या नदी की मछलियों को काला साबुत मूंग या उड़द खिलाएं।
Pandit Anjani kumar Dadhich
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Thursday, 20 August 2020

पितृपक्ष के बारे में

🌻पितृपक्ष के बारे में🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिंदू धर्म में वैदिक परंपरा के अनुसार अनेक प्रकार के रीति-रिवाज और संस्कार जो कि व्यक्ति के गर्भधारण से लेकर मृत्योपरांत तक किये जाते हैं। अंत्येष्टि को भी अंतिम संस्कार माना जाता है। लेकिन अंतिम संस्कार के पश्चात भी कुछ ऐसे कर्म होते हैं जिन्हें मृतक की संतान को करना होता है श्राद्ध कर्म उन्हीं में से एक है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्रद्धा पूर्वक किया जाने वाले कर्म को श्राद्ध के नाम से जाना जाता है। श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रगट करने से है। वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है परन्तु श्राद्ध पक्ष अपने पूर्वजों को जो इस धरती पर नहीं है उन्हें एक विशेष समय में 15 दिनों की अवधि तक सम्मान दिया जाता है। इस अवधि को पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष कहते हैं जो भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक एक पूरा पखवाड़ा पितरो हेतु किया जाने वाला कर्म विधान है। इस वर्ष पितृ पक्ष का प्रारंभ 17 सितंबर 2024 से होगा और पितृपक्ष का समापन 02 अक्टूबर 2024 को होगा। मान्यता है कि इस दौरान पितरों के निमित तर्पण करते हुए ब्राह्मणों को भोजन, गायों को चारा खिलाने और दान-पुण्य करने से साधक को सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। गरुड़ पुराण में वर्णित है कि इस पितृ पखवाड़े में घर के पुर्वज या पितृ धरती पर पंछी (कौए) के रूप मे रहने के लिए आते हैं। 
 श्राद्ध पक्ष का महत्व
पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान को सर्वोत्तम माना गया है और शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों को पितृ उनसे प्रसन्न नहीं होते उन्हें पितृ दोष का श्राप मिलता है और जिस भी घर में पितृ दोष का श्राप लगता है उस घर के सदस्य कभी भी सुखी नहीं रहते और न हीं वह जीवन में सफलता को प्राप्त करते। इसी कारण से पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण किया जाता है और उनसे श्रमा याचना की जाती है।पितृ पक्ष में व्यक्ति मृत्यु तिथि के आधार पर श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। जिस तिथि पर व्यक्ति की मृत्यु होती है उसी तिथि पर उसके लिए श्राद्ध करना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु तिथि मालूम नहीं है तो उसके लिए सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है।
श्राद्ध कर्म करने का तरीका
✾ श्राद्ध कर्म के दिन साधक को सुबह जल्दी उठना चाहिए और बिना सिले वस्त्र धारण करने चाहिए। 
✾ श्राद्ध के दिन अपने पूर्वजों को तर्पण देने के लिए काले तिल, कुशा,चावल और जौ को सम्मिलित कर तर्पण उन्हें अर्पित करें।
✾ तर्पण अर्पित करने के बाद पितरों की शांति हेतु एक छोटा सा यज्ञ या हवन करना चाहिए। 
✾ पितरों का पसंदीदा भोजन बनवाएं और भोजन की पिंडी बनाकर उन्हें अर्पित करें।
✾सबसे पहले गाय कुता और कौओं को भोजन करवाए। क्योंकि पितृ पक्ष में कौए को पितरों का रूप माना जाता है।
✾इसके बाद जनेऊ धारी ब्राह्मण को भोजन कराकर उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दें। 
✴️पितृ पक्ष की तिथियां ✴️ 
✿17 सितंबर 2024 (मंगलवार) - पूर्णिमा श्राद्ध
✿ 18 सितंबर 2024 (बुधवार)- प्रतिपदा श्राद्ध
✿ 19 सितंबर 2024 (गुरुवार)- द्वितीया श्राद्ध
✿ 20 सितंबर 2024 (शुक्रवार) - तृतीया श्राद्ध
✿ 21 सितंबर 2024 ( शनिवार)- चतुर्थी श्राद्ध
✿ 22 सितंबर, 2024 (रविवार) - पंचमी श्राद्ध
✿ 23 सितंबर, 2024 (सोमवार) - षष्ठी श्राद्ध + सप्तमी श्राद्ध,y999v
✿ 24 सितंबर, 2024 (मंगलवार) - अष्टमी श्राद्ध
Q✿25 सितंबर, 2024 (बुधवार) - नवमी श्राद्ध
✿26 सितंबर, 2024 (गुरुवार) - दशमी श्राद्ध
✿27 सितंबर, 2024 (शुक्रवार) - एकादशी श्राद्ध
✿ 28 सितंबर, 2024 (शनिवार) - कोई श्राद्ध नहीं 
✿29 सितंबर, 2024 (रविवार) - द्वादशी श्राद्ध
✿29 सितंबर, 2024 (रविवार) - माघ श्राद्धrr
✿30 सितंबर, 2024 (सोमवार) - त्रयोदशी श्राद्ध
✿ 1cvgdd ji अक्टूबर, 2024 (मंगलवार) - चतुर्दशी श्राद्ध
✿ 2 अक्टूबर, 2024 (बुधवार) - सर्व पितृ अमावस्या
 Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच [पुरोहित कर्म (यज्ञ-हवन - पुजा-अनुष्ठान) विशेषज्ञ, वैदिक ज्योतिषी, अंक ज्योतिषी एवं वास्तुविद ]
Nakshatra Jyotish Sansthaan
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान
panditanjanikumardadhich@gmail.com
सम्पर्क सूत्र - 06377054504

Monday, 17 August 2020

गुरु के उपाय

🌻अशुभ अथवा खराब गुरू के बारे में🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नवग्रहों में गुरू को देवताओं का गुरु माना जाता है। गुरु को बृहस्पति के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का बड़ा महत्व होता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्मकुंडली में गुरु (बृहस्पति) यदि बलवान है तो व्यक्ति ज्ञान, सत्कर्म, ईमानदारी, विद्या, बुद्धि, प्रसिद्धि और संपदा के मामले में श्रेष्ठ होता है, लेकिन यदि गुरु कमजोर हो तो व्यक्ति का जीवन संकटपूर्ण रहता है। वैवाहिक सुख के लिए भी गुरु का मजबूत होना आवश्यक है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर जन्म कुंडली के 2, 5, 9, 12वें भाव में बृहस्पति के ऊपर शत्रु ग्रह की दृष्टि हो या शत्रु ग्रह उसके साथ हो तो बृहस्पति खराब फल देने लगता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपकी जन्मकुंडली में गुरु अशुभ अथवा खराब है तो आप में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं जिनसे आपको पता चलता है कि आपका गुरू अशुभ फल दे रहा है - यदि आपके शरीर के भीतर गुरुत्व बल कमजोर होने लगा है तो सिर पर चोटी के स्थान से बाल उड़ने लगेंगे। गले में व्यक्ति माला पहनने की आदत डाल लेता है। ऐसे व्यक्ति के संबंध में व्यर्थ की अफवाहें उड़ाई जाती हैं। ऐसे व्यक्ति के अनावश्यक दुश्मन पैदा हो जाते हैं। उसके साथ कभी भी धोखा हो सकता है। गुरु के खराब होने पर सोना खो जाता या चोरी हो जाता है। बिना कारण शिक्षा रुक जाती है। आंखों में तकलीफ होना, मकान और मशीनों की खराबी भी गुरु के खराब होने की निशानी है। सांस या फेफड़े की बीमारी, गले में दर्द आदि। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अशुभ अथवा खराब गुरू के उपाय निम्नलिखित हैं जिनका उपयोग कर आप गुरू को मजबूत बना सकते हैं। 
🙏गुरु के उपाय🙏
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरुवार के दिन भगवान नारायण या भगवान बृहस्पति की मूर्ति या तस्वीर को पीलें रंग के कपड़े पर विराजित करें और विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में केसरिया चंदन, पीले फूल और प्रसाद में गुड और चनें की दाल चढ़ाएं या इस रंग का कोई पकवान चढ़ाएं। पीले वस्त्र धारण करें तथा अपने साथ हमेशा पीला रंग का रूमाल रखना चाहिए। भोजन भी चने की दाल का होना चाहिए। पूजन के बाद कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। यदि व्रत रखते हैं तो और भी प्रभावकारी रहेगा। व्रत मे केले के पेड़ का पूजन करें। दिन में एक समय ही भोजन करें। नमक न खाएं। ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और परिवार में धन धान्य, विद्या, स्वास्थ्य, वैभव किसी चीज की कमी नहीं रहती। 
❃ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि आपका गुरु अशुभ या कमजोर है तो आप नित्य पीपल में जल चढ़ाएं, सदा सत्य बोलें और अपने आचरण को शुद्ध रखें तो गुरु शुभ फल देने लगेगा। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरु को शुभ करने के लिए सदा पिता,दादा तथा गुरु का आदर करे उनके पैर छुकर सेवा करें साथ ही साथ अंधे और निशक्त लोगों की सेवा करें। अपना गुरु अवश्य बनाएं। 
❃ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरुवार के दिन पीली वस्तु का सेवन करें और पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए जैसे कि चने की दाल, सोना, हल्दी, आम आदि।गाय को गुड़ और चना दान खिलाएं और
प्रत्येक गुरूवार को घर में प्रात: धूप-दीप करे और रात्रि को कर्पूर जलाएं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार तिजोरी या ‍ईशान कोण में हल्दी की गांठ को किसी सफेद कपड़े में हल्का से बांधकर रखें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरुवार के दिन नहाते वक्त अपने नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करे इसके बाद "ओम् नमो भगवते वासुदेवाय" का जप करते हुए केसर का तिलक लगाए और केले के वृक्ष में जल अर्पित हुए उसकी धूप- दीप से पूजा करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरुवार को सूर्योदय से पहले उठें। स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर आपकी कुंडली में गुरु का दोष हो तो हर गुरुवार को शिवजी को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इससे आपको काफी फायदा मिलेगा।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरुवार के दिन लेन देन थोड़ा संभलकर करें और अगर कोई इस दिन धन मांगने आता है तो धन देने से परहेज करें। इससे आपका गुरु कमजोर हो जाता है जिससे आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बृहस्पतिवार के द‌िन को लेकर माना जाता है क‌ि इस द‌िन शरीर पर साबुन लगाना, बाल धोना और कटवाना तीनों ही शुभ नहीं होता। इसलिए इससे परहेज करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरूवार के दिन आप निम्नलिखित में से किसी एक  मंत्र का जाप कर सकते हैं "ओम् बृं बृहस्पतये नमः।" या
"ओम् गुं गुरवे नम:।"
❃ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार लगातार आठ दिनों तक किसी मंदिर में हल्दी का दान करें। 
❃ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपको गुरुवार के दिन गन्ने का रस अवश्य पीना चाहिए।   
❃ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपको स्वर्ण धातु से बनी अंगुली में पीला पुखराज धारण करें। 
❃ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जमीन के अंदर उगने वाले फल और सब्जियों का दान करें। 
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मूलांक सात के बारे में

🌻मूलांक सात के बारे में🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 7,16,और 25 को हुआ है तो आपका मूलांक सात होगा। मूलांक सात के प्रतिनिधि ग्रह केतु हैं इसलिए मूलांक सात के व्यक्तियों पर केतु ग्रह की विशेषताओं का विशेष प्रभाव होता है।मूलांक सात वाले गूढ़ विद्या और साहित्य में बहुत रूचि रखते है।
🌹स्वाभाविक विशेषताएं🌹 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक सात वाले लोग दार्शनिक तथा श्रेष्ठ विचारक हो सकते है इनकी तर्कशक्ति बहुत ही मजबूत होती है। मूलांक सात वाले धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं पर रूढ़ियों एवं पूरानी रीतियों से दूर रहते हैं,धर्म के क्षेत्र में ये परिवर्तनशील विचारधारा रखते हैं, इन्हें धर्म में आडंबर पसंद नहीं है।मूलांक सात वाले व्यक्ति स्वतंत्र विचार के होते है। इनका चित मन अशांत होता है। आप एक विचार अथवा स्थान पर पूरी तरह से टिक कर नहीं रह पाते है। आपके विचारो में प्रतिक्षण बदलाव संभव है। आपके मन में हमेशा कोई न कोई विचार चलते रहता है। यही नहीं आप नकारात्मक विचारो से किसी न किसी रूप में प्रभावित होते रहते है।आप समाज या परिवार में स्पष्ट वक्ता के रूप में प्रतिष्ठित है। आप अपनी बात दृढ़तापूर्वक रखते है किसी से डरते नहीं है। आपमें आत्मविश्वास कूट कूट कर भरा होता हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 7 वाले समाज में प्रतिष्ठित होते हैं। परन्तु कभी कभी साधारण बात को इतना बड़ा बना देते है की उसको संभालना मुश्किल हो जाता है।यह समाज को खुले दिमाग से देखते हैं तथा समाज में हो रहे बदलाव का प्रभाव किस रूप में पड़ेगा पर अवश्य ही विचार करते है। यही कारण है की आप कवि, लेखक या कला प्रेमी होते हैं। आपको इस क्षेत्र में सफलता भी मिलती है।आप में दूसरों के मन की बात समझने की क्षमता होती है। आप शीघ्र ही लोगों को अपनी ओर आकृष्ट कर लेते है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 7 के जातक दिमाग के तेज होते हैं इनकी स्मरण शक्ति भी सुदृढ़ होती है। समस्याओ से न ही घबराते है और न ही डर कर भागते है बल्कि उसका डटकर मुकाबला करते है। इसी कारण ऐसा व्यक्ति जो ठान लेते है उसे पूरा करके ही दम लेते है।आप में अनेक खूबियां हैं और आप सैकड़ों में पहचाने जा सकते हैं।आप साहित्य, संगीत,ललित कला या चित्र कला में ये ख्याति अर्जित करते हैं।आप धन की अपेक्षा मान-सम्मान पर यकीन करते हैं।आप अकेला रहना पसंद करते हैं और अपने विचार किसी से साझा नहीं करते।अपने गहरे व्यक्तित्व के कारण इनकी सोच रहस्य से काम नहीं रहती।आप शायद ही किसी पर भरोसा करते हैं।आप धर्म-भीरु होते हैं और अध्यात्म में रूचि रखते हैं।आप दूरदर्शी हैं और आप गूढ़ विषयों के ज्ञाता होते हैं। आपका अंतर्मुखी व्यक्तित्व आपको सबसे अलग थलग रखता है।आप अंदर से तो बहुत मजबूत होते हैं। आप कल्पनाशील, विज्ञान-प्रेमी, एकांत प्रिय दार्शनिक और उन्नत विचार के स्वामी होते हैं।आप नित्य नवीनता पसंद करते हैं और आपकी योजनाएं शायद ही विफल होती हैं।
❌कमियाँ❌ 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपके विचार किसी भी विषय पर विस्तृत ज्ञान रखते हैं, परन्तु आप उसी विषय से जुडी सूक्ष्म बातें नजरअंदाज कर जाते हैं।आपका अंतर्मुखी व्यक्तित्व आपकी बड़ी कमज़ोरी है। आपके सोच और आपके विचार किसी को पता नहीं रहते और लोग आपके बारे में गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप ज़्यादातर अकेला रहना पसंद करते हैं और किसी की दखल आपको पसंद नहीं रहती रिश्तों में भी एक अधूरापन बरक़रार रहता है।आप किसी पर भरोसा नहीं करते और करीबी रिश्तों में ऐसा स्वभाव खोखलापन लाता है।करीबी रिश्तों में लोगों पर भरोसा रखें और थोड़ा घुलें-मिलें।अपने इष्ट मित्र से सलाह नहीं लेना या उनकी सलाह पर ध्यान न देना बहुत बड़ी कमजोरी है।आप बहुत जल्द ही क्रोधित हो जाते हैं जिसके कारण कभी कभी बनता काम बिगड़ जाता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी कार्य में अपनी भावुकता को हथियार न बनाये।
आप बात बात में झगड़ा करने पर उतारू हो जाते है।
आप तुरंत फैसला नहीं ले पाते है यह आपके लिए बहुत बड़ी कमी है।
👪पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन👪
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपका वैवाहिक जीवन प्रायः सुखी रहता हैं। मूलांक सात से प्रभावित व्यक्ति का प्रेम सम्बन्ध ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता। आपके स्वतंत्र विचार प्रेम सम्बन्ध को प्रभावित करते है।आप को ये प्रेम में दिखावापन पसंद नहीं है।आप परिवार और समाज के सम्बन्ध में सोचते है इस कारण आपका पारिवारिक सम्बन्ध अच्छा होता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भाई बहनों के साथ आपका व्यवहार अच्छा रहेगा। भाई बहनों के साथ मिलकर कोई व्यवसाय भी कर सकते है। आपकी मित्रता प्रायः स्थायी नहीं होती। सगे सम्बन्धियो से आप रिश्ते को बनाकर रखते है। माता पिता के साथ विचारो की भिन्नता हो सकती है लेकिन अपने माता-पिता के लिए आप हमेशा ही अच्छा सोचते है।
💰आर्थिक स्थिति💰
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि इनके आर्थिक स्थिति की बात करे तो आप अपने परिश्रम के बल पर धन अर्जित करेंगे। मेहनत के अनुरूप धन की प्राप्ति होगी।आप जितना कमाते है उसी के अनुसार खर्च भी करते है।लेकिन दान पुण्य आदि में काफी धन खर्च कर देते हैं।आप मोक्ष प्राप्त करने के लिए कुछ भी खर्च करने के लिए तैयार रहते है।
🌼स्वास्थ्य🌼
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से मूलांक 7 वाले शारीरिक रूप से कमजोर होते है।आप पेट की बिमारी से हमेशा परेशान रहेंगे।मस्तिष्क सम्बन्धी बिमारी जैसे डिप्रेशन आदि से पीड़ित हो सकते है। इसके आलावा अतिरिक्त रक्तचाप कम या ज्यादा होना, त्वचा रोग, नज़र कमजोर होना आदि रोगों के चपेट में आ सकते है।
🎓शिक्षा🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 7 वाले जातक की शिक्षा में रूचि होती है। आप के अंदर शिक्षा के प्रति प्रेम है इस कारण आप हमेशा कोई न कोई पढ़ाई करने की तलाश में होते है। स्वास्थ्य के कारण आपकी प्राथमिक शिक्षा में कुछ व्यवधान आ सकता है। परन्तु माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा में ज्यादा दिक्कत नहीं आती है।आपको कोई न कोई विदेशी भाषा का ज्ञान होना चाहिए।विदेशी भाषा को आप अपना कैरियर भी बना सकते है। आपकी रूचि कला एवं गुप्त विद्या में भी होती है।आप गुप्त तथा धार्मिक ग्रंथों को पढना पसन्द करते है।आप परीक्षा में हमेशा सफल ही होंगे ऐसा नहीं है असफलता के बाद सफलता मिलना आपके लिए आयाम बात है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 7 के व्यक्तियों के अंदर अन्वेषणात्मक बुद्धि होती है इस कारण आप रिसर्च कार्य करके अच्छा नाम कमा सकते है।आपका झुकाव रहस्यमय एवं गूढ़ विद्याओं की ओर रहता है।आपकी बुद्धि अत्यंत तीक्ष्ण होती है इस कारण आप इंट्यूशन के माध्यम से अपने सामने वाले के चेहरा तक पढने में समर्थ होते है। ऐसा जातक अच्छा ज्योतिषी तथा आध्यात्मिक पुरुष भी हो सकता है।
📰कार्यक्षेत्र📰 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि आपके कार्यक्षेत्र अथवा व्यवसाय की बात की करे तो मूलांक 7 वाले कल्पना-शक्ति व अपनी अभिव्यक्ति को कुशलता पूर्वक अभिव्यक्त करने के कारण की क्षमता के कारण लेखक, दार्शनिक आध्यात्मिक गुरु तथा कवि के रूप में अधिक सफल होते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इसके अलावा आप सरकारी अधिकारी, ज्योतिषी,डॉक्टर,अध्यापक, जज, सलाहकार तथा गाइड आदि के रूप में भी ये कार्य करने वाले होते है।मूलांक सात के जातकों को यात्रा, पर्यटन, सैर-सपाटा करना अच्छा लगता है। आप अच्छे वकील या न्यायाधीश, परामर्शदाता हो सकते हैं। आपको एजेंट का भी कार्य करते हुए देखा गया है। इन लोगों की सहनशक्ति अच्छी होती है। आपको यात्रा करना अच्छा लगता है इसलिए आपको मार्केटिंग के भी कार्य में खूब सफलता मिलती है।
👉सलाह👈
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक सात वालो को निम्नलिखित उपाय करने चाहिए -
❃आपको केतु ग्रह की उपासना करनी चाहिए।
❃आपको शिवजी की उपासना करनी चाहिए इनके शरण में जाने से आपकी समस्या शीघ्र ही समाप्त हो जायेगी।
❃प्रतिदिन नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करने से आर्थिक समृद्धि, मान सम्मान तथा यश की प्राप्ति होगी।
❃“ॐ गं गणपतये नमः” मन्त्र का जप करना चाहिए इससे ❃आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आप उत्तरोत्तर आगे बढ़ाते जाएंगे।  
❃धूम्रपान करना एवं शराब का सेवन नहीं करे तो अच्छा रहेगा क्योकि केतु मोक्ष कारक ग्रह है और यदि आप कोई व्यसन करते है तो मुक्ति का मार्ग बंद हो जाएगा।
❃आपके लिए शुभ दिशा है ईशान कोण। 
❃आपके लिए शुभ धातु है सोना
❃आपके लिए मूलांक 1,2 3 5 7 और 9 वाले जातक सच्चे मित्र हो सकते है।
❃इनके लिए 7,16 व 25 तारीखे और रविवार, सोमवार और गुरुवार के दिन शुभ रहते हैं।
❃रंगों की बात करें तो इनके लिए हल्का पीला व काफ़ूरी रंग अनुकूल होते हैं
❃आपके लिए शुभ रंग खाकी हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।
📖विवेचना📖
स्वामी ग्रह- केतु
शुभ तारीखें- 7, 16, 25
सहायक तारीखें- 2, 11, 20, 29 एवं 1, 10, 19, 28 तथा 4, 13, 21, 31
शुभ समय- 21 जून से 25 जुलाई
शुभ वर्ष- 7, 16, 25, 34, 43, 52, 61, 70वां वर्ष
सहायक वर्ष- 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65, 74 तथा 1, 10, 19, 37, 46, 55, 64, 73 एवं 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67
निर्बल समय- जनवरी, फरवरी, जुलाई, अगस्त
शुभ दिन- रविवार, सोमवार, बुधवार
सर्वोत्तम दिन- सोमवार शुभ रंग- हरा, हल्का पीला, सफेद, चमकीला
शुभ रत्न- हीरा, लहसुनिया। शुभ धातु- स्वर्ण 
रोग- संक्रमण रोग, पसीने की अधिकता, आमाशय दोष, कब्ज, भूख न लगना, अनिद्रा, घबराहट, वातरोग, मंदाग्नि, कफ, रक्त विकार
इष्ट देव- नृसिंह भगवान
व्रत- सोमवार
दान पदार्थ- सोना, लोहा, पंचधातु, जूता, सप्तधान्य, तेल
व्यवसाय- तैराकी, अभिनय, फिल्म, वायुसेना, पर्यटन, ड्राइवरी, जलयान का कार्य, मेडिसिन, चिकित्सा, कृषि, सर्जरी, प्लास्टिक, ललितकला, तरल पदार्थ, कूटनीतिक कार्य, खनिज एवं अनुवादक का कार्य इत्यादि
अनुकूल दिशा- दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पूर्व
प्रतिकूल दिशा- उत्तर-पश्चिम।
Pandit Anjani Kumar Dadhich
Nakastra Jyotish Hub

मूलांक आठ के बारे में

🌻मूलांक आठ के बारे में🌻
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि आपका जन्म किसी भी महीने के दिनांक 8,17,और 26 को हुआ है तो आपका मूलांक 8 होगा। मूलांक 8 वाले व्यक्ति बहुत ही परिश्रमी होते है। मूलांक 8 के प्रतिनिधि ग्रह शनि हैं इसलिए मूलांक 8 के व्यक्तियों पर शनि ग्रह की विशेषताओं का विशेष प्रभाव होता है।
🌼स्वाभाविक विशेषताएं🌼
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक आठ का स्वामी ग्रह शनि हैं।इस मूलांक के व्यक्ति प्रायः कम बोलते हैं। प्रायः आप अन्तर्मुखी प्रवृति के होते है। मूलांक आठ के लोग प्रचार-प्रसार से दूर एकनिष्ठ होकर अपने कामो में लगे रहते हैं। आप हर बात को गंभीरता से सोचते हैं।आप अत्यंत ही गंभीर और शांत प्रकृति के व्यक्ति है। आप किसी भी कार्य को निष्ठापूर्वक निभाते हैं।जिस प्रकार शनि ग्रह सभी ग्रहों में सबसे धीरे धीरे चलने वाला ग्रह है उसी प्रकार मूलांक 8 वाले लोग भी धीरे धीरे ही जीवन में सफलता को प्राप्त करते हैं।आप मार्ग में आने वाली बाधाओ से कभी निराश नहीं होते है।आपके कामो में प्रायः रुकावट आती रहती है। आप बड़े ही तन मन से कार्य करते है परन्तु यह भी देखने में आता है कि काम तो आप करते है परन्तु क्रेडिट कोई और ले जाता है।सामान्यतः लोग आपके कार्यो को अधिक महत्त्व नहीं देते है जिससे आप अपने आप को धीरे-धीरे समाज और परिवार से दूर होने लगते हैं। आप अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए भरपूर कोशिश करते हैं। प्रायः यह देखने में आया है कि मूलांक 8 वाले इस व्यक्ति या तो अत्यंत सफल होते है या तो असफल।ऐसा व्यक्ति जिद्दी स्वभाव का होता है। आप अपनी बात को मनवाने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक आठ का स्वामी शनि है।आपका अद्भुत और अनोखा व्यक्तित्व है।जीवन में चाहे जो कुछ करें,चाहे जितना लोगों का भला करें लेकिन लोगों की सहानुभूति कम प्राप्त होती है।ये अपने संपर्क में आए व्यक्तियों का ढाल बनकर सुरक्षा करते हैं।ये साहसिक, लगनशील, चिंतनशील, श्रेष्ठ विचारक और इन्ही गुणों से सम्मान और यश प्राप्त करते हैं।आप लोग शायद ही किसी से सलाह लेते हैंं। अपने निर्णय खुद लेते हैं और उनपर अडिग रहते हैं।इसी कारण से वे कभी-कभी चीज़ों को लम्बे और कठिन तरीके से सीखते हैं।आप लोग जिम्मेदारी से अपने दायीत्व का निर्वाह करते हैं और कभी भी अपने प्रियजनों को व्यक्त नहीं करते।आप लोग दूसरों के व्यक्तित्व का सही आकलन करते हैं और सही समय पर सही लोगों के साथ मिलकर अपने योजनाओं को क्रियान्वित करते हैं। आपके इसी गुण के कारण आप एक अच्छे व्यवसायी और एक अच्छे कूटनीतिज्ञ साबित होते हैं। 
👪पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन👪
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपका पारिवारिक जीवन सामान्य रूप से चलते रहेगा। मूलांक 8 वालों का अपने परिजनों,अपने भाई बहनों तथा मित्रों से सामान्य सा रिश्ता रहेगा। पिता के साथ विचारो का मतभेद रहेगा।इनके मित्र भी कम होते हैं उनसे इन्हें लाभ भी कम मिलता है।आपके प्रेम सम्बन्ध स्थाई नहीं रहते। आप एकतरफा प्यार भी कर सकते है प्रेम का इजहार करना आपके लिए आसान नहीं है। इसी कारण मूलांक 8 वाले लोग को प्रेम सम्बंधों में सतर्कता बरतते है।गृहस्थ जीवन में कोई न कोई परेशानी आना निश्चित है इसका मुख्य कारण हो सकता है आलस्य और जिद्दीपन। आपकी शादी विलम्ब से हो सकती है। पति पत्नी में मनमुटाव हो सकता हैं। ओपल रत्न पहनकर मनमुटाव दूर कर सकते है।संतान को लेकर भी परेशानी अनुभव करते है।
💰आर्थिक स्थिति💰
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 8 वाले जातक में धन संग्रह करने की अच्छी प्रवृत्ति होती है इस कारण आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती है। आप निरर्थक खर्च करना पसंद नहीं करते है आप बहुत ही सोच समझ कर खर्च करते हैं यही कारण है कि आप धीरे धीरे काफ़ी धन इकट्ठा कर लेते हैं और धनवान हो जाते हैं परन्तु धनवान केवल नाम के लिए क्योकि खर्च तो आप करते है नहीं।
⚓स्वास्थ्य⚓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 8 वाले किसी न किसी रोग से परेशान रहते है। आपको किडनी का रोग,आंतो में विकार,फोड़ा फुंसी, रक्त सम्बंधित रोग,तथा गठिया आदि बीमारी होने की प्रबल संभावनाए होती हैं।आप लिवर,श्वसन-तंत्र,मूत्र व मल,उदर,त्वचा आदि से सम्बंधित रोग से पीड़ित हो सकते हैं।जीवन के अंतिम पड़ाव में श्रवण शक्ति कमजोर हो जाते है साथ ही नेत्र दोष भी हो जाता है।माँस मदिरा का सेवन आपको सर्वनाश देगा अतः इससे बचना ही बेहतर उपचार है।
🎓शिक्षा🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपकी शिक्षा की प्राप्ति संघर्ष से ही होती है। परन्तु संघर्ष से ही सही धीरे धीरे आप इच्छानुकूल शिक्षा प्राप्त कर लेते है।कई बार इच्छाशक्ति की कमी के कारण आपकी शिक्षा भी अधूरी रह जाती है।आप टेक्निकल तथा उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते है।
🎍कार्यक्षेत्र🎍
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 8 वाले जातक अथक परिश्रम व लगन से अपने कार्यो में सफल होते है।आप हार्डवेयर स्टोर,ट्रांसपोर्टर, ठेकेदारी,मशीनरी इत्यादि का काम करते है।आप जैसे लोग डॉक्टर का पेशा भी अपना सकते है। व्यवसाय के रूप में कैमिस्ट का काम करते हुए भी देखा गया है। बीमा एजेंट,प्रिंटिंग प्रेस आदि के कार्य में भी सफल होते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 8 अंक शनि का है और शनि कठिन कार्य जैसे मजदूरी किसान का काम इत्यादि भी करता है।आप जैसे लोग शारीरिक मेहनत से धनोपार्जन करने में ज्यादा विशवास रखते है।
❌कमियाँ❌
आप अपने प्रियजनों का पूरा ख्याल रखते हैं परन्तु आप इसे कभी ज़ाहिर नहीं होने देते। इसी कारण से आप को जितना श्रेय मिलना चाहिए वह कहीं दब के रह जाता है। आप अपनी बातों ज़रूर रखें और बताएं की आप उनके लिए क्या कुछ करते हैं?
आप दूसरों से राय नहीं लेने के कारण गलतियों से सीखते हैं जो एक लम्बा और कठिन मार्ग होता है।आप दूसरों से भी राय लें और उन्हें अमल में लाने की कोशिश करें।
आप बहुत ही सशंकित स्वभाव के जातक है यह आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है।
आप अपने आप को ज्यादा चालाक समझते है परन्तु यह भूल जाते है की आपसे भी कोई चतुर व्यक्ति है।आपके व्यक्तित्व को समझना आसान नहीं है ज्यादा शांति से काम करने की प्रवृति कभी कभी परेशानी का कारण बन जाता है।गुस्सा को काबू में नहीं रखना बड़ी कमजोरी है।
👉सलाह👈
❃आपको शनि ग्रह की उपासना करनी चाहिए।
❃आपको हनुमान जी की उपासना करने से से आपकी सभी समस्या शीघ्र ही समाप्त हो जायेगी।
❃प्रतिदिन नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करने से आर्थिक समृद्धि, मान सम्मान तथा यश की प्राप्ति होगी।
❃शिवजी के पंचाक्षरी मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करने से आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आप उत्तरोत्तर आगे बढ़ते जाएंगे। 
❃धूम्रपान एवं शराब का बिलकुल भी सेवन नहीं करे तो अच्छा रहेगा यदि इसका सेवन करते है तो आपका कमाया हुआ सब धन धीरे धीरे नष्ट हो जाएगा इसमें कोई संदेह नहीं है।
❃आपके लिए शुभ दिशा है पश्चिम है।
❃आपके लिए शुभ धातु है लोहा।
 ❃रंगों की बात करें तो इनके लिए गहरा भूरा,काला व नीला रंग अनुकूल होते हैं।आपके लिए शुभ रंग हल्का नीला और काला हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।
❃आपके लिए मूलांक  4, 5, 6 वाले जातक सच्चे मित्र हो सकते है।
❃इनके लिए 8,17, 26 तारीखे और बुधवार, शुक्रवार एवं शनिवार के दिन शुभ रहते हैं।
❃ मादक द्रव्यों, जुआ, सट्टा एवं रेस आदि से बचना चाहिए।
👓विवेचना👓
स्वामी ग्रह : शनि। व्रत : शनिवार
शुभ समय : 21 दिसम्बर से 19 फरवरी, 21 सितम्बर से 19 अक्टूबर
शुभ तारीख : 8, 17, 26
शुभ वर्ष : 8, 17, 26, 35, 44, 53, 62, 71
अनुकूल तिथियां : 4, 13, 22, 31
अनुकूल वर्ष : 8, 17, 26, 35, 44, 53 एवं 4, 13, 22, 31, 40, 45, 58, 67
निर्बल समय : दिसम्बर, जनवरी, मार्च, अप्रैल
शुभ दिन : शनिवार, रविवार, सोमवार
सर्वोत्तम दिन : शनिवार
शुभ रंग : बैगनी, काला, नीला, आसमानी, भूरा
अशुभ रंग : चटख लाल रंग
शुभ रत्न : नीलम। धातु : पंचधातु
रोग : वायुरोग, शरीर क्षीणता, कोष्ठबद्धता, गठिया, रक्तचाप, हृदय रोग, रक्ताल्पता, सिर पीड़ा, पेशाब में जलन, गंजापन इत्यादि
दान पदार्थ : भैंस, तिल, तेल, काला वस्त्र, लौह, पंचधातु, उड़द, नीलम
व्यवसाय : कसरत, खेलकूद का सामान, पुलिस व सैन्य विभाग, ठेकेदारी, वन विभाग, केमिकल्स, लघु उद्योग, वकालत, ज्योतिष, मुर्गीपालन, बागवानी, कोयला, बिजली का कार्य, नेतृत्व, नीति निर्धारण,धर्म कार्य, अध्यापन आदि
अशुभ दिशा : उत्तर, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम।
Pandit  Anjani Kumar Dadhich
Nakastra Jyotish Hub

Thursday, 13 August 2020

कैंसर एक भंयकर बिमारी

कैन्सर एक भंयकर बिमारी
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आजकल के समय में कैन्सर एक भयानक बिमारियों में से एक है जिसमें समय पर इलाज ना होने से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है।मानव शरीर में कैंसर की उत्पत्ति में कोशिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कोशिकाओं में श्वेत एवं लाल रक्त कण होते हैं।भारतीय ज्योतिष के अनुसार श्वेत रक्त कण कोशिकाओं का सूचक चन्द्रमा तथा लाल रक्त कण कोशिकाओं का सूचक मंगल माना गया है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कर्क राशि का राशि चिह्न केकड़ा है। केकड़े की प्रकृति होती है कि वह जिस स्थान को अपने पंजों से जकड़ लेता है तो उसे अपने साथ लेकर ही छोड़ता है। इसी प्रकार कैन्सर रोग में पीड़ित व्यक्ति की कोशिकाएं मानव शरीर के जिस अंग को अपना स्थान बना लेती है उसे शरीर से अलग करके ही कोशिकाओं को हटाया जाता है। इसलिए ज्योतिष में कैंसर जैसे भयानक रोग के लिए कर्क राशि के स्वामी चंद्र का विशेष महत्व है। इसके साथ साथ राहु, केतु, मंगल एवं शनि आदि ग्रह भी कैन्सर का कारण बनते है। ज्योतिष में राहु को कैंसर का कारक माना गया है लेकिन शनि व मंगल भी यह रोग देते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार छठा भाव रोग और आठवाँ भाव लम्बी अवधि तक होने वाले रोग का भाव माना जाता हैं।कैंसर एक लम्बी अवधि तक होने वाला रोग हैं। इसलिए छ्ठे भाव व अष्टम भाव का संबंध बनना आवश्यक है।शनि और राहु लम्बे समय तक चलने वाले रोगो की सूचना देते हैं इसलिए इन दोनो ग्रहों की भूमिका भी कैंसर रोग के होने में मुख्य होती है। कैंसर रोग का संबंध राहु, पीड़ित चंद्रमा, पीड़ित पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बृहस्पति या शनि से होता है और यह मेष, वृष, कर्क, तुला और, मकर राशियों से संबंधित होता है। किसी व्यक्ति की कुण्डली में चंद्रमा जब षष्ठेश या अष्टमेश होकर पीड़ित होता है और साथ ही दशा भी प्रतिकूल चल रही हो तब व्यक्ति को कैंसर रोग होने की संभावना बनती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शनि असाध्य एवं भयानक लंबे समय तक चलने वाले रोगों का परिचालक है। इसके संयोग से या इसकी दृष्टि पीड़ादायक मानी जाती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शरीर में किसी भी प्रकार की व्याधि का मुख्य कारण जल ही होता है। जल राशियों कर्क, वृशचिक और मीन। ये जल राशियां हैं। इनके पाप ग्रस्त होने पर भी कैंसर की संभावना प्रबल होती है । 
 Pandit Anjani kumar Dadhich
Nakastra jyotish Hub

Wednesday, 12 August 2020

गणेश चतुर्थी उत्सव

🌻गणेश चतुर्थी के बारे में 🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारत में गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेशजी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के त्यौहार को विनायक चतुर्थी और कुछ जगहों पर डंडिया चोथ के रूप में भी मनाई जाती है। जो भगवान गणेश को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वेदों और शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मदिवस है और उनकी पूजा करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस साल में 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी  मनाई जाएगी।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का यह उत्सव लगभग दस दिनों तक चलता है जिस कारण इसे गणेशोत्सव भी कहा जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यह माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था। इसीलिए गणेश चतुर्थी के दिन गणेश पूजा दोपहर के दौरान की जाती है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गणेश उत्सव का आरंभ भगवान गणपति प्रतिमा की स्थापना करने के साथ उनकी पूजा से होता है और लगातार दस दिनों तक घर में रखकर अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई की जाती है। इस दिन ढोल नगाड़े बजाते हुए और नाचते गाते हुए गणेशजी की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है। विसर्जन के साथ ही गणेशोत्सव की समाप्ति होती है।
⚜गणेश चतुर्थी का पुजन विधी⚜
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि नित्य कर्म से निवृत होकर गणेश जी की प्रतिमा बनाना चाहिए।यह प्रतिमा सोने,तांबे,मिट्टी,या गाय के गोबर आदि से बनाना चाहिए। एक कोरे कलश को लेकर उसमें जल भरकर उसमें सुपारी डालें और उसे कोरे कपड़े से बांधाना चाहिए। इसके बाद एक चोकी स्थापित करे और उस पर कलश और गणेश प्रतिमा की स्थापना करे।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  इसके बाद प्रतिमा पर सिंदूर, केसर, हल्दी, चन्दन, मौली आदि चढाकर षोडशोपचार के साथ उनका पूजन करे। गणेश जी को दक्षिणा अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाऐ। गणेश प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकि ब्राह्मणों में बांट देने चाहिए। गणेश जी की पूजा मध्याह्न के समय करनी चाहिए।इसके पश्चात ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उन्हें दक्षिणा भी देनी चाहिए। शाम के समय में गणेश जी की विधिवत पूजा करें। इसके बाद गणेश जी की कथा और गणेश चालीसा का पाठ अवश्य करें।अंत में गणेश जी की आरती करें और "ओम् गं गणपतये नमः" मंत्र की एक माला का जाप करना चाहिए। पूजा के पश्चात सायंकाल में दृष्टि नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। 
🏵गणेश चतुर्थी की तारीख और मुहूर्त🏵
✾ गणेश पूजा मुहूर्त मध्याह्न - सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक। 
✿ इस दिन ही लोग गणपति की मूर्तियां लाकर अपने घरों में रखते हैं। 
✾ चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - रात 11 बजकर 02 मिनट से (21/08/ 2020)
✾ चतुर्थी तिथि समाप्त - शाम 07 बजकर 57 मिनट तक (22/8/2020)
✿ मूर्ति विसर्जन 1 सितंबर, 2020 को किया जाएगा।
Pandit Anjani kumar Dadhich
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Sunday, 9 August 2020

कर्क राशि

🌻कर्क राशि के बारें में🌻पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बारह राशियों के राशि चक्र में चतुर्थ राशि कर्क है। इस राशि का चिह्न केकड़ा है। यह चर राशि है।राशि स्वामी चन्द्रमा है। इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेषा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जल तत्व का प्रभाव होने के कारण कर्क राशि के लोग शीतल और भावुक स्वाभाव के होते हैं।कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा है, जिस कारण से यह एक सौम्य राशि मानी जाती है. इस राशि के स्वामी और विशेषताओं के फलस्वरूप जातक में सौम्यता व भावनात्मकता का भाव देखा जा सकता है।
🌹चारित्रिक विशेषताएं🌹
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कर्क राशि वाला व्यक्ति श्रेष्ठ बुद्धि वाला,शांत सौम्य, कल्पना शील, तेज स्मरण शक्ति के मालिक, उद्यमी, परिश्रमी जल मार्ग से यात्रा पसंद करने वाला, कामुक,जिद्दी, आदर्शवादी, निष्ठावान कला-प्रेमी, कृतज्ञ,ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है। वह मातृभक्त होता है।
📖स्वभाव और जीवनशैली📖
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप शांत स्वाभाव के और सत्य बोलने वाले होते हैं।चन्द्र का प्रभाव होने के कारण आपकी वाणी मीठी होती है।आप कला-प्रेमी, लोकप्रिय, बड़ी-मित्र मंडली वाले होते है।कफ प्रधान होने के कारण आप आप कल्पना-लोक में मस्त रहते हैंं। स्त्रियों का सम्मान करते हैं।आप बडी योजनाओं का सपना देखने वाले होते हैं। आप कम परिश्रम से जायदा फल चाहते हैं। भावनाओं के प्रभाव में बहकर बडे-बडे निर्णय ले लेना आपके लिए कोई कठिन काम नहीं है, फिर चाहे उस निर्णय का बाद में क्या प्रभाव पड़ता है, इस बात से आप उस समय अनभिज्ञ होते हैं। आप जिनके साथ पूर्ण रूप से जुड़ जाते हैं उनके साथ मित्रता भी निभाते हैं।अपने मित्रों के लिए जान तक न्यौछावर करने से भी पीछे नहीं हटते है परन्तु कुछ सीमित लोगों से ही ये मित्रता कर पाते है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप श्रेष्ठ बुद्धि, कामुक होते है।आप अपनी माता को अत्यधिक प्रेम करते हैं। आप अत्यंत भावुक होते हैं और एक बार जो धारणा बना लेते हैं तो उसी पर अड़े रहते हैं । भावना वश किसी गलत प्रभाव में आ जाने पर जल्दी उस से निकलना सम्भव नहीं होता।आपके स्वभाव में कल्पना शक्ति की अदभुत क्षमता होती है और जल की तरह लचीला स्वभाव भी होता है जिसमें डाला जाए वैसा ही आकार भी ले लेता है। आप में गजब की सहनशक्ति होती है जो आपको अन्य राशियों से अलग करती है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  कर्क(केकड़ा) जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों को जकड़ लेता है तो उसे आसानी से नहीं छोड़ता है। उसी तरह जातकों में अपने लोगों तथा विचारों से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है।यह भावना उन्हें जिद्दी, आदर्शवादी, निष्ठावान तथा भोगी के गुण प्रदान करती है।इस राशि के लोगों मूड बदलते देर नहीं लगती है।उनके लिए अतीत का महत्व होता है। मैत्री को वे जीवन भर निभाना जानते हैं, अपनी इच्छा के स्वामी होते हैं।ये सपना देखने वाले होते हैं, परिश्रमी और उद्यमी होते हैं।जातक बचपन में प्राय: दुर्बल होते हैं। किन्तु आयु के साथ साथ उनके शरीर का विकास होता जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शनि-सूर्य जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढ़ाते हैं।जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, वहां परेशानी ही मिलती है।शनि-बुध दोनों मिलकर जातक को होशियार बना देते हैं। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते हैं।शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक आकर्षण देता है।जातक उपदेशक बन सकता है। बुध गणित की समझ और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनने में जातक को सफलता मिलती है।
👪दाम्पत्य जीवन और परिवार👪
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कर्क राशि के लोग अपनी उन्नति अकेले रहकर नहीं कर सकते। अतः इन्हें विवाह करना आवश्यक है। यद्यपि इनके गृहस्थ जीवन में पति-पत्नी के बीच एकमत नहीं रहता है। कर्क राशि वालों को अपने परिवार के विषय में बातें करना अधिक अच्छा लगता है। माता-पिता तथा बच्चों के संबंध में उनकी विशेष रुचि होती है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  सुरक्षा, समय तथा भोजन उनके लिए विशेष महत्वपूर्ण होता है। इनकी एक संतान गौरवशाली होती है तथा इनको सुख प्रदान करती है। कर्क राशि के लोग अपने कुटुम्ब तथा प्रिय व्यक्तियों के लिए त्याग करने वाले होते हैं, पर उसका त्याग अहसान के रूप में भी प्रकट होता है।कर्क राशि वालों को समान स्तर का जीवनसाथी चाहिए। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  कर्क राशि के जातक स्वतंत्र रहना ही अधिक पसंद करते हैं। पत्नी के अधिकार में रहना या खुशामद करना बिलकुल पसंद नहीं। यदि जीवनसाथी इनके कार्य में हस्तक्षेप करता है, तो वह भी इन्हें पसंद नहीं आता है। ये व्यक्ति जिद्दी भी होते हैं और इसी कारण तकलीफ भी उठाते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अपना प्रभाव जीवनसाथी तथा दूसरों पर रखते हैं। व्यर्थ की बातचीत या काम पसंद नहीं करते हैं। इन्हें पत्र लिखने का भी समय नहीं रहता है अतः अपनी पत्नी को भी समय नहीं दे पाते। ईमानदार होने से पैसा जमा नहीं कर पाते हैं। इसकी वजह से पत्नी के आधीन रहते हैं अथवा रहना पड़ता है।
👨‍🎓शिक्षा👩‍🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कर्क राशि का व्यक्ति शिक्षा के किस क्षेत्र में अधिक सफलता प्राप्त करेगा, इसका ठीक-ठाक ज्ञान तो उसकी कुंडली के ग्रहों की स्थिति को देखकर ही प्राप्त किया जा सकता है। कर्क राशि वाले चिकित्सा-शास्त्र की ओर आकर्षित होते हैं। अभिनय, नर्सिंग, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र, कानून,गणित इंजीनियरिंग, ज्योतिष,प्रबंधकीय विषय आदि क्षेत्रों में प्रमुख रूप से शिक्षा प्राप्त करते हैं।
🏵कैरियर🏵
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप दवाओं और द्रव्यों का आयात, अन्वेशण और खोज, भूमि या खानों का निर्माण व विकास, जल से प्राप्त होने वाली वस्तुओं आदि, जन उपयोगी कम्पनियों में काम करके भी धन कमा सकते हैं।इसके अतिरिक्त आप नेवी में काम कर सकते हैं, दुग्ध उत्पादों से संबंधित काम कर सकते है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  मछली उत्पादन, शहद का व्यापार, होटल व्यवसाय में कार्य करने जैसे कामों से भी जुड़ सकते हैं। चित्रकला, जल और सिंचाई विभाग से संबंधित, व्यापार और वनस्पति विज्ञान, कपास, चावल और सफेद धातु का व्यापार भी आपके लिए उपयुक्त रहता है। 
🚫कमियाँ🚫
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कर्क राशि वाले अपनी रुचि के अनुसार निर्माण करने में पुराने विचार तथा मान्यताओं को त्याग सकते हैं।यदि उनका कोई साथी या मित्र उसकी कल्पना में ठीक नहीं बैठता तो वे उसकी उपेक्षा भी कर सकते हैं। यह लोग विरोधाभासों के प्रतीक होते हैं। 
अत्यन्त कठोर पर अत्यन्त विनम्र, अत्यंत दृढ़ मन से अत्यन्त दुर्बल होते हैं। उनकी कुछ असंभव इच्छाएं होती हैं। भावनाएं बालक जैसी होती हैं और सहज ही चोट खा जाते हैं। चंद्रमा से संबंधित होने के कारण इनका मन क्षण-क्षण बदलता रहता है।जातक मुड के अनुसार कार्य करने वाला, अस्थिर मानसिकता, घमंडी भी होता है।  
🙏उपाय🙏
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस राशि वाले व्यक्तियों को सोमवार का उपवास, सोलह सोमवार का व्रत अथवा सत्यनारायण, शिव, दत्तात्रेय या गणेश की पूजा लाभदायक रहेगी। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार चंद्रमा का जप भी उपयोगी रहेगा तथा कष्ट दूर होंगे। श्वेत वस्त्र व चावल, चांदी, घी, मोती, सफेद पुष्प, कपूर एवं सफेद वस्तुओं का दान लाभकारी है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' - इस मंत्र का 11,000 जाप करना मनोकांक्षा पूर्ति में सहायक है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार दूसरों की नकल न करें, आलोचना न करें, दिखावा न करें। भावुकता त्याग कर समय की महत्ता को समझें और प्रत्यनशील रहें तो सफलता निश्चित ही प्राप्त होगी।
✍विवेचना✍
कर्क- ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
राशि स्वरूप- केकड़ा। राशि स्वामी- चंद्रमा।
कर्क- चौथी राशि।स्वभाव - सौम्य
दिशा -उत्तर।वर्ण- ब्राह्मण
लिंग-स्त्री।गुण सत
तत्त्व-जल।योनि- जलचर
प्रभुत्व - वक्ष स्थल
रंग - गुलाबी,सफेद। रत्न -मोती
Pandit Anjani kumar Dadhich
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर कुछ अचूक उपाय

🌻श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर करे कुछ अचूक उपाय🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जैसा की सब जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन हम जन्माष्टमी का त्यौहार के रूप में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि और रोहणी नक्षत्र में मनाया जाता है।यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी की रात्रि अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए किये गए उपायों के लिए बहुत ही विशेष मानी जाती है। इसीलिए इस रात्रि को मोह रात्रि भी कहते है। शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणी माँ लक्ष्मी का अवतार थी अत: अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो माता लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। अपनी समस्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए, अभीष्ट लाभ की सिद्धि के लिए जन्माष्टमी के दिन ये उपाय पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास से अवश्य ही करें- 
🏵धन लाभ के हेतु🏵 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आर्थिक संकट के निवारण के लिए तथा धन लाभ के लिए जन्माष्टमी के दिन प्रात: स्नान आदि करने के बाद किसी भी राधा-कृष्ण मंदिर में जाकर प्रभु श्रीकृष्ण जी को पीले फूलों की माला अर्पण करें।और "ओम भगवते वासुदेवाय:नम: " की 11 माला का जाप करने से आर्थिक संकट दूर होने लगते है धन लाभ के योग प्रबल होते है । 
🌷मनोकामनाओं की पूर्ति के हेतु🌷 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी के दिन प्रात: दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें और “गोकुल नाथाय नमः” मंत्र की एक माला का जाप करे। इसके बाद यह उपाय हर शुक्रवार को करें । इस उपाय को करने वाले जातक से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इस उपाय को करने से समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती है । 
🌹ऐश्वर्य प्राप्ति के हेतु🌹
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई, साबुतदाने की खीर यथाशक्ति मेवे डालकर बनाकर उसका भोग लगाएं उसमें चीनी की जगह मिश्री डाले एवं तुलसी के पत्ते भी अवश्य डालें तथा “ओम् श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा” नामक मंत्र की एक माला का जाप अवश्य करें इससे भगवान द्वारकाधीश श्रीकृष्ण की कृपा से ऐश्वर्य की प्राप्ति अवश्य होगी। 
💐धन-यश की प्राप्ति हेतु💐
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबर धारी भी कहलाते हैं, पीतांबर धारी का अर्थ है जो पीले रंग के वस्त्र पहनने धारण करता हो। इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन किसी मंदिर में भगवान के पीले रंग के कपड़े, पीले फल, पीला अनाज व पीली मिठाई दान करे तथा "कृं कृष्णाय नम:" मंत्र की माला का जाप करे। इससे भगवान श्रीकृष्ण व माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न रहते हैं उस जातक को जीवन में धन और यश की कोई भी कमी नहीं रहती है। 
🌼सर्व कार्य सिद्धि हेतु🌼
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जी के मंदिर में जटा वाला नारियल और कम से कम 11 बादाम चढ़ाएं । ऐसी मान्यता है कि जो जातक जन्माष्टमी से शुरूआत करके कृष्ण मंदिर में लगातार सत्ताइस दिन तक जटा वाला नारियल और बादाम चढ़ाना चाहिए जिससे सभी कार्य सिद्ध होते है तथा “क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः” मंत्र की माला का जाप करने से जीवन में किसी भी चीज़ का आभाव नहीं रहता है। 
🌺व्यापार और नौकरी में तरक्की हेतु🌺
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कई बार काफी कोशिशों के बाद व्यापार, नौकरी में मनवाँछित सफलता नहीं मिल पाती है इसलिए जन्माष्टमी के दिन अपने घर में सात कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें खीर या सफेद मिठाई खिलाकर कोई भी उपहार दें। ऐसा उसके बाद पांच शुक्रवार तक लगातार करें। इसे करने से माँ लक्ष्मी की कृपा से व्यापार, कारोबार में मनवाँछित सफलता मिलती है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करें फिर उसके बाद उस पत्ते पर रोली से "श्री गोविन्द वल्लभाय नम:" अथवा "श्री मंत्र" लिखकर उसे अपनी तिजोरी में रख लें। इस उपाय से लगातार धन का आगमन होता रहता है। 
🍁स्थाई सुख समृद्धि हेतु🍁
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी की रात को 12 बजे जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था उस समय भगवान श्री कृष्ण का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करते हुए "ओम् श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीकृष्णाय गोविंदाय गोपीजन वल्लभाय श्रीं श्रीं श्री" नामक मंत्र का जाप करे। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन में स्थाई रूप से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 
✍जीवन में अस्थिरता एवं संघर्ष को दूर करने हेतु ✍
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी के दिन प्रात: श्री कृष्ण मंदिर में जाकर भगवान के गले में तुलसी के पत्तो की माला या जाप करने वाली तुलसी की माला डाल कर वहीं पर तुलसी की माला से "ओम् नमो भगवते वासुदेवाय" की 5 या 11 माला का जाप करने से जीवन में अस्थिरता एवं संघर्ष की स्थिति समाप्त होने लगती है। 
👪परिवार में सुख शांति हेतु 👪
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी सँध्या के समय घर में तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएँ और "ओम् नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें, इससे परिवार में सुख शांति और प्रेम का वातावरण बना रहता है। 
🧜‍♂️जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए🧜‍♂️ 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जीवन में यश और सफलता प्राप्त करने के लिए जन्माष्टमी के दिन से नित्य माथे पर पीले चंदन या केसर में गुलाबजल मिलाकर उसका टीका लगाएं और "क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः" मंत्र की माला का जाप प्रतिदिन करे। इस उपाय से जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है, और समाज में यश भी मिलता है ।
☀उत्तम संतान प्राप्ति हेतु☀ 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि आप भी अपने यहाँ कृष्ण कन्हैया जैसी संतान की चाह रखते हैं तो जन्माष्टमी के दिन सन्तान प्राप्ति के लिए नीचे लिखे मंत्र का विधि-विधान पूर्वक जप करें। 
मंत्र- ऐं क्लीं देवकी सुत गोविंद, वासुदेव, जगत्पते। देहि में तनय कृष्ण, त्वाम अहं शरणं गत: क्लीं।।
जन्माष्टमी के दिन सुबह एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर बालगोपाल की मूर्ति या चित्र रखे फिर उसके सामने कुश के आसन पर बैठकर उपरोक्त मंत्र की कम से कम 5 माला का जप अवश्य करें। इस जप के बाद कन्हैया को माखन-मिश्री का भोग लगाएं और अपने घर में सुंदर एवं स्वस्थ संतान के लिए भगवान से प्रार्थना करें। इसके बाद नित्य इस मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य ही करें , प्रभु की कृपा से आपको सुन्दर और गुणवान सन्तान की प्राप्ति होगी । 
⚜मनचाहा जीवनसाथी पाने हेतु⚜ 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जन्माष्टमी के दिन किसी कृष्ण मंदिर में जाकर भगवान श्रीकृष्ण को पीले फूलो की माला पहनाते हुए उन्हें पीली मिठाई, शहद, मिश्री, इलाइची का भोग लगाते हुए उन्हें पानी वाले या जटावाला नारियल और केले अर्पित करें और अपने विवाह की इच्छा अपने मन में रखकर "ओम क्लीं कृष्णाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा:" मंत्र की राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर के आगे सच्चे मन से 5 माला का जाप करें। इस मन्त्र के नित्य जाप से अति शीघ्र ही आपके विवाह में आ रही हर अड़चन दूर होगी और आपको योग्य और मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होगा।
Pandit Anjani Kumar Dadhich 
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सिंह राशि के बारे में

🌻सिंह राशि के बारे में🌻  
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सिंह राशि की (अक्षर तालिका में मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे आदि)नामाक्षर आते है। राशिफल चक्र में सिंह राशि का पंचम स्थान है। इस राशि का राशि चिन्ह शेर है तथा राशि का स्वामी सूर्य है। सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तरा -फाल्गुनी का पहला चरण आता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सिंह राशि का तत्व अग्नि है। इसलिए सिंह राशि के लोगों का स्वभाव उग्र होता है और आप मनमर्जी के कार्यों को करने वाले होते हैं और आपकी ऊर्जा अद्वितीय है।आपकी शालीनता और रौब सभी को आकर्षित करने वाला होता है।इसी कारण आप जहाँ भी जाते हैं अपना अमिट प्रभाव छोड़ते हैं। 
✍मुख्य विशेषताएं✍
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस राशि के जातक शेर जैसे होते हैं पूरे साहसी, निडर, उर्जावान, स्वतंत्रता प्रेमी, मजबूत, आत्म विश्वास से लबरेज। रचनात्मकता, बुद्धिमान, उदार, प्रभावी और तेजस्वी वाणी के मालिक,आदर्शवाद, सौन्दर्यप्रेमी, नेतृत्व की क्षमता इनमें स्वाभाविक रुप से विकसित होती है।
🌹चारित्रिक विशेषताएं🌹
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य का प्रभाव होने के कारण आपकी वाणी प्रभावी और तेजवान होती है। आप बुद्धिमान, शासन करने वाले, लोगों पर प्रभुत्व जमाना आपके लिए आसान होता है।आप एक उदार और सहायक व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं, आप एक वफादार व्यक्ति बनते हैं जो आत्मिक रूप से दूसरों के साथ जुड़ सकता है।आप अपने मित्रों कि सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते है।आप अपनी जरूरतों को दरकिनार करते हुए दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप एक ऐसे साथी की चाह रखते हैं जो आपको स्वछंद रहने दे और आपकी प्रगति में सहायक बन सके।आप साहसी, बली और आत्मविश्वास से पूर्ण होते हैं तथा अपनी क्षमताओं से परे जाकर अपने काम को आगे तक ले जाने की कोशिश करते हैं।आप मिलनसार व्यक्तित्व के मालिक होते है। मघा नक्षत्र के कारण जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा होता है। सजावटी और सुन्दरता के प्रति भावना को बढाता है।कल्पना करने और उसके विकास के लिये सोच पैदा होती है। पूर्वाफ़ाल्गुनी नक्षत्र के सानिध्य में जातक स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ़ बढता है। जातक को सुन्दरता का बोध करवाने मेंं तथा उसके प्रति मोह और कामुकता का भाव जगाने में सहायक होता है। इसी नक्षत्र के प्रभाव के कारण जातक अपने वादों को क्रियात्मक रूप मे बदलने के लिए काम करता है। उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण जातक में अपने प्रति स्वतन्त्रता की भावना भरता है और जातक को किसी की बात न मानने के लिये बाध्य करता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले तथा रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है। छाती बड़ी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अंतिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है। सिंह राशि वाले जातक हर कार्य सोचना, काम करना,खाना और रहना आदि शाही ढंग से करते हैं।इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खाएगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नहीं होता है, जिससे प्रेम करेगा, उस मरते दम तक निभाएगा, जीवनसाथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।जातक कठोर मेहनत करने वाले, धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार स्वर्ण, पीतल और हीरे-जवाहरात का व्यवसाय इनको बहुत फायदा देने वाले होते हैं। जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पाई जाती है।इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं। नृत्य करना भी इनकी एक विशेषता होती है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है या फिर आजीवन बीमार रहते हैं।जिस वातावरण में इनको रहना चाहिए अगर वह न मिले। इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाए या इनके प्रेम में कोई बाधा आए तो यह बीमार रहने लगते है।
🎭कमियाँ🎭
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सिंह राशि का पुरुष अपने लिए स्वयं ही कष्टों का निर्माण करता है। वह वर्तमान पर कम भूत और भविष्य पर अधिक सोचता है। इनकी शंकालु प्रवृत्ति होती है एवं इस राशि का स्वामी सूर्य होने के कारण यह अग्नितत्व प्रधान ग्रह है, जिससे ये बात-बात पर अत्यधिक क्रोध करते हैं। स्वार्थ-भावना, ईर्ष्या तथा केन्द्र में रहने की भावना उनके दुर्गुण हैं। सिंह राशि के लोगों को अपने प्रारम्भिक जीवन में दूसरों पर विश्वास करने के कारण बहुत धोखा खाना पड़ता है। इन्हें प्रशंसा की भूख होती है। प्रशंसा के अभाव में वे प्रतिशोध तो नहीं लेते, अपितु अत्यन्त उदास हो जाते है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कई बार आप सूर्य के प्रभाव के कारण स्वतंत्र व स्वच्छंद रहने लगते हैं और इसलिए आप कुछ जिद्दी, घमंडी तथा अहंकारी हो जाते हैं।आपके भीतर लचीलेपन का अभाव पाया जाता है। 
👩‍🎓कैरियर👨‍🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए उपयुक्त व्यवसाय सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, वकील, प्रोफेसर, इंजीनियर, व्यापार और संस्था के प्रमुख के रूप में और दवाओं से संबंधित हो सकता है। आप दार्शनिक व्यक्ति होते हैं, साहित्य और ललित कला के प्रति विशेष रूचि रखते हैं. आपको कलाकृतियों के संग्रह का शौक रहता है। सिंह राशि के व्यक्ति क्रिकेट खेलना पसन्द करते हैं। आप बहस अच्छी और तर्कों से भरी हुई करते हैं अत: आप वकील बनने की योग्यता रखते है आपमें न्याय करने की क्षमता होती है।इसलिये न्यायधीश भी बन सकते है, आप नियुक्ति अधिकारी बन सकते हैं, राजदूत व राजकीय सेवायें, डायरेक्टर, चेयरमैन, मंत्री जैसे उच्च पदों में नियुक्त हो सकते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  प्रशासनिक सेवाओं, दवा विक्रेता, डाक्टर, शेयर मार्केट, वन्य अधिकारी, भ्रमणशील कार्य, सोने की खाने, रेस कोर्स, स्टेडियम आदि के रखरखाव से जुड़ सकते हैं।आपमें नेतृत्व व संगठन के स्वाभाविक गुण होते हैं अत: आप संगठन के बड़े-बड़े कार्य, शालीनता व गरिमापूर्ण ढ़ग से करने में सक्षम होते हैं।सरकार और नगर पालिका वाले पद इनको खूब भाते हैं। 
🏵रोग🏵
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार रीढ़ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं। इस राशि के लोगों के लिये हृदय रोग, धड़कन का तेज होना, लू लगना और आदि बीमारी होने की संभावना होती है।गला, पेट, आंखों में तकलीफ, रक्त विकार, कान का दर्द, चर्मरोग, वातरोग या शीत ज्वर पीड़ा का भय बना रहता है। जुकाम शीघ्र हो जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बाल्यावस्था में रोगों से विशेष कष्ट उठाना पड़ता है, किन्तु युवावस्था में शक्तिमान रहते हैं।अधिक जल पीना लाभदायक होता है। छाछ, दही, पपीता, गोभी, आलू, टमाटर व आम विशेष प्रिय चीजें होती हैं।
👪घर परिवार और वैवाहिक जीवन👪
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सिंह राशि के जातक अपनी माता के लिए हृदय में उच्च सम्मान और प्रेम रखते हैं। ईश्वर पर भरोसा रखने के कारण इनके सुख-दुःख चेहरे पर शीघ्र ही झलक जाते हैं अतः परिवार के लिए विश्वसनीय होते हैं। इन्हें अपने भाई-बहनों की ओर से उचित व्यवहार प्राप्त नहीं होता। किसी एक निकट संबंधी की मृत्यु के कारण इन्हें आर्थिक चोट पहुंचाने की संभावना रहती है। किसी एक यात्रा में विपत्ति की संभावना रह सकती है तथा किसी एक यात्रा के समय पिता को भी विपत्ति की संभावना होगी। सिंह राशि के लोगों का अपने पिता से विरोध रहना संभव है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सिंह राशि के जातक दूसरों की सहायता करने वाले, प्रेमी स्वभाव के तथा दूसरों को प्रसन्न देखना चाहने वाले होते हैं। वे एक अच्छे पति भी सिद्ध होते हैं। सिंह राशि के जातकों के विवाह में बाधा पड़ती है पर विवाह से ही भाग्योदय होता है। सिंह राशि का व्यक्ति व्यवहार में कठोर होता है। उसे क्रोध भी जल्दी आता है। क्रोध में वह किसी भी सीमा तक जा सकता है। क्रोधावेग में वह अपने प्रिय से प्रिय व्यक्ति का भी अहित कर सकता है। सिंह राशि के क्रोध को झेल पाना सरल नहीं होता है। उत्तेजना के कारण वह लगभग पागल सा हो जाता है। उस पर तब नियन्त्रण कर पाना असंभव हो जाता है। इनका जीवनसाथी इनके क्रोध को सहता रहता है। हालांकि ये अंदर से भावुक होते हैं।
🌼उपाय🌼
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सिंह राशि वाले लोगों के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपायों को उपयोग करना चाहिए- 
❃रविवार का उपवास करने से इच्छित फल मिलता है। 
सूर्य को जल तर्पण एवं रविवार का व्रत सदैव लाभकारी है। 
❃भगवान दत्तात्रेय, सूर्य, हनुमान,और गायत्री माता में किसी भी एक देवता की उपासना करें। 
❃एकादशी करना व गणेश की उपासना भी अच्छी मानी गई है। 
❃माणिक रत्न या बिल्व पत्र झाड़ की जड़ी पास में रखें तो दुःख दूर होगा।
"ओम घृणि सूर्यायः नमः" मंत्र का 7,000 जाप करना भी आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होता है।
📖विवेचना📖
सिंह - पांचवी राशि
राशि स्वामी - सूर्य। राशि स्वरूप- शेर जैसा
स्वभाव- उग्र। दिशा- पूरब
वर्ण-  क्षत्रिय। लिंग-  पुरुष
गुण- सतोगुण। तत्त्व - अग्नि
योनि - पशु। प्रभुत्व- ह्रदय
रंग- लाल, गुलाबी
रत्न- माणिक । शुभ अंक : 1
Pandit Anjani kumar Dadhich
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