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Sunday, 15 February 2026

महाशिवरात्रि के विभिन्न उपाय

महाशिवरात्रि और विभिन्न उपाय 
प्रिय पाठकों, 
15 फरवरी 2026, रविवार 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज महाशिवरात्रि के विभिन्न उपाय के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारत में सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से महाशिवरात्रि एक है। भारत में ज्यादातर लोग भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए जाना जाता हैं। हिन्दू धार्मिक पंचांग के मुताबिक महाशिवरात्रि का त्योंहार हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार आज रविवार 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वैदिक मान्यता हैं कि इस दिन (महाशिवरात्रि के दिन) भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। पौराणिक कथाओं में ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का धरती पर प्रकाट्य हुआ था साथ ही यह मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान महादेव पृथ्‍वी पर मौजूद प्रत्‍येक शिवलिंग में मौजूद होते हैं। इसी कारण महाशिवरात्रि ‍के दिन शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन शिवजी की पूजा-आराधना करना सारे कष्‍ट दूर कर देता है और अपार सुख-समृद्धि देता है।भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए महाशिवरात्रि साल का सबसे उत्तम दिन होता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारतीय शास्त्रों में महाशिवरात्रि की पूजा निशिता काल में करने का विधान है। साधक रात्रि के समय में महादेव और माता पार्वती की भक्ति भाव से पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा, दिन के समय में भी पूजा उपासना कर सकते हैं। 
इस दिन (महाशिवरात्रि के दिन) ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान शिव जी का स्मरण कर दिन की शुरुआत करें और इसके पश्चात नित्य कर्मों से निवृत होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें और अब आमचन कर अपने आप को शुद्ध करें। इसके बाद सफेद कपड़े धारण कर सबसे पहले भगवान सूर्य को जल का अर्घ्य देंवे। इसके बाद भगवान शिव जी एवं माता पार्वती की पूजा फल, फूल, धूप, दीप, अक्षत, भांग, धतूरा, दूध,दही और पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक पूजा के दौरान ओम् नमः शिवाय मंत्र और शिव चालीसा का जाप करने के बाद अंत में आरती अर्चना कर भगवान शिव और माता पार्वती से कामना करें। दिनभर उपवास रखें। निशिता काल में पूजा आरती के पश्चात फलाहार करें। अगले दिन पूजा-पाठ संपन्न कर व्रत खोलें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व पर महादेव की उपासना से व्यक्ति की हर कामना पूर्ण हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ था। इस दिन विधीवत से भगवान भोलेे की पूजा की जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सभी प्रकार की समस्या जैसे विवाह की बाधाओं के निवारण, ग्रह जनित पीड़ा और आयु संंबंधित परेशानी के लिए इस दिन शिव जी की उपासना अमोघ अस्त्र साबित होती है। शिवरात्रि का व्रत,उपवास, मंत्रजाप तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि को प्रातः काल स्नान करके शिव पूजा का संकल्प लेने के बाद सूर्य को अर्घ्य देंने के बाद शिव जी को जल अर्पित कर पंचोपचार पूजन के साथ "ओम्  नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना चाहिए। महाशिवरात्रि के रात्रि में शिव मन्त्रों के अलावा रुद्राष्टक अथवा शिव स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं। अगर चार पहर पूजन करते हैं तो पहले पहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद से पूजन करना चाहिए। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हर पहर में शुद्ध जल का प्रयोग जरूर करना चाहिए और साथ ही साथ निम्नलिखित उपायों का उपयोग कर जीवन में आ रही समस्याओ का निवारण भी कर सकते है -
❁रोजगार के लिए और मनचाही नौकरी के लिए-महाशिवरात्रि के दिन उपवास रखें और शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर शहद और जलधारा से भगवान शिव का अभिषेक "ओम् नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए शिव जी से रोजगार प्राप्ति की प्रार्थना करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर अनार का फुल चढ़ाएं। महाशिवरात्रि के संध्याकाल में शिव मंदिर में 11 घी के दीपक जलाएं। ऐसा करने से व्यापार में तेजी आएगी और नौकरी संबंधित समस्या का भी अंत होगा।
❁शिक्षा और एकाग्रता के लिए- शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का दूध मिश्रित जल का अभिषेक करना चाहिए पर इस बात का ध्यान रखें कि इसकी धारा लगातार शिवलिंग पर गिराते रहें उस समय "ओम् नमः शिवाय" कहते जाएं और शिव लिंग से स्पर्श कराके पांच-मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। 
❁संतान के लिए- शिवरात्रि के दिन आटे से 11 शिवलिंग बनाकर 11 बार शुद्ध घी और बाद में जल धारा से इनका जलाभिषेक कर भगवान शिव से संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें यह प्रयोग पति पत्नी एक साथ करें तो उत्तम होता है। इस उपाय से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।
❁शीघ्र विवाह के लिए- अगर कोई भी अपनी शादी को लेकर बैचैन हैं तो इस महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव से श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करनी चाहिए कि हे भगवान आप मेरी शादी इसी साल में करवा दीजिए। उनसे जिस प्रकार के वर या वधू को आप चाहते हैं आप अपनी शादी को लेकर भगवान शिव से इस महा शिवरात्रि पर अपने मन में प्रार्थना करें। और आपकी शादी शीघ्र ही आपकी मनचाहे जीवन साथी से हो जाएगा।महाशिवरात्रि के दिन जहां माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति एक साथ हो उस मंदिर में पीले वस्त्र धारण करके शिव मंदिर जाना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव के प्रतिक शिव लिंग पर उतने बेलपत्र अर्पित करने चाहिए जितनी उस युवक या युवती की उम्र है हर बिल्व पत्र के साथ " ओम् नम शिवाय" का जाप करते हुए भगवान शिव को अर्पित करे और बाद में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर दोनों की पूजा साथ में करनी चाहिए। इसके बाद मौली को हाथ में लेकर सात बार शिव-पार्वतीजी की परिक्रमा करते हुए सात बार मौली से शिवलिंग और पार्वती जी के बंधन कर देना चाहिए।अंत में भगवान शिव और माता पार्वती से शीघ्र विवाह की प्रार्थना करनी चाहिए इसके बाद वहाँ शिव चालीसा का पाठ करें। यह पुजा महाशिवरात्रि के व्रत के साथ 16 सोमवार तक लगातार करे और व्रत भी करना चाहिए। 
❁शीघ्र विवाह के लिए दूसरा उपाय - महाशिवरात्रि की शाम के समय मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन जरूर करना चाहिए और इस बात का ध्यान रखें कि पूजा करते समय आपका मुख पश्चिम दिशा की ओर हो और "ओम् नमः शिवाय" पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। उसके बाद दूध से भी अभिषेक  सवा घंटा तक कर सकें। शिवलिंग की अर्ध परिक्रमा करनी चाहिए और नंदी के कान में शीघ्र विवाह की कामना कहनी चाहिए। 
❁महशिवरात्रि के दिन का विवाह के लिए तीसरा उपाय- सूर्योदय से पूर्व नित्य कर्म से निवृत्ति के बाद स्नान करें। स्नान करने के दौरान पानी मे गंगा नदी का जल डाले और भगवान शिव एवं माता पार्वती का ध्यान करें। स्नान के बाद एक साफ तांबे के गिलास या लोटा में सवा पाव कच्चा दूध लेकर उसमें थोड़ी पिसी शक्कर मिलाएं और पूजा का सामान लें। सबसे पहले शिवलिंग को जलाभिषेक कराएं। फिर कच्चे दूध से और उसके बाद दूध में बूरा या मीठा डाल कर स्नान करवाएं। अभिषेक के बाद भगवान शिव को कच्चा सूत रुपी वस्त्र अर्पित करे। इसके बाद उन्हें चंदन का तिलक लगाएं। उनको आक के फूलों की माला समर्पित करें और भगवान शिव को 108 बिल्व पत्र ''ओम् नमः शिवाय" का मंत्र जाप करते हुए अर्पित करे और हर बेलपत्र को अर्पित करते हुये भोलेनाथ से सुयोग्य वर या सुयोग्य पत्नी की कामना करें। 
❁आमदनी में वृद्धि हेतु उपाय- शिवरात्रि पर घर में पारद के शिवलिंग या स्फटिक के शिवलिंग की स्थापना योग्य ब्राह्मण से सलाह कर स्थापना कर प्रतिदिन पूजन जल, दूध ,दही, घी, शहद और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक "ओम् नमः शिवाय" मंत्र का जाप करे। प्रति दिन ओम् नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने और शिवलिंग पुजा करने से आमदनी में वृद्धि होती हैं।
❁पितृदोष की शांति हेतु उपाय महाशिवरात्रि भगवान शिव के शिवलिंग का पानी में काले तिल मिलाकर 101 बार अभिषेक करें और "ओम् नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। इसके बाद गरीबों और जरूरत मंदो को भोजन कराना चाहिए। इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी और पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी और मन को शांति मिलेगी।
❁बिमारी में लाभ के लिए- महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक रुद्रीपाठ के साथ ही महामृत्युंजय मंत्र जो हैं- 
"ओम् हौं जूं सः। ओम् भूरभूव स्वः। ओम् त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्। उर्व्वारुकमिव बन्धानान्मृत्यो मुक्षीय मामृतात्। ओम् स्वः भुवः भूः ओम्। सः जूं हौं ओम्" का जाप करते रहें। इससे बीमारी ठीक होने में लाभ मिलता है।
❁सुख समृद्धि और परेशानी के अंत के लिए- महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करे और उसके बाद भगवान शिव को तिल व जौ चढ़ाएं और 21 बिल्व पत्रों पर चंदन से 'ओम् नम: शिवाय' लिखकर उन्हें शिवलिंग पर चढ़ाएं।इसके बाद किसी नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और परेशानियों का अंत होगा। ऐसा करने से आपकी धन संबंधी समस्या खत्म होती है और रुके हुए धन की प्राप्ति भी होती है।
❁दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए- महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद अनाथ आश्रम में जाकर फल और खाने की वस्तुओं का वितरण करें और जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सभी प्रकार की समस्याओं का अंत होगा और भाग्य भी साथ देगा।
❁वैवाहिक जीवन की परेशानी का अंत के लिए- अगर आपके वैवाहिक जीवन में परेशानी चल रही है तो महाशिवरात्रि पर 16 सुहागिन महिलाओं को सुहाग का सामान दें और गरीब और जरूरतमंद महिलाओं की मदद करें। ऐसा करने से आपके वैवाहिक जीवन की समस्याओं का अंत होगा और दाम्पत्य जीवन मधुर हो जाएगा।
❁ग्रह जनित अशुभ परिणाम से बचने के लिए - अगर आपकी जन्मकुंडली में कोई भी ग्रह शुभ परिणाम नहीं दे रहा हैं तो महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का दुग्धाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा करें और "ओम नम: शिवाय" या "महामृत्युंजय मंत्र" का जप करने से कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रह शुभ फल देना शुरू कर सकते हैं।
❁मोक्ष प्राप्ति के लिए- महाशिवरात्रि के दिन एक मुखी रूद्राक्ष भगवान शिव के समक्ष रखकर गंगाजल से अभिषेक कर विधी-विधान से पूजा करें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर रूद्राक्ष रख दें। उसके बाद "ओम् नम: शिवाय" मंत्र का एक लाख बार जप करें और हर दिन एक माला का जाप करें। ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
❁स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए- जो व्यक्ति स्थायी लक्ष्मी पाना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर चावल चढ़ाने चाहिए।चावल पूरे यानी अखंडित होने चाहिए। 
❁लम्बी उम्र के लिए- यदि कुंडली में अल्पायु योग है तो लंबी उम्र के लिए महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक दुर्वा रस से महामृत्युंजय मंत्र के साथ करना चाहिए और दूर्वा(दूब) और आक के फुल और धतुरे को भी चढ़ाना चाहिए। इससे शिवजी और गणेशजी की कृपा से आयु में वृद्धि के साथ-साथ सुख-समृद्धि भी बढ़ती हैं। 
❁शत्रु पर विजय के लिए - महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक करें और वहीं रूद्राष्टक का पाठ करें। ऐसा करने से कोई शत्रु परेशान कर रहा है या फिर किसी झूठे मुकदमे में फंसे हैं तो महाशिवरात्रि पर यह विजय दिलाएगा। 
❁शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रूप हैं। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन बिल्व वृक्ष की पूजा करनी चाहिए और रात्रि में बिल्व वृक्ष के पास दीपक जलाएं। बाद में भगवान शिव की पुजा के लिए बिल्व पत्रो को तोड़ कर ले जाए। फिर शिवलिंग का जलाभिषेक करे। जल चढ़ाते समय शिवलिंग को हथेलियों से रगड़ना चाहिए। महाशिवरात्रि की रात में किसी शिव मंदिर में या बिल्व वृक्ष के पास दीपक जलाएं। शिवपुराण के अनुसार कुबेर देव ने पूर्व जन्म में रात के समय शिवलिंग के नजदीक दीपक जलाकर रोशनी की थी। इसी वजह से अगले जन्म में वे देवताओं के कोषाध्यक्ष बने।
❁शिवरात्रि का महाउपाय- महाशिवरात्रि में शिवजी के समक्ष घी का दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें शमी पत्र अर्पित करना चाहिए। साथ में शिवलिंग के समक्ष रुद्राक्ष की माला या रुद्राक्ष भी रखकर पुजा करनी चाहिए और "ओम् नमः शिवाय"  मंत्र का यथाशक्ति जाप करना चाहिए। अपनी मनोकामना के पूर्ण हो जाने की प्रार्थना नंदीश्वर के कान में कहनी चाहिए। इसके बाद उस रुद्राक्ष को गले में धारण कर लें। ऐसा करने से आपकी मन इच्छा जरूर पूरी होगी। 
❁कालसर्प दोष की शांति के लिए - महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के मंदिर में जहाँ शिवलिंग पर सर्प मूर्ति नहीं है वहाँ शिवलिंग पर चांदी से बना कर सर्प मूर्ति बना कर चढाये और बाद में शिव लिंग का पंचामृत से अभिषेक महामृत्युंजय मंत्र के साथ करना चाहिए। 
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Hub
नक्षत्र ज्योतिष हब
📧panditanjanikumardadhich@gmail.com
फोन नंबर - 6377054504

Wednesday, 31 December 2025

विश्व और आने वाला साल 2026

विश्व और आने वाला साल 2026
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वर्ष 2026 विश्व स्तर पर बड़े बदलावों, राजनीतिक उथल-पुथल और Ai का बड़ी तीव्रता से प्रचार प्रसार, आध्यात्मिक प्रगति का वर्ष रहने वाला है। 
वर्ष 2026 के लिए मुख्य ज्योतिषीय भविष्यवाणियां निम्नलिखित हैं-
ग्रहों का मंत्रिमंडल- वर्ष 2026 में बृहस्पति (गुरु) 'राजा' होंगे और मंगल 'मंत्री' की भूमिका निभाएंगे। यह परिवर्तन शिक्षा और अध्यात्म में उन्नति लाएगा लेकिन मंगल के प्रभाव से राजनीतिक तनाव भी बढ़ सकता है। जो प्रारंभिक वर्ष में नेतृत्व परिवर्तन, जल-संबंधी प्लावन, सैलाब, अग्निकांड, भावनात्मक अस्थिरता व जनता में असंतोष के योग रच रहे हैं। वर्ष के आरंभिक समय में उथल-पुथल, जल और अग्नि से हानि की आशंका बलवती हो रही है। तत्पश्चात 19 मार्च 2026 से संवत 2083 (रौद्र संवत्सर) का प्रारंभ होगा जहां बृहस्पति राजा और मंगल मंत्री अनूठे वैश्विक चित्र रचेंगे। शनि वर्ष पर्यन्त मीन में नए चित्र गढ़ेंगे, राहु कुंभ में, केतु सिंह में संचार करेंगे। जून तक शनि-राहु-केतु योग प्रलयकारी प्रभाव डालेगा। बृहस्पति 2 जून तक मिथुन, फिर कर्क में अक्टूबर अंत तक, तत्पश्चात सिंह में विचित्र गति से रक्षा सुरक्षा को प्रभावित करेगा। ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो इस वर्ष का आकाश असामान्य है। गुरु अतिचारी हैं, और जब ज्ञान और विस्तार का ग्रह असहज गति में हो, तो अवसर भ्रम बन जाते हैं और निर्णय दुविधा। यह वह समय है जब धन रहेगा, पर स्थिर नहीं। साधन होंगे, पर संतोष नहीं। निवेश में उतावलापन, योजनाओं में असंतुलन और भविष्य को लेकर एक अदृश्य बेचैनी समाज में व्याप्त होने की संभावना है। इसी कालखंड में शनि अपना न्यायासन संभाले हुए हैं। शनि न क्रूर हैं, न दयालु वे केवल निष्पक्ष हैं। जिन व्यवस्थाओं ने वर्षों तक सतही वृद्धि, उधार की समृद्धि और दिखावटी स्थिरता पर भरोसा किया, शनि अब उनसे हिसाब लेगा। बैंकिंग, कॉर्पोरेट और शासन, ये सारे सेक्टर दबाव महसूस करेंगे। टालमटोल की आदतें, लापरवाह नीतियां और नैतिक शिथिलता सामने आ सकती हैं। आकाश मण्डल में राहु शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं। यह स्थिति अचानक बदलाव, तकनीकी उथल-पुथल और अप्रत्याशित घटनाओं की सूचक मानी जाती है। 
वैश्विक राजनीति और युद्ध - अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और युद्ध जैसी स्थितियां बन सकती हैं। पुरानी शक्तियों के पतन और नई शक्तियों (विशेषकर एशिया की ओर सत्ता का केंद्र खिसकने) के संकेत हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में खटास और टकराव की संभावना भी जताई गई है। बुध वक्री फरवरी, जून-जुलाई, अक्टूबर में संचार-व्यापार को डगमगाएगा। शुक्र अक्टूबर तुला वक्री रिश्तों में दरार डालेगा। भारत की विदेश नीति अपना दशक पुरानी चोला बदलेगी। इस्लामिक देशों में नया ध्रुवीकरण नज़र आयेगा। उत्तर बंगाल के चुनावी परिणाम सत्ताधारीयों को चौंका सकते हैं। विश्व में एक बड़ा देश किसी दूसरे बड़े देश की स्थिर सत्ता को अस्थिर करने का प्रयास करेगा। विश्व में राजनीतिक उथल-पुथल रहेगी। कई पड़ोसी देशों से तनाव मिलेगा। एक बड़ा विश्व नेता कई बड़े बदलाव कर सकता है। एशिया में शक्ति संतुलन के दरमियान संघर्ष परिलक्षित होने की संभावना है। सीमा विवाद, वैश्विक सत्ता पुनर्संरचना दृष्टिगोचर होगी। शनि-राहु-केतु से विश्व, राष्ट्र और प्रांतों, निकायों में नेतृत्व परिवर्तन होगा। पंजाब-कश्मीर-ओडिशा में कुछ समय के लिए अशांति की आशंका है।
आर्थिक स्थिति - यह वर्ष वित्तीय मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में मंदी (रिसेशन) और कर्मचारियों की छंटनी की आशंका है, हालांकि साल के मध्य में स्थिरता आने के संकेत हैं। भारत के लिए घरेलू मांग के कारण आर्थिक विकास मजबूत बना रह सकता है।
प्राकृतिक आपदाएं और जलवायु- अत्यधिक गर्मी, सूखे और जल स्तर की कमी की संभावनाएं प्रबल हैं। इसके साथ ही भूकंप, सुनामी, चक्रवाती तुफान, ज्वालामुखी फटने और भूस्खलन,कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति भी सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
धातुएं, जिन्स और शेयर मार्केट - वर्षारंभ में दुग्ध संकट, सरसों-जौ-चना-गन्ना अधिक, कीटों से फसल हानि होने की आशंका। पूर्वार्ध में अन्न-फल में कमी, उत्तरार्ध में फलोत्पत्ति उत्तम रहेगी। शेयर बाजार में नया उछाल दरअसल भविष्य में बड़ी गिरावट की पटकथा लिख सकता है, मई-जुलाई में ट्रेडर्स को हानि का सामना करना पड़ सकता है, अक्टूबर के बाद शेयर बाजार की स्थिति विचित्र नज़र आएगी। तकनीक क्षेत्र उन्नति करेगा। धातुओं में उछाल आएगा। सोना-चांदी में प्रारंभिक गिरावट के पश्चात महातेजी दृष्टिगोचर होगी, तब आज की कीमतें सस्ती लगेंगी। मानसून के बाद धातुओं के भाव में उछाल आएगा, अकस्मात किसी खबर से बाजार सहसा स्तब्ध रह सकता है। आने वाले बरसों में तांबा उत्कर्ष की नई कहानी लिखेगा। पांच बरसों में तांबा बड़ी उछाल मार सकता है। बड़े नोटों की कमी होगी।
मनोरंजन और खेल - इस साल में डिजिटल कंटेंट्स का बूम देखने को मिलेगा। नए इन्फ्लुएंसर्स चमकेंगे। उनका क्रेज बढ़ेगा। बॉलीवुड के सब्जेक्ट और आईडिया में बदलाव दिखेगा। खेल क्षेत्र में भारत उन्नति करेगा। अगले ओलंपिक के परफॉरमेंस में कुछ सुधार आएगा, क्रिकेट-एथलेटिक्स में नए सितारे उभरेंगे। मंगल खेल में साहस का सबब बनेगा। कई खिलाड़ी चोटिल होने की आशंका है। आने वाले साल और सालों में कई काबिल खिलाड़ियों के करियर में बदलाव आ सकता है।
तकनीक और नवाचार- वर्ष 2026 में प्रौद्योगिकी (Technology), विशेषकर AI और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में भारत और दुनिया भर में बड़े अनुसंधान और प्रगति होगी। ज्योतिष और विज्ञान के क्षेत्र में नवीन प्रगति देखने को मिलेगी। 
प्रमुख खगोलीय घटनाएं - 2026 में कुल चार ग्रहण होंगे जो निम्नलिखित है-
17 फरवरी: कुंभ राशि में कुंडलाकार सूर्य ग्रहण।
3 मार्च: कन्या राशि में पूर्ण चंद्र ग्रहण।
12 अगस्त: सिंह राशि में पूर्ण सूर्य ग्रहण।
28 अगस्त: मीन राशि में आंशिक चंद्र ग्रहण।
अन्य भविष्यवाणियां- बाबा वेंगा जैसी भविष्यवाणियों के अनुसार, 2026 में अंतरिक्ष अनुसंधान में बड़ी प्रगति या एलियंस से जुड़े किसी बड़े खुलासे की संभावना जताई गई है। 
निष्कर्ष - कुल मिलाकर, 2026 एक परिवर्तनकारी वर्ष होगा जहाँ मानवता को धैर्य,आध्यात्मिक संरेखण और पुरानी आदतों को छोड़कर आगे बढ़ने की आवश्यकता होगी। आने वाले साल 2026 को डिजास्टर का वर्ष कहा जा सकता है। लेकिन प्राकृतिक कम, आर्थिक और संरचनात्मक अधिक। ढेरों नौकरियां जाएंगी, विशेषकर आईटी और उससे जुड़े क्षेत्रों में। जहां मशीनें मनुष्य की जगह लेने को तैयार हैं। यातायात को लेकर कोहराम मचेगा। हवाई , रेल और सड़क यात्रा पर नकारात्मक असर होगा। पशुओं को किसी बीमारी या महामारी से कष्ट होने की आशंका है। 
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra Jyotish Sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान 
E - Mail - panditanjanikumardadhich@gmail.com
सम्पर्क सूत्र - 6377054504

Sunday, 21 September 2025

नवरात्रि पर्व

शारदीय नवरात्र 
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार भारतीय हिन्दू पंचांग के मुताबिक हर वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्र महोत्सव 22 सितंबर 2025 सोमवार के दिन है इस दिन नवरात्रि का पहला दिन है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शारदीय नवरात्र आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तिथि में संपन्न हो जाता है। किन्तु इस साल शारदीय नवरात्र पूरे दस दिनों का होगा।
नवरात्रि के दिन शुभ/अशुभ योग 
नवरात्रि पर इस बार बुधादित्य राजयोग, भद्र राजयोग, धन योग (चंद्र मंगल युति तुला राशि में), त्रिग्रह योग (चंद्रमा बुध और सूर्य की युति कन्या राशि में), और गजेसरी राजयोग का शुभ संयोग रहने वाला है। नवरात्रि का आरंभ गजकेसरी राजयोग से हो रहा है क्योंकि, गुरु और चंद्रमा एक दूसरे से केंद्र भाव में होंगे। गुरु मिथुन राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेंगे जिससे गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा।
मां का आगमन और उसका प्रभाव -
हर साल मां दुर्गा का आगमन अलग-अलग सवारी पर होता है और उसका विशेष महत्व माना जाता है। इस साल मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। हाथी को बहुत शुभ माना जाता है, जो समृद्धि, प्रगति और खुशहाली का प्रतीक है। भक्तों का विश्वास है कि इस वर्ष मां की कृपा से घर-परिवार और समाज में शांति और बरकत बढ़ेगी।
कलश स्थापना का महत्व -
वैदिक ग्रंथों एवं पुराणों में बताया गया है कि किसी भी पुजा में कलश स्थापना का अपना विशेष महत्व होता है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, नवग्रह समेत चौसठ योगिनियों सहित सभी देवी-देवताओं का वास होता है और धर्मशास्त्रों के अनुसार नवरात्र में कलश की पूजा करने से सुख- समृद्धि, धन, वैभव, ऐश्वर्य, शांति, पारिवारिक उन्नति तथा रोग-शोक का नाश होता है।
शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं -
1) सुबह 6:09 मिनट से आरंभ हो रहा है जो 8:06 मिनट तक।
2) सुबह 09:11 मिनट से सुबह 10:43 मिनट तक।
3) दोपहर 11:49 मिनट से 12:38 मिनट तक (अभिजीत मुहूर्त)।
दिनांक  तिथि  व माँ का स्वरूप
22 सितंबर 2025 प्रथमा माँ शैलपुत्री की पूजा
23 सितंबर 2025 द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा
24 सितंबर 2025 तृतीया माँ चंद्रघंटा की पूजा
25 सितंबर 2025 तृतीया माँ चंद्रघंटा की पूजा
26 सितंबर 2025 चतुर्थी माँ कूष्मांडा की पूजा
27 सितंबर 2025 पंचमी माँ स्कंदमाता की पूजा
28 सितंबर 2025 षष्ठी मां कात्यायनी की पूजा
29 सितंबर 2025 सप्तमी माँ कालरात्रि की पूजा
30 सितंबर 2025 अष्टमी माँ सिद्धिदात्री की पूजा
01 अक्टूबर 2025 नवमी माँ महागौरी की पूजा
02 अक्टूबर 2025 विजयादशमी (दशहरा)
नवरात्रि में मां की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु दुर्गा सप्तशती,सिद्ध कुंजिका स्तोत्र दुर्गा चालीसा, देवी कवच, अर्गलास्तोत्र, दुर्गा चालीसा आदि का पाठ करें या 
"ओम् ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्यै" माला का जाप करें।

लेखक परिचय - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
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Saturday, 6 September 2025

चन्द्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारतीय पंचांग की काल गणना के आधार पर कल 7 सितंबर 2025 रविवार के दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लग रहा है। चंद्रमा के ग्रहण का समय रात्रि 9:58 मिनट से शुरू होगा और ग्रहण का समापन रात्रि 1:26 मिनट पर होगा। खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। ग्रहण काल से 9 घंटे पहले ही ग्रहण का सूतक काल शुरु हो जाता है। दोपहर 12: 59 मिनट से सूतक काल शुरू होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, पश्चिमी और उत्तरी अमेरिका तथा दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी नजर आएगा। 
यह चंद्र ग्रहण न्याय के कारक शनि की राशि कुंभ और गुरु के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में लगने वाला है। ऐसे में जिन भी जातकों का जन्म इस नक्षत्र में हुआ है उनपर विशेष कृपा बनी रहेगी। करियर-कारोबार में मनचाहा लाभ मिलने की संभावना है। नई नौकरी की प्राप्ति होगी, जिससे भौतिक सुख में वृद्धि होना संभव है। स्वास्थ्य समस्याएं दूर होंगी और रिश्तों में प्रेम-विश्वास का संचार होने के योग है।
यह चंद्र ग्रहण मेष, वृषभ, कन्या और धनु राशि वालों के लिए शुभ रहने वाला है। इन राशियों वालों को धन लाभ, करियर-कारोबार में सफलता, वैवाहिक सुख और निवेश में मनचाहा लाभ संभव है। इसके अलावा अटके काम पूरे और भाग्योदय के भी योग बन रहे हैं। 
यह चंद्र ग्रहण मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए कष्टकारी या पीड़ादायक हो सकता है। सभी क्षेत्रों में कार्य बाधा, यात्राओं में दुर्घटना कारक या कष्टकारी होगा। किसी नए कार्य को शुरू करने का अगर विचार बना रहे हैं तो अभी ठहराव बेहतर रहेगा। व्यापार में चुनौतियां आ सकती हैं। काम को पूरा करने में दिक्कतें आएंगी। किसी से भी कोई जानकारी साझा न करें। 
⁠ ग्रहण में क्या नहीं करना चाहिए - 
✷ग्रहण की अवधि में सोना नहीं चाहिए।
✷बाल या नाखून भी नहीं काटना चाहिए।
✷ग्रहण में रसोई का कोई काम नहीं करना चाहिए।
✷भोजन ग्रहण भी नहीं करना चाहिए।
✷पूजा-पाठ और भगवान की मूर्तियों को नहीं छूना चाहिए।
✷कोई भी खरीदारी ग्रहण में न करें।
✷शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए।
✷गर्भवती महिलाएं बाहर जाने की भूल न करें।
✷आसमान को नहीं देखना चाहिए।
✷ सुई से जुड़ा कोई भी काम न करें।
✿ ग्रहण में क्या करना चाहिए -
✷ ग्रहण काल में नाम जप, मंत्र जप, और भगवान भजन कीर्तन करना चाहिए।
✷ कपड़े, अनाज, अन्न - धन आदि का दान करना चाहिए।
लेखक परिचय - Pandit Anjani Kumar Dadhich 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakastra Jyotish Sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान 
E-mail anjanikumardadhich@gmail.com 
📱9829836368

Wednesday, 6 August 2025

बुध प्रदोष व्रत

बुध प्रदोष व्रत के बारे में

प्रिय पाठकों, 
6 अगस्त 2025, बुधवार 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज बुध प्रदोष व्रत के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए किया जाने वाला व्रत है। भगवान शिव को समर्पित प्रदोष का यह व्रत हर माह के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख, शांति और खुशहाली हमेशा बनी रहती हैं।  इस बार प्रदोष के व्रत तारीख 6 अगस्त बुधवार को रखा जाएगा। माना जाता है कि बुधवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत व्यक्ति को बुध ग्रह की शुभता प्रदान करता है।
किसी भी बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को बुध प्रदोष कहते हैं। वैसे प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा का विधान है। पर यह दोष व्रत बुधवार के दिन आए तो बुध-प्रदोष का शुभ संयोग बन जाता है।
बुध प्रदोष व्रत विशेषकर अपनी संतानों की खुशहाली, सर्वत्र रक्षा और उनकी बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है।  बुधवार भगवान श्रीगणेशजी का भी दिन है। इसलिए इस दिन जो व्यक्ति व्रत रखकर शिव-गणेश की पूजा करता है। उसकी संतानें हमेशा खुशहाल रहती हैं। भगवान शिव उनकी रक्षा करते हैं और श्रीगणेश उन्हें अच्छी बुद्धि प्रदान करते हैं। जिन लोगों की संतानें गलत रास्ते पर चल पड़ी हैं या जिनकी संतानों को कोई गंभीर रोग है तो उन्हें बुध प्रदोष व्रत करके शिव-गणेश की पूजा अवश्य करना चाहिए।बुध प्रदोष का व्रत करके जीवन में धन की वृद्धि की जा सकती है और सभी रोग, शोक, कलह, क्लेश हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। बुध प्रदोष व्रत करके भगवान गणेश की विशेष कृपा से हर कार्य का विघ्न भी दूर होता है। 
किसी भी प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व शुरू होकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बुध प्रदोष व्रत के लाभ निम्नलिखित हैं-
❁बुध प्रदोष व्रत खासतौर पर संतान की कुशाग्र बुद्धि और उनकी रक्षा के लिए किया जाता है।
❁जो बच्चे मंदबुद्धि हैं या जिनका मन पढ़ाई में नहीं लगताहै या जो बच्चे अच्छे अंक नहीं ला पाते है तो उनके माता-पिता दोनों को यह व्रत करना चाहिए।
❁जिन दंपती के बच्चे गलत संगत में पड़ गए हैं और उनका कहना नहीं मानते हैं। नशे के आदी हो गए हैं तो उन्हें भी बुध-प्रदोष व्रत करना चाहिए।
❁जिन दंपती के बच्चों को कोई गंभीर रोग है या बार-बार बीमार पड़ते हैं उन्हें बुध प्रदोष जरूर करना चाहिए।
❁बच्चों की जन्मकुंडली के लग्न स्थान में यदि पापी ग्रह बैठे हों तो वे अक्सर बीमार रहते हैं तो ऐसे बच्चों के माता-पिता को यह व्रत करना चाहिए।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बुध प्रदोष के दिन घर के कष्टों को दूर करने का निम्नलिखित उपाय करे-
शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल में कच्चा दूध मिलाकर अभिषेक करें और तिल के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं और ओम् नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके अलावा बुध प्रदोष के दिन ही घर में लाल रंग के भगवान गणेश की पूर्व दिशा में स्थापना कर बुध प्रदोष के दिन से लेकर लगातार 27 दिनों तक उन्हें रोजाना लाल गुड़हल के 11 फूल और हरी दूर्वा की पत्तियां अर्पित कर "ओम् वकतुण्डाय हुम्" मंत्र की एक माला का जाप लाल चंदन की माला से करें और इस दौरान रोज प्रभु से घर के संकट दूर करने के लिए प्रार्थना करें। जाप पूर्ण होने के बाद जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं। 
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
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Tuesday, 29 July 2025

नागपंचमी

नाग पंचमी 
प्रिय पाठकों 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच इस लेख में श्रावण मास में मनाई जाने वाली नाग पंचमी के बारे में जानकारी दें रहा हूं कृपया इस‌ लेख को जरूर पढ़ें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हर वर्ष श्रावण 
मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार भारतीय पंचांग के अनुसार सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 28 जुलाई को रात में 11 बजकर 25 मिनट पर होगा और 29 जुलाई मंगलवार को पंचमी तिथि रात में 12 बजकर 47 मिनट तक  रहेगी। उदया तिथि का अनुसार नाग पंचमी तिथि 29 जुलाई मंगलवार को ही मनाई जाएगी। इस बार नाग पंचमी तिथि पर शिव योग, रवि योग का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। साथ ही इस दिन सावन का मंगलवार होने के कारण इस बार नाग पंचमी पर मंगला गौरी व्रत का संयोग भी है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नाग पंचमी के दिन भगवान शिव शंकर और उनके गले में आभूषण की तरह विराजमान नाग देवता के स्वरूपों की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। इसके अलावा जिन जातकों पर काल सर्प दोष है उनके लिए भी यह दिन बहुत अहम माना गया है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस दिन नागदेव की पूजा करने से कुंडली में राहु और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिन्दू धर्म में मान्यता है कि सर्प ही धन की रक्षा करते हैं। इसलिए धन-संपदा व समृद्धि की प्राप्ति के लिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पुजा करते है। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरुप की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और साधक को धनलक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मान्यता है कि इस दिन सर्पों की पूजा करने से नाग देवता और महादेव प्रसन्न होते हैं और काल सर्प दोष से ग्रसित जातकों को इस दोष से मुक्ति से मिलती है। जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष है तो उन्हें विशेष तौर पर नागपंचमी को विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। कालसर्प दोष कुंडली में तब आता है जब सारे ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं। इसके अतिरिक्त राहु-केतु की दशा,अन्तर्दशा या गोचरीय प्रभाव के कारण यदि जीवन में कोई समस्या या बाधा आ रही है तो नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने पर राहु-केतु के दोष का प्रभाव कम हो जाता है। 
नाग पंचमी मनाने का कारण-
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नागपंचमी मनाने के पीछे मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद जो विष निकला उसे पीने को कोई तैयार नहीं था। अंतत: भगवान शिव ने उसे पी लिया। भगवान शिव जब विष पी रहे थे, तभी उनके मुख से विष की कुछ बूंदें नीचे गिरीं और सर्प के मुख में समा गई। इसके बाद ही सर्प जाति विषैली हो गई। सर्पदंश से बचाने के लिए ही इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग पर विजय के उपलक्ष में भी नाग पंचमी पर्व मनाया जाता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नागपंचमी पूजा के दिन अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख आदि अष्टनागों की पूजा की जाती है। नागपंचमी पर वासुकि नाग, तक्षक नाग और शेषनाग की पूजा का विधान है।
भविष्य पुराण में आस्तिक मुनि द्वारा यज्ञ से नागों को बचाने की कथा है पुराण के अनुसार आस्तिक मुनि ने यज्ञ की आग में जलते हुए नागों पर दूध से अभिषेक किया था। इससे उन्हें शीतलता मिली और नागों ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि जो भी मनुष्य नाग पंचमी के दिन उनकी पूजा करेगा उसे सर्प दंश का भय नहीं रहेगा। इसीलिए नाग पंचमी के दिन कई लोग आस्तिक ऋषि की भी पुजा करते हैं ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नाग पंचमी के दिन सर्वप्रथम भगवान महादेव और पार्वती की विधि-विधान से पूजन कर महादेव का रुद्राभिषेक करें। इसके बाद नाग-नागिन की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर दूध, अक्षत, फूल, चंदन और मीठा अर्पित करें।पूजन साम्रगी अर्पित करने के बाद महादेव और नाग देवता से अपनी बाधाओं को दूर करने की कामना करते हुए निम्नलिखित मंत्र का जाप करे।
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।
इसके बाद सर्प देव की आरती करें। कालसर्प शांति की प्रार्थना करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नागपंचमी पर कालसर्प दोष की शांति के अन्य उपाय जो कालसर्प दोष से मुक्ति दिलाते है वो निम्नलिखित हैं-
∆ सर्पों(नागो) का पूजन कर राहु केतु का जप स्वयं करें या किसी ब्राह्मण से करवाए।
∆ किसी सपेरे से सर्पों का जोड़ा ले पूजा कर जंगल में छोड़ें। परन्तु यह उपाय जोखिम भरा है।अतः मैं इसका पक्षधर कदापि नहीं हुं
∆ भगवान शिव को तांबे या चांदी की धातु से बना सर्प अर्पित करें और कालसर्प शांति की प्रार्थना करें।
∆  नागपंचमी को दूध, जल, शहीद, फलों का रस, चंदन, इत्र से रुद्राभिषेक करें।
∆  कालसर्प दोष शान्ति की पुजा करवाना चाहिए। 
ध्यान देने योग्य - नाग पंचमी के शुभ अवसर घर में या फिर मंदिर में रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है।
नाग पंचमी के दिन भगवान शिव को नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं।
लेखक परिचय - Pandit Anjani kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच 
Nakastra jyotish sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान नागौर 
सम्पर्क मेल - panditanjanikumardadhich@gmail.com 
सम्पर्क सूत्र - 6377054504

Wednesday, 23 July 2025

ज्योतिष और इसके भेद

ज्योतिष और ज्योतिष के भेद 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार "ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम् " अर्थात सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से ग्रह, नक्षत्र आदि के स्वरूप, संचार, परिभ्रमण काल, ग्रहण और स्थिति संबधित घटनाओं का निरूपण एवं शुभाशुभ फलों का कथन किया जाता है। नभमंडल में स्थित ग्रह नक्षत्रों की गणना एवं निरूपण मनुष्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और यह व्यक्तित्व की परीक्षा की भी एक कारगर तकनीक है और इसके द्वारा किसी व्यक्ति के भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पता किया जा सकता है साथ ही यह भी मालूम हो जाता है कि व्यक्ति के जीवन में कौन-कौन से घातक अवरोध उसकी राह रोकने वाले हैं अथवा प्रारब्ध के किस दुर्योग को उसे किस समय सहने के लिए विवश होना पड़ेगा और ऐसे समय में ज्योतिष शास्त्र ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा जातक को सही दिशा प्राप्त होती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष एक प्राचीन विज्ञान है जो समय, ग्रहों, और नक्षत्रों के संबंधों को अध्ययन करता है और माना जाता है कि इनके बीच के संबंधों का मानव जीवन पर प्रभाव होता है। यह एक पूर्वाग्रही विज्ञान है जिसमें विभिन्न ग्रहों, राशियों, और नक्षत्रों के स्थिति और गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है ताकि भविष्य में किसी व्यक्ति के जीवन में घटित होने वाली घटनाओं की पूर्वानुमान किया जा सके।
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारतीय ज्योतिष शास्त्र में अलग-अलग तरीके से भाग्य या भविष्य बताया जाता है। माना जाता है कि भारत में लगभग 150 से ज्यादा ज्योतिष विद्या प्रचलित हैं। प्रत्येक विद्या आपके भविष्य को बताने का दावा करती है। माना यह ‍भी जाता है कि प्रत्येक विद्या भविष्य बताने में सक्षम है, लेकिन उक्त विद्या के जानकार कम ही मिलते हैं, जबकि भटकाने वाले ज्यादा। मन में सवाल यह उठता है कि आखिर किस विद्या से जानें हम अपना भविष्य।  पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें समान्तर ज्योतिष, नाड़ी ज्योतिष, पाराशरी ज्योतिष, होरा ज्योतिष, वस्तु ज्योतिष, नक्षत्र ज्योतिष, और विवाह ज्योतिष शामिल हैं। इन प्रकारों के अनुसार, ज्योतिष का अध्ययन और प्रयोग भिन्न-भिन्न तरीकों में किया जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार समान्तर ज्योतिष में ग्रहों के अध्ययन पर जोर दिया जाता है, जबकि होरा ज्योतिष में कुंडली का अध्ययन किया जाता है। वस्तु ज्योतिष में भविष्य की पूर्वानुमान के लिए वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है। नाड़ी ज्योतिष में व्यक्ति की कुंडली के माध्यम से भविष्य की पूर्वानुमान किया जाता है। मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज कुछ प्रचलित ज्योतिष विद्याओं की जानकारी दे रहा हूँ जो निम्नलिखित है-
1. कुंडली ज्योतिष :- यह कुंडली पर आधारित विद्या है। इसके तीन भाग है- सिद्धांत ज्योतिष, संहिता ज्योतिष और होरा शास्त्र। इस विद्या के अनुसार व्यक्ति के जन्म के समय में आकाश में जो ग्रह, तारा या नक्षत्र जहाँ था उस पर आधारित कुंडली बनाई जाती है। बारह राशियों पर आधारित नौ ग्रह और 27 नक्षत्रों का अध्ययन कर जातक का भविष्य बताया जाता है। उक्त विद्या को बहुत से भागों में विभक्त किया गया है, लेकिन आधुनिक दौर में मुख्यत: चार माने जाते हैं। ये चार निम्न हैं- नवजात ज्योतिष, कतार्चिक ज्योतिष, प्रतिघंटा या प्रश्न कुंडली और विश्व ज्योतिष विद्या।
2. लाल किताब की विद्या :- यह मूलत: उत्तरांचल, हिमाचल और कश्मीर क्षेत्र की विद्या है। इसे ज्योतिष के परंपरागत सिद्धांत से हटकर 'व्यावहारिक ज्ञान' माना जाता है। इसे बहुत ही कठिन विद्या माना जाता है। इसके अच्‍छे जानकार बगैर कुंडली को देखे उपाय बताकर समस्या का समाधान कर सकते हैं। उक्त विद्या के सिद्धांत को एकत्र कर सर्वप्रथम इस पर एक ‍पुस्तक प्रकाशित की थी जिसका नाम था 'लाल किताब के फरमान'। मान्यता अनुसार उक्त किताब को उर्दू में लिखा गया था इसलिए इसके बारे में भ्रम उत्पन्न हो गया।
3 अंक ज्योतिष :- इस भारतीय विद्या को अंक विद्या भी कहते हैं। इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रह, नक्षत्र, राशि आदि के अंक निर्धारित हैं। फिर जन्म तारीख, वर्ष आदि के जोड़ अनुसार भाग्यशाली अंक और भाग्य निकाला जाता है।
4 नंदी नाड़ी ज्योतिष :- यह मूल रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित विद्या है जिसमें ताड़पत्र के द्वारा भविष्य जाना जाता है। इस विद्या के जन्मदाता भगवान शंकर के गण नंदी हैं इसी कारण इसे नंदी नाड़ी ज्योतिष विद्या कहा जाता है।
5 पंच पक्षी सिद्धान्त :- यह भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इस ज्योतिष सिद्धान्त के अंतर्गत समय को पाँच भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग का नाम एक विशेष पक्षी पर रखा गया है। इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई कार्य किया जाता है उस समय जिस पक्षी की स्थिति होती है उसी के अनुरूप उसका फल मिलता है। पंच पक्षी सिद्धान्त के अंतर्गत आने वाले पाँच पंक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर। आपके लग्न, नक्षत्र, जन्म स्थान के आधार पर आपका पक्षी ज्ञात कर आपका भविष्य बताया जाता है।
ज्योतिष और इसके भेद
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार “ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम् ” अर्थात सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से ग्रह, नक्षत्र आदि के स्वरूप, संचार, परिभ्रमण काल, ग्रहण और स्थिति संबधित घटनाओं का निरूपण एवं शुभाशुभ फलों का कथन किया जाता है। नभमंडल में स्थित ग्रह नक्षत्रों की गणना एवं निरूपण मनुष्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और यह व्यक्तित्व की परीक्षा की भी एक कारगर तकनीक है और इसके द्वारा किसी व्यक्ति के भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पता किया जा सकता है साथ ही यह भी मालूम हो जाता है कि व्यक्ति के जीवन में कौन-कौन से घातक अवरोध उसकी राह रोकने वाले हैं अथवा प्रारब्ध के किस दुर्योग को उसे किस समय सहने के लिए विवश होना पड़ेगा और ऐसे समय में ज्योतिष शास्त्र ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा जातक को सही दिशा प्राप्त होती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष एक प्राचीन विज्ञान है जो समय, ग्रहों, और नक्षत्रों के संबंधों को अध्ययन करता है और माना जाता है कि इनके बीच के संबंधों का मानव जीवन पर प्रभाव होता है। यह एक पूर्वाग्रही विज्ञान है जिसमें विभिन्न ग्रहों, राशियों, और नक्षत्रों के स्थिति और गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है ताकि भविष्य में किसी व्यक्ति के जीवन में घटित होने वाली घटनाओं की पूर्वानुमान किया जा सके।
ज्योतिष के विभिन्न प्रकार
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारतीय ज्योतिष शास्त्र में अलग-अलग तरीके से भाग्य या भविष्य बताया जाता है। माना जाता है कि भारत में लगभग 150 से ज्यादा ज्योतिष विद्या प्रचलित हैं। प्रत्येक विद्या आपके भविष्य को बताने का दावा करती है। माना यह ‍भी जाता है कि प्रत्येक विद्या भविष्य बताने में सक्षम है, लेकिन उक्त विद्या के जानकार कम ही मिलते हैं, जबकि भटकाने वाले ज्यादा। मन में सवाल यह उठता है कि आखिर किस विद्या से जानें हम अपना भविष्य।  पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें समान्तर ज्योतिष, नाड़ी ज्योतिष, पाराशरी ज्योतिष, होरा ज्योतिष, वस्तु ज्योतिष, नक्षत्र ज्योतिष, और विवाह ज्योतिष शामिल हैं। इन प्रकारों के अनुसार, ज्योतिष का अध्ययन और प्रयोग भिन्न-भिन्न तरीकों में किया जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार समान्तर ज्योतिष में ग्रहों के अध्ययन पर जोर दिया जाता है, जबकि होरा ज्योतिष में कुंडली का अध्ययन किया जाता है। वस्तु ज्योतिष में भविष्य की पूर्वानुमान के लिए वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है। नाड़ी ज्योतिष में व्यक्ति की कुंडली के माध्यम से भविष्य की पूर्वानुमान किया जाता है। मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज कुछ प्रचलित ज्योतिष विद्याओं की जानकारी दे रहा हूँ जो निम्नलिखित है- 1. कुंडली ज्योतिष :- यह कुंडली पर आधारित विद्या है। इसके तीन भाग है- सिद्धांत ज्योतिष, संहिता ज्योतिष और होरा शास्त्र। इस विद्या के अनुसार व्यक्ति के जन्म के समय में आकाश में जो ग्रह, तारा या नक्षत्र जहाँ था उस पर आधारित कुंडली बनाई जाती है। बारह राशियों पर आधारित नौ ग्रह और 27 नक्षत्रों का अध्ययन कर जातक का भविष्य बताया जाता है। उक्त विद्या को बहुत से भागों में विभक्त किया गया है, लेकिन आधुनिक दौर में मुख्यत: चार माने जाते हैं। ये चार निम्न हैं- नवजात ज्योतिष, कतार्चिक ज्योतिष, प्रतिघंटा या प्रश्न कुंडली और विश्व ज्योतिष विद्या।
2. लाल किताब की विद्या :- यह मूलत: उत्तरांचल, हिमाचल और कश्मीर क्षेत्र की विद्या है। इसे ज्योतिष के परंपरागत सिद्धांत से हटकर ‘व्यावहारिक ज्ञान’ माना जाता है। इसे बहुत ही कठिन विद्या माना जाता है। इसके अच्‍छे जानकार बगैर कुंडली को देखे उपाय बताकर समस्या का समाधान कर सकते हैं। उक्त विद्या के सिद्धांत को एकत्र कर सर्वप्रथम इस पर एक ‍पुस्तक प्रकाशित की थी जिसका नाम था ‘लाल किताब के फरमान’। मान्यता अनुसार उक्त किताब को उर्दू में लिखा गया था इसलिए इसके बारे में भ्रम उत्पन्न हो गया।

अंक ज्योतिष :- इस भारतीय विद्या को अंक विद्या भी कहते हैं। इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रह, नक्षत्र, राशि आदि के अंक निर्धारित हैं। फिर जन्म तारीख, वर्ष आदि के जोड़ अनुसार भाग्यशाली अंक और भाग्य निकाला जाता है।
नंदी नाड़ी ज्योतिष :- यह मूल रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित विद्या है जिसमें ताड़पत्र के द्वारा भविष्य जाना जाता है। इस विद्या के जन्मदाता भगवान शंकर के गण नंदी हैं इसी कारण इसे नंदी नाड़ी ज्योतिष विद्या कहा जाता है।
पंच पक्षी सिद्धान्त :- यह भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इस ज्योतिष सिद्धान्त के अंतर्गत समय को पाँच भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग का नाम एक विशेष पक्षी पर रखा गया है। इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई कार्य किया जाता है उस समय जिस पक्षी की स्थिति होती है उसी के अनुरूप उसका फल मिलता है। पंच पक्षी सिद्धान्त के अंतर्गत आने वाले पाँच पंक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर। आपके लग्न, नक्षत्र, जन्म स्थान के आधार पर आपका पक्षी ज्ञात कर आपका भविष्य बताया जाता है।
हस्तरेखा ज्योतिष :- हाथों की आड़ी-तिरछी और सीधी रेखाओं के अलावा, हाथों के चक्र, द्वीप, क्रास आदि का अध्ययन कर व्यक्ति का भूत और भविष्य बताया जाता है। यह बहुत ही प्राचीन विद्या है और भारत के सभी राज्यों में प्रचलित है।
नक्षत्र ज्योतिष :- वैदिक काल में नक्षत्रों पर आधारित ज्योतिष विज्ञान ज्यादा प्रचलित था। जो व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्म लेता था उसके उस नक्षत्र अनुसार उसका भविष्य बताया जाता था। नक्षत्र 27 होते हैं।
अँगूठा शास्त्र :- यह विद्या भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसके अनुसार अँगूठे की छाप लेकर उस पर उभरी रेखाओं का अध्ययन कर बताया जाता है कि जातक का भविष्य कैसा होगा।
सामुद्रिक विद्या:- यह विद्या भी भारत की सबसे प्राचीन विद्या है। इसके अंतर्गत व्यक्ति के चेहरे, नाक-नक्श और माथे की रेखा सहित संपूर्ण शरीर की बनावट का अध्ययन कर व्यक्ति के चरित्र और भविष्य को बताया जाता है।
चीनी ज्योतिष :- चीनी ज्योतिष में बारह वर्ष को पशुओं के नाम पर नामांकित किया गया है। इसे ‘पशु-नामांकित राशि-चक्र’ कहते हैं। यही उनकी बारह राशियाँ हैं, जिन्हें ‘वर्ष’ या ‘सम्बन्धित पशु-वर्ष’ के नाम से जानते हैं। यह वर्ष निम्न हैं- चूहा, बैल, चीता, बिल्ली, ड्रैगन, सर्प, अश्व, बकरी, वानर, मुर्ग, कुत्ता और सुअर। जो व्यक्ति जिस वर्ष में जन्मा उसकी राशि उसी वर्ष अनुसार होती है और उसके चरित्र, गुण और भाग्य का निर्णय भी उसी वर्ष की गणना अनुसार माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष :- वैदिक ज्योतिष अनुसार राशि चक्र, नवग्रह, जन्म राशि के आधा‍र पर गणना की जाती है। मूलत: नक्षत्रों की गणना और गति को आधार बनाया जाता है। मान्यता अनुसार वेदों का ज्योतिष किसी व्यक्ति के भविष्य कथक के लिए नहीं, खगोलीय गणना तथा काल को विभक्त करने के लिए था।
टैरो कार्ड :- टैरो कार्ड में ताश की तरह पत्ते होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति अपना भविष्य या भाग्य जानने के लिए टैरो कार्ड के जानकार के पास जाता है तो वह जानकार एक कार्ड निकालकर उसमें लिखा उसका भविष्य बताता है। यह उसी तरह हो सकता है जैसा की पिंजरे के तोते से कार्ड निकलवाकर भविष्य जाना जाता है। यह उस तरह भी है जैसे कि बस स्टॉप या रेलवे स्टेशन पर एक मशीन लगी होती है जिसमें एक रुपए का सिक्का डालो और जान लो भविष्य। किसी मेले या जत्रा में एक कम्प्यूटर होता है जो आपका भविष्य बताता है। उपरोक्त विद्या जुए-सट्टे जैसी है यदि अच्छा कार्ड लग गया तो अच्छी भविष्यवाणी, बुरा लगा तो बुरी और सामान्य लगा तो सामान्य। हालाँकि टैरो एक्सपर्ट मनोविज्ञान को आधार बनाकर व्यक्ति का चरित्र और भविष्य बताते हैं। अब इसमें कितनी सच्चाई होती है यह कहना मुश्किल है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इसके अलावा माया, हेलेनिस्टिक, सेल्टिक, पर्शियन या इस्लामिक, बेबिलोनी आदि अनेक ज्योतिष धारणाएँ हैं। हर देश की अपनी अलग ज्योतिष धारणाएँ हैं और अलग-अलग भविष्यवाणियाँ। ज्योतिष विविधता का प्रदर्शन करता है और विश्वव्यापी है, हालांकि यह एक वैज्ञानिक विधि के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। इसे आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विवादास्पद माना जाता है, लेकिन यह अनेक लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लेखक परिचय - Pandit Anjani Kumar Dadhich 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच 
Nakastra Jyotish Sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान नागौर 
panditanjanikumardadhich@gmail.com 
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