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Friday, 31 July 2020

मिथुन राशि

🌻मिथुन राशि के बारे में 🌻 
मिथुन- (अक्षर तालिका- का, की, कू, घ, ड़, छ, के, को, ह) पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बारह राशियों में मिथुन को तृतीय(तीसरा)स्थान प्राप्त है।मिथुन राशि का प्रतीक चिन्ह स्त्री-पुरुष का एक जोड़ा है।ज्योतिष की यह पहली राशि है जिसमें मानवाकृति बनी हुई है। यह जोड़ा स्त्री-पुरुष का साथ बताता है।यह राशि स्वभाव से द्वि-स्वभाव मानी जाती है अत: इसके प्रभाव से आप द्वि-स्वभाव व्यक्तित्व के हो सकते हैं। बुध के प्रभाव स्वरुप इस राशि के लोगों को बुद्धिमान व हाजिर-जवाब माना गया है।  
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यह सम संज्ञक, पुरुष प्रधान, पश्चिम दिशा की स्वामिनी, शीर्षोदय,रात्रीबली, जलाश्रयी, वैश्य वर्ण हरे रंग की अधिपति तथा लग्न में बली मानी जाती है। 
🌹भौतिक लक्षण🌹
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसारमिथुन राशि का जातक का शरीर लंबा, सुडौल शरीर, पतले और लंबे हाथ मध्यम रंग, ठोढ़ी के पास गढ्ढ़ा, सक्रिय स्पष्ट वचन तीखी-सक्रिय काली आंखें, लंबी नाक चेहरे पर मस्सा आदि होते हैं। 
🏵स्वभाव🏵 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप बहुत ही चुलबुले,कुशल-वक्ता, सोन्दर्य प्रेमी कल्पनाशील, विचारशील,चतुर,परिश्रमी,मस्तमौला,रोमांटिक, जिन्दादिल,बहुत बोलने वाले और हर बात में तर्क वितर्क करने वाले हैं तो अपने दूसरे रुप में बहुत ही धीर गंभीर रहने वाले, व्याकुल,अशांत कुशल कूटनीतिज्ञ राजनीतिज्ञ और चिन्तन मनन करने वाले होते हैं। 
✍गुण एवं चारित्रिक विशेषताएं✍
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वायु तत्त्व होने के कारण आपके मन के घोड़े सदा दौड़ते ही रहेंगे और आप सदा कोई ना कोई योजना बनाने में मशगूल रहेंगे। चिन्तन मनन बहुत करेंगे,विचारशील व्यक्ति होगें।आप परिश्रमी तथा बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति होगें।आप हर परिस्थिति में स्वयं को ढ़ालने में अनुकूल होगें, आप बहुत ही तर्कपूर्ण तरीके से अपने शब्दों की अभिव्यक्ति करते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपकी सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि आप एक समय में दोहरा व्यक्तित्व अपनाते हैं लेकिन दोनो व्यक्तित्व में संतुलन बनाकर रखते हैं।आपके एक रुप में क्रोधी तो दूसरे रुप में शांत चित कोई भी रुप सामने आए, आप दोनो में ही परिस्थिति अनुकूल स्वयं को ढ़ालने में सक्षम होते हैं।इसीलिए आप कहीं भी क्यूँ ना चले जाएँ, आपके आसपास के लोग कभी बोरियत महसूस नहीं करते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप एक जिन्दादिल व्यक्ति हैं और सदा मौज मस्ती के मूड में रहते हैं। प्रेम संबंधों को लेकर आप सदा ही जोश में रहते हैं लेकिन अपने प्रेम संबंधों का इजहार करने में आप झिझकते बहुत हैं।प्रेम संबंधों को पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करते हैं, आपको मित्रों के साथ घूमना-फिरना भी बहुत अच्छा लगता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप समाज के नियमो का पालन भी बखूबी करते हैं और आप कभी अधिक समय तक अकेले नहीं रह सकते हैं।आपको अच्छी बाते करना, गपशप और तर्कपूर्ण बाते करना अच्छा लगता है। यही सभी खूबी आप सामने वाले व्यक्ति में भी तलाशते हैं और सामने वाला व्यक्ति आपके समान नही है तब आप एक कदम पीछे हटा लेते हैं क्योकि आपको साफ व स्पष्ट बात करना अच्छा लगता है। इन्ही सभी खूबियों के कारण आप महिलाओं को अत्यंत प्रिय होते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसारय ह मृगशिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र हैं। मंगल शक्ति और शुक्र माया है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जातक के अन्दर माया के प्रति भावना पाई जाती है और जातक जीवनसाथी के लिए हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही, घरेलू कारणों के चलते कई बार आपस में तनाव रहते है मंगल और शुक्र की युति के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है।जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नए-नए वाहनों और सुख के साधनों के प्रति अत्यधिक आकर्षण होता है। इनका घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।मंगल के कारण जातक वचनों का पक्का बन जाता है।
गुरु आसमान का राजा है तो राहु गुरु का शिष्य, दोनों मिलकर जातक में ईश्वरीय ताकतों को बढ़ाते हैं।इस राशि के लोगों में ब्रह्माण्ड के बारे में पता करने की योग्यता जन्मजात होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है।राहु-शनि के साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जातक एक दायरे में रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरान्त फलदायक रहता है। जातक के अंदर एक मर्यादा होती है जो उसे धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है।गुरु जो ज्ञान का मालिक है, उसे मंगल का साथ मिलने पर उच्च पदासीन करने के लिए और रक्षा आदि विभागों की ओर ले जाता है।जातक अपने ही विचारों, अपने ही कारणों से उलझता है।
👩‍🎓कैरियर👨‍🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जातक हर कार्य में जिज्ञासा और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफलता लेते रहते हैं और पत्रकार, लेखक,मीडियाकर्मी, विभिन्न भाषाओं की जानकारी, योजनाकार भी बन सकते हैं।मिथुन राशि का होने से जातक के लिए मीडिया में जाना उचित हो सकता है क्योकि वहाँ वाकपटु होना जरुरी है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इसके अतिरिक्त आप ज्योतिष, अकाउंट्स, आंकड़ो से जुड़े काम भी कर सकते हैं।आप लेखन अथवा संपादन में भी अपना कैरियर बना सकते हैं। इंजीनियरिंग, शिक्षण तथा सलाहकारिता के काम भी आप कर सकते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसारआप अनुवादक,अच्छे आलोचक, साहित्यकार, प्रशासनिक अधिकारी, प्रकाशक, विश्लेषक तथा डाक-तार विभाग में
 भी आप भाग्य आजमा सकते हैं। मार्केटिंग फील्ड या वाणी के प्रभाव से होने वाला हर कार्य आपके लिए उपयुक्त होगा।
 🚫कमियाँ🚫
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इनमें असंगतता, सनकीपन भी झलकने लगता है। दरअसल इनका दोहरा व्यवहार इनके लिये कई बार सकारात्मक तो कई बार नकारात्मक साबित होता है। एक और ये शांत व गंभीर होते हैं तो दूसरी और मजाक उड़ाने में भी देर नहीं लगाते। संगत का रंग इन पर बहुत जल्दी चढ़ता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बुरी संगत में ये बहुत बूरे हो जाते हैं तो अच्छी संगत इन्हें बहुत अच्छा बनाती है। इनके व्यक्तित्व का एक गुण मूडी होना भी है।
📖विवेचना📖
मिथुन - तीसरी राशि
राशि स्वरूप - स्त्री-पुरुष आलिंगनबद्ध 
राशि स्वामी - बुध। स्वभाव- उग्र
दिशा - पश्चिम। वर्ण - शुद्र
लिंग - पुरुष। गुण - तम
तत्त्व - वायु। योनि - मनुष्य
प्रभुत्व - कंठ व भुजा
रंग - हरा। रत्न - पन्ना। 
Pandit Anjani kumar Dadhich
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Wednesday, 29 July 2020

स्त्री व्यवहार और ज्योतिष

स्त्रीयों का व्यवहार एवं ज्योतिष -

☀सूर्य☀ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी महिला की कुंडली में यह उसके पति के जीवन के बारे में बताता है। सेवा क्षेत्र में सूर्य उच्च व प्रशासनिक पद तथा समाज में मान-सम्मान को दर्शाता है।यह लीडर (नेतृत्व करने वाला) का भी प्रतिनिधित्व करता है। यदि सूर्य की महादशा चल रही हो तो रविवार के दिन जातकों को अच्छे फल मिलते हैं।अगर किसी महिला कि कुंडली में सूर्य अच्छा हो तो वह हमेशा अग्रणी ही रहती है और निष्पक्ष न्याय में विश्वास करती है और संकट की घड़ी में अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मगर सूर्य का आत्मा से सीधा सम्बन्ध होने के कारण यह अगर दूषित या नीच का हो तो दिल डूबा-डूबा सा रहता है जिस कारण चेहरा निस्तेज सा होने लगता है। पति से लगातार शिकायतें बनी रहती है। मन दुखों के बोझ से भरा हुआ रहता है। ऐसे में सूर्य का अर्घ्य देने की सलाह दी जाती है।          ❃चंद्रमा❃ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार चन्द्रमा स्त्री की कुंडली में इसका महत्व और भी अधिक है।चन्द्रमा स्त्री की कुंडली में स्त्री का स्वभाव, प्रकृति, गुण -अवगुण आदि निर्धारित होते है। मन, मस्तिष्क, बुद्धिमत्ता, स्वभाव, जननेन्द्रियाँ, प्रजनन सम्बंधी रोगों, गर्भाशय अंडाशय, मूत्र -संस्थान, छाती और स्तन का कारक है। इसके साथ ही स्त्री के मासिक -धर्म ,गर्भाधान एवं प्रजनन आदि महत्वपूर्ण क्षेत्र भी इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।जिस स्त्री जातक की कुंडली में चंद्रमा अच्छी स्थिति में होता है तो वे महिलाएँ हंसमुख,सुहृदय,कल्पनाशील धार्मिक,जनसेवी एक सटीक विचारधारा युक्त और रचनात्मक होती हैं। हर काम में सक्रिय रहती हैं और उनमें नया काम करने की ललक होती है। राहू, केतू, बुध और शनि के कारण चंद्रमा पीडित हो तो स्त्री कर्कशा, रूदन करने वाली या कलहप्रिय होती है। ऎसी स्त्रियों को रोजाना सुबह खाली पेट मिश्री के साथ मक्खन खाने की सलाह दी जाती है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार चंद्रमा पीडित होने पर शरीर में खनिज तत्वों और कैल्शियम की कमी हो जाती है। मक्खन में उपलब्ध खनिज तत्व एवं कैल्शियम जातक के केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को फिर से दुरूस्त करता है और जातक हंसने खिलखिलाने लगता है। चन्द्रमा नीच का होने पर महिला सदैव भ्रमित ही रहेगी। हर पल उसे एक भय सताता है कि कोई भूत -प्रेत का साया उसको परेशान कर रहा है। कमजोर या नीच का चन्द्र किसी भी महिला को भीड़ भरे स्थानों से दूर रहने को उकसाएगा और एकांतवासी कर देता है। हिस्टीरिया जैसी बिमारी का शिकार हो जाती है। पांच रति का मोती अंगुली में पहनना तथा चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। 
 ❁बृहस्पति❁ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पुरूष कुंडली में जहां शुक्र सांसारिकता और दैहिक सुख के लिए देखा जाता है वहीं स्त्री जातक के लिए गुरू महत्वपूर्ण है। स्त्री जातक के लिए उसके पति का प्रगति करना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। जिस स्त्री जातक की कुंडली में वृहस्पति शुभ स्थान और शुभ प्रभाव में होता है, उसे सामाजिक मान प्रतिष्ठा और सांसारिक सुख सहजता से मिलते हैं। वृहस्पति खराब होने पर स्त्री जातक को अपमान और उपेक्षा झेलनी पड़ सकती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ऐसे में अधिकांश स्त्री जातकों को गुरू का रत्न पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है। पुखराज रत्न सोने की अंगूठी में पहनने से गुरू का प्रभाव बढ़ जाता है। जिन जातकों के गुरू मारक या बाधक स्थान का अधिपति होता है उनके अलावा सभी स्त्री जातकों को बेधड़क पुखराज पहनाया जा सकता है। 
 ✿मंगल✿ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शुभ मंगल से स्त्री अनुशासित,न्यायप्रिय,समाज में प्रिय और सम्मानित होती है।जिन स्त्रियों की जन्म कुंडली में मंगल कमजोर स्थिति में हो तो वह आलसी,बुजदिलऔर थोड़ी सी डरपोक भी होती है।मानसिक अवसाद में घिरती चली जाती है। नीच राशि का मंगल स्त्री को मान -मर्यादा भूलने वाली,क्रूर और हृदय हीन भी बना देता है। मंगल रक्त और स्वभाव में उत्तेजना, उग्रता और आक्रामकता लाता है इसीलिए जन्म-कुंडली में विवाह से संबंधित भावों-जैसे द्वादश, लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम व अष्टम भाव में मंगल की स्थिति को विवाह और दांपत्य जीवन के लिए अशुभ माना जाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार समाज में वैधव्य का दंश दोष स्त्रियों को भोगना पडता है अगर स्त्री मांगलिक हो और उसका पति मांगलिक नहीं हो तो स्त्री हावी रहेगी और दांपत्य जीवन में तनाव रहेगा। अगर मंगल और शनि आठवें स्थान पर हो तो उसे चूंदड़ी मंगल कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मंगल वैधव्य के योग बनाता है। विधुर की तुलना में विधवा को पुरूष प्रधान समाज में अधिक समस्याओं को सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए कुंडली मिलान के समय पुरूष की तुलना में स्त्री के मंगल पर अधिक ध्यान दिया जाता है। 
❃बुध❃ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष में बुध और शनि ग्रह को नपुंसक ग्रह माना गया है। पुरूष कुण्डली में जहां शनि पीड़ादायी ग्रह है वहीं स्त्री जातक के लिए बुध पीड़ादायी ग्रह सिद्ध होता है। उच्च बुध के प्रभाव में जिस किसी भी स्त्री का बुध शुभ प्रभाव में होता है वे अपनी वाणी के द्वारा जीवन की सभी ऊँचाइयों को छूती हैं,अत्यंत बुद्धिमान, विद्वान् और चतुर और एक अच्छी सलाहकार साबित होती है। व्यापार में भी अग्रणी तथा कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी समस्याओं का हल निकाल लेती हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नीच का बुध स्त्री को कटु भाषी, अपनी बुद्धि से काम न लेने वाली यानि दूसरों की बातों में आने वाली अर्थात कानो की कच्ची होती है। भविष्य की अघटित घटना की चिंता करने वाली और चर्मरोगों से ग्रसित हो जाती है।बुध बुद्धि का परिचायक भी है अगर यह दूषित चंद्रमा के प्रभाव में आ जाता है तो स्त्री को आत्मघाती कदम की तरफ भी ले जा सकता है।
❁शुक्र❁ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कुंडली का अच्छा शुक्र स्त्री के चेहरे को आकर्षण का केंद्र बनाता है। यह जरुरी नहीं की स्त्री का रंग गोरा है या सांवला। सुन्दर नेत्र और सुंदर केशराशि से पहचाना जा सकता है स्त्री का शुक्र शुभ ग्रहों के सानिध्य में है। वह सोंदर्य-प्रिय भी होती है। अच्छे शुक्र के प्रभाव से स्त्री को हर सुख सुविधा प्राप्त होती है। वाहन, घर, ज्वेलरी, वस्त्र सभी उच्च कोटि के। किसी भी वर्ग की औरत हो, उच्च, मध्यम या निम्न उसे अच्छा शुक्र सभी वैभव प्रदान करता ही है।अगर आय के साधन सीमित भी हो तो भी वह ऐशो आराम से ही रहती है। अच्छा शुक्र किसी भी स्त्री को गायन, अभिनय, काव्य -लेखन की और प्रेरित करता है। चन्द्र के साथ शुक्र हो तो स्त्री भावुक होती है। और अगर साथ में बुध का साथ भी मिल जाये तो स्त्री लेखन के क्षेत्र में पारंगत होती है और साथ ही में वाक्पटु भी, बातों में उससे शायद ही कोई जीत पाता हो। अच्छा शुक्र स्त्री में मोटापा भी देता है और यह मोटापा स्त्री को ज्यादा आकर्षक बनाता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मगर बुरा शुक्र या पापी ग्रहों का सानिध्य या कुंडली के दूषित भावों का साथ स्त्री में चारित्रिक दोष भी उत्पन्न करवा सकता है। यह विलम्ब से विवाह, कष्ट प्रद दाम्पत्य जीवन, बहु विवाह, तलाक की और भी इशारा करता है। अगर ऐसा हो तो स्त्री को हीरा पहनने से परहेज करना चाहिए। कमजोर शुक्र स्त्री में मधुमेह,थाइराईड, यौन रोग, अवसाद और वैभव हीनता लाता है।            
❃शनि❃ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार स्त्री की कुंडली में अच्छा शनि उसे उदार,लोकप्रिय बनाता है और तकनीकी ज्ञान में अग्रणी रखता है। वह हर क्षेत्र में अग्रणी हो कर प्रतिनिधित्व करती है। राजनीति में भी उच्च पद प्राप्त करती है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार दूषित शनि स्त्री को ईर्ष्यालु और हिंसक भी बना देता है। यह स्त्री में निराशा, उदासीनता और नीरसता का समावेश कर उसके दाम्पत्य जीवन को कष्टमय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता और धीरे-धीरे स्त्री अवसाद की तरफ बढ़ने लग जाती है। स्त्रियों में कमर-दर्द, घुटनों का दर्द या किसी भी तरह का मांसपेशियों का दर्द दूषित शनि का ही परिणाम है।चंद्रमा के साथ शनि स्त्री को पागलपन का रोग तक दे सकता है।     
 ✾राहु✾ 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु से प्रभावित स्त्री एक अच्छी जासूस या वकील, अच्छी राजनीतिज्ञ हो सकती है। वह आने वाली बात को पहले ही भांप लेती है। विदेश यात्राएं बहुत करती है। कुंडली में राहु जिस राशि में स्थित होता है वैसे ही परिणाम देने लगता है। अगर बृहस्पति के साथ या उसकी राशि में हो तो स्त्री को ज्योतिष में रूचि होगी। शनि के प्रभाव में हो तो तांत्रिक-विद्या में निपुण होगी। चंद्रमा के साथ हो तो वह कई सारे वहमों में उलझी रहेगी। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार खराब राहु से प्रभावित स्त्री की वाणी में कटुता आ जाती है। वह थोड़ी घमंडी भी हो जाया करती है। भ्रमित रहने के कारण वह कई बार सही गलत की पहचान भी नहीं कर पाती जिसके फलस्वरूप उसका दाम्पत्य जीवन भी नष्ट होते देखा गया है। राहु के दूषित प्रभाव के कारण स्त्री चर्म -रोग, मति-भ्रम,अवसाद रोग से ग्रस्त हो सकती है।                ✾केतु✾ 
 पंंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार केतु से प्रभावित महिला कुछ भ्रमित सी रहती है।अच्छा केतु महिला को उच्च पद, समाज में सम्मानित, तंत्र-मन्त्र और ज्योतिष का ज्ञाता बनाता है।पंंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बुरा केतु महिला की बुद्धि भ्रमित कर उसे सही निर्णय लेने में बाधित करता है। चर्म रोग से ग्रसित कर देता है। काम-वासना की अधिकता भी कर देता है जिसके फलस्वरूप कई बार दाम्पत्य -जीवन कष्टमय हो जाता है। वाणी भी कटु कर देता है। केतु का प्रभाव अलग-अलग ग्रहों के साथ युति और अलग-अलग भावों में स्थिति होने के कारण ज्यादा या कम हो सकता है। 
Pandit Anjani kumar Dadhich
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5 नंबर

🌻मूलांक (5) के बारे में🌻 



पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14, और 23 को हुआ है तो आपका मूलांक 5 होगा। मूलांक पांच के अधिष्ठाता ग्रह बुध हैं इसलिए मूलांक पांच के व्यक्तियों पर बुध ग्रह के विशेषताओं का विशेष प्रभाव होता है। 

👉स्वाभाविक विशेषताएं👈

पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 5 का संरक्षक ग्रह बुध है। ज्योतिष में बुध “बुद्धि” का कारक है। इस मूलांक के व्यक्ति प्रसन्न रहना चाहते है। ऐसा व्यक्ति झगड़ा करना पसंद नहीं करता है। इस मूलांक वाला व्यक्ति विलक्षण प्रतिभा से युक्त होता है। ऐसा व्यक्ति बहुत ही तार्किक होता है।इस मूलांक वाले व्यक्ति निर्णय लेने मे निपुण होते है। ऐसे व्यक्ति परिश्रम करने से करने से बचते है। आप बहुत ही आसानी से धन कमाने की कोशिश करते है। पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आप हमेशा धनोपार्जन के नये रास्ते और तरीके खोजने का की कोशिश करते रहते है। आप दोहरी नीति के धनि व्यक्ति होंगे। कई बार तो आप करे या न करे के भवर जाल में भी झूलते रहते है।
पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आप अपने आपको परिस्थिति के अनुरूप ढाल लेते हैं। मूलांक 5 वाले व्यक्ति किसी विषय को लेकर ज्यादा गम्भीर नहीं होते। आप न तो ज्यादा देर तक खुश रह सकते है और न ही ज्यादा देर तक दुखी रह सकते है।
पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार मूलांक पांच का स्वामी बुध है।ये तार्किक, विचारशील और बौद्दिक क्षमता से परिपूर्ण होते हैं।नित्य नयी सूझ बूझ के साथ स्वयं को प्रदर्शित करने में इनका कोई शानी नहीं है।ये साहसिक,आत्म-विश्वास से भरे अपने मानसिक क्षमता से जाने जाते हैं।आप साहसिक, बेचैन और निरंतर कुछ न कुछ करते रहने वाले हैं।पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार बदलाव और नवीनता आपको सबसे ज़्यादा पसंद है।आप साहसिक कार्यों में सबसे ज़्यादा आनंद लेते हैं और आप की साहस आप को एक नए मुकाम पर ले जाती है।शायद यही स्वभाव आपको अच्छा व्यवसायी बनता है।व्यवसाय में बुद्धिमत्ता, साहस और अनुशासन तीनों की आवश्यकता होती है और यही तो आपका स्वभाव है।पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार नए बदलाव, नयी संभावनाएं आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता।नए विचारों पर प्रयास करना, नए लोगों से मिलना-जुलना, नए दोस्त बनाना आपका स्वाभाव है।आपको पुरातनपंथी कहना पूरी तरह से गलत होगा।आप लोगों को प्रोत्साहित करते हैं और अपनी बात मना पाते हैं और इसलिए आप एक अच्छे दुकानदार या व्यवसाई हो सकते हैं।पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आपका जॉब अगर यात्रा करने से सम्बंधित है तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता क्योंकि, एक जगह ठहर कर रहना आपका स्वभाव नहीं है।

👪पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन👪

पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आपका पारिवारिक जीवन सुखमय व्यतीत होता है। आपको अपने भाइयों, बहनो और परिजनों के साथ रिश्ता सामान्य बना रहेगा। आप के मित्र जल्दी बनते है। और उन्हें भूल में देर नही लगती वैसे आप भूलना नही चाहते है। मित्रों से आपको उतना लाभ नही मिलता जितना अन्य को मिलता है।पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आपका वैवाहिक सम्बन्ध ठीक होगा। अधिक मिलनसार स्वभाव के होने के कारण महिला मित्र भी अधिक होते हैं। परन्तु मूलांक 5 वालों के प्रेम सम्बन्ध स्थायी रहता है दो विवाह की भी संभावनाए बानी रहती हैं। संतान को लेकर कुछ चिंताएं बनी रहेगी। ससुराल पक्ष से आपका रिश्ता सामान्य बना रहेगा।
🌷रोग🌷
पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आपके शरीर में पीड़ा तथा तनाव हो सकता है। आप अनिद्रा के शिकार हो सकते है। शरीर में बदहजमी,नजला, सिर दर्द, नाक व आंखों की तकलीफ़ हो सकती है। 
🎓शिक्षा🎓
पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आप पढाई करेंगे कई बार यह भी देखा गया है कि मूलांक 5 वाले पूरी उम्र कुछ न कुछ पढाई करते ही रहते है।अगर कोई विपरीत परिस्थिति न हो तो आप अपनी पढाई पूरा करेंगे। यदि आप अन्वेषणात्मक पढाई करते है तो आपको लाभ मिलेगा। पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसारआपकी रूचि वाणिज्यिक विषय में होगी। अर्थात आप कामर्स का अध्ययन करे तो अच्छा रहेगा। आप मेनेजमेंट की पढाई कर सकते है।आप कई भाषाओं के जानकार होते हैं। यदि आपकी शिक्षा कम भी रह जाती है तो भी आप समाज तथा परिवार में बुद्धिमान ही कहलाते हैं।धार्मिक ग्रंथों तथा गुप्त विद्याओं का भी अध्ययन करने में रूचि रखते है।
📰कार्यक्षेत्र📰
पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आप शिक्षा व व्यवसाय के क्षेत्र से जुड़कर अच्छा काम कर सकते है और इस क्षेत्र में एक नये मुकाम हासिल कर सकते है। आप अपने लाभ के लिए किसी भी हद तक जा सकते है इसमें कोई संदेह नहीं है। आप निरंतर अपने काम में लगे रहते है और नये-नये परिवर्तन तथा आविष्कारों से अपने नाम को रौशन करने का प्रयास करते हैं।आप हर काम करने से पहले कई बार सोचते है। आप अपने कामों में नीत नवीनता लाने के लिए हमेशा कोशिश करते हैं। आप नौकरी और व्यवसाय दोनों से लाभ प्राप्त कर सकते है। पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार आप ब्रोकर, सेल्समैन, क्लर्क तथा अध्यापक का कार्य कर सकते है। आपके जीवन का मूल रहस्य यह है अपने लक्ष्य को पाना।गुप्त विद्या और धार्मिक ग्रन्थों में रुचि होने के कारण आप ज्योतिषी का भी कार्य कर सकते है।पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 5 वाले व्यापार और उद्योग धंधों में सफलता पाते हैं। आप अच्छे मैनेजर, वकील, जज, लेखाधिकारी, शिक्षाविद, डाक्टर, पत्रकार पब्लिक रिलेशन अधिकारी हो सकते हैं।पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार इन्हें अर्थशास्त्र और संगीत का भी अच्छा ज्ञान होता है। ज्योतिष के क्षेत्र में आप अच्छा नाम कमा सकते है।आप निर्णय तुरंत लेते है तथा कार्य को बड़ी तेजी के साथ पूर्ण करते है। आपको अपना व्यवसाय करना ज्यादा अच्छा लगता है। कई बार तो यह भी देखा गया है कि ऐसा जातक नौकरी के साथ कोई न कोई व्यवसाय भी करता है इसका मुख्य कारण यह होता है कि नौकरी से मिलने वाली निश्चित आय से आत्मसन्तुष्टि नहीं होती। वस्तुतः व्यवसाय इनके स्वभाव में होता है।
❌कमियाँ❌
पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार साहस और जिज्ञासा आपको नित्य नयी चीज़ों की तरफ ले जाता है और यही आपके रिश्तों में कड़वाहट लाता है। आप भावुक स्वाभाव के होने के बावजूद कभी कभी अच्छे पति या प्रेमी नहीं साबित होते।आप रिश्तों में थोड़ा स्थायीत्व लाऐ।साहस और नित्य नये विचारों को क्रियान्वित करने में आपका जीवन दिशाहीन हो सकता है।इन पर एक हद तक नियंत्रण लगा कर आगे बढे।याद रखें, एक मुकाम पर चीज़ों को एक दिशा में ही ले जाना पड़ता है।आपका साहस कभी कभी आपको जुआ,सट्टा या लाटरी की तरफ ले जाता है और आप कभी-कभी अपना सब कुछ दांव पर लगा देते है।ध्यान रहे, बहुत कुछ कुछ पाने की चाहत में आप सब कुछ न खो दें।पंडित अंंजनी कुुुुुुमार दाधीच के अनुसार अगर आपकी घूमने की इच्छा नहीं पूरी होती है तो आप निराशा के गर्त में चले जाते हैं।आप बहुत सोचते है जिसके कारण मानसिक उलझन में रहते है।आपके स्वभाव में दोहरापन रहता है यह उचित नहीं है।इसके कारण आपको नुकसान भी उठाना पड़ता है।आपका स्वभाव तथा सोच सबसे अलग है यह आपके लिए तो ठीक है परन्तु सब के लिए नहीं।आप स्वार्थी व्यक्ति है यह आपके ये तो ठीक है परन्तु अन्य के लिए ठीक नहीं होता।
✔️सलाह✔️
आपको बुध ग्रह की उपासना करनी चाहिए
माता सरस्वती की उपासना सभी समस्याओं का हल है। 
भगवान् गणपति की उपासना तथा प्रतिदिन गणपति के द्वादश नाम का जप करने से आर्थिक समृद्धि, मान सम्मान तथा यश की प्राप्ति होगी। 
किसी कार्य को हल्के में लेना सबसे बड़ी कमजोरी है।
दूसरे के स्वभाव को समझने की कोशिश करें।
आपके लिए शुभ दिशा है उत्तर।
आपके लिए शुभ धातु है चांदी। 
आपके लिए मूलांक 1,3,5,6 वाले जातक सच्चे मित्र हो सकते है।आपके लिए शुभ रंग हरा, सफेद रंग तथा नीला हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।
🏵विवेचना🏵
स्वामी ग्रह : बुध। इष्टदेव- भगवान लक्ष्मीनारायण
श्रेष्ठ प्रभाव : 21 मई से 22 जून तथा 21 अगस्त से 20 सितम्बर के मध्य उत्पन्न जातक
श्रेष्ठ तारीखें : 5, 14, 23
उन्नत समय : 21 मई से 21 जून, 21 अगस्त से 20 सितम्बर
निर्बल समय : मई, सितम्बर, दिसम्बर
शुभ दिन : बुध, सोम, गुरु, शुक्र
सर्वोत्तम दिन : बुधवार शुभ रंग- हल्का खाकी, सफेद, चमकीला, उज्ज्वल, हरा
शुभ रत्न- पन्ना 
रोग- फ्लू, लू लगना, जुकाम, स्नायु निर्बलता, मस्तिष्क रोग, ब्लडप्रेशर, चर्मरोग
श्रेष्ठ वर्ष- 5, 14, 23, 32, 41, 50, 59, 68
व्रत- पूर्णिमा, रविवार
दान पदार्थ- पन्ना, स्वर्ण, मूंगा, कांस्य पात्र, हरा वस्त्र, घृत, शक्कर, कर्पूर, हाथी दांत, पंचरत्न
विवाह श्रेष्ठता- 15 अगस्त से 14 सितम्बर, 15 मार्च से 15 अप्रैल व 15 जनवरी से 14 फरवरी के मध्य जन्मे जातकों से
मित्र अंक- 1, 3,5,6
शत्रु अंक- 2, 9
व्यवसाय- तार, टेलीफोन विभाग, ज्योतिष, सेल्समैन, बीमा, बैंकिंग, बजट, निर्माण, रेलवे, इंजीनियरिंग, संपादन, तम्बाकू, लेखन, पत्रकारिता, राजनीति, पुस्तक, ट्रांसपोर्ट, पर्यटन आदि
अनुकूल दिशा- उत्तर उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम
अशुभ दिशा- दक्षिण-पश्चिम
pandit anjani kumar dadhich
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Monday, 27 July 2020

राखी

🏵रक्षाबंधन पर्व🏵


पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारत में श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को राखी, श्रावणी, सावनी, और सलूनों के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन राखी के धागे को कवच सा शक्तिशाली माना गया है, जो कच्चे सूत, रंगीन कलावे और रेशमी धागे से निर्मित है। राखी का यह धागा रक्षा के संकल्प का पवित्र प्रतीक है। यह आंतरिक और बाह्य भय के उन्मूलन का पर्व है। इस पर्व भाई-बहन, गुरु-शिष्य, प्रकृति और मनुष्य के मध्य तारतम्य स्थापित कर सक्षम और समर्थ से अबला और कमजोर की सुरक्षा के संकल्प का त्योहार है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार 3 अगस्त 2020 को यानि सावन के समापन के साथ पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व  सर्वार्थ सिद्धी योग एवं आयुषमान योग की संधि में मनाया जाएगा। इसी दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार रक्षाााबंधन के दिन भद्रा प्रातः 9:28 बजे तक रहेेेेेेेेेगी। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राखी बांधने के महुर्त निम्नलिखित है-
शुभ का चोघड़िया प्रातः 9:30 से 11:00 बजे तक रहेगा। 
अभिजित मुर्ख दोपहर 12:18 से1:10 बजे तक रहेगा। 
लाभ -अमृत का चोघड़िया दोपहर 4:02 से 7:20 बजे तक रहेगा। 
Pandit Anjani kumar Dadhich
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Sunday, 26 July 2020

मूलांक 4

🌻मूलांक (4) के बारे में 🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 और 31 को हुआ है तो आपका मूलांक 4 होगा। मूलांक चार के अधिष्ठाता ग्रह राहु हैं इसलिए मूलांक चार के व्यक्तियों पर राहु ग्रह के विशेषताओं का बहुत प्रभाव होता है। परन्तु पाश्चात्य विद्वानों के मतानुसार मूलांक चार का स्वामी हर्षल ग्रह को माना है।
🌹स्वाभाविक विशेषताएं🌹
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक 4 वाले जातक के जीवन में परिस्थितियां और घटनाएं अचानक ही घटित होती हैं जिनकी इन्होंने कल्पना भी नहीं की होती है।आप लोग निरंतर क्रियाशील रहते हैं।आप लोग सामाजिक और व्यावहारिक सोच रखने वाले लोगों में से हैं।आप मेहनती हैं और मेहनत से अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं।ये लोग कभी बहुत संपन्न तो कभी बहुत विपन्न भी देखे गए हैं।धन का गमनागमन, उन्नति-पतन, यश-अपयश, जय-पराजय, हानि-लाभ, सौभाग्य-दुर्भाग्य इत्यादि इनके जीवन में आता-जाता रहता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ये नवीनता के उपासक और प्राचीन रूढ़िवादिता का विरोध करते हैं।आपको प्राचीन प्रथा पर श्रद्धा और विश्वास नहीं होता है। आप प्राचीन परम्पराओ को उखाड़-फेकने तथा आधुनिक प्रथा के संस्थापक के रूप में कार्य कर सकते है। आप समाज में व्याप्त रूढ़ियों को दूर करने का भरसक प्रयास करते हैं। 
ये पूर्णरूप से सामाजिक होते हैं और उसका निर्वहन करते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप लोग संगठित रहते हैं और दूसरों से भी यही उम्मीद रखते हैं।घर पर साज सज्जा के साथ रहना इन्हे पसंद है और अगर इन्हे असंगठित देखें तो जान लीजिये की कुछ ठीक नहीं है।आप लोग त्यौहार, पर्व, पार्टी मानाने के शौक़ीन होते हैं और इसी से अपना दिमाग शांत रखते हैं।इनका सही और गलत का परख अच्छा रहता है और ये खुद ईमानदार होते हैं और दूसरों की ईमानदारी का सम्मान करते हैं।आप लोगों के सपने सत्यता के करीब होते हैं और उन्हें मेहनत से पूरा करने में आप कभी पीछे नहीं हटते।आप निर्माण कार्य जैसी चीज़ों में ज्यादा निपुण होते हैं। आप कभी भी अपने आस पास लोगों को शिक्षित करने में कभी नहीं चूकते।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप लोग वफादार, भरोसेमंद और अपनी बात के पक्के होते हैं और एक अच्छा मित्र या साथी साबित होते हैं. कुल मिला जुला कर आप एक सामाजिक, व्यवहारिक और भरोसेमंद इंसान हैं। मूलांक चार के व्यक्ति की सोच सामान्यजन से प्रायः अलग होती है। इसी कारण आपके मित्र भी कभी कभी दुश्मन हो जाते हैं।आपके व्यवहार में विरोध की प्रमुखता होती है जो जीवन के प्रत्येक स्तर पर दिखाई देती है। इस कारण लोग इन्हें लड़ाकू व झगडा़लू भी समझ बैठते हैं।आप समाज सुधारक के रुप में कार्य कर सकते हैं। आप जैसे लोग समाज में नई परम्परा को स्थापित करते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक चार का जातक राहु के प्रभाव में होता है इस कारण इस मूलांक के लोगों में विध्वंसात्मक तथा साहसिक कार्य करने कि प्रवृत्ति होतीे है। आपके व्यक्तित्व को आसानी से समझ पाना आसान नहीं होता। आप अपनी गोपनीयता को गोपनीय बनाये रखना चाहते है परन्तु अंततः आपकी पोल खुल ही जाती है।आप सहजतापूर्वक अथवा जल्द ही किसी से संबंध स्थापित या दोस्ती नहीं कर पाते हैं किंतु जब एक बार दोस्त बना लेते हैं तो बहुत अच्छे मित्र साबित होते हैं।मूलांक चार के जीवन में अचानक प्रगति होती है।जीवन में अनेक असंभावित घटनायें भी घट सकती हैं।  
👪पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन👪
मूलांक चार के जातकों का पारिवारिक और दाम्पत्य जीवन कुछ क्लेशयुक्त भी रहता है। इन्हें पत्नी के स्वास्थ्य की सदैव चिंता बनी रहती है। यदि परिवार के सदस्य उनकी देखभाल करते हैं, तो भी वे अपने को हमेशा अकेला ही समझते हैं इनका अकेलापन दूर नहीं हो पाता है। प्रेम विवाह की संभावना रहती हैं। भाई तथा बहिनों से कम ही बनती है। परन्तु मूलांक 6 तथा 8 से संबंध सहजता से स्थापित कर लेते हैं। 
👨‍🎓 शिक्षा👩‍🎓
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप पढाई करेंगे लेकिन 14 से 16 वर्ष की अवस्था में पढाई में दिक्कत आ सकती है। आप अपनी पढाई पूरा कर सकेंगे। यदि आप अन्वेषणात्मक पढाई करते है तो आपको लाभ मिलेगा।आपकी विज्ञान विषय में रुचि होती है। कंप्यूटर की पढाई आपके लिए सबसे अच्छा होगा। आप मेडिकल की भी पढाई कर सकते है। पैथोलॉजी का कोर्स आपके बहुत अच्छा रहेगा।
👉कार्यक्षेत्र👈
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप सामाजिक व राजनीति क्षेत्र से जुड़कर काम कर सकते है और इस क्षेत्र में एक नये मुकाम हासिल कर सकते है।आपको अपने जीवन यात्रा में दो प्रकार से आय प्राप्त होती है। आप नौकरी और व्यवसाय दोनों का लुफ्त उठा सकते है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप डॉक्टर, ब्रोकर, वैज्ञानिक, सेल्समैन, समाजसुधारक, क्लर्क, राजनितिज्ञ तथा पुलिस का कार्य कर सकते है। इसके अलावा आप अच्छे इंजीनियर, वकील, मैकेनिक या अकाउंटेंट भी हो सकते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपके जीवन का मूल रहस्य यह है कि आप बिना किसी का परवाह किये अपने लक्ष्य को पाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। आप परिस्थिति का दास न बनकर परिस्थितियों को ही दास बनाने के लिए दृढ संकल्प ले लेते हैं।
❌कमियाँ❌
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अपने तरीके से काम करने के वजह से आप लोग कभी कभी जिद्दी या गुस्सैल हो जाते हैं और अपनी जिद्द में दूसरों की बातों को नज़रअंदाज़ कर जाते हैं।आप लोगों के मुह पर बिना लिहाज़ किये ऐसे बातें बोल देते हैं जिससे आप के बहुत से शत्रु बन जाते हैं।ऐसी परिस्तिथियों से बचे और अपने ज़बान और लिहाज़ का ख्याल रखें।व्यवहारिक होने के बावजूद आप अपनी योजनाओं को मूर्त रूप देने में इतना विलम्ब करते हैं जिससे सही मौका हाथ से निकल जाता है।आप कभी कभी ऐसा महसूस करने लगते हैं की सब ठीक चल रहा है और कुछ भी करने की ज़रुरत नहीं है,आप का यही स्वभाव अच्छे मौकों को छोड़ देता है और बाद में बहुत देर हो चुकी रहती है।आप अपनी निरंतरता बनाये रखे और यही आप का स्वाभाव भी है।अगर आप उम्मीद से कम आराम या मज़ा करते हैं तो आप निराशा के गर्त में जाने लगते हैं।हालाँकि, आराम आपका स्वाभाव नहीं हैं।आप अति व्ययी है जिसके कारण धन संग्रह अधिक नहीं कर पाते हैं।आप सामजिक सोहरत पाने के चक्कर में अनेक दुश्मन बना लेते है यह उचित नही है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार क्रोधी स्वभाव होने के कारण कभी-कभी बहुत नुकसान उठाना पड़ता है।आपका स्वभाव तथा सोच सबसे अलग है यह आपके लिए तो ठीक है परन्तु सब के लिए नहीं। 
दूसरों को हानि पहुँचाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना क्षणिक आनंददायक तो देता है परन्तु अंतिम परिणाम दुखदायक होता है।
🎭रोग एवं उपचार🎭
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपको हृदय रोग, रक्तचाप, अनिंद्रा, पीठ दर्द, रक्ताल्पता, श्वांस रोग, टांगों में चोट और नैत्ररोग आदि होने की संभावना बनी रहती है। दुर्घटना में मृत्यु होने का भय बना रहता है। स्थायी स्वास्थ्य के लिए पालक, हरी सब्जियां एवं अंकुरित मूंग का सेवन विशेष लाभदायक है। 
📖सलाह📖
आपको गोमेद या काले हकीक की अगुंठी धारण करनी चाहिए।
भगवान गणेश की आराधना करनी चाहिए। 
भगवान् शिव की उपासना तथा रुद्राभिषेक से आर्थिक समृद्धि, मान सम्मान तथा यश की प्राप्ति होगी।आपके लिए शुभ दिशा है नैऋत्य कोण।
आपके लिए शुभ धातु चांदी है । 
आपके लिए मूलांक 6, 8 वाले जातक सच्चे मित्र हो सकते है।
आपके लिए शुभ रंग काला, आसमानी, मैरून, हरा, पीला तथा नीला हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।
किसी कार्य को हल्के में लेना सबसे बड़ी कमजोरी है।
आप अपने शुभचिंतकों को समय पर नहीं पहचान पाते तथा ‍जिद्द और अहंकार में आकर अपना नुकसान कर लेते हैं। अतः आपको सहज रुख अपनाना चाहिए। 
अधिक धन खर्च करने से बचे तथा धन संचय करने के लिए योजना बनाये।अपनी संघर्ष करने की प्रवृत्ति पर अंकुश रखकर, सहनशील तथा सहिष्णु बन सकें और शत्रुता कम पैदा करें।दूसरे के स्वभाव को समझने की कोशिश करें।
🔔विवेचना🔔
स्वामी ग्रह - राहु या हर्षल ग्रह
शुभ समय - 21 जून से 30 अगस्त
निर्बल समय - अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर
शुभ तिथियां - 4, 13, 22, 31
सहायक तिथियां : 2, 11, 20, 29
शुभ वर्ष - 4, 13, 22, 31, 40, 45, 58, 67
सहायक वर्ष - 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65, 74
शुभ दिन - रविवार, सोमवार, शनिवार
सर्वोत्तम दिन - शुक्रवार तथा शनिवार
शुभ रंग - धूप-छांव, नीला, भूरा या स्लेटी रंग
रत्न - गोमेद। धातु - लौह।
रोग - रक्तदोष, संक्रामक रोग, पशु से आघात प्रभावित अंग- पिंडलियां व श्वास क्रिया
देव - गणपति। व्रत - गणेश चतुर्थी
दान - लाल पदार्थ व खाद्यान्न
विवाह संबंध - 15 जुलाई से 15 अगस्त, 15 मई से 14 जून तथा 15 अक्टूबर से 18 नवम्बर के मध्य जन्मे जातक से संबंध उचित। 
व्यवसाय - स्प्रिट, तेल, कैरोसिन, पारा, इत्र, रेल विभाग, वायु सेना, टेक्नीशियन, इंजीनियरिंग, रंगसाजी, छापे का कार्य, टेलीफोन आपरेटर, पत्रकारिता, शिल्प कार्य, विद्युत कार्य, भाषण, उपदेशक, राज्यकर्मचारी, ठेकेदारी
शुभ दिशा - दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम
अशुभ दिशा - उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Saturday, 25 July 2020

सूर्य के उपाय

☀सूर्य के उपाय एवं शान्ति ☀

सूर्य - पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य ग्रह सभी ग्रहों का राजा माना गया है। वैदिक ज्योतिष में इसे आत्मा, मान-सम्मान, राजा, उच्च पद, सरकारी सेवा, लीडरशिप आदि का कारक माना जाता है। सूर्य सिंह राशि का स्वामी है। यह तुला राशि में नीच का होता है। जबकि मेष राशि में यह उच्च का होता है।शनि और शुक्र इसके शत्रु ग्रह हैं।
❄अशुभ सूर्य का प्रभाव❄
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य के अशुभ होने पर शरीर में अकड़न आ जाती है। मुँह में थूक बना रहता है। यदि घर पर या घर के आसपास लाल गाय या भूरी भैंस है तो वह खो जाती है या मर जाती है। यदि सूर्य और शनि एक ही भाव में हों तो घर की स्त्री को कष्ट होता है। यदि सूर्य और मंगल साथ हों और चंद्र और केतु भी साथ हों तो पुत्र, मामा और पिता को कष्ट। सूर्य के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति अपना पद भी खो बैठता है।
🌻क्या ना करें🌻
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य कमजोर अथवा नीच का होकर आपको परेशान कर रहा है अथवा किसी कारण सूर्य की दशा सही नहीं चल रही है तो आपको गेहूं और गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा आपको इस समय तांबा धारण नहीं करना चाहिए अन्यथा इससे सम्बन्धित क्षेत्र में आपको और भी परेशानी महसूस हो सकती है। पिता और पिता तुल्य व्यक्ति का अपमान नही करना चाहिए। 
✍उपाय ✍
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय करके सूर्य ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। जो निम्नलिखित हैं - 
∆ "ओम् ह्रां ह्रीं ह्रूं स: सूर्याय नमः" या "ओम् घृणि सूर्यायः नमः"। इन दोनों में से कोई एक मंत्र का 108 बार जाप किसी भी शुक्ल पक्ष के रविवार से शुरू कर प्रतिदिन करे। 
∆ प्रतिदिन सूर्येदेव को प्रणाम करके ताम्र पात्र में जल सामने रखकर लाल वस्त्र धारण करके पूर्व दिशा की तरफ मुख करके 1 माला सूर्यमंत्र जाप करने के पश्चात ताम्र पात्र से अर्ध्य दे। 
∆ पिता की सेवा करने से भी सूर्येदोष शान्त होता है
∆ भगवान विष्णु की पुजा कर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करते हुए रविवार का व्रत करना चाहिए। 
∆ दान के विषय में शास्त्र कहता है कि दान का फल उत्तम तभी होता है जब यह शुभ समय में सुपात्र को दिया जाए। सूर्य से सम्बन्धित वस्तुओं का दान रविवार के दिन दोपहर में ४० से ५० वर्ष के व्यक्ति को देना चाहिए।
∆ गाय को गेहुं और गुड़ मिलाकर खिलाना चाहिए। 
∆ किसी ब्राह्मण अथवा गरीब व्यक्ति को गुड़ का खीर खिलाने से भी सूर्य ग्रह के विपरीत प्रभाव में कमी आती है। अगर आपकी कुण्डली में सूर्य कमजोर है तो आपको अपने पिता एवं अन्य बुजुर्गों की सेवा करनी चाहिए इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। 
∆ प्रात: उठकर सूर्य नमस्कार करने से भी सूर्य की विपरीत दशा से आपको राहत मिल सकती है। 
∆ सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पुष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए।
∆ रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए।
∆ ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ में धारण किया जा सकता है।
∆ लाल गाय को रविवार के दिन दोपहर के समय दोनों हाथों में गेहूँ भरकर खिलाने चाहिए। गेहूँ को जमीन पर नहीं डालना चाहिए।
∆ किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य पर जाते समय घर से मीठी वस्तु खाकर निकलना चाहिए।
∆ हाथ में मोली (कलावा) छः बार लपेटकर बाँधना चाहिए।
∆ लाल चन्दन को स्नान के जल में डालकर स्नान करना चाहिए।
∆ सूर्य के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु रविवार का दिन, सूर्य के नक्षत्र (कृत्तिका, उत्तरा-फाल्गुनी तथा उत्तराषाढ़ा) तथा सूर्य की होरा में अधिक शुभ होते हैं।  
∆ गायत्री माता का ध्यान कर गायत्री मंत्र का जाप करने से भी सूर्य का अशुभ प्रभाव कम होता है। 
Pandit Anjani kumar Dadhich
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वृष राशि के बारे में

🌻वृष राशि के बारे में🌻

वृष राशि(अक्षर तालिका- ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वृष राशि बारह राशियों में द्वितीय स्थान रखने वाली राशि है। वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है तथा वृष राशि का चिह्न बैल है। बैल के समान ही स्वभाव वृष राशि के जातक में भी पाया जाता है। यह स्त्री राशि, हृस्वाकार,सोम्य स्वभाव, स्थिर राशि, रात्रि बली, पृष्ठोंदय प्रधान, जलाश्रयी, चतुष्पदी प्रधान और दक्षिण दिशा की स्वामिनी मानी जाने वाली यह राशि दशम भाव में बली या प्रखर होती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वृष का अर्थ होता है बैल  जो कि स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी, शक्तिशाली और बहुत अधिक वीर्यवान होता है और प्राय वह शांत रहता है किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है।
✍चारित्रिक विशेषताएं ✍
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वृष राशि के पुरुष हठी, जिद्दी, भावुक महत्वाकांक्षी,एवं परिश्रमी होते हैं। इनका उद्देश्य सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य के साधन जुटाने का होता है। ये व्यवहार कुशल, सहनशील एवं दृढ़ता से कर्मरत रहकर अन्त में लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं। प्रेम के क्षेत्र में पूर्ण व्यवहारिक होते हैं। ये अनुभवी एवं सफल गृहस्थी होतें है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वृष राशि की स्त्री कुशल गृहणी, व्यवहार कुशल, सहनशील, हठी, मितव्ययी और जिद्दी होती है। ये अपनी प्रशंसा सुनना सुनने की इच्छुक होती है। ये जिस पर भी विश्वास करती है तो उस पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तत्पर रहती है। ये निष्कपट और सहज रूप से प्रेम करती है। ये अपने एकत्रित धन को अचानक प्रकट कर सबको आश्चर्य चकित कर देती है।
🌷स्वभाव🌷
आप संयमी व धैर्यवान व्यक्ति हैं इसलिए धैर्य आपका विशिष्ट गुण होता है। आपको लोगों पर अधिकार जमाना बखूबी आता है। शुक्र का प्रभाव होने के कारण दिल से सौम्य, विद्वान व गुरुओं का आदर करने में सिद्धहस्त होते हैं।मित्रता और शत्रुता दोनों को निभाना इनको बखूभी आता है।आप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह बहुत अच्छी तरह से करते हैं। घर के सभी कर्तव्यों का पालन करना अपना धर्म समझते हैं और परिवार की सुख समृद्धि के लिए जितना आपके वश में होता है उससे बढ़कर करते हैं। आप एक मजबूत विचारधारा रखते हैं और खासियत यह भी है कि आप जो काम आरंभ करते हैं उसे तब तक करते रहते हैं जब तक कि आप किसी परिणाम पर नहीं पहुंच जाते हैं।आप अपनी विचारधारा के लोगों के साथ ही तालमेल बिठा पाते हैं और अन्य व्यक्तियों से आपको तालमेल जमाने में दिक्कत होती है। इसलिए अपने समान बुद्धि के लोगों से मिलना आपको ज्यादा आरामदायक लगता है। ऐसे तो आप निर्णय लेने में समय लेते हैं परन्तु कई बार क्रोध में निर्णय लेने में जल्दबाजी कर देते हैं और यह क्रोध हल्का फुल्का नहीं होता है, भले आप लोगों की नजर में शांत हो जाएँ पर जब तक बदला नहीं ले लेते क्रोध शांत नहीं होता है।
🏵कमियाँ🏵
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप जिद्दी स्वभाव के व्यक्ति होंते है और आपको स्थिर रहना पसंद होता है। आप आसानी से अपनी जगह से हिलना पसंद नहीं करते हैं।यदि आपको अचानक से और अनायास कोई फैसला या किसी बदलाव के लिए कहा जाए तब आपका मूड खराब हो जाता है क्योंकि बिना विचार, मनन किए शीघ्रता से आप कोई काम करना पसंद नहीं करते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आलस्य आपकी आकांक्षाओं की पूर्ति में बाधक होता है इसलिए आप चिड़चिड़े भी हो जाते है। आपका क्रोध भंयकर होता है।
🎭जीवन विश्लेषण🎭
वृष राशि के जातक का पिता से अक्सर मतभेद रहता है।जीवन में पिता-पुत्र का कलह रहता है।जातक का मन सरकारी कार्यों की ओर रहता है। सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता रहती है।पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिकतर तामसी भोजन में अपनी रुचि दिखाता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो स्वाभिमान की बात करता है सरकारी क्षेत्रों की शिक्षा और उनके काम जातक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मंगल के प्रभाव से जातक के अंदर मानसिक गर्मी प्रदान करता है।कल-कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य जातक कर सकता है, जातक की माता के जीवन में परेशानी ज्यादा होती है।ये अधिक सौन्दर्य प्रेमी और कला प्रिय होते हैं। जातक कला के क्षेत्र में नाम करता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण मे सामंजस्यता लाता है, जातक अपने जीवन साथी के अधीन रहना पसंद करता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार चन्द्र-बुध जातक को कन्या संतान अधिक देता है और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बनाता है आपके जीवन में व्यापारिक यात्राएं काफी होती हैं, अपने ही बनाए हुए उसूलों पर जीवन चलाता है।अपने मन का राजा होता है।
🎭कैरियर🎭
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वृष राशि का स्वामी ग्रह शुक्र होता है और शुक्र ग्रह की गिनती सौम्य ग्रहों में होती है।शुक्र ग्रह के प्रभाव से कला पक्ष प्रभावी रहता है। गीत, संगीत, फिल्म, टी.वी. इत्यादि से जुड़े हुए कार्य।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शुक्र भोग का कारक है इसलिए सभी भोगवादी वस्तुएं इस ग्रह के अन्तर्गत आती हैं, इसलिए आप उच्च स्तर की भोग की वस्तुओं से जुड़ा व्यवसाय कर सकते हैं। वाहन, पर्यटन संबंधी,फैशन, डिजायनर कपड, ग्राफिक्स व वेब डिजायनिंग, होटल, फोटोग्राफी, कवि या न्यूज़ एंकर भी हो सकते हैं।
📖विवेचना 📖
राशि स्वरूप- बैल
राशि स्वामी- शुक्र
स्वभाव - सौम्य
दिशा -  दक्षिण
वर्ण -    वैश्य
लिंग -    स्त्री
गुण -   रजो
तत्त्व - भूमि
योनि-  पशु
प्रभुत्व - मुख
रंग- श्वेत
रत्न - हीरा
शुभ अंक - 6
उपरत्न- ओपल
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