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Wednesday, 22 July 2020

राहु के उपाय

राहु के उपाय-
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु एक छाया ग्रह हैं जो अपने स्वभाव के अनुसार जातक को  पिड़ित करता है। राहु की दशा में जातक की मानसिक अशांति होती हैं। जातक को शल्य चिकित्सा करवाना पड़ता है चाहे छोटे रूप में हो या बड़े रूप में। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु बुधवार का दिन, राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा)  राहु काल तथा ग्रहण का दिन अधिक शुभ होते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु के उपाय व शांति के लिए निम्नलिखित उपाय करें -
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अपनी शक्ति के अनुसार संध्या को काले-नीले फूल,गोमेद,नारियल, मूली, सरसों, नीलम, कोयले, खोटे सिक्के, नीला वस्त्र किसी कोढ़ी को दान में देना चाहिए। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु की शांति के लिए लोहे के हथियार, नीला वस्त्र, कम्बल, लोहे की चादर, तिल, सरसों तेल, विद्युत उपकरण, नारियल एवं मूली दान करना चाहिए और सफाई कर्मी या जमादार को लाल अनाज और तम्बाकू का दान देने से भी राहु की शांति होती है। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु से पीड़ित व्यक्ति मीठी रोटी कौए को देंना चाहिए इससे राहु ग्रह का दुष्प्रभाव कम होता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु की दशा होने पर कुष्ट से पीड़ित व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु पीड़ित व्यक्ति को गरीब व्यक्ति की कन्या की शादी करनी चाहिए।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु की दशा से आप पीड़ित हैं तो अपने सिरहाने जौ रखकर सोयें और सुबह उनका दान कर दें इससे राहु की दशा शांत होगी। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु से पीड़ित व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हाथी दाँत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए अथवा सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है।
 ∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु से पीड़ित व्यक्ति को दिन के संधिकाल में अर्थात् सूर्योदय या सूर्यास्त के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य नही करना चाहिए।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहु से पिड़ित व्यक्ति को झुठी कसम नही खानी चाहिए।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार "ओम् भ्रां भ्रीं भू्रं स: राहुवे नम: स्वाहा:" कृष्ण पक्ष के बुधवार को राहु मंत्र का 7 माला जाप करने के पश्चात नारियल का दान कर दें एवं पत्तों समेत मूली भी दान कर दें।
 ∆पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भगवान शिव शंकर का अभिषेक करने से राहु की पीड़ा शांत होती है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार क्या नहीं करें जिस से राहु के दुष्प्रभाव कम पडे़-
मदिरा और तम्बाकू के सेवन से राहु की दशा में विपरीत परिणाम मिलता है अत: इनसे दूरी बनाये रखना चाहिए। आप राहु की दशा से परेशान हैं तो संयुक्त परिवार से अलग होकर अपना जीवन यापन करें।
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मूलांक एक

मूलांक एक (1) के बारे में

जिस  व्यक्ति या जातक का जन्म किसी भी महीना की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है तो उनका मूलांक एक होगा। मूलांक 1 का स्वामी ग्रह सूर्य  है। सूर्य को ज्योतिष में आत्मा का कारक माना गया है। सूर्य जीवन शक्ति है।
स्वभाव
मूलांक एक वाले व्यक्ति के अंदर भी सूर्य में होने वाले गुण का संचार होगा।ऐसा व्यक्ति परिश्रमी,आत्म-निर्भर, महत्वाकांक्षी,उत्साही  कला-प्रेमी,अति आकर्षक व सुन्दर, कार्य कुशल तथा अग्रसोची होता है।आप शीघ्र निर्णय लेने में समर्थ हैं। मूलांक एक का व्यक्ति सतत क्रियाशील और कर्मप्रधान होता हैं। अपने आदर्शों का निर्वाह करने वाले, बात के धनी तथा अपने निर्णय पर अटल रहने वाले है। इनमें सूर्य जैसा तेज और आत्म-विश्वास रहता है। अपने निर्णय पर अडिग रहने वाले मूलांक एक के जातक दृढ निश्चयी और अपने मार्ग आने वाली बाधा को दूर करने में सक्षम होते हैं।अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे अपनी सारी ऊर्जा लगा देते हैं।ये लोग व्यवसाय, नौकरी, कला, धर्म और समाज के क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले होते हैं। मूलांक एक के जातक अपने को प्रथम स्थान पर देखना पसंद करते हैं और इनका दृढ संकल्प उनको सफलता प्रदान करता है।कभी कभी इनका यही स्वाभाव अन्य आलसी लोगो के लिए इन्हें कठोर बना देता है। कलात्मकता और नवीनता में इनका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। ये नए उद्यम और नए कार्य का आरम्भ करने में सफल साबित होते हैं।आत्म-निर्भर और अनुशासित होने के कारण वे खुद का अपना का व्यवसाय करना पसंद करते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं।मूलांक एक के जातक को कुछ न करते रहना चाहिए, आलस्य इनका स्वाभाव नहीं है इसलिए खली बैठने में अप्रसन्न रहते हैं।मूलांक एक के जातक को कुछ न करते रहना चाहिए, आलस्य इनका स्वाभाव नहीं है इसलिए खाली बैठने में अप्रसन्न रहते हैं।नए उद्यम आरम्भ करने में इनसे अच्छा कोई नहीं है और इन्हें इसी तरह आगे बढ़ते रहना चाहिए। 
 इस मूलांक वाला जातक ईमानदार और दॄढ़ निश्चयी होता है। आपमें नेतृत्त्व करने की कला है। आप कमोबेश जिद्दी और अहंकारी होंगे। आप स्वार्थी व्यक्ति हो सकते है।आप सैद्धान्तिक जीवन में विशवास करते हैं। आप किसी के अधीन काम करना पसंद नहीं करते। आप साहसी व स्वाभिमानी हैं। जीवन यात्रा में आने वाली परेशानियों से आप घबराते नहीं बल्कि उसका डटकर मुकाबला करते हैं। धन कमाने मे जितना मेहनत करते हैं, उतना ही खुले हाथों से खर्च भी करते हैं इस कारण आपके पास धन नही रुकता है।मूलांक एक (1) के जातक के अंदर केवल अपने मन को सुनना पसन्द करता है। आप अपने कार्यों को पूर्ण निष्ठा तथा ईमानदारी के साथ करने में विश्वास रखते हैं। आपके व्यवहार में उदारता और स्वभाव में दयालुता का भाव छिपा होता है। आपका मनोबल आत्मविश्वास से भरा होता है।मूलांक एक के जातक अपनी परंपरा के प्रति आदर भाव रखते है। आप हमेशा कुछ नया करना चाहते है। आप जो कार्य कर रहे है उसमे टोका-टोकी आपको बिलकुल भी पसंद होती है। आप सौंदर्य प्रिय व्यक्ति है।
कमियाँ
मूलांक एक के व्यक्ति कभी कभी स्वार्थी,घमंडी और दूसरों से अधिक अपेक्षा रखने वाले होते हैं।जाने अनजाने में ये लोगों को सताने लगते हैं।प्रथम स्थान पर बने रहने के लिए ये कभी कभी अपने से नीचे काम करने वालों के लिए गुस्सैल, कठोर और अप्रिय बन जाते हैं। ऐसा माहौल इन्हे अप्रसन्न रखने लगता है और इसी कारण से ये किसी कार्य को प्रारम्भ तो करते हैं, परन्तु उसे मुकाम तक पहुचने से पहले थकने लगते हैं।मूलांक एक के लोग जल्दी लोगों पर भरोसा कर लेते हैं और धोखा खा जाते हैं।कभी कभी दिखावा, लोभ, जल्दीबाजी और अहंकार इनको सबका अप्रिय बना देता है।अहंकार के व जह से ये लोग किसी की दखल पसंद नहीं करते।इनमें नेतृत्व कर गुण तो है परन्तु ये अच्छे टीम-प्लेयर नहीं साबित होते। 
शैक्षणिक योग्यता 
मूलांक 1 के व्यक्ति उच्च शिक्षा  प्राप्त करने में विश्वास रखते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश भी जाना चाहते है और शोध कार्य भी कर सकते है इसका मूल कारण है कि ऐसा जातक हर क्षेत्र में अपने को अव्वल अथवा प्रथम रखना चाहता है। मान सम्मान प्राप्त करना आपका मुख्य ध्येय होता है। यश और सम्मान पाने के लिए आप खूब मेहनत करते है, सफलता भी प्राप्त करते है और समाज तथा परिवार से सम्मान भी प्राप्त करते हैं।
आर्थिक स्थिति
मूलांक वाले जातक की आर्थिक स्थिति सामान्यतः अच्छी ही होती हैं। इन्हें धन की कमी नहीं होती है (कुंडली में धनवान बनने के योग)इन्हें धन देने वाले भी बहुत लोग मिल जाते है। ऐसा जातक अपने मित्रों और संबंधियों से धन लेने में भी संकोच नहीं करते है। वैसे ये अपने पास इतना पैसा रखते है की इन्हें किसी से लेने की जरुरत ही नहीं पड़े। आप अपनी शान-शौकत पर धन खर्च करने में संकोच नहीं करते हैं।आपका अपने भाई बहनों से सम्बन्ध सामान्य रहेगा समय पर आप उनकी पूरी मदद करते हैं। आप घर में बड़े की भूमिका निभाते हैं। घरेलु मामले में अपना सहयोग देने में तनिक भी नहीं चूकते।
दाम्पत्य जीवन 
आपका दाम्पत्य जीवन में प्रेम बना रहेगा। आपका प्रेम सम्बन्ध स्थायी बना रहेगा। आप चाहते हैं कि मेरा जीवन साथी आज्ञाकारी तथा वफादार हो। आपके अहंकार के कारण प्रेम सम्बन्ध में कटुता भी देखा गया है। आपको पुत्र सुख मिलेगा। अहंकार और स्वाभिमान के कारण संतान के प्रति अपने प्यार का इजहार नहीं करते जिसके कारण संतान आपके प्यार में कमी महसूस करते है जबकि आप अपने संतान से बेहद प्यार करते है।
कार्यक्षेत्र
मूलांक 1 वाले जातक प्रशासकीय पद पर कार्य करते है। आप में नेतृत्व करने की शक्ति है अतः आप अच्छे नेता बन सकते हैं। आपमें अच्छे प्रबंधक के गुण होने के कारण अधिकारी की  भूमिका में कार्य कर सकते है। आप डॉक्टर,सर्जन, डेंटिस्ट तथा केमिस्ट बन सकते हैं। आप साहसिक कार्य कर सकते है जिसके कारण सिनेमा, समाचार पत्र, पत्रिका, प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक के रूप में कार्य कर सकते है और उसमे सफल भी होंगे।
स्वास्थ्य  
मूलांक 1 वालो का स्वास्थ्य सामान्यतः ठीक रहता है। चूँकि इस मूलांक के जातक का ग्रह सूर्य है और सूर्य ह्रदय तथा आँख का कारक होने के कारण ऐसे जातक को आंख तथा ह्रदय रोग का भय बना रहता है। रक्तचाप के आप भी शिकार हो सकते है।
उत्तम सलाह
आपको सूर्य की उपासना करनी चाहिए। आदित्य हृदयस्त्रोत का पाठ करने से आर्थिक समृद्धि तथा मान संम्मान व यश की प्राप्ति होगी।प्रतिदिन अपने पिता का आशीर्वाद लेना न भूले।आपके लिए शुभ दिशा ईशान कोण है।आपके लिए शुभ धातु है सोना।आपके लिए 2, 3, 9 मूलांक वाले जातक सच्चे मित्र होंगे।आपके लिए शुभ रंग नारंगी, पीला, सुनहरा, हरा तथा सफेद हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग  में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।
स्वार्थी बनिए परन्तु इतना नहीं की घर परिवार को प्रभावित करें।आपको चुगलखोर, जुआ, सट्टा आदि से बच कर रहना चाहिए।6 एवं 8 अंक वाले आपके शत्रु हैं।
“अहम” या घमंड आपका सबसे बड़ा शत्रु और कमजोरी है।व्यर्थ के दिखावे से बचना चाहिए।
विवेचना
स्वामी ग्रह : सूर्य
विशेष प्रभावी : 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य
शुभ तारीखें : 1, 10, 19, 28
सहायक तारीखें : 2, 11, 20, 29 एवं 4, 13, 22, 31 तथा 7, 16, 25
सहायक शुभ वर्ष : 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65, 74 एवं 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67 तथा 7, 16, 25, 34, 43, 52, 61, 70
सर्वोत्तम वर्ष : 1, 10, 19, 28, 37, 46, 56, 64, 73
उत्तम दिन : रविवार, सोमवार
शुभ रंग : हरा, भूरा, पीला, सुनहरा
शुभ रत्न : माणिक्य
राशि : सिंह
धातु : स्वर्ण, तांबा
दिशा : पूर्व
मित्र अंक : 2, 7, 5
सम अंक : 3, 9, 4
शत्रु अंक : 6, 8
तत्व : अग्नि
रोग : हृदय की कमजोरी, रक्तदोष, रक्तचाप, स्नायु निर्बलता, नेत्र दोष
पाठ : आदित्य हृदय स्तोत्र
उपासना : सूर्य की
व्रत : रविवार
दान पदार्थ : माणिक्य, स्वर्ण, ताम्र, गुड़, घी, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, रक्त चंदन एवं गाय
विवाह करना उत्तम : 14 जून से 15 जुलाई, 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर, 15 नवम्बर से 18 दिसम्बर, 18 मार्च से 15 अप्रैल के मध्य जन्मे जातक से
व्यवसाय : आभूषण, जौहरी कार्य, स्वर्णकारिता, विद्युत, चिकित्सा, नेतृत्व, स्पोर्टस वस्तु, अग्नि, सेवा कार्य, सैन्य विभाग व प्रशासन
अनुकूल दिशा : उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, पश्चिम
प्रतिकूल दिशा : दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम
शुभ मास : जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर व दिसम्बर।
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Sunday, 19 July 2020

शिव रुद्राभिषेक एक विश्लेषण

शिव रुद्राभिषेक एक विश्लेषण

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जो मनुष्य शीघ्र ही अपनी कामना पूर्ण करना चाहता है वह भगवान शिव के आशुतोष स्वरूप की विविध द्रव्यों से विविध फल की प्राप्ति हेतु रुद्राभिषेक करता है। जो मनुष्य शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी से अभिषेक करता है उसे भगवान शिव प्रसन्न होकर शीघ्र मनोवांछित फल प्रदान करते है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि "सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका" अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं। इनका अभिषेक करने से सभी ग्रह बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है। रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ किया जाता है।अभिषेक के कई प्रकार होते हैं। शिव जी को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है रुद्राभिषेक करना अथवा श्रेष्ठ ब्राह्मण विद्वानों के द्वारा कराना। वैसे भी भगवान शिव को जलधारा प्रिय माना जाता है क्योंकि वह अपनी जटा में गंगा को धारण किये हुए हैं। जो व्यक्ति जिस कामना की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक करता है वह उसी प्रकार के द्रव्यों का प्रयोग करता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे हैं उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए और इससे कौनसे लाभ प्राप्त होते है उनका उल्लेख शिव पुराण में किया गया है।जिसके निम्नलिखित लाभ इस प्रकार हैं- 
∆ अगर किसी भी स्थान पर वर्षा नहीं हो रही है तो भगवान शिव के रुद्राभिषेक में केवल जल से अभिषेक करते है तो उस स्थान पर वर्षा होती है।
∆ अगर कोई भी व्यक्ति असाध्य रोग से ग्रस्त है तो भगवान शिव के रुद्राभिषेक कुशोदक से करें तो असाध्य रोग से मुक्ति मिलती है। अथवा आप अगर इत्र मिले जल से अभिषेक करते हैं तो उससे बीमारी नष्ट होती है।
∆ अगर आप स्वयं का मकान और वाहन चाहते हैं तो उसके लिए आपको दही से रुद्राभिषेक करना चाहिए।
∆ आपको लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करना चाहिए।
∆ अगर आप अपने धन में वृद्धि चाहते है तो उसके लिए आपको शहद एवं घी से अभिषेक करना चाहिए।
∆ आप किसी तीर्थ के जल से अभिषेक करते हैं तो आपको मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 ∆ अगर आप संतान प्राप्ति के लिए दुग्ध से रुद्राभिषेक करने से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से रुद्राभिषेक करना चाहिए।
∆ आपको तेज ज्वर पीड़ा से मुक्ति शीतल जल अथवा गंगाजल से रुद्राभिषेक करने पर प्राप्त होती है।
∆ शिव के सहस्रनाम मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से रुद्राभिषेक करने पर वंश का विकास होता है।
∆ अगर किसी को भी प्रमेह रोग की शांति चाहिए तो भी दुध द्वारा रुद्राभिषेक करने से हो जाती है। गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा  रुद्राभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।
∆ यदि शकर मिले दूध से रुद्राभिषेक करे तो पर जड़बुद्धि वाला भी विद्वान हो जाता है।
∆ यदि आप किसी भी प्रकार के कोर्ट केस में फंसे हुए हो और अपने शत्रु की हार चाहते हो तो सरसों के तेल से रुद्राभिषेक करना चाहिए तो शत्रु पराजित होता है।
∆ अगर कोई भी अगर तपेदिक रोग से ग्रसित है तो शहद के द्वारा रुद्राभिषेक करने पर वह कष्ट भी दूर हो जाता है।पातकों को नष्ट करने की कामना करने वाले को भी शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए। 
∆ व्यक्ति को पुत्र कामना की इच्छा से शकर मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करना चाहिए। ऐसे तो अभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार रुद्राभिषेक करने के लिए कुछ नियम भी है जो निम्नलिखित है
❀ यदि किसी मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक करेंगे तो बहुत उत्तम रहेगा।
❀ किसी ज्योतिर्लिंग पर रुद्राभिषेक का अवसर मिल जाए तो इससे अच्छी कोई बात नहीं।
❀ नदी किनारे या किसी पर्वत पर स्थित मंदिर के शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना सबसे ज्यादा फलदायी है।
❀ कोई ऐसा मंदिर जहां गर्भ गृह में शिवलिंग स्थापित हो वहां पर रुद्राभिषेक करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा।
❀ घर में भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्र, गोदुग्ध या अन्य दूध मिलाकर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सबको मिलाकर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है। इस प्रकार विविध द्रव्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी पुराने नियमित रूप से पूजे जाने वाले शिवलिंग का अभिषेक बहुत ही उत्तम फल देता है किंतु यदि पारद के शिवलिंग का अभिषेक किया जाए तो बहुत ही शीघ्र चमत्कारिक शुभ परिणाम मिलता है। रुद्राभिषेक का फल बहुत ही शीघ्र प्राप्त होता है।
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Saturday, 18 July 2020

शनि प्रदोष व्रत

शनि प्रदोष व्रत
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भगवान शिव की प्रसन्नता व आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत  किया जाता है।हर महीने में दो बार एक शुक्ल और दूसरा कृष्ण पक्ष में प्रदोष का व्रत आता है। यह व्रत त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। प्रदोष व्रत में शिवजी जी की उपासना व पूजा की जाती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिन्दू धर्म के अनुसार यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभकारी है क्योंकि प्रत्येक प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर की पूजा की जाती है। लेकिन शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की भी पूजा अर्चना की जाती है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सावन के पवित्र माह में दोनों प्रदोष शनिवार को पड़ रहे है। जिसके कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि अगर आपकी कुंडली में शनि दोष, साढ़े साती, शनि की लघु कल्याणी ढैय्या आदि है तो आज 18 जुलाई और 1 अगस्त को जरूर प्रदोष व्रत करें। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोषम कहते हैं।शनिवार का प्रदोष व्रत संतान प्राप्ति के इच्छुक भक्तों के लिए फलदायक है। अगर आप संतान प्राप्ति की कामना कर रहे हैं तो यह व्रत जरूर करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रदोष व्रत करने की विधी निम्न लिखित है -
प्रदोष व्रत करने के लिए त्रयोदशी वाले दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निर्वित होकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रदोष व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
इस व्रत में व्रती को सफ़ेद कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
इस व्रत में भोजन करना निषेध है। अत: यह व्रत निराहार रखा जाता है।
सांयकाल के समय शिवालय जाये या फिर घर पर ही पूजास्थान पर बैठे।भगवान शंकर का ध्यान करते हुए, व्रत कथा और आरती पढ़नी चाहिए।
भगवान शिव का दूध और जल आदि से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद में शिवजी जी को फल, फूल, धतूरा, बिल्वपत्र और ऋतुफल अर्पित करें।
प्रदोष व्रत में अपने सामर्थ्य अनुसार किसी ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान दक्षिणा देनी चाहिए। व्रति अपनी संध्या काल के पूजा के बाद ही सात्विक भोजन या फलाहार ले सकता है।
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Sunday, 5 July 2020

श्रावण मास और शिव

श्रावण मास और शिव शंकर

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सावन का महीना भगवान शिवजी को बहुत प्रिय है। गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होने वाले सावन के महीने की शुरुवात होती है। शिव भक्त श्रद्धालु इस पूरे महीने शिवजी के निमित्त व्रत और प्रतिदिन उनकी विशेष पूजा आराधना करते हैं। सावन का महीना मनोकामनाओं का इच्छित फल प्रदान करने वाला है। देश के सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। सावन के सभी सोमवारो को भोले नाथ के दर्शन और पूजा अर्चना के लिए सभी ज्योर्तिलिंगों और शिवालयों में श्रद्धालुओं की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है। इस माह में सभी सोमवारो को जिनमें स्त्रियाँ तथा विशेषतौर से कुंवारी लड़कियां अच्छे पति की कामना से भगवान शिव के व्रत रखती हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सावन के पवित्र महीने में अगर कोई भी प्राण-प्रतिष्ठित शिवलिंग या पारद धातु से निर्मित लिंग का गंगाजल व दुग्ध से रुद्राभिषेक करते हैं तो उनकी इच्छित मनोकामनाएं भगवान शिव जरूर पुरी करते हैं क्योंकि पुराणों में भी जलाभिषेक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है और शिवलिंग का रुद्राभिषेक भगवान शिव को भी अत्यंत प्रिय है। इन दिनों शिवलिंग पर गंगा जल द्वारा अभिषेक करने से भगवान शिव अतिप्रसन्न होते हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भगवान शिव शंकर का अभिषेक अलग अलग द्रव्य से करने पर निम्नलिखित फल प्राप्त होता है -
∆ शिवलिंग का दुग्धा अभिषेक एवं घृत से अभिषेक करने पर योग्य संतान की प्राप्ति होती है। 
∆ गन्ने के रस से अभिषेक करने पर धन संपदा की प्राप्ति होती है।  
∆ कुशोदक से अभिषेक करने से समस्त व्याधि शांत होती है। 
∆ दधि से अभिषेक करने से पशु धन की प्राप्ति होती है।
∆ शहद से शिवलिंग पर अभिषेक करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
∆ सावन मास में शिव चालीसा और आरती का पाठ करें।
∆ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
∆ सावन के महीने में सभी सोमवार को व्रत रखें।
∆ बेलपत्र, दूध, शहद और जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
भगवान महाकालेश्वर शिव शंकर आप सभी की मनोकामनाएं अवश्य पुरी करेंगे इस श्रावण मास में। 
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Saturday, 4 July 2020

मांगलिक दोष निवारण के उपाय

मांगलिक दोष निवारण के उपाय

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आजकल हर कोई मांगलिक दोष से डरते दिखाई देते है। लड़का लड़की को देखने से पहले आजकल जन्म कुंडली का मिलान कर मांगलिक दोष का ही पुछा जाता है। मांगलिक दोष से घबराए नही बल्कि पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मांगलिक दोष निवारण के कुछ उपाय दिए गए हैं जो मांगलिक दोष के प्रभाव को काम करेंगे और अच्छा परिणाम देंगे जो निम्नलिखित हैं-
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रतिदिन गणेशजी को गुड़ और लाल फूल चढ़ाएं और पूजा करते हुए 108 बार यह मंत्र पढ़ें ‘ ॐ गं गणपतये नमः’।

∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि स्वस्थ हों तो हर चार महीने में एक बार मंगलवार को रक्तदान करें।

∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मंगल यन्त्र की स्थापना करें और मंगल प्रार्थना करें।

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मंगलवार को सूर्योदय से लेकर अगले सूर्योदय तक का व्रत करें और इस अवधि में सिर्फ फल और दूध ही लें।

∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मंगल चंडिका मंत्र का नियमित जाप करें।

∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कुम्भ विवाह, विष्णु विवाह और अश्वत्थ विवाह कराएं।

∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आक के सफेद फुलो को लाल रंग के धागे में पिरोकर 40 मंगलवार तक हनुमान जी को पहनाए व हनुमान चालीसा पढ़े। मांगलिक दोष में राहत मिलेगी।

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रत्येक मंगलवार के दिन चिड़ियों को मीठा खिलाएं। 

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मांगलीक दोष की शांति के लिए उज्‍जैन के मंगलनाथ मंदिर में विशेष भात पूजा करवाया जाना भी फायदेमंद है।
Pandit Anjani Kumar Dadhich 
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Tuesday, 30 June 2020

Vastu Remedies

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर उल्लू को घर के पश्चिम क्षेत्र में रखते हैं तो इससे आपकी दुरदृष्टि तेज, मष्तिष्क के मनोभावों को पढ़ने की क्षमता और धन एवं समृद्धि में वृद्धि में मदद करता है।  
Pandit Anjani Kumar Dadhich 
Nakastra jyotish Hub

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर अपने भवन के वेस्ट साउथ वेस्ट क्षेत्र में नंदीश्वर की पीतल मूर्ति रखेंगे तो आप अपने व्यवसाय को अप्रत्याशित आपदा या खतरे के खिलाफ सुरक्षित कर उन्नति विश्वास और ईमानदार के साथ व्यवसाय को आगे बढा सकते हैं। 
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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 घर या आफिस के उत्तर पश्चिमी दिशा में  आर्टिफिशियल घोड़े का जोड़ा रखें अगर आप कर्ज सेे परेशान है। 
Pandit Anjani kumar Dadhich
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पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर आप कोई भी सरकारी अनुबंध प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने घर या कार्यालय के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में अशोक स्तंभ का स्टेच्यु रखें या उसकी तस्वीर लगाएं।
Pandit Anjani kumar Dadhich
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