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Friday, 24 July 2020

नाग पंचमी

नाग पंचमी 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हर वर्ष श्रावण 
मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 25 जुलाई 2020 को देशभर में नागपंचमी मनाई जाएगी। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के बाद हस्त नक्षत्र रहेगा। इस दौरान मंगल वश्‍चिक लग्न में होंगे खास संयोग यह है कि इसी दिन कल्कि भगवान की जयंती भी है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नाग पंचमी के दिन भगवान शिव शंकर और उनके गले में आभूषण की तरह विराजमान नाग देवता के स्वरूपों की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। इसके अलावा जिन जातकों पर काल सर्प दोष है उनके लिए भी यह दिन बहुत अहम माना गया है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस दिन नागदेव की पूजा करने से कुंडली में राहु और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिन्दू धर्म में मान्यता है कि सर्प ही धन की रक्षा करते हैं। इसलिए धन-संपदा व समृद्धि की प्राप्ति के लिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पुजा करते है। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरुप की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और साधक को धनलक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मान्यता है कि इस दिन सर्पों की पूजा करने से नाग देवता और महादेव प्रसन्न होते हैं और काल सर्प दोष से ग्रसित जातकों को इस दोष से मुक्ति से मिलती है। जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष है तो उन्हें विशेष तौर पर नागपंचमी को विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
नाग पंचमी मनाने का कारण-
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नागपंचमी मनाने के पीछे मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद जो विष निकला उसे पीने को कोई तैयार नहीं था। अंतत: भगवान शिव ने उसे पी लिया। भगवान शिव जब विष पी रहे थे, तभी उनके मुख से विष की कुछ बूंदें नीचे गिरीं और सर्प के मुख में समा गई। इसके बाद ही सर्प जाति विषैली हो गई। सर्पदंश से बचाने के लिए ही इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग पर विजय के उपलक्ष में भी नाग पंचमी पर्व मनाया जाता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नागपंचमी पूजा के दिन अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख आदि अष्टनागों की पूजा की जाती है। नागपंचमी पर वासुकि नाग, तक्षक नाग और शेषनाग की पूजा का विधान है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नाग पंचमी के दिन सर्वप्रथम भगवान महादेव और पार्वती की विधि-विधान से पूजन कर महादेव का रुद्राभिषेक करें। इसके बाद नाग-नागिन की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर दूध, अक्षत, फूल, चंदन और मीठा अर्पित करें।पूजन साम्रगी अर्पित करने के बाद महादेव और नाग देवता से अपनी बाधाओं को दूर करने की कामना करते हुए निम्नलिखित मंत्र का जाप करे।
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।
इसके बाद सर्प देव की आरती करें।कालसर्प शांति की प्रार्थना करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नागपंचमी पर कालसर्प दोष की शांति के अन्य उपाय जो  कालसर्प दोष से मुक्ति दिलाते है वो निम्नलिखित हैं-
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सर्पों(नागो) का पूजन कर राहु केतु का जप स्वयं करें या किसी ब्राह्मण से करवाए।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी सपेरे से सर्पों का जोड़ा ले पूजा कर जंगल में छोड़ें। परन्तु यह उपाय जोखिम भरा है।अतः मैं इसका पक्षधर कदापि नहीं हुं
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भगवान शिव को तांबे या चांदी की धातु से बना सर्प अर्पित करें और कालसर्प शांति की प्रार्थना करें।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नागपंचमी को दूध, जल, शहीद, फलों का रस, चंदन, इत्र से रुद्राभिषेक करें।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कालसर्प दोष शान्ति की पुजा करवाना। 
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मूलांक 3 के बारे में।

🌻मूलांक (3) के बारे में🌻

पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21 और 30 को  हुआ है तो आपका मूलांक 3 होगा। अंक शास्त्र में मूलांक तीन का स्वामी ग्रह गुरु (बृहस्पति) हैंं। इसलिए मूलांक तीन के व्यक्तियों पर बृहस्पति ग्रह के विशेषताओं का बहुत प्रभाव होता है।
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आप महत्वाकांक्षी, नेतृत्व का गुण रखने वाले, कलात्मक, अनुशासन-प्रेमी और स्पष्टवादी स्वभाव के हैं। आप की कलात्मकता और अभिव्यक्ति कुशलताा प्राप्त व्यक्ति बनाते हैं। आप अपने आस पास एक सकारात्मक ऊर्जा रखते है जो सबको पसंद आता है और आप जल्दी लोगों का दिल जीत लेते है और लोग आपके मुरीद हो जाते हैं।लोग आप के साथ सहज महसूस करते हैं।पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आप लोग आज पर कल से ज्यादा यकीन रखते हैं, इसी वजह से आप अपने जीवन का भरपूर आनंद लेते है।आपकी सोच इतनी सकारात्मक है कि आप सोचते हैं कि अपने आप समस्याएं सुलझ जाएंगी।इस सोच के अपने फायदे और नुकसान हैं।आपके विचारों में धार्मिकता और विचारों का स्पष्ट अनुमोदन करने की क्षमता होती है।मानसिक रूप से समृद्ध होने के कारण आप गूढ़ विषयों में भी अच्छी समझ रखते है।आपका आकर्षक स्वभाव लोगों में लोकप्रिय बना देता है।
✏️स्वभाव✏️
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आप स्वभाव से शांतिप्रिय, कोमल हृदय, मृदुवाणी एवं सत्य वक्ता हैं। मूलांक 3 वाले साहसिक होते है। उनमे नेतृत्त्व करने की क्षमता है। आप में आध्यात्मिकता का भाव भरा होता है इसी कारण आप हमेशा सकारात्मक सोचते है। प्रत्येक स्थिति में अपने आप को खुश रखने का प्रयास करते हैं।पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार मूलांक 3 के जातक बहुत ही महत्वाकांक्षी प्रवृत्ति के होते हैं।आप के अंदर वो सारे गुण है जो एक प्रशासक में होता है।आप स्वयं अनुशासन प्रिय है और चाहते है कि जो भी आप से जुड़ा है वह अनुशासित हो। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार मूलांक 3 वाले व्यक्ति किसी का भी अहित नहीं करते हैं परन्तु अगर कोई इनका अहित करे तो कदापि नहीं छोड़ते बल्कि उनके लिए वे विषधर सर्प जैसे होते है।आप स्पष्ट वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। अपने कार्यों को लेकर हमेशा चौकन्ना रहते हैं। विवादों से दूर रहना आपको पसंद हैं। आपके विचारों में धार्मिकता कूट-कूट कर भरा होगा। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार धार्मिक कार्यो में आपकी रूचि रहती है। यदि धार्मिक संस्था से जुड़कर कोई कार्य करते है तो आपकी ख्याति कोने -कोने में फैलेगा साथ ही मान-सम्मान  में बृद्धि होगी। आप मानसिक रूप से पूर्ण विकसित होते हैं। आप अपने तर्क एवं ज्ञान शक्ति से दूसरों को प्रभावित करते हैं।
👉कमियाँ👈
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार अनुशासन के प्रति आपकी कठोरता आप के नीचे काम करने वालों के लिए समस्या बना देती है।आप खुद भी अनुशासित हैं और वही सबसे अपेक्षा रखते हैं।किसी भी नए कार्य को प्रारम्भ कर के उसे बीच में छोंड देना आपकी एक और समस्या है।आप हमेशा सफल होना चाहते हैं और यही पलायनवाद को जन्म देता है और आप सफलता हाथ न आने पर आप घोर निराशा प्राप्त करते हैं।अगर आप किसी से भावनात्मक तौर से आहात होते हैं, तब आप कठिन से कठिन बातों से उसपर हमला करते हैं और सत्य को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करने की कोशिश करते हैं।पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आप किसी का एहसान नहीं लेना चाहते।आप किसी की रोक-टोक पसंद नहीं करते और और स्वाभिमान आहात होने पर क्रोधित हो जाते हैं।सफलता न मिलने पर निराश हो जाना आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है।जोश में आकर अधिक व्यय कर देते है बाद में परेशान होते है यह ठीक नहीं है।अपने सिद्धान्तों से समझौता नही करने के कारण मानसिक रूप से परेशान होते है जिसके कारण परिवार के लोग भी असहज जीवन व्यतीत करते है।पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार तानाशाही प्रवृत्ति से दोस्त भी दुश्मन बन जाते है।आप स्वाभिमानी है अच्छी बात है परन्तु आपके अपने लिए न कि दूसरे लिए, इसे दूसरे के ऊपर न थोपे तो अच्छा रहेगा।
👪पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन👪
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार मूलांक तीन वाले लोगों के विचार परिवार में स्थित अन्य सदस्यो से किंचित भिन्न होता है यही कारण है कि कई बार आपको अपने परिवार में रहना पसन्द नहीं होता है। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार इसका मुख्य कारण है की आप एक सैद्धान्तिक व्यक्ति है और अपने सिद्धान्त से हटना नहीं चाहते है परिणामस्वरूप पारिवारिक अंतर्विरोध बना रहता है और यह अंतर्विरोध शादी के बाद सबके सामने आ जाता है और आप अपने परिवार से दूर रहने का फैसला कर बैठते है। आपका दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा। यदि आप शादी से पूर्व प्यार के चक्कर में फसे हुए है तो सावधान हो जाइये उस प्यार के कारण आपकी शादी देर से हो सकती है। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार इनके दो विवाह भी हो सकते हैं क्योंकि पहले विवाह से कई  बार हानि होती है। ज्येष्ठ संतान की खातिर परेशानी झेलनी पड़ती है।
🎓शिक्षा🎓
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार मूलांक 3 के लोग अध्ययनशील होते है। आप तो निरन्तर नए नए खोज में लगे रहते है। कुछ नया करना आपके स्वभाव में  ही है। पढाई के क्षेत्र में आप चाहते है की कोई ऐसा कार्य कर जो दुनिया के लिए मिशाल हो। आप अध्यनशील होकर लगातार अन्वेषण में लिप्त रहते हैं इसी कारण पढाई तथा लेखन जैसे बौद्धिक कार्यों के बल पर अपार सफलता प्राप्त करते हैं। आप जैसे लोग उच्च शिक्षा प्राप्त करते है। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार ऐसा जातक मेडिकल, इंजिनियरिंग तथा प्रबंधन शिक्षा में डिग्री प्राप्त करते है। आप 32 साल तक शिक्षा प्राप्त कर सकते है।16 से 19 और  22 से 25 साल में आपकी पढाई में बाधा आ सकती है।पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आप अपनी पूरी आत्मशक्ति से पढाई करते है तो शिक्षा के उच्च पद को हासिल करेंगे परन्तु जैसे ही पढ़ाई के प्रति उत्साह कम हुआ की आप धड़िम से नीचे पहुच जायेंगे। अतः अपने एनर्जी को लगातार बनाये रखे सफलता कदम चूमेगी।
📰कार्यक्षेत्र 📰
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आप नौकरी तथा व्यवसाय दोनों कार्य कर सकते है। आपके लिए निम्न कार्य में आगे बढ़ सकते है यथा लेक्चरर, टीचर, अधिवक्ता,जज तथा लेखक जैसे कार्यो में मिल का पत्थर साबित हो सकते है। आप कोई भी कार्य आत्मविश्वास, धैर्य एवं शांत चित होकर करते हैं। आप जैसे लोग सरकार में अहम् पद पर कार्य करते है। प्रशासनिक पदाधिकारी के रूप में कार्य करते है। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आप कवि, रेडियो संचालक, लेखक और संगीतकार भी होते है। बहुत से कवि, गायक, रेडियो संचालक मूलांक तीन के पाये गए हैं।
🔔सलाह🔔
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार मूलांक तीन वाले जातकों को सलाह दी जानी चाहिए कि वे हमेशा अपने गुरुदेव से आशीर्वाद ले और उनका स्नेह और आशीर्वाद से उच्च पदासीन होंगे।आपको वृहस्पति की उपासना करनी चाहिए। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार भगवान् विष्णु की उपासना करनी चाहिए और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से आर्थिक समृद्धि, मान सम्मान तथा यश की प्राप्ति होगी। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार आपके लिए शुभ दिशा ईशान कोण है।आपके लिए शुभ धातु सोना है। मूलांक 1एवं 9 वाले जातक आपके सच्चे मित्र हो सकते है। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार मूलांक 3 के जातकों के लिए शुभ रंग पीला, लाल तथा नारंगी हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।किसी कार्य को हल्के में लेना सबसे बड़ी कमजोरी है।आप हमेशा अपने घर के सबसे बड़ो का आशीर्वाद लेकर कोई कार्य प्रारम्भ करते है तो निश्चित ही सफलता मिलेगी। नियमित ध्यान योग करे इससे स्वास्थ्य एवम भाग्य दोनों की वृद्धि होगी।
😂रोग एवं उपचार😂
पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार पीठ तथा पैरों में दर्द, चर्मरोग, गले का रोग एवं लकवा होने का भय होता है। लहसुन व अदरक का उपयोग कम करे। गुलकंद खाए।पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार केले की जड़ को पीले रंग के धागे से लपेट कर गले में धारण करने से बृहस्पति का दुष्प्रभाव कम होता है। पंंडित अंजनी कुमार दाााधीच के अनुसार मूलांक तीन वाले जातकों को पुखराज पहनना कारगर साबित होगा। पुखराज के अलावा सोनेला, टाईगर आई और पीला रंग का हकीक भी पहन सकते हैं।
👓 विवेचना 👓
स्वामी- देवगुरु वृहस्पति
विशेष प्रभावी- 19 फरवरी से 21 मार्च के मध्य उत्पन्न जातक
शुभ तिथियां- 3, 12, 21, 30
सहायक तिथियां- 6, 15, 24 एवं 9, 18, 27
शुभ वर्ष- 3, 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66, 75
सहायक वर्ष- 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60, 69 एवं 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72
शुभ दिन- गुरुवार, शुक्रवार, मंगलवार
श्रेष्ठ दिन- गुरुवार
शुभ रंग- पीला, चमकीला, गुलाबी, हल्का जामुनी
उन्नत समय- मार्च, जून, सितम्बर, 19 फरवरी से 20 मार्च व 20 नवम्बर से 21 दिसम्बर
निर्बल समय- 7, 16, 23 तिथियां व जनवरी, जुलाई माह
शुभ रत्न- पीला पुखराज
प्रभावित अंग- जंघा और उसके आसपास के अवयव
रोग- चर्मरोग, रक्त दोष, वायु प्रकोप, मधुमेह, ज्वर, खांसी
देव- विष्णु
व्रत-पूर्णिमा
दान- पुखराज, पीला कपड़ा, पुस्तक, चने की दाल, नींबू, नारंगी, कांस्य पात्र, शंख, चीनी, घी, हल्दी
विवाह संबंध- 15 दिसम्बर से 14 जनवरी, 15 मार्च से 14 अप्रैल, 15 नवम्बर से 14 दिसम्बर व 15 अप्रैल से 14 मई के मध्य उत्पन्न जातक से
व्यवसाय- वस्त्र, भोजनालय, धर्मोपदेश, लेखन, संपादन, कानूनी सलाहकार, व्याख्याता, वकील, क्लर्क, चिकित्सा कार्य, दलाली, आढ़त, विज्ञापन, अभिनय, जल जहाज कार्य, पुलिस विभाग, दार्शनिक, प्रबंधन व जलीय व्यापार
शुभ दिशा- दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, उत्तर- पश्चिम
अशुभ दिशा- ईशान कोण
धातु- सुवर्ण।
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पितर दोष

🌻पितृश्राप दोष की शान्ति और उपाय🌻 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पितृश्राप दोष एक अदृश्य दोष है।यह दोष जब घर के पितर अपने वंशजों के द्वारा अंत्येष्टि कर्म में हुई किसी त्रुटि के कारण, श्राद्ध कर्म ना करने से,किसी परिजन द्वारा की गयी गलती से,अपने वंशजो के आचरण से पितर रुष्ट होने के बहुत से कारण होती है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यह दोष तब भी लागु होता है जब घर के परिजनों के द्वारा श्रद्धापूर्वक किसी भी अवसर पर याद नहीं करते हैं। और ना ही उन्हें कोई प्यार, स्नेह और आदर देते है। उनके प्रति अपने ऋण को चुकाने का प्रयास ही नहीं करते हैं तो ये पवित्र पितृ आत्माएं दुखी होकर अपने वंशजों को श्राप दे देती हैं, जिसे "पितृश्राप दोष" कहा जाता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पितृ दोष जन्म पत्रिका में लग्न ,पंचम ,अष्टम और द्वादश भाव से पितृदोष का विचार किया जाता है। पितृ दोष में ग्रहों में मुख्य रूप से सूर्य ,चन्द्रमा ,गुरु ,शनि और राहू -केतु की स्थितियों से पितृ दोष का विचार किया जाता है।इनमें से भी गुरु ,शनि और राहु की भूमिका प्रत्येक पितृ दोष में महत्वपूर्ण होती है इनमें सूर्य से पिता या पितामह, चन्द्रमा से माता या मातामह , मंगल से भ्राता या भगिनी और शुक्र से पत्नी का विचार किया जाता है।
🙏पितृश्राप दोष का प्रभाव🙏
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ये दोष पितरों द्वारा रुष्ट होने के कारण होती है इसका परिणाम जातक को मानसिक अवसाद, व्यापार में नुकसान, परिश्रम के अनुसार फल न मिलन, वैवाहिक जीवन में समस्याएं, कैरिअर में समस्याओं के रुप में प्रदर्शित होती है या संक्षिप्त में कहें तो जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्ति और उसके परिवार को बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
✍पितृश्राप दोष के उपाय✍
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पितृश्राप दोष के निवारण के उपाय निम्नलिखित है जिनके कारण इस दोष को कुछ हद तक कम किया जा सकता है - 
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार घर के सभी बड़े बुजर्ग को हमेशा प्रेम, सम्मान,और पूर्ण अधिकार दिया जाए। उनका आशीर्वाद लेने, उन्हे पूर्ण रूप से प्रसन्न एवं संतुष्ट रखने से भी निश्चित रूप से पित्र दोष में लाभ मिलता है। 
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अपने ज्ञात अज्ञात पूर्वजो के प्रति ईश्वर उपासना के बाद उनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखने उनसे अपनी जाने अनजाने में की गयी भूलों की क्षमा माँगने से भी पित्र प्रसन्न होते है। 
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अमावस्या को दूध की खीर बनाकर पितरों को अर्पित करने के बाद किसी ब्राह्मण को या भूखे व्यक्ति को खिलाने से भी इस दोष में कमी होती है ।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अमावस्या के दिन यदि कोई व्यक्ति पीपल के पेड़ पर मीठा जल मिष्ठान एवं जनेऊ अर्पित करते हुये “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाएं नमः” मंत्र का जाप करते हुए कम से कम सात या 108 परिक्रमा करे तत्पश्चात् अपने अपराधों एवं त्रुटियों के लिये क्षमा मांगे तो पितृ दोष से उत्पन्न समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता है।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रत्येक अमावस्या को गाय को पांच फल भी खिलाने चाहिए।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अमावस्या को बबूल के पेड़ पर संध्या के समय भोजन रखने से भी पित्तर प्रसन्न होते है।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन शिव लिंग पर जल चढ़ाकर महामृत्यूंजय का जाप करना चाहिए ।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार माँ काली की नियमित उपासना से भी पितृ दोष में लाभ मिलता है।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप घर में भोजन बनने पर सर्वप्रथम पित्तरों के नाम की खाने की थाली निकालकर गाय को खिलाने से उस घर पर पित्तरों का सदैव आशीर्वाद रहता है घर के मुखियां को भी चाहिए कि वह भी अपनी थाली से पहला ग्रास पित्तरों को नमन करते हुये कौओं के लिये अलग निकालकर उसे खिला दे।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पितरों के निमित घर में दीपक, अगरबत्ती को प्रात:काल पूजा के समय ऊँ पितृय नम: कम से कम 21 बार उच्चारण करें।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार श्रीमद भागवत गीता का ग्यारहवां अध्याय का पाठ करें।
❃पित्र पक्ष अथवा अमावस्या के दिन पितरों को ध्यान करके सामर्थ्यनुसार ब्राह्मण पूजन के बाद गरीबों को दान करने से पितर खुश होते हैं। ब्राह्मण के माध्यम से पितृपक्ष में दिये हुऐ दान-पुण्य का फल दिवंगत पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। 
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार पिंडदान, तिलांजली और ब्राह्मणों को पूर्ण श्रद्धा से भोजन कराने से जीवन में सभी सांसारिक सुख और भोग प्राप्त होता है। 
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शनिवार के दिन पीपल की जड़ में गंगा जल, काला तिल चढाकर आटे के द्वारा निर्मित चौमुखी दिपक जलाए और ओम् पिप्लाद मुनि मंत्र का जाप करते हुए पिपल की परिक्रमा करे। पीपल और बरगद के वृ्क्ष की पूजा करने से पितृ दोष की शान्ति होती है ।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अपने पूर्वजो के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने उन्हे पूर्ण रूप से संतुष्ट करने उनको प्रसन्न रखने वाले व्यक्ति पर हमेशा दैवी कृपा बनी रहती है।उसके कार्यों में कोई भी अवरोध नही होता है।उसकी सर्वत्र जय जयकार होती है ।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार "ओम् नमो भगवते वासुदेवाय" की एक माला का नित्य जाप करें। 
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जब भी किसी तीर्थ पर जाएं तो अपने पितरों के लिए तीन बार अंजलि में जल से उनका तर्पण अवश्य ही करें । 
 ❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पितृपक्ष मे अपने पितरों की याद मे वृक्ष, विशेषकर पीपल लगाकर, उसकी पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने से भी पितृदोष समाप्त होता है ।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पितृ सूक्त का पाठ करने से पितृदोष की शांति होती है। इस पाठ को शाम के समय तेल का दीपक जलाकर करना चाहिए।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर किसी विशेष कामना को लेकर किसी परिजन की आत्मा पितृ दोष उत्पन्न करती है तो तो ऐसी स्थिति में मोह को त्याग कर उसकी सदगति के लिए "गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र " का पाठ करना चाहिए।
❃पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी गरीब की कन्या के विवाह में गुप्त रूप से अथवा प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग करना चाहिए।लेकिन ये सहयोग पूरे दिल से होना चाहिए ,केवल दिखावे या अपनी बढ़ाई कराने के लिए नहीं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी भी नदी के किनारे जहाँ शिववास भी हो वहाँ पर त्रिपिंडि श्राद्धकर्म पुजा करके भी पितृश्राप दोष का निवारण होता है। 
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Thursday, 23 July 2020

आग्नेय मुखी भवन या भुखंड का वास्तु

आग्नेयमुखी भवन अथवा भूखण्ड का वास्तु -
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जिस भवन के मुख्य द्वार के दक्षिण-पूर्व दिशा जिसे आग्नेय दिशा भी कहा जाता है उस दिशा की ओर मार्ग होता है वह आग्नेयमुखी भवन कहलाते है। आग्नेय का मतलब होता है आग का स्थान।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) दिशा के स्वामी भगवान श्री गणेश तथा इस दिशा का प्रतिनिधि ग्रह शुक्र ग्रह है। इस तरह के भवन का शुभ अशुभ परिणाम का प्रभाव सीधे घर की स्त्रियों, बच्चो पर ज्यादा पड़ता है ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस दिशा के भवन में निवास करने वाले लोगो को आर्थिक एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का ज्यादा सामना करना पड़ता है और इस दिशा के भवन में कलह भी ज्यादा होती है। लेकिन यदि वास्तु के सिद्दांतो या उपायों का पालन किया जाय तो यह भवन भी अवश्य ही शुभ साबित होते है। वास्तु के कुछ उपायों का वर्णन निम्नलिखित हैं-
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा के भवन के मुख्य द्वार पर सिद्धि विनायक गणेश जी की मूर्ति अन्दर बाहर दोनों तरफ से अवश्य लगाये।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस दिशा के भवन में यदि आग्नेय कोण दक्षिण की तरफ ज्यादा बढ़ा हो तो शत्रुता एवं घर की स्त्रीयों को रोग की सम्भावना होती है। इसके विपरीत भवन का पूर्व, ईशान की तरफ ज्यादा बढ़ा होना शुभ होता है ।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस तरह के भवन में मुख्य द्वार अग्नेय और दक्षिण की जगह पूर्व की तरफ अवश्य ही होना चाहिए । यदि किसी जरुरी कारणवश पूर्व की तरफ मुख्य द्वार संभव ना हो तो भी पूर्व में एक द्वार अवश्य ही बनाना चाहिए एवं इसी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए ।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा के भवन में मुख्य द्वार नैऋत्य में भी कतई न बनाएं। इससे चोरी व धन हानि का सदैव भय बना रहता है।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा को बंद न करें, इस दिशा में छोटा दरवाजा अथवा खिड़की अवश्य ही रखें। इस दिशा को बंद करने से विकास में गतिरोध आ जाता है और आकस्मिक दुर्घटनाओं की सम्भावना भी रहती है।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस तरह के भवन में चारदीवारी का निर्माण उत्तर, ईशान एवं पूर्व से ऊँचा लेकिन दक्षिण और नैत्रत्य से नीचा होना चाहिए। उत्तर, ईशान एवं पूर्व में रिक्त स्थान ज्यादा से ज्यादा छोड़ना चाहिए लेकिन दक्षिण और नैत्रत्य में रिक्त स्थान नहीं होना चाहिए ।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा अग्नि की दिशा है अत: इस दिशा में रसोई घर होना हर तरह से शुभ होता है । चूँकि घर की स्त्रियों का काफी समय रसोई में गुजरता है अत: आग्नेय दिशा में रसोई होने पर ना केवल घर की स्त्रियों का वरन घर के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक रहता है।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  घर के सभी सदस्यो में प्रेम भावना भी बनी रहेगी लेकिन किचन किसी-भी प्रकार से गोल न हो वरन उसे वर्गाकार रखना चाहिए, अन्यथा मकान के निवासीयों का सुख चेन बाधित रह सकता है।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस तरह के भवन के सामने की ओर अर्थात आग्नेय कोण की फर्श यदि नीची हुई या इस दिशा में सेफ्टिक टेंक या गड्डा होने घर के मालिक या उसकी संतान को दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा ईशान (उत्तर-पूर्व) और वायव्य (पश्चिम-उत्तर) से ऊँची होनी चाहिए लेकिन यह नैऋत्य(पश्चिम-दक्षिण) से अवश्य ही नीची होनी चाहिए। इससे यश की प्राप्ति होती है।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस तरह के भवन में बिजली के मीटर, जनरेटर, बिजली का खम्भा आदि की स्थापना अग्नेय कोण में ही करनी चाहिए ।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा के भवन में सामने की तरफ अर्थात अग्नेय दिशा में कुआं, बोरिंग नल आदि का निर्माण भूलकर भी ना करवाएं। ऐसा करने से घर की स्त्री व संतान को कष्ट होने की सम्भावना रहती है।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा के भवन के ईशान में उत्तर की ओर सैप्टिक टैंक एवं ईशान दिशा में पूर्व की ओर कुआं बनाना शुभ माना जाता है।
✿ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आग्नेय दिशा के भवन के सामने की ओर अर्थात अग्नि कोण में बाथरूम बहुत ही अशुभ होता है। इस दिशा में बाथरूम होने पर पत्नी हावी रहती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार घर में कलह होगी और सास बहू में सदैव विरोध रहने की सम्भावना होगी।
अत: यदि आप अपने आग्नेयमुखी भवन का निर्माण यहाँ पर बताये गए वास्तु के सिद्दांतों के अनुसार करेंगे तो आप निश्चय ही सुखी जीवन व्यतीत कर पाएंगे।
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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केतु के उपाय

केतु की शान्ति एवं उपाय
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिषशास्त्र में केतु को अशुभ ग्रह माना जाता है।अत: जिनकी कुण्डली में केतु की दशा चलती है उसे अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। केतु रात की ‍नींद हराम कर देता है।धन का अनावश्यक अपव्यय करा देता है। पेशाब की बीमारी, जोड़ों का दर्द, सन्तान उत्पति में रुकावट और गृहकलह का कारण भी केतु है। बच्चों से संबंधित परेशानी, बुरी हवा या अचानक धोखा होने का खतरा भी केतु के अशुम होने के कारण बना रहता है।इसकी दशा होने पर शांति हेतु जो उपाय जातक कर सकता हैं उनमें दान का स्थान प्रथम है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार केतु की शांती के उपाय निम्नलिखित हैं -
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार केतु से पीड़ित व्यक्ति को बकरे का दान करना चाहिए।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कम्बल, लोहे के बने हथियार, तिल, भूरे रंग की वस्तु केतु की दशा में दान करने से केतु का दुष्प्रभाव कम होता है। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गाय की बछिया और केतु से सम्बन्धित रत्न लहसुनिया का दान भी उत्तम होता है।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सोमवार के दिन दुध, जल मे काले और सफेद तिल मिलाकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करे तथा 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मंगलवार के दिन किसी गरीब मजदूर नेत्रहीन, कोढ़ी, अपंग को पकौड़ी खिलाने तथा दुरंगा कपड़े का दान करने से केतू ग्रह शान्त होता है। बजरंग बली की पूजा आराधना करें।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गणपति की आराधना करने पर भी केतु का प्रभाव क्षीण होता है।अतः भगवान गणेश की पूजा करें। गणेश के द्वादश नाम स्तोत्र का पाठ करें। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी भी रविवार या बुधवार के दिन कोयले के आठ टुकड़े, कीले और ब्लेड को एक कुल्हड़ मे डाल कर उस कुल्हड़ को काले और सफेद कपड़े से बांध कर बहते पानी में प्रवाहित करें। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर केतु की दशा का फल संतान को भुगतना पड़ रहा है तो मंदिर में कम्बल का दान करना चाहिए।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार दुरंगे कुत्तों या गाय को खाने का सामग्री दें। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ब्राह्मणों को भात खिलायें इससे भी केतु की दशा शांत होगी। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी को अपने मन की बात नहीं बताएं एवं बुजुर्गों एवं संतों की सेवा करें यह केतु की दशा में राहत प्रदान करता है। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार काले या सफेद तिल को काले वस्त्र में बांधकर बहते पानी में प्रवाहित करें।
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पानी में लोबान मिलाकर स्नान करें।
∆पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार काले रंग का रुमाल अपने छोटे भाई या मित्र को उपहार में दें। 
∆  पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार केतु के मूल मंत्र  'ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम:' का रात्रि में 40 दिन में 18,000 बार बुधवार को जप करें। कुशा का आसन उसके ऊपर लाल वस्त्र बिछाकर लाल वस्त्र भी धारण करके दक्षिण दिशा के तरफ मुख करके तांबे के कटोरी में जल भरकर जाप आरम्भ करें तत्पश्चात जाप समाप्त होने पर जल का पान कर लें। 
∆ पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कपिला गाय, दुंरगा कंबल, लहसुनिया, लोहा, तिल, तेल, सप्तधान्य, शस्त्र, बकरा, नारियल, उड़द आदि का दान करने से केतु ग्रह की शांति होती है। 
Pandit Anjani kumar Dadhich
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मूलांक २

मूलांक (2)के बारे में 


 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अंकशास्त्र में मूलांक 2  का विशेष महत्त्व है। यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 और 29 को  हुआ है तो आपका मूलांक 2 होगा और आप जीवनभर दो अंक से किसी न किसी रूप में अवश्य ही प्रभावित होते रहेंगे।     पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक दो के लिए निर्धारित स्वामी ग्रह चंद्रमा है। चंद्रमा मन का कारक है। "चंद्रमा मनसो जातः।" अर्थात चन्द्रमा हमारे अंतर्मन में उठाने वाले सुख -दुःख की भावनाओं का संचालन करता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यही कारण है की कुंडली में अशुभ चंद्रमा हमें मन को व्यथित और बात-बात में परेशान करता है। मानसिक बीमारियां तथा मन के उलझन का कारण भी तो चंद्रमा ही है। हमारे लिए क्या अच्छा है और क्या ख़राब है इसका प्रथम फैसला तो मन ही करता है हां यह भी सही है कि यदि आपके कुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में है आपका मन सुविचारो को जन्म देता है। परन्तु यदि चंद्रमा अशुभ स्थिति  में है तो कुविचारों, कुदृष्टि को जन्म देता है इसमें कोई संदेह नहीं है।अतः यह स्पष्ट है की चंद्रमा की शुभता और अशुभता हमारे जीवन यात्रा को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
चारित्रिक विशेषताएं
आपका चन्द्रमा जैसा शीतल स्वभाव और जैसे चन्द्रमा हृदयता और मन का प्रतीक होता है, वैसे ही आप मन के धनी है। और बौद्धिक कार्यों में ज्यादा सफल साबित होते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप मृदुभाषी, कल्पनाशील, शांत और कोमल स्वाभाव के हैं। आप अन्वेषक हैं परन्तु मूलांक एक के जैसे उसे क्रियान्वित नहीं कर पाते। आपका बुद्धि चातुर्य अच्छा रहता है और इसी वजह से आप दूसरों से ज्यादा सम्मान प्राप्त करते हैं और लोकप्रिय बन जाते हैं।आप विचारों और सिद्धांतों के धनी हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं।आप कठिन परिस्थितियों में भी अपना कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न कर पाते है और दूसरों से बाजी मार लेते हैं।मूलांक दो के जातक वफादार होते हैं अगर वे कहते हैं आप को प्यार करते हैं तो आप उनपर विश्वास कर सकते हैं। ये भावुक स्वभाव के अच्छे मित्र साबित होते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  दूसरों के दुःख-दर्द की इनमे अच्छी समझ होती है। इनमें दूसरों के मन की स्थिति जान लेने की क्षमता होती है। दूसरों के लिए भी संवेदनशील होते हैं और अच्छे श्रोता होते हैं।आप लोग मित्र बनाने मे सक्षम हैं, सौंदर्य प्रेमी भी होते है आपमें सौंदर्य-बोध कि अच्छी समझ होती हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मृदु-भाषी और अच्छी छवि के कारण इनमें राजनयिक या राजनेता बनने के गुण होते हैं और अपने प्रतिद्वंदियों के लिए एक प्रबल दावेदार साबित होते हैं।मूलांक दो के जातक निश्छल, निष्कपट, सत्यवादी और वफादार होते हैं।आप लोग अकेले रहना पसंद नहीं करते और आपको कोई न कोई साथ में चाहिए रहता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी भी व्यक्ति की बुराई में भी अच्छाई ढूंढ लेना आपके लिए प्लस पॉइंट है।आप की प्रवृत्ति सहज, सहृदय, सुशील और मृदुभाषी होती है।आप के अंदर दुसरे के अंतर्मन को शीघ्र ही जान लेते है।आप में स्पष्ट बोलने की शक्ति है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सामाजिक कार्यो से आपका लगाव रहता है सेवा भावना से काम करने में आप अपने आप को गौरवान्वित महसुस करते हैं।  

प्राकृतिक स्वभाव
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार दो मूलांक वाले व्यक्ति का मन अस्थिर तथा चंचल  होता हैं। आप निरन्तर कुछ पाने के लिए कार्य करते रहते है। चाहे कोई भी विषय हो आप उसके मूल तक जाने का प्रयास करते है परन्तु सातत्य के अभाव में बीच में छोड़ देते है।  हमेशा अपने मन रुपी बुद्धि का इस्तेमाल करना आपकी फिदरत है ऐसा जान पड़ता है। आप कल्पना शक्ति के धनी है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  तन से ज्यादा आपका मन काम करता है। आप मन और बुद्धि का इस्तेमाल हर समय करते है इसलिए आप बुद्धिमान की श्रेणी में गिने जाते हैं। इस मूलांक के व्यक्ति कलाप्रिय तथा कलाप्रेमी होते हैं। आप सरल, सुशील, सभ्य, सहृदय तथा मृदुभाषी होते हैं। यदि कहा जाए कि भावुकता आप की पहचान है तो गलत नहीं होगा। आप  कोमल स्वभाव के होते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक दो  वाले लोग सहिष्णु, कल्पनाशील, कलात्मक प्रवृत्ति के और रोमांटिक होते है। आपकी बुद्धि चातुर्य काफी अच्छी है तथा बुद्धि विवेक के कार्यों में दूसरों से आगे निकल जाते हैं। एक लोकप्रिय व्यक्ति होते हैं तथा स्वयं की मेहनत से अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्राप्त कर लेते हैं।

कमियाँ
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप लोग किसी कार्य को लम्बे समय तक कर पाने में सक्षम नहीं होते।जैसे चन्द्रमा की कला बदलती रहती है उसी प्रकार से आपका विचार, मनः-स्तिथि और योजना बदलती रहती है।अस्तिरथा आपकी बड़ी योजनाओं के विफल होने का मुख्य कारण बनती है।आप में एकाग्रता की कमी और आत्म-विश्वास की कमी आपको निराशा के गर्त में ढ़केल देता है।अगर मन मुताबिक माहौल न मिले तो आप जल्दी निराश हो जाते हैं और अपना स्वाभाविक कार्य-संपादन करने में भी असफल हो जाते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अधिक संवेदनशीलता आपको भावुक और शर्मीला बनता है।इसी स्वाभाव से आप बहुत सी बातें सबको बता नहीं पाते अपने विचार रख नहीं पाते और इससे आपको समझ पाने में काफी समय लगता है।आपके विचार और योगदान इसी वजह से सामने नहीं आ पाते।दूसरों के दुःख दर्द से परेशान होना आपके स्वभाव की कमजोरी है। ऐसे में धोखा खाना भी संभव है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  मूलांक दो द्वैतवाद का प्रतीक है। आप जो हैं उसी छवि में दिखें या बने रहे। आप जो नहीं हैं आप उसे दिखाने का कोई प्रयास न करें। आप खुद को जानते हैं।दोहरे व्यक्तित्व से आपका जीवन कठिन बना सकता है, इससे बचें।आप जल्दी अनिर्णय की स्तिथि में पहुंच जाते है और आत्म-विश्वास की कमी उसमें आग में घी का कार्य करता है।अपने विचारों का सम्मान करें और अपनी ऊपर विश्वास रखें। 

पारिवारिक तथा दाम्पत्य जीवन 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपके पारिवारिक जीवन में कोई न कोई परेशानी बनी रहेगी जिसका मुख्य कारण होगा उचित समय पर उचित फैसला न लेना। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अक्सर यह देखा गया है की मूलांक २ वाले जातक का जन्म स्थान जरूर छूट जाता  है। ऐसे लोग अपने संयुक्त परिवार से अलग हो जाते है।आपका दाम्पत्य जीवन में भी दिक्कत आती है। कम उम्र में बहुत कम ही शादी होते हुए देखा गया है। आप लव मैरिज भी कर सकते है। शादी के तीन-साल बाद दाम्पत्य जीवन में समस्या आती है।



शिक्षा 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप शैक्षणिक योग्यता उत्तम होगा। दो मूलांक वाले व्यक्ति की पढाई में व्यवधान आते हुए देखा गया है कई बार पढाई बीच में ही छूट जाती है। इसका मुख्य कारण है एकाग्रता और निरन्तरता का अभाव होना। आप कमाने के चक्कर में पढाई छोड़ सकते है। इक्कीसवाँ साल पढाई के लिए महत्त्वपूर्ण होगा। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार साहित्य संगीत की पढाई में आपकी अधिक रूचि होनी चाहिए। यदि आप पेंटिंग का कार्य करते है तो सफलता प्राप्त कर सकते है।

कार्यक्षेत्र 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आप नौकरी और व्यापार दोनों तरह के काम कर सकते है। आप को वैसे कार्य में विशेष सफलता मिलेगी जिसमे कूटनीति का प्रयोग होता हो अर्थात आप एक अच्छे सलाहकार हो सकते है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक  2 वाले लोग कवि, अभिनेता, अध्यापक, लेखक, रिपोर्टर पब्लिशर इत्यादि का कार्य करे तो अपार सफलता मिल सकती है अथवा आप एक अच्छे एजेंट की भूमिका निभा सकते है।   

स्वास्थ्य
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक २ वाले जातक कफ प्रकृति के होते है। आप को अपने पेट का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सर्दी-जुकाम, गैस, ब्लड प्रेशर तथा हृदयाघात की बिमारी हो सकती है। बाएँ आँख में परेशानी आ सकती है। जीवन काल में कोई न कोई ऑपरेशन की स्थिति बनेगी और ऑपरेशन कराना भी पड़ेगा। 40 वर्ष के बाद निरन्तर  जांच कराते रहना चाहिए।

कमजोरी 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक दो वाले जातक कार्य में एकाग्रता और निरन्तरता का अभाव होने से बीच में ही कार्य छोड़ने देते है।आत्मविश्वास कि कमी होती है।कार्य के प्रति उतावलापन बहुत होता है परन्तु निरन्तरता नहीं।अत्यधिक भावुक एवम संवेदनशील होते हैं। यही कारण है की अन्य के दु:ख दर्द से बहुत जल्द परेशान हो जाते है।आप बहुत जल्द निराश हो जाते है और स्वभाव से शंकालु होते हैं।
सलाह 

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मूलांक दो वाले जातक को चंद्रमा तथा शिव की उपासना करनी चाहिए। श्रावण मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना चाहिए। शिव चालीसा का पाठ करने से आर्थिक समृद्धि तथा मान संम्मान व यश की प्राप्ति होगी।आपके लिए शुभ दिशा वायव्य तथा पश्चिम है।आपके लिए शुभ धातु चांदी है।आपके लिए 1, 9 मूलांक वाले जातक सच्चे मित्र होंगे।आपके लिए शुभ रंग सफेद , पीला, तथा  हरा हैं। यदि आप अपने ऑफिस तथा शयनकक्ष के पर्दे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग का प्रयोग निर्दिष्ट शुभ रंग में करे तो भाग्य आपका साथ देगा।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  किसी कार्य को हल्के में लेना सबसे बड़ी कमजोरी है।आप हमेशा अपने माता का आशीर्वाद लेकर ही कोई कार्य प्रारम्भ करे तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।गो ग्रास और गो सेवा करना आपके स्वास्थ्य परिवार तथा कार्यक्षेत्र के लिए वरदान है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपमें आत्मविश्वास कि कमी होती है अपने आत्मविशवास को बढ़ाये। कार्य में एकाग्रता और निरन्तरता का अभाव होने से आप बीच में ही कार्य छोड़ने देते है। अतः नियमित ध्यान योग करके एकाग्रता बढ़ाये। कोई कार्य प्रारम्भ करने से पहले पूरा करने के लिए समय का निर्धारण कर ले।आप अत्यधिक भावुक एवम संवेदनशील होते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यही कारण है की अन्य के दु:ख दर्द से बहुत जल्द परेशान हो जाते है यह उचित नहीं है।आप बहुत जल्द निराश हो जाते है।आप अपनी शक करने की आदत छोड़ दे तो बहुत अच्छा रहेगा। 

विवेचना

स्वामी ग्रह - चंद्रमा। आराध्य देव - शिवजी।

विशेष प्रभावी - 20 जुलाई से 21 अगस्त के मध्य जन्म लेने वाले जातक

अत्यंत शुभ तिथियां - 2, 11, 20, 29
मध्यम फलदायी तिथियां : 4, 13, 22 31 एवं 3, 16, 25
सर्वोत्तम वर्ष - 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65
मध्यम वर्ष - 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67 एवं 7, 16, 25, 34, 43, 52, 61, 70
शुभ दिन - सोमवार, शुक्रवार, रविवार
सर्वोत्तम दिन - सोमवार
शुभ रंग - सफेद, कर्पूरी, धूप-छांव, अंगूरी तथा हल्का हरा रंग
अशुभ रंग - लाल, काला, नीला
शुभ रत्न - मोती, चंद्रकांता मणि, स्फटिक, दूधिया
प्रभावित अंग - फेफड़े, छाती, हृदय, वक्षस्थल, जिह्वा, तालु, रक्त संचार
रोग - हृदय और फेफड़े संबंधी, अपच, डिप्थीरिया,निद्रा, अतिसार, जीभ पर छाले, रक्ताल्पता, गुर्दे संबंधी रोग, जलोदर, आंत रोग, कुंठा, उद्वेग
विवाह शुभता - 15 मई से 14 जून, 15 अक्टूबर से 14 नवम्बर, 15 फरवरी से 14 मार्च के मध्य उत्पन्न जातक से
शुभ मास - फरवरी, अप्रैल, जून, सितम्बर, नवम्बर
व्यवसाय - द्रव्य पदार्थ, तैतीय कार्य, पर्यटन, एजेंट, फल-फूल, दूध-दही, संपादन, लेखन, अभिनय, नृत्य, ठेकेदारी, चिकित्सा, रत्नों का व्यवसाय, दंत चिकित्सा, पशुपालन
शुभ दिशा - उत्तर, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम
अशुभ दिशा - दक्षिण-पूर्व, पश्चिम
दान पदार्थ - मोती, स्वर्ण, चांदी, कपूर, श्वेत वस्तु, पुस्तक, धार्मिक ग्रंथ, मिश्री, दूध, दही, श्वेत पुष्प, शंख, कागज व चीनी
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मेष राशि

मेष राशि के बारे में

मेष-(अक्षर तालिका-चू,चे,चो,ला,ली,लू,ले,लो,आ) पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष में बारह राशियाँ  होती है और जिसमें से सबसे प्रथम राशि मेष राशि होती है।मेष राशि का प्रतीक चिन्ह मेढा होता है जिसे आम बोलचाल की भाषा में भेड़ा कहा जाता है।इसके प्रभाव स्वरूप वाले जातक के स्वभाव में मेढे वाले गुण देखे जा सकते हैं। मेष राशि का स्वामी ग्रह मंगल है और यह एक अग्नि तत्व राशि है।मंगल से प्रभावित होने पर इस राशि के लोगों में  क्रूरता और दबंगई का भाव अवश्य होता है।
∆स्वभाविक विशेषताएँ ∆
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि वाले जातक प्रायः चंचल स्वाभाव के, सदाचारी परन्तु क्रोधी स्वाभाव के होते हैं। अपने काम के प्रति पूर्ण समर्पित रहने वाले होते है और अपने लक्ष्य को किसी भी प्रकार से हासिल कर लेने की कोशिश आप में रहते है। अपने लक्ष्य को पाने में आप निरंतर प्रयासरत रहते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेंष राशि वाले जातकों में  स्थिरता की कमी होती है। एक स्थान पर टिक कर बैठना आपको नहीं आता है सदैव व्यस्त रहते हैं मेष राशि वाले अपने कर्म क्षेत्र में भी बदलाव करते रहते हैं।अचानक या अनायास होने वाले फैसलों या बदलावों के लिए तैयार रहते हैं।कभी-कभी बिना विचार,मनन किए बिना भी शीघ्रता से कोई काम करना शुरू कर सकते हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि एक चर राशि है इसलिए अधिकतर समय आप गतिशील रहते हैं।मेष राशि वाले जातक  बड़ी से बड़ी चुनौती से भी नहीं घबराते बल्कि कोई भी चुनौती को अच्छे से निपटा देते हैं। आपको नेतृत्व करने की चाह रहती है एवं प्रत्येक कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेना आपको अच्छा लगता है। मेष राशि वाले जातक सभी स्थानों में सबसे आगे रहना चाहते हैं, खेल कूद में भाग लेना पसंद होता है इसी के साथ साथ नए-नए परिधानों को पहनने का शौक भी हो सकता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि वाले जातक शारीरिक श्रम करने से पीछे नहीं हटते हैं।साहस, दृढ़ता, संकल्पशक्ति, उत्साह व आत्मविश्वास आपकी अन्य विशेषताएं होती हैं।मंगल का प्रभाव होने के कारण क्रोध जल्दी आता है पर उतनी ही जल्दी चला भी जाता है।इनकी तर्कशक्ति अच्छी होती है एवंविचार स्वतंत्र होते हैं।मेष राशि वाले जातक को पसीना अधिक निकलता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिषचक्र में प्रथम राशि होने के कारण लगभग हमेशा से ही मेष राशि की उपस्थिति कुछ ऊर्जावान और उग्र शुरुआत को इंगित करती है। वे लगातार गतिशील,तेज और प्रतियोगिता के लिए देख रहे होते हैं। वे हर चीज में हमेशा से आगे रहते हैं - काम से लेकर सामाजिक समारोहों तक।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इसके स्वामी ग्रह मंगल की कृपा से मेष राशि सबसे सक्रिय राशियों में से एक है। मेष राशि में पैदा हुए लोग व्यक्तिगत और आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर की खोज पर जोर देने के लिए बने हैं। यह इस अवतार की सबसे बड़ी विशेषता है। इनका उग्र स्वभाव उनके उत्कृष्ट संगठनात्मक कौशल को प्रभावित करता है। जब वे अधीर,आक्रामक हो कर दूसरों पर गुस्सा उतारते हैं तो चुनौतियां बढ़ जाती हैं।पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष सिर को नियंत्रित करता है और सिर से ही आगे बढ़ता है।वास्तव में आगे झुकते हुए गति और ध्यान केन्द्रित करने के लिए अक्सर सिर को पहले चलाता है। वे स्वाभाविक रूप से बहादुर होते हैं और परीक्षण एवं जोखिम से शायद ही डरते हैं। भले ही उनकी उम्र कितनी भी हो, उनमें युवा शक्ति और ऊर्जा रहती है और वे रिकार्ड समय में कार्य पूरा करते हैं। खुद के साथ समायोजित करने से वे सबसे बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

∆प्यार,परिवार और मित्र∆
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अग्नि राशि से संबंधित होने के कारण मेष राशि वाले जातक प्रेम पसंद करते हैं और वे प्रेम संबंध में पहल करेंगे। जब मेष राशि के जातक प्यार में पड़ जाते हैं, तो बिना कोई सोच विचार किये वे सीधे अपने प्यार को व्यक्त कर देते हैं। प्यार में मेष राशि के जातक अपनी प्रेमिका पर उदार स्नेह, कभी-कभी अतिरिक्त स्नेह की बौछार भी कर सकते हैं। मेष राशि वाले जातक बहुत ऊर्जावान,भावुक होते हैं और उन्हें रोमांच पसंद है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि जातक के साथ रिश्ता मजबूत और लंबे समय तक चल सकता है।मेष राशि वाले जातक लगातार गतिशील रहते हैं, इसलिए इस राशि के लिए गतिविधि मुख्य शब्द है। जब मित्रों की बात आती है, जितने अधिक भिन्न मित्र हो बेहतर है। इस राशि में पैदा हुए लोग आसानी से संवाद शुरू कर लेते हैं, जीवन में आगे बढ़ते हुए संबंधों और परिचितों की एक अविश्वसनीय संख्या प्राप्त करते हैं।फिर भी लंबे समय तक और असली मित्र पूरी तरह से अलग होते हैं। केवल ऐसे लोग उनके साथ रहेंगे जो ऊर्जावान हैं और लंबे समय तक साथ चलने के लिए इच्छुक हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि के जातक अपने परिवार के साथ अक्सर संपर्क में नहीं रहते हैं लेकिन वे उनके दिल में हमेशा होते हैं। आप हमेशा मेष राशि से एक सीधे और ईमानदार दृष्टिकोण की उम्मीद कर सकते हैं।  

∆कैरियर एवं पैसा∆
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि के होने से आप सेना, पुलिस, सुरक्षाबल,खिलाडी़, सर्जन, अस्त्र-शस्त्र से जुड़े कार्य अथवा धातु से संबंधित कार्य कर सकते हैं। प्रशासनिक विभाग में कार्य करने वाला, वन्य विभाग में कार्यरत, चिकित्सा में, नेता के रूप में कार्यरत हो सकते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सबसे उपयुक्त क्षेत्र या व्यवसाय अनुसंधान, यांत्रिकी, एथलेटिक्स और खेल, अग्निशमन, साहसिक यात्रा, इंजीनियरिंग, मनोविज्ञान, और सबसे महत्वपूर्ण बात उद्यमिता। बिक्री एजेंट, डीलर, प्रबंधक, संचालक और कंपनी के मालिक के रूप में उनका भव्य करियर हो सकता है।

∆गुण∆
मेष राशि वाले खाने और खिलाने के भी शौक़ीन होते हैं साथ साथ अच्छा खाना बनाना भी इनका शौक होता है। इस एक क्षेत्र में मेष राशि के लोग सबसे अधिक चमकदार प्रभाव छोड़ते है। महत्त्वाकांक्षी और रचनात्मक मेष के लिए काम का माहौल एकदम उपयुक्त स्थान है, जो अक्सर सबसे बेहतर संभव होने की जरूरत द्वारा संचालित हैं। मेष राशि वाले जातक जन्मजात नेता गुण वाले होते है जो आदेश प्राप्त करने के बजाय उन्हें जारी करना पसंद करेंगे। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हालांकि, मेष राशि के लोग समझदार होते है और कठिन दिनों के लिए कुछ पैसे बचा सकते हैं।अक्सर मेष राशि के लोगों को शॉपिंग, जुआ और व्यापार पर पैसा खर्च करने में आनंद मिलता है।इसी वजह से मेष राशि वाले पैसे को पुंजी रूप में जमा नहीं रख पाते हैं।मेष राशि वर्तमान में रहते हैं और भविष्य पर ध्यान केंद्रित नहीं करते। मेष राशी वाले जातको का दर्शन है कि हमें वर्तमान में जीना चाहिए। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि के लिए पैसे की कमी दुर्लभ है क्योंकि उन्हें काम करना पसंद है। ये कभी उम्मीद नहीं छोड़ते, सदैव कार्य करने में तत्पर रहते हैं, ईमानदार होते है, हर कार्य करने के लिये तत्पर बहादुर, रोमांच पसंद करने वाले प्राणी होते है, खुश रहने वाले और हर बात को जानने के इच्छुक होते हैं। बहस में हारते नहीं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि वाले जातक की सिक्स्थ सेन्स अच्छी होती हैं जिसके कारण इनमें भविष्यवाणी करने की एक उत्कृष्ट क्षमता होती है जो उन्हें हमेशा एक कदम आगे रखती है और सब कुछ व्यवस्थित करती है। उन्हें केवल अपने चुने हुए मार्ग का अनुसरण करने की ज़रूरत है।एक चुनौती से सामना होने पर, मेष राशि के जातक जल्दी से स्थिति का आकलन करते हुए एक समाधान निकाल लेंगे। प्रतियोगिता से उन्हें परेशानी नहीं होती, बस उन्हें और ज्यादा चमकने के लिए प्रोत्साहित करती है। 

∆कमियाँ ∆
मेष राशि वाले जातक अक्सर उग्रवादी एवं क्रोधी स्वभाव के होते हैं।मेष वाले अधीर,अविवेकी, स्वार्थी, ईर्ष्यालु, व्यर्थ घमंडी, अहंकारी, मोटे, क्रूर, स्वत्वबोधक, हिंसक होते हैं। मंगल ग्रह ख़राब होने की स्थिति में अपने रक्तसंबंध वालो से संबंध खराब होते है।निर्णय लेने में जल्दबाजी करते है।स्वभाव कभी-कभी विरक्ति का भी रहता है।सोचते बहुत ज्यादा है जैसा खुद का स्वभाव है, वैसी ही अपेक्षा दूसरों से करते हैं।इस कारण कई बार धोखा भी खाते हैं।अपनी जिद पर अड़े रहना,यह भी मेष राशि के स्वभाव में पाया जाता है।अपनी मर्जी के अनुसार ही दूसरों को चलाना चाहते हैं।इससे आपके कई दुश्मन खड़े हो जाते हैं।आपके भीतर प्रतिभा का भंडार होता है लेकिन आप उसका समय पर सदुपयोग नहीं कर पाते हैं,अधीर प्रवृत्ति के व्यक्ति होते हैं।अक्सर आप कुतर्क और मूर्खतापूर्ण बातें करने से भी परहेज नहीं करते हैं।
मेष राशि वाले जातक तुनकमिजाज होते हैं खासकर जब आपको बाधाओं और आलोचनाओं का सामना करना पड़ता हैं। 
∆स्वास्थ्य∆
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि के जातक का मंगल खराब है तो मंगल से संबंधित बीमारियों में पेट के रोग, हैजा, पित्त, भगंदर, फोड़ा, मानसिक रोगों में अति क्रोध, विक्षिपता, चिढ़चिढ़ापन, तनाव,अनिंद्रा, नासूर और आमाशय से संबंधित समस्याएँ आदि होने लगती हैं। 

∆सावधानी व उपाय∆
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मेष राशि वाले जातक को कुछ सावधानियां और उपाय करने चाहिए जो निम्नलिखित हैं-
किसी से मुफ्त में कुछ लेंगे तो बरकत जाती रहेगी। 
भाई और पिता से झगड़ा न करें। 
अपने बच्चों को जन्मदिवस पर नमकीन वस्तुएँ बाँटें। 
मेहमानों को मिठाई जरूर खिलाएँ। 
विधवाओं की निस्वार्थ मदद करें। 
हमेशा अपनों से बड़ों का सम्मान करें और उनसे आशीर्वाद लेते रहें। कभी-कभी गुलाबी या लाल चादर पर सोएँ।
आँत और दाँत साफ रखें।
हनुमानजी की भक्ति करें।
मंगल खराब की स्थिति में सफेद रंग का सुरमा आँखों में डालना चाहिए। 
गुड़ खाना चाहिए। 
भाई और मित्रों से संबंध अच्छे रखना चाहिए। 
क्रोध न करें। 
इन्हे अपने आहार का ख्याल रखना चाहिए है | 
इन्हे कॉफी और चीनी से बचना चाहिए,इन पदार्थों से उन्हें तनाव हो सकता हैं। 
आपके अगर मंगल अशुभ होता है तो माँस खाने से,भाइयों से झगड़ने से और क्रोध करने से बचना चाहिए। 
∆विवेचना ∆
राशिस्वामी- मंगल। स्वभाव - उग्र 
दिशा - पूर्व। वर्ण - क्षत्रिय 
लिंग - पुरुष । गुण - रज
तत्त्व - अग्नि । योनि - पशु
प्रभुत्व - मस्तक। रंग - लाल 
रत्न - मूंगा । शुभ अंक - नौ। राशि स्वरूप - मेंढा
 Pandit Anjani Kumar Dadhich
Nakastra Jyotish Hub