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Tuesday, 2 August 2022

रुद्राभिषेक - अद्भुत जानकारी

रुद्राभिषेक - अद्भुत जानकारी 
प्रिय पाठकों, 
 28 जूलाई 2025, सोमवार 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज रुद्राभिषेक के बारे में अद्भुत जानकारी यहाँ दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार संहारक के तौर पर पूज्यनीय भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं। भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शंकर बड़े दयालु हैं और उनके रुद्राभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इन सबके अलावा "ओम् नम: शिवाय" मंत्र का रुद्राक्ष की माला पर प्रतिदिन जाप करना, शिव पञ्चाक्षरी स्रोत्र, शिव चालीसा, शिव सहस्त्रनाम और शिवमहिम्न स्तोत्र आदि में से कोई एक स्तोत्र का  नियमित रूप से पाठ करना चाहिए और साथ ही सोमवार का व्रत करना विशेष लाभप्रद माना जाता है। पंडित अंजनी कुमार के अनुसार द्वितीय दशांश में जन्म लेने वाले स्त्री-पुरुष के लिए सोमवार के दिन संभोग करना वर्जित माना जाता है। इन नियमों का पालन करते हुए शंकर जी की आराधना करने वाले के मनोरथ सिद्ध होते हैं।
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार रुद्राभिषेक का अर्थ भगवान रूद्र(शिव) का अभिषेक करना होता है जो कि शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों के द्वारा विभिन्न द्रव्यों के द्वारा अभिषेक करना होता है। जैसा की वेदों में वर्णित है कि भगवान शिव को ही रुद्र कहा जाता है।भगवान भोलेनाथ सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं। प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण होते हैं और शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका रुद्राभिषेक करना माना गया है तथा रुद्राभिषेक के मंत्रों का वर्णन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद में भी किया गया है। शास्त्र और वेदों में वर्णित हैं की शिव जी का अभिषेक करना परम कल्याणकारी है। 
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारे पातक-से पातक कर्म भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है।रूद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि- सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका: अर्थात् सभी देवताओं की आत्मा में रूद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रूद्र की आत्मा हैं। वैसे तो रुद्राभिषेक किसी भी दिन किया जा सकता है परन्तु त्रियोदशी तिथि, प्रदोष काल और सोमवार को रुद्राभिषेक करना परम कल्याणकारी है।पंडित अंजनी कुमार के अनुसार  श्रावण मास में किसी भी दिन किया गया रुद्राभिषेक अद्भुत एवं शीघ्र फल प्रदान करने वाला होता है। वेदों और पुराणों में रुद्राभिषेक के बारे में तो बताया गया है कि रावण ने अपने दसों सिरों को काट कर उसके रक्त से शिवलिंग का अभिषेक किया था तथा सिरों को हवन की अग्नि को अर्पित किया था जिससे वो त्रिलोकजयी हो गया।  भष्मासुर ने भी शिवलिंग का अभिषेक अपनी आंखों के आंसुओ से किया तो वह भी भगवान के वरदान का पात्र बन गया।
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार शिव पुराण में वर्णित किया गया है कि जिस भी उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है तो उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल शिवाभिषेक में करने से क्या फल मिलता है और इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा। पंडित अंजनी कुमार के अनुसार भगवान शिव का रुद्राभिषेक में अलग अलग द्रव्यो का उपयोग करने से जो फल प्राप्त होता है वो निम्नलिखित हैं-
☞ भगवान शिव का जल से रुद्राभिषेक करने पर वृष्टि होती है।
☞ भगवान शिव का कुशा जल से अभिषेक करने पर रोग, दुःख से छुटकारा मिलती है।
☞ भगवान शिव का दही से अभिषेक करने पर पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
☞ भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी प्राप्ति होती है।
☞भगवान शिव का मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर धन वृद्धि होती है।
☞ भगवान शिव का तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
☞ भगवान शिव का इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।
☞ दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से पुत्र प्राप्ति, प्रमेह रोग की शान्ति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
☞ गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने से ज्वर ठीक हो जाता है। 
☞ भगवान शिव का दूध शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से सद्बुद्धि प्राप्ति होती है।
☞ भगवान शिव का घी से अभिषेक करने से वंश विस्तार होती है। 
☞ सरसों के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने से रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
☞ शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने से प्रत्येक पाप का क्षय हो जाता है।
इस प्रकार शिव के रूद्र रूप के पूजन और अभिषेक करने से साधक में शिव तत्व रूप में सत्यं शिवम सुन्दरम् का उदय हो जाता है उसके बाद शिव के शुभ आशीर्वाद से समृद्धि, धन-धान्य, विद्या और संतान की प्राप्ति के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने विभिन्न तिथियों पर करने से भिन्न भिन्न परिणाम या फल प्राप्त होते हैं अतः निश्चित उद्देश्य की पूर्ति के लिए निश्चित तिथि पर रुद्राभिषेक करने से निम्नलिखित परिणाम और फल प्राप्त होते है-
☞कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, चतुर्थी, पंचमी, अष्टमी, एकादशी, द्वादशी, अमावस्या, शुक्लपक्ष की द्वितीया, पंचमी, षष्ठी, नवमी, द्वादशी, त्रयोदशी तिथियों में अभिषेक करने से सुख-समृद्धि संतान प्राप्ति एवं ऐश्वर्य प्राप्त होता है।
☞कालसर्प योग, गृहकलेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यो की बाधाओं को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी कामना से किए जाने वाले रुद्राभिषेक में शिव-वास का विचार करने पर अनुष्ठान अवश्य सफल होता है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है जो निम्नलिखित है-
☞प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी, अमावस्या तथा शुक्लपक्ष की द्वितीया व नवमी के दिन भगवान शिव माता गौरी के साथ होते हैं, इस तिथिमें रुद्राभिषेक करने से सुख-समृद्धि उपलब्ध होती है।कृष्णपक्ष की चतुर्थी, एकादशी तथा शुक्लपक्ष की पंचमी व द्वादशी तिथियों में भगवान शंकर कैलाश पर्वत पर होते हैं और उनकी अनुकंपा से परिवार मेंआनंद-मंगल होता है।
☞कृष्णपक्ष की पंचमी, द्वादशी तथा शुक्लपक्ष की षष्ठी व त्रयोदशी तिथियों में महादेव नंदी पर सवार होकर संपूर्ण विश्व में भ्रमण करते है।अत: इन तिथियों में रुद्राभिषेक करने पर अभीष्ट सिद्ध होता है।
वैसे तो रुद्राभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है। परन्तु विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों मंत्र गोदुग्ध या अन्य दूध मिला कर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग।-अलग अथवा सब को मिला कर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान 
Panditanjanikumardadhich@gmail.com
Phone No-6377054504

Friday, 29 July 2022

वक्री बृहस्पति का विश्व और भारत पर प्रभाव

वक्री गुरु(देव गुरु बृहस्पति) का देश दुनिया पर पड़ने वाला प्रभाव
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार देवगुरु बृहस्पति के वक्री होने का यह समय देश दुनिया के लिए चुनौती पूर्ण रहेगा। विश्व के नेताओं की बुद्धि विपरीत होगी। जनता में आक्रोश बढ़ेगा। महंगाई पहले कि अपेक्षा बढ़ेगी।10 सितंबर से 2 अक्टूबर तक शनि, गुरु के साथ बुध ग्रह भी वक्री रहेगा।और शुक्र भी साथ होकर निचभंग राजयोग का निर्माण करेगा। कुछ देशों में सत्ता परिवर्तन होगा।जिन देशों में युद्ध चल रहा है वहां और परेशानी बढ़ेगी। कुछ दुसरे देशों के बीच भी युद्ध के आसार बनेंगे।
✿ भारत की कुंडली में देव गुरु बृहस्पति का वक्री प्रभाव
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार 
भारत देश की कुंडली वृष लग्न की है अतः देव गुरु बृहस्पति लाभ भाव में वक्री हो रहे है जो कि अष्टमेश भी है जिसके निम्नलिखित प्रभाव है-  
☞कुछ पुरानी चीजो की तरफ देश का ध्यान आकर्षित होगा। 
☞लाभ में पहले की अपेक्षा कमी आएगी। 
नए कार्य की प्रगति देश के लिए धीमी हो जाएगी और पुराने मामले बाहर आना शुरू हो जाएंगे। 
☞ गुरु बली अवस्था में शनि के नक्षत्र में है जिसकी वजह से पुराने मामलो मे तेज़ी आएगी और न्याय भी होता दिख रहा है।
☞ पूरे विश्व में हलचल रहेगी। 
☞ धर्म का विरोध बढ़ेगा। 
☞ धर्म और सांप्रदायिक घटनाएं बढ़ेगी। आतंकवादी घटनाएं होगी लेकिन सरकार और सेना भी इसका पूरी तरह सामना करेगी।यह गोचर फायदा और नुकसान दोनों लेकर आएगा। लेकिन गुरु शुभ ग्रह है तो इनकी शुभता भी देखने को मिलेगी।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Hub
नक्षत्र ज्योतिष हब
Panditanjanikumardadhich@gmail.com
Phone No-6377054504,9414863294

वक्री गुरु (बृहस्पति)ग्रह के प्रभाव और उपाय

वक्री गुरु (बृहस्पति)ग्रह के प्रभाव और उपाय 
प्रिय पाठकों, 
29 जूलाई 2022, शुक्रवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज वक्री गुरु (बृहस्पति)ग्रह के प्रभाव और उपाय के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
भारतीय वैदिक ज्योतिषशास्त्र में बृहस्पति ग्रह को देव गुरु के नाम से जाना जाता है जो सुख-समृद्धि और सौभाग्य का ग्रह माना जाता है। गुरु(बृहस्पति) को अपना चक्र पूरा करने में लगभग 13 महीने का समय लगता है। शनि ग्रह के बाद में बृहस्पति ऐसा दूसरा ग्रह है जिसकी गोचर की अवधि सबसे लंबी होती है और गुरु साल में कम से कम एक बार को वक्री जरूर होते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वर्तमान समय में गुरु ग्रह अपनी स्वराशि मीन में ही स्थित हैं और इसी राशि में 29 जुलाई 2022 शुक्रवार के दिन दोपहर 01:33 बजे को वक्री होने वाले हैं। और 24 नवंबर 2022 दिन गुरुवार को 04:36 बजे इसी राशि में मार्गी हो जाएगा।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुरु की इस वक्री चाल से कुछ राशियों पर शुभ और कुछ राशियों पर अशुभ प्रभाव पड़ने वाला है।
वक्री गुरु या बृहस्पति के प्रभाव 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार लोग ग्रहों का वक्री होने का नाम सुनते ही भयभीत हो जाते हैं कि अब उनके साथ जीवन में कुछ ना कुछ बुरा ही होता रहेगा लेकिन यह बात पूरी तरह से सत्य नहीं होती है। वैदिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि जन्म कुंडली में कोई ग्रह अच्छी या मजबूत स्थिति में बैठा है और वह वक्री हो रहा है तो ऐसे जातकों को लाभ मिलता है। 
वहीं इसके विपरीत यदि कुंडली में कोई भी शुभ ग्रह अन्य पापी ग्रहों के साथ मौजूद हो और उसके बाद वक्री हो तो उससे व्यक्ति को बुरे प्रभाव मिलने लगते हैं।
वक्री गुरु की तो जिन जातकों की कुंडली में वक्री गुरु मौजूद होता है और गुरु पहले से मजबूत अवस्था में होता है ऐसे जातक दूरदर्शी होते हैं, और लोगों को एक साथ लेकर चलने वाले होते हैं। इन्हें भविष्य के बारे में पहले से ही आभास हो जाता है और उन्हें पता होता है कि कौन सा व्यक्ति इन्हें लाभ देगा और कौन इन्हें धोखा दे सकता है।हालांकि जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह अशुभ अवस्था में या पापी ग्रहों से पीड़ित बैठा हो और फिर वक्री हो रहा हो ऐसे व्यक्तियों को नकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं। उन व्यक्तियों को नकारत्मक परिणाम बचने के कुछ उपाय करने चाहिए जो निम्नलिखित है-
✷ रोजाना पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और सात बार परिक्रमा करें। 
✷ घर में पीले रंग के फूलों वाले पौधा लगाएं। 
✷विष्णु भगवान की पूजा करें और ब्राह्मणों और जरूरतमंद लोगों को दान करें। 
✷अगर मुमकिन हो सके तो गुरुवार का व्रत अवश्य करें। 
✷गुरुवार के दिन पूजा में भगवान विष्णु को गुड़ और चने की दाल का भोग लगाएं। 
✷भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हे हल्दी और पीले चंदन और केसर का तिलक लगाएं।
✷ इसके अलावा बृहस्पति से संबंधित वस्तुओं का दान भी वक्री गुरु के अशुभ प्रभाव को दूर करने में सहायक साबित होता है।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
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Thursday, 28 July 2022

हरियाली अमावस्या के उपाय

हरियाली अमावस्या एवं उसके उपायप्रिय पाठकों, 
28 जूलाई 2022, गुरुवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज हरियाली अमावस्या एवं उसके उपाय के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिन्दू संवत्सर वर्ष के श्रावण मास में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है  भारतीय पंचांग के अनुसार इस बार 28 जुलाई 2022 गुरुवार को हरियाली अमावस्या का पर्व है। आज दिन निम्नलिखित उपायों को करने से इच्छित लाभ मिलता है-
✷ ग्रह दोष शांति करने के लिए - हरियाली अमावस्या के दिन सुबह या शाम को पीपल की पुजा कुमकुम, चावल मौली आदि से करने के बाद पीपल की जड़ में दूध और जल अर्पित करें। इसके बाद मालपुआ के साथ पांच अलग-अलग तरह की मिठाई भी रखे और फिर धूप-दीप से आरती करके परिक्रमा करें और पीपल के वृक्षारोपण करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और साथ ही ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है और भाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन तुलसी, वट, अशोक आदि के पौधे जरूर लगाना चाहिए।
✷ कालसर्प दोष को दूर करने के लिए उपाय - पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन कालसर्प दोष को दूर करने के लिए सुबह स्नान व ध्यान करने के बाद भगवान शिव की पूजा और उनका पंचामृत से अभिषेक करने के बाद चांदी के बने हुए नाग-नागिन की पूजा करें और फिर उनको (चांदी के बने हुए नाग-नागिन को)सफेद फूलों के साथ बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से कालसर्प दोष दूर होता है और शिवजी का आशीर्वाद मिलता है।
✷ पितृ शांति के लिए उपाय- हरियाली अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए नहाने के जल में पवित्र नदियों का जल मिलाकर स्नान करें और फिर पितृ शांति यज्ञ और तर्पण विधिवत रुप से करने के बाद पितृ सूक्त पाठ, गरुड़ पुराण, पितृ गायत्री पाठ, पितृ देव चालीसा आदि का पाठ करें इसके बाद गरीब व जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और दान दक्षिणा दें। ऐसा करने से भाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं होती है तथा पितृदोष की शांति भी होती है।
✷ धन धान्य सुख समृद्धि के लिए- हरियाली अमावस्या के दिन शाम को माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए घर के ईशान कोण में लाल रंग के धागे से बनी हुई बत्ती का प्रयोग करते हुए गाय के घी का दीपक जलाएं  साथ ही यह ध्यान रखे कि बत्ती रूई की न हो। दीपक में थोड़ी सी केसर भी जरूर डाले इसके बाद कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने के बाद उस दीपक को रात के समय में पांच लाल फूलों के साथ बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन लाभ के योग बनते हैं। 
✷ सुख समृद्धि और खुशहाली के लिए - हरियाली अमावस्या की रात में पूजा घर की थाली में ओम् बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र रखें और फिर विधिपूर्वक यंत्र की पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है और साथ ही इस दिन चीटियों को सूखे आटे में चीनी मिलाकर खिलाने से सभी कष्ट दूर होते हैं और भाग्य में वृद्धि होती है।
✷ बेरोजगार युवाओं के लिए- हरियाली अमावस्या को 1 साफ नींबू को घर के मंदिर में रख दें और फिर रात में अपने ऊपर से सात बार वार लें और फिर 4 बराबर भाग में काटकर चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में फेंक दें। ऐसा करने से आपको तरक्की के कई अवसर प्राप्त होंगे और मेहनत का भी पूरा फल मिलेगा।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
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Friday, 1 April 2022

चैत्र नवरात्र

चैत्र नवरात्र एवं उपाय
प्रिय पाठकों, 
01अप्रेल 2022, शुक्रवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज चैत्र नवरात्री के महत्वपूर्ण त्यौहार के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिन्दू सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। 
नवरात्रि यानि नौ दिन मां दुर्गा की पूजा और अराधना के दिन होते हैं। नवरात्रि के दिन मां दुर्गा को समर्पित होते हैं।भगवत पुराण में वर्णित किया गया है कि विक्रम संवत के एक साल में चार बार नवरात्रि पर्व मनाए जाते हैं। दो बार गुप्त नवरात्रि और एक चैत्र एक शारदीय नवरात्रि। चैत्र नवरात्रि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। भारतीय पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी जो इस बार चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल 2022 शनिवार को सर्वाथसिद्धी योग और अमृतसिद्धी योग में शुरू होकर 10 अप्रैल 2022 रविवार रामनवमी तक नवरात्रि पर्व होगा। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में पूरे विधि विधान से पूजा पाठ किया जाए तो मां दुर्गा प्रसन्न होकर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक अपने घर में मां के नाम की ज्योत जरूर जलाएं। साथ ही पूजा के समय नवार्ण मंत्र "ओम् ऐ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै" का जाप जरूर करें।नवरात्रि के दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करना चाहिए। अगर दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए सबसे पहले कवच, कीलक व अर्गला स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा कुंजिका स्त्रोत का पाठ भी करना चाहिए। ऐसा करने से दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का फल प्राप्त होता है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार चैत्र नवरात्रि पर्व के दौरान कुछ उपयोगी उपाय करने से भी मां दुर्गा की कृपा से सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है। चैत्र नवरात्रि के दौरान के किए जाने वाले उपाय निम्नलिखित है-
✷ चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा के साथ पीले रंग की धन-कौड़ियों की पंचोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए क्योंकि मां दुर्गा को धनकौड़ियां बहुत ही प्रिय हैं और इससे आर्थिक समस्या दूर होती हैं साथ ही ये बहुत ही शुभ माना जाता है। 
✷ चैत्र नवरात्रि में हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करें। ऐसा नवरात्रि में हर दिन करें। इससे आ​र्थिक संकट दूर होते हैं। घर में सुख-समृद्धि आती है। नवरात्रि में पूजा करते समय दीपक में चार लौंग, घी और बत्ती डालकर जलाएं। नवरात्रि के दौरान हर दिन सुबह और शाम घी का दीपक जलाएं। इससे आपको बिजनेस या जॉब में सफलता मिलेगी।
✷ चैत्र नवरात्रि में शंख की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। शंख की पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इससे आप पर मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।
✷ चैत्र नवरात्रि के दौरान आप श्रीयंत्र, चांदी का सिक्का और कुबेर यंत्र खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। इनकी पूजा करें। इसके बाद इसे तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से कभी भी धन-दौलत की कमी नहीं होगी।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
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Monday, 28 February 2022

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि : एक विशेष पर्व और उसका महत्व 
प्रिय पाठकों, 
01 मार्च 2022, मंगलवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज महाशिवरात्रि - शिवभक्ति का महत्वपूर्ण त्यौहार के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। भारतीय कालदर्शक पंचांग के मुताबिक फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 1 मार्च 2022, मंगलवार को मनाया जाएगा। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन माता पार्वती और भगवान शंकर की पूजा करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था इसलिए शिवभक्तों के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत ही खास होता है। महाशिवरात्रि के दिन पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती का पूजन भी किया जाता है। इस दिन शिव जी को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करके व्यक्ति अपने जीवन की समस्याओं से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पौराणिक कथाओं के आधार पर ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से व्रत रखने वालों को धन,सौभाग्य, समृद्धि, संतान और आरोग्य की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और उन्‍हें भांग, धतूरा, बेल पत्र और बेर चढ़ाए जाते हैं। इस दिन कई लोग धार्मिक अनुष्‍ठान और रुद्राभिषेक व महा महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का विशेष महत्‍व होता है और हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन अधिकांश घरों में लोग शिवजी का व्रत करते हैं और शाम को फलाहार करके व्रत पूरा करते हैं। इस दिन देश भर में कई स्‍थानों पर शिव बारात निकाली जाती है और धूमधाम से यह त्‍योहार मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के व्रत रखने वालों को सौभाग्य, समृद्धि और संतान की प्राप्ति होती है। शिव जी को महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ के नामों से भी जाना जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने ही धरती पर सबसे पहले जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया था इसीलिए भगवान शिव को आदिदेव भी कहा जाता है।
महाशिवरात्रि पूजा का महत्व निम्नलिखित हैं-
महाशिवरात्रि के दिन महाशिवरात्रि का व्रत रखते हुए रात्रि को शिवजी की विधिवत आराधना करना कल्याणकारी माना जाता है। दूसरे दिन अर्थात अमावस के दिन मिष्ठान्नादि सहित ब्राहम्णों तथा शारीरिक रुप से अस्मर्थ लोगों को भोजन देने के बाद ही स्वयं भोजन करना चाहिए। यह व्रत महाकल्याणकारी और अश्वमेध यज्ञ तुल्य फल प्राप्त होता है। इस दिन किए गए अनुष्ठानों, पूजा व व्रत का विशेष लाभ मिलता है। अलौकिक सिद्धियाँ एवं ऋद्धि- सिद्धि प्राप्त करने के लिए यह दिन सर्वाधिक उपयुक्त समय होता है।ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को अर्द्धरात्रि के समय करोड़ों सूर्य के तेज के समान ज्योर्तिलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। स्कंद पुराण के अनुसार- चाहे सागर सूख जाए, हिमालय टूट जाए, पर्वत विचलित हो जाएं परंतु शिव-व्रत कभी निष्फल नहीं जाता। भगवान राम भी यह व्रत रख चुके हैं।
महाशिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा सामग्री निम्नलिखित है -
प्रातःकाल स्नान से निवृत होकर एक वेदी पर कलश की स्थापना कर गौरी शंकर की मूर्ति या चित्र रखें। कलश को जल से भरकर रोली, मौली, अक्षत, पान सुपारी, लौंग, इलायची, चंदन, दूध,दही, घी, शहद, कमलगट्टा, धतूरा, बिल्व पत्र, कनेर आदि अर्पित करें और शिव की आरती पढ़ें। रात्रि जागरण में शिव की चार आरती का विधान आवश्यक माना गया है। इस अवसर पर शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप कल्याणकारी कहा जाता है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर निम्नलिखित कार्यो का ध्यान रखना चाहिए जो बहुत महत्वपूर्ण है -  
❃महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के शिवलिंग का पूजन शुभ शुभफलदायी रहता है इसलिए शिवलिंग अवश्य करना चाहिए।  
❃भगवान शिव की पूजा में सफेद फूलों का प्रयोग करना चाहिए और यदि आक के फूल हो तो और भी श्रेष्ठ रहता है।
❃शिवरात्रि के दिन शिव जी के साथ माता पार्वती की पूजा भी करनी चाहिए जिससे वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और जिन लोगों का विवाह नहीं हुआ हैै तो उनकी विवाह की बाधाएं दूर होती है।
❃ महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के साथ नंदी का पूजन अवश्य करना चाहिए क्योंकि नंदी पूजन के बिना शिव जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। 
❃भगवान शिव की कृपा पाने के लिए महाशिवरात्रि के दिन बैल को हरा चारा खिलाना चाहिए।
❃बिल्वपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। बिल्वपत्र पर चंदन से ''ओम् नमः शिवाय: '' लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए।
❃महाशिवरात्रि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने के साथ चारो प्रहर की पूजा करनी चाहिए।
महाशिवरात्रि के अवसर पर निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना अति आवश्यक होता है - 
❁महाशिवरात्रि के दिन सवेरे बिल्कुल भी देर तक न सोएं। यदि महाशिवरात्रि का व्रत नहीं भी किया है तो बिना स्नान और भगवान शिव के पूजन के बिना भोजन नहीं करें।
❁शिवरात्रि के दिन भूलकर भी काले रंग के वस्त्र धारण न करें। 
❁शिवलिंग की परिक्रमा करते समय जल स्थान को भूलकर भी न लांघे।
❁शिव जी की पूजा में हल्दी, तुलसी और कुमकुम का प्रयोग न करें।
❁शिव जी को भूलकर भी शंख से जल न चढ़ाएं।
❁ शिव जी की पूजा में केतकी का फूल वर्जित है इसके अलावा चंपा के फूल का प्रयोग भी न करें।
❁भगवान शिव पशुपतिनाथ कहलाते हैं इसलिए महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी किसी पशु-पक्षी को न सताएं।
❁ महाशिवरात्रि पर घर में या आस-पास किसी से भी कलह करने से बचें। किसी को अपशब्द न कहें और न ही निंदा करें।
❁ महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर चढ़ाई गई चीजों को बिल्कुल भी ग्रहण नहीं करना चाहिए क्योंकि
 ❁ शिवलिंग पर चढ़ाई चीजों को ग्रहण करना शुभ नहीं माना जाता है।
❁ महाशिवरात्रि पर सात्विकता बनाएं रखें। इस दिन भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन न करें।
 महाशिवरात्रि पर महादेव की कृपा पाने के लिए करें राशि अनुसार उपाय
मेष राशि: इस दिन मंदिर में या अपने घर में ही भगवान शिव को लाल रंग के गुड़हल फूल चढ़ाएं।
वृषभ राशि: इस दिन भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इसे बेहद ही शुभ माना गया है।
मिथुन राशि: इस दिन भगवान शिव के समक्ष तेल का दीपक जलाएं तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
कर्क राशि- इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का दुग्धाभिषेक कर भगवान शिव के लिंगाष्टकम का पाठ करें। 
सिंह राशि: इस दिन प्रात काल उठकर महादेव की पूजा करें और शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करें। 
कन्या राशि: इस दिन भगवान शिव का पूजन करते हुए ‘ओम् नमः शिवाय’ का 21 बार जप करें। 
तुला राशि- इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। महाशिवरात्रि की रात्रि में भगवान शिव की खास पूजा करें।
वृश्चिक राशि इस दिन भगवान शिव की पूजा करें और गन्ने के रस से अभिषेक करें और नंदी को गुड़ का भोग लगाएं। 
धनु राशि: मंदिर में भगवान शिव को दूध अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
मकर राशि: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हुए रुद्राष्टकम का पाठ करें। कुंभ राशि: भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक कर भिखारियों को भोजन कराएं। 
मीन राशि: इस दिन भगवान शिव का अभिषेक कर 11 बिल्व पत्र अर्पित विशेष तौर पर करे तथा अपने बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद अवश्य लें।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Hub
नक्षत्र ज्योतिष हब
📧panditanjanikumardadhich@gmail.com
फोन नंबर - 9414863294

Wednesday, 2 February 2022

गुप्त नवरात्रि

माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए चमत्कारी मन्त्र 

प्रिय पाठकों, 
2 फरवरी 2022, बुधवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज गुप्त नवरात्रि और चमत्कारी मंत्र जाप के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार
नवरात्रि यानि नौ दिन मां दुर्गा की पूजा और अराधना के दिन होते हैं। नवरात्रि के दिन मां दुर्गा को समर्पित होते हैं। एक साल में चार बार नवरात्रि मनाए जाते हैं। दो बार गुप्त नवरात्रि और एक चैत्र एक शारदीय नवरात्रि। साल में दो बार आने वाले नवरात्रि में से एक माघ माह में आने वाले गुप्त नवरात्रि हैं।
भारतीय वैदिक पंचांग के अनुसार गुप्त नवरात्रि 2 फरवरी 2022 बुधवार से प्रारंभ हो रहे हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिंदीके व्याकरण साहित्य में गुप्त शब्द का अर्थ छिपा हुआ होता है। इस नवरात्रि में गुप्त विद्याओं की सिद्धि हेतु साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में तंत्र एवं मंत्र साधनाओं का महत्व होता है और तंत्र और मंत्र साधना को गुप्त रूप से ही किया जाता है। इसीलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इसमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। साधकों को इसका ज्ञान होने के कारण या इसके छिपे हुए होने के कारण इसको गुप्त नवरात्र कहते हैं। गुप्‍त नवरात्रि में विशेष पूजा से कई प्रकार के दुखों से मुक्‍ति पाई जा सकती है। गुप्त नवरात्रि में महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। यह नवरात्रि मोक्ष की कामने से भी की जाती है। इस दौरान 10 महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रुमावती, मां बंगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार माता दुर्गा की कृपा प्राप्ति का का सबसे सरल उपाय दुर्गा सप्तशती का पाठ है। नवरात्र में माँ के कलश स्थापना के साथ शतचंडी, नवचंडी, दुर्गा सप्तशती, देवी अथर्वशीर्ष आदि का पाठ किया जाता है। दुर्गा सप्तशती महर्षि वेदव्यास रचित मार्कण्डेय पुराण के सावर्णि मन्वतर के देवी महात्म्य के सात सौ श्लोक का एक भाग है। 
दुर्गा सप्तशती में कुछ ऐसे परम शक्तिशाली और दुर्लभ स्तोत्र एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत पारायण से मनुष्य की समस्त इच्छित मनोकामना की अवश्य ही पूर्ति होती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार साधक को अपनी आवश्यकता के अनुसार माँ के दिव्य मन्त्र का चयन करके नित्य उसकी 5 माला या कम से कम एक माला का जाप तो अवश्य करना ही चाहिए ।
जीवन में सर्वकल्याण एवं शुभ फलो की प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली मन्त्र:-
सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥  
जीवन में किसी भी तरह की बाधा से मुक्ति एवं सुख समृद्धि एवं योग्य संतान की प्राप्ति के लिए :-
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥
जीवन में सर्वबाधा की शांति के लिए :-
सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्।। 
आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के लिए चमत्कारिक मन्त्र इस दिव्य मंत्र को देवी दुर्गा ने स्वयं देवताओं को दिया है:-
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌। 
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥ 
माँ के चरणो में स्थान पाने के लिए मोक्ष प्राप्ति के लिए:-
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या।
विश्वस्य बीजं परमासि माया।।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्।
त्वं वैप्रसन्ना भुवि मुक्त हेतु:।। 
जीवन में शक्ति एवं सम्पन्नता प्राप्ति के लिए :-सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोह्यस्तु ते।। 
सभी प्रकार के संकटो से रक्षा का मंत्र:-
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि: स्वनेन च।। 
समस्त रोगो के नाश के लिए चमत्कारी मंत्र:- 
रोगान शेषान पहंसि तुष्टा रूष्टा तु कामान सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हाश्रयतां प्रयान्ति।। 
समस्त दु:ख और दरिद्रता के नाश के लिए:-
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:।
स्वस्थै स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।।
द्रारिद्र दु:ख भयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकारणाय सदाह्यह्यद्र्रचिता।। 
जीवन में सभी तरह के सुख सौभाग्य, ऐश्वर्य, आरोग्य, धन संपदा एवं शत्रु भय मुक्ति-मोक्ष के लिए - 
ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥ 
किसी भी तरह के भय के नाश के लिए दुर्गा मंत्र :- 
सर्व स्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।
भयेभ्यास्त्रहिनो देवी दुर्गे देवी नमोस्तुते।। 
स्वप्न में अपने कार्यों के फलो को जानने के लिए मन्त्र :-
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थ साधिके।
मम सिद्घिमसिद्घिं वा स्वप्ने सर्व प्रदर्शय।। 
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
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