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Tuesday, 16 February 2021

बसंत पंचमी

विश्वविजय सरस्वती कवच
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार बसंत पंचमी के दिन विश्वविजय सरस्वती कवच का पाठ करने से साधक में अद्भुत शक्तियों का संचार होता है तथा जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। अत: देवी सरस्वती के इस विश्वविजय सरस्वती कवच का पाठ नित्य प्रातः जरूर करना चाहिए।भगवती सरस्वती के इस अद्भुद विश्वविजय कवच को धारण करके ही व्यास, ऋष्यंश्रृंग,भरद्वाज, देवल और जैगीषव्य आदि ऋषियों ने सिद्धि पाई थी। मां सरस्वती की उपासना काली के रूप में करके ही कविकुलगुरु कालिदास ने ख्याति पाई।
🍂🍂विश्वविजय सरस्वती कवच🍂🍂
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श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वत:।
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदावतु।।
ऊं सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्र पातु निरन्तरम्।
ऊं श्रीं ह्रीं भारत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदावतु।।
ऐं ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोवतु।
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदावतु।।
ऊं श्रीं ह्रीं ब्राह्मयै स्वाहेति दन्तपंक्ती: सदावतु।
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदावतु।।
ऊं श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदावतु।
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्ष: सदावतु।।
ऊं ह्रीं विद्यास्वरुपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्।
ऊं ह्रीं ह्रीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदावतु।।
ऊं सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदावतु।
ऊं रागधिष्ठातृदेव्यै सर्वांगं मे सदावतु।।
ऊं सर्वकण्ठवासिन्यै स्वाहा प्राच्यां सदावतु।
ऊं ह्रीं जिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहाग्निदिशि रक्षतु।।
ऊं ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा।
सततं मन्त्रराजोऽयं दक्षिणे मां सदावतु।।
ऊं ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदावतु।
कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु।।
ऊं सदाम्बिकायै स्वाहा वायव्ये मां सदावतु।
ऊं गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेवतु।।
ऊं सर्वशास्त्रवासिन्यै स्वाहैशान्यां सदावतु।
ऊं ह्रीं सर्वपूजितायै स्वाहा चोध्र्वं सदावतु।।
ऐं ह्रीं पुस्तकवासिन्यै स्वाहाधो मां सदावतु।
ऊं ग्रन्थबीजरुपायै स्वाहा मां सर्वतोवतु।।
(ब्र. वै. पु. प्रकृतिखंड 4/73-85)
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Sunday, 14 February 2021

बसंत पंचमी और उसके उपाय

बसंत पंचमी और उसके उपाय
प्रिय पाठकों, 
14 फरववरी 2021,रविवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज बसंत पंचमी और उसके उपायों के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिंदू धर्म में बसंत पंचमी पर्व का विशेष महत्व है। बसंत पंचमी के दिन को ज्ञान की देवी माता सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रुप में माना जाता है और माँ सरस्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना कर उनसे विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है।
इस साल बसंत पंचमी 16 फरवरी दिन मंगलवार को रेवती नक्षत्र में मनाई जाएगी। बसंत पंचमी को शुभ कार्य, शादी-विवाह और सभी मांगलिक कार्यो के स्वयं सिद्ध या अबुझ महुर्त माना जाता है। इस बार बसंत पंचमी रेवती नक्षत्र में मनाई जा रही है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार पंचांग की कालगणना के आधार पर 16 फरवरी 2021 को सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि लगेगी जो कि अगले दिन यानी 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में पंचमी तिथि 16 फरवरी को पूरे दिन रहेगी। इस दिन 11.30 से 12.30 के बीच माँ सरस्वती के पुजन का अच्छा मुहूर्त है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बसंत पंचमी पूजा विधि निम्नलिखित हैं- 
❃ इस दिन लोगों को सुबह सवेरे स्नान करके पीले वस्त्र पहनकर माँ सरस्वती की अराधना करना भी उत्तम रहता है। अतः सुबह जल्दी उठकर दैनिक कार्यो से निवृत्ति के पश्चात स्नान करके पीले वस्त्र धारण करे और माँ सरस्वती की पुजा के लिए माँ सरस्वती की मूर्ति का पंचामृत(दूध,दही,घी,शक्कर,शहद आदि) से अभिषेक करे। 
❃ इसके पश्चात माँ सरस्वती की प्रतिमा या मूर्ति को रोली, चंदन, हल्दी, केसर, चंदन,अक्षत पीले या सफेद रंग के पुष्प, पीली मिठाई और पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। 
❃ इन के बाद माँ सरस्वती की पूजा के पश्चात वाद्य यंत्र और किताबों की पुजा भी करें। 
❃ माँ सरस्वती की वंदना अथवा पाठ करें। 
❃ इस दिन विद्यार्थीयों को माँ सरस्वती के लिए व्रत भी रखना चाहिए।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार बंसत पंचमी के निम्नलिखित उपायों का उपयोग कर जीवन में आने वाले कष्ट और अज्ञान रूपी अंधकार को दूर किया जा सकता है-
❁ अगर किसी विद्यार्थी का पढ़ाई में मन नहीं लगता है तो उन्हें बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती के "ओम् ऐं ह्रीं क्लीं महा सरस्वत्यै नम:”अथवा "ओम् सरस्वत्यै नम:" मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य ही करना चाहिए।
इससे बुद्दि का विकास होता है, ज्ञान, यश की प्राप्ति होती है। 
❁ यदि कोई व्यक्ति संगीत के क्षेत्र में सफल होना चाहता है तो उसे माँ सरस्वती का ध्यान करके ‘ह्रीं वाग्देव्यै ह्रीं ह्रीं’ मंत्र का जाप करना चाहिए और बसंत पंचमी के दिन कटु वाणी से मुक्ति हेतु एवं वाणी में मधुरता लाने के लिए देवी सरस्वती पर चढ़ी शहद को नित्य प्रात: सबसे पहले थोड़ा से अवश्य चखना चाहिए साथ ही उसे प्रसाद के रूप में वितरित करें। 
❁बसंत पंचमी के दिन किसी भी असाध्य कार्य पूरा करने हेतु देवी सरस्वती पर मोर पंख चढ़ा कर उस मोरपंख को तिजोरी में छुपाकर रखना चाहिए।
बंसत पंचमी के दिन से नित्य प्रातः विद्यार्थियों को अपने मस्तक पर केसर अथवा पीले चंदन का त‌िलक करना चाहिए इससे ज्ञान और धन में वृद्धि होती है।
❁ बसंत पंचमी में आप अपने व्यापारिक साझेदार या पार्टनर को कलम,फूलों का गुलदस्ता,खूबसूरत फोटो फ्रेम जिसमें आप दोनों का हँसता-मुस्कुराता फोटो लगा हो उपहार में देना चाहिए जिससे आप दोनों की साझेदारी और भी प्रगाढ़ होगी। 
❁ अगर किसी भी न्यायिक मामलों, पति-पत्नी संबंधी विवादों या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से झुंड रहा है तो उसके समाधान हेतु दुर्गा सप्तशती में वर्णित ‘अर्गला स्तोत्र’ और ‘कीलक स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए और किसी भी गरीब व्यक्ति या ब्राह्मण को श्वेत वस्त्र का दान करने से लाभ होगा।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Hub
नक्षत्र ज्योतिष हब
📧panditanjanikumardadhich@gmail.com
फोन नंबर - 9414863294

Tuesday, 9 February 2021

गुप्त नवरात्रि के उपाय

माघ मास गुप्त नवरात्रि के उपाय
प्रिय पाठकों, 
09 फरववरी 2021,मंगलवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज माघ मास के गुप्त नवरात्रा के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इस वर्ष 12 फरवरी 2021 शुक्रवार के दिन से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होने जा रही है। नवरात्रि के यह नौ दिन मां दुर्गा की पूजा-उपासना के दिन होते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं लेकिन साल की दो नवरात्रि को ही अधिकांश लोग जानते है जो चैत्र और शारदीय नवरात्र कहलाते है वहीं, इन दो नवरात्र के अलावा भी दो नवरात्र होते है जिन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है यह गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ मास में आते हैं।माघ महीने में पड़ने के कारण इन नवरात्र को माघी नवरात्र भी कहा जाता है। 
हिन्दू कलेंडर के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक माघ गुप्त नवरात्र मनाए जाते हैं। ये नवरात्रि भी नॉर्मल नवरात्रियों की तरह नौ दिन ही मनाई जाती हैं। गुप्त नवरात्रियों में मां भगवती की पूजा की जाती है। जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुप्त नवरात्रि स्थापना के मुर्ख निम्नलिखित हैं-
नवरात्र प्रारंभ 12 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार
नवरात्रि समाप्त 21 फरवरी 2021 दिन रविवार
कलश स्थापना मुहूर्त- सुबह 08 बजकर 34 मिनट से 09 बजकर 59 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार माघ नवरात्री उत्तरी भारत में अधिक प्रसिद्ध है।आषाढ़ नवरात्रि मुख्य रूप से दक्षिणी भारत में लोकप्रिय है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपाय करने चाहिए - 
❁संतान प्राप्ति के लिए- गुप्त नवरात्रि के दौरान संतान प्राप्ति के लिए 9 दिन मां दुर्गा को पान का पत्ता अर्पित करना चाहिए। पान का पत्ता कटा-फटा नहीं होना चाहिए। पूजा के दौरान नन्दगोपगृह जाता यशोदागर्भ सम्भवा ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी मंत्र का जाप करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मनोकामना पूरी होती है।
❁नौकरी की समस्या के लिए- नौकरी या जॉब में किसी तरह की समस्या आ रही है तो गुप्त नवरात्रि के दौरान 9 दिन तक मां दुर्गा को बताशे पर रखकर लौंग अर्पित करनी चाहिए। इस दौरान "सर्वबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित: मनुष्यो मत्प्रसादेने भविष्यति ना संशय:।" मंत्र का जाप करना चाहिए। 
❁खराब सेहत के लिए- खराब सेहत से छुटकारा पाने के लिए 9 दिन तक देवी मां को लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए। इस दौरान "ओम् क्रीं कालिकायै नम:" मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति स्वस्थ होता है।
❁कर्ज से मुक्ति पाने के लिए- कर्ज या किसी वाद-विवाद से मुक्ति पाना चाहते हैं तो इसके लिए 9 दिन तक देवी मां के सामने गुग्गल की सुगंध वाला धूप जलाएं। ऐसा करने से समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस दौरान "ओम् दुं दुर्गाय नम:" मंत्र का जाप करना चाहिए।
❁विवाह के लिए- अगर विवाह में कोई बाधा आ रही है तो पूरे 9 दिन पीले फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए। 
दुर्गा सप्तशती,अर्गला स्त्रोत्र, कीलक स्त्रोत्र, देवी कवच, दुर्गा चालीसा के पाठ और "ओम् ऐम् ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै नम:" की माला का जाप करेंगे तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होगा। 
इस गुप्त नवरात्रि में एक छोटा सा उपाय जरुर करे जिसके परिणामस्वरूप माता हमारे कष्ट जरूर हर लेगी। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कोई भी पेड़ (वटवृक्ष, बिल्व वृक्ष,अशोका वृक्ष केले का वृक्ष या पिपल वृक्ष आदि) का एक पता लेकर उसे साफ पानी से धोकर अनार वृक्ष की कलम से केसर के द्वारा उस पते पर "ह्रीं " लिखे और माता जी के चरणों में रखकर "ओम् दुं दुर्गाय: नम:" की 5 या 11 माला का जाप नित्य करे और नवमी तिथि तक यह प्रक्रिया दोहराते रहे बाद में सभी पतों को इकट्ठा करके बहते हुए जल या कोई भी पवित्र वृक्ष की जड़ो में विसर्जित कर दे । इसका लाभ अवश्य मिलेगा। 
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Wednesday, 6 January 2021

वैदिक ज्योतिष में शुक्र

शुक्र ग्रह ज्योतिष की दृष्टि से विश्लेषण
प्रिय पाठकों, 
6 जनवरी 2021,बुधवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज शुक्र ग्रह के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है। शुक्र को ग्रहों में मंत्रणा का मालिक मानते हैं। बृहस्पति और शुक्र दोनों गुरु माने जाते हैं। शुक्र को दैत्य गुरु और बृहस्पति को देव गुरु माना जाता है। गुरु तत्व की जो भूमिका और गुण है वह शुक्र के अंदर पाया जाता है। जिस कारण से शुक्र को बड़ा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को भौतिक,शारीरिक और वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए शुुुुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग आदि का कारक माना जाता है। शुक्र वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है और मीन इसकी उच्च राशि है जबकि कन्या इसकी नीच राशि कहलाती है। शुक्र ग्रह भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा जैसे नक्षत्रों के स्वामी हैं। शुक्र के मित्र ग्रह बुध और शनि है जबकि सूर्य और चंद्रमा शत्रु ग्रह माने जाते हैं। 
किसी भी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह बलवान होता है तो उसका वैवाहिक जीवन हमेशा सुखी बना रहता है। शुक्र पति-पत्नी के बीच प्रेम की भावना को बढ़ाता है तो वहीं प्रेमीयों के जीवन में रोमांस में वृद्धि करता है। इसके अलावा कुंडली में शुक्र के मजबूत होने पर व्यक्ति को तमाम तरह के ऐशोआराम और भौतिक सुखों का आनंद प्राप्त होता है। कुंडली में शुक्र मजबूत होने पर व्यक्ति कला और साहित्य के क्षेत्र में काम करता है।
 किसी भी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर होता है तो उनके वैवाहिक जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं। पति-पत्नि के बीच मतभेद होते हैं। इसके अलावा शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता और भौतिक सुखों का अभाव में हो जाता है। पीड़ित शुक्र के प्रभाव से बचने के लिए जातकों को शुक्र ग्रह के उपाय करने चाहिए।
शुक्र ग्रह को कोरियोग्राफी, संगीतकार, पेंटर, फैशन, डिज़ाइनिंग, इवेंट मैनेजमेंट, कपड़ा संबंधी व्यवसाय, होटल, रेस्ट्रोरेंट, टूर एंड ट्रेवल, थिएटर, साहित्यकार, फिल्म इंडस्ट्री आदि कार्यक्षेत्रों का मालिक माना जाता है। इनके अलावा शुक्र ग्रह को सौन्दर्य उत्पाद, विद्युत उत्पाद, फैन्सी प्रोडक्ट्स, इत्र, कन्फेक्शनरी, फूल, चीनी, कार, शिप, हवाई जहाज, पेट्रोल आदि वस्तुओं का भी मालिक माना गया है।
शुक्र ग्रह प्रधान व्यक्ति रूप-रंग से सुंदर होता है। उसका व्यक्तित्व विपरीत लिंग के व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है। शुक्र के प्रभाव से वह दीर्घायु होता है और स्वभाव से वह मृदुभाषी होता है। शुक्र व्यक्ति को गायन, वादन, नृत्य, चित्र कला के प्रति रूचि पैदा कराता है। शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति काम-वासना, भोग विलास संबंधी चीज़ों को अधिक प्राथमिकता देता है। शुक्र प्रधान व्यक्ति चित्रकार, गायक, नर्तक, कलाकार, अभिनेता आदि बनता है। वहीं शुक्र स्त्री को आकर्षक मोटापा भी प्रदान करता है। 
अगर शुक्र खराब हो तो निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं- 
❁अगर शुक्र खराब हो तो उस व्यक्ति को त्वचा रोग के साथ-साथ स्वप्न दोष जैसे विकार ही घेर लेते हैं। 
❁अगर शुक्र कुंडली में अच्छी स्थिति में नहीं है तो उस व्यक्ति के अंगुठे बिना किसी वजह से खराब हो जाते है या उनका स्वरूप बिगड़ने लगता है।
❁अगर शुक्र खराब हो तो उस व्यक्ति का व्यक्तित्व आकर्षक नहीं होता है ना तो रंग रुप से और न ही कपड़ो से। 
❁अगर शुक्र खराब हो तो उस व्यक्ति की कामुक शक्ति कमजोर होती है। इसके प्रभाव से व्यक्तियों को किडनी से संबंधित बीमारी होने का खतरा रहता है। 
❁अगर शुक्र खराब हो तो व्यक्ति को आँखों से सबंधित रोग होता है
❁अगर शुक्र खराब हो तो उस स्त्री का बार बार गर्भपात होने लगता है।
यदि किसी का शुक्र ग्रह खराब या कमजोर हो तो उन्हें निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-
❃अपनी पत्नी का सम्मान करें और साथ ही पराई स्त्री से दूर रहें। 
❃किसी भी स्त्री के साथ अभद्रता कभी न करें। 
❃शुक्र नीच का है तो खुद घर की साफ सफाई रखे और खुद ही कपड़े धोए। 
❃साफ सुथरे कपड़े पहनें और स्नान रोज करें।
❃सुगंधित इत्र या सेंट का उपयोग जरूर करें क्योंकि शुक्र को यह बहुत पसंद है।
❃शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी की पूजा जरूर करें।
❃शुक्रवार के दिन सफेद रंग के कपड़ों,दूध, दही, चावल, चीनी, आटा, घी, मिश्री, खीर आदि का दान गरीबों में करें।
❃जब भी आप भोजन बनाएं कुछ हिस्सा उसमें से गाय, कौवे और कुत्ते को देने के लिए निकालें।
❃दो मोती ले और उनमें से एक बहते पानी में शुक्रवार को बहा दें दूसरा जीवन भर अपने पास रखें।
❃ शुक्रवार के दिन 'ओम् शुं शुक्राय नम:' मंत्र का जाप जरूर करें।
❃शुक्रवार को खुद भी सफेद वस्त्र धारण करें और सफेद चीजों को ही खाएं।
❃शुक्र की शुभता के लिए काली चीटिंयों को खाने के लिए चीनी डालें। 
❃शुक्र की शुभता के लिए पुरुष को ओपल धारण करना लाभकारी होता है और महिला को हीरा या जरकन पहनना फायदेमंद रहेगा। 
❃शुक्र की दशा ठीक करने के लिए सफेद स्फटिक की माला पहनना भी लाभकारी रहेगा। 
❃नियमित रूप से शुक्रवार को शिव जी को सफेद फूल अर्पित करें। 
❃शुक्र की शुभता के लिए शुक्र स्त्रोत्र का पाठ करना चाहिए। 
लेखक - पंडित अंजनी कुमार दाधीच 
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Saturday, 26 December 2020

अंक ज्योतिष अनुसार कैसा रहेगा 2021

अंक ज्योतिष अनुसार कैसा रहेगा 2021
प्रिय पाठकों, 
26 दिसम्बर 2020,शनिवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज अंक ज्योतिष के अनुसार वर्ष 2021 के वार्षिकफल के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सभी को मालूम है कि साल 2020 अब कुछ ही दिनों का मेहमान है जो कि शुरुआत से ही कोरोना की त्रासदी से भरा रहा है और जल्द ही नए साल 2021 का आगमन होने वाला है ऐसे में हर किसी के मन में ये जिज्ञासा है कि साल 2021 उनके लिए कैसा रहने वाला है? 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए अंक ज्योतिष बहुत ही अहम योगदान कर सकती है। अंक ज्योतिष के मूलांक और भाग्यांक से व्यक्ति के जीवन मे होने वाली घटनाओं का विवरण प्राप्त कर सकते है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अंक ज्योतिष के अनुसार आने वाला नया साल 2021 है जिसके प्रत्येक अंक को जोड़ने पर योग पांच प्राप्त होता है अर्थात नए साल 2021 का मूलांक पांच आता है।(2+0+2+1+=5) मूलांक पांच के अधिष्ठाता ग्रह बुध हैं इसलिए मूलांक पांच के इस साल पर बुध ग्रह की सभी विशेषताओं का विशेष प्रभाव होगा। 
अंक ज्योतिष में मूलांक 5 का स्वामी बुध ग्रह को माना जाता है जिन्हें ग्रहों का राजकुमार कहा गया है। ज्योतिष में बुध बुद्धि,भाषण,वाणी,मैनेजमेंट, व्यापार और वाणिज्य का कारक माना जाता है।
अंक पांच नवीनता और उत्साह को दर्शता है पर इसमें थोड़ी सी गंभीरता की कमी होती है ऐसे इस साल कुछ ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं जिनमें गंभीरता और अनुभव की कमी दिखेगी। लेकिन यह वर्ष उन लोगों के लिए शुभफलदायी और उन्नतिदायक रह सकता है जिनका जन्म किसी भी महीने में 5, 14 और 23 तारीख को हुआ है। इन सभी तिथियों का संबंध मूलांक 5 से है जो वर्ष के अंक से मेल खाता है। ऐसे में साल 2021 मूलांक 5 वालों के लिए शुभ फलदायी रहेगा। इस वर्ष इस मूलांक के लोग अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर कर पाएंगे। भाग्य इन्हें लाभ और उन्नति भी प्रदान करेगा। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अंक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह के प्रभाव के कारण आने वाले साल में लोगो के मध्य कम्यूनिकेशन और परस्पर मिलन को दर्शा रहा है अर्थ अर्थात ऐसा संकेत मिल रहा है कि आने वाले साल 2021 में कोरोना महामारी का प्रकोप कम होगा और लोग आपस में मिलेंगे-जुलेंगे और वहीं दूसरी ओर पाबंदियों पर भी लगाम कसेगी। काम धंधे सामान्य होने से एक बड़ी आबादी को राहत मिलेगी। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया कोरोना महामारी से उबरते हुए नई ऊर्जा के साथ बिजनेस को नई शुरुआत देगी। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सभी ग्रहों में से मूलांक 5 के स्वामी बुध ग्रह को चंचल प्रकृति का माना जाता है। बुध के इसी प्रभाव के कारण समय-समय पर बाजार में बहुत ही तेजी मंदी या उतार-चढाव देखने को मिलेंगे पर बाजार में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रौनक दिखाई देगी। सरकार की नई नई नितियों के कारण कुछ नए व्यापार अस्तित्व में आऐंगे। 
शिक्षक, चिकित्सक, वक्ता, व्यापारी और सलाहकारों के लिए आने वाला साल 2021अच्छा साबित होगा। मिडिया, पत्रकारिता, दवा कंपनियों, दवा विक्रेताओं, रेडीमेड वस्त्रों, श्रृंगार की वस्तुओं के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी साल 2021 सुखद रहने वाला है। सब्जियों के कारोबार से जुड़े लोग भी अगले साल खूब लाभ कमाएंगे। राजनीति में वे व्यक्ति सफल होगें जिनकी कुंडली में बुध की स्थिति अच्छी हो। समय-समय पर मौसम में भी तीव्रता के साथ बदलाव देखने को मिलेंगे। 
लेखक - पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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मैं आशा करता हूँ कि आने वाला वर्ष 2021आपके लिए शुभ और मंगलमय हो। पंडित अंजनी कुमार दाधीच की ओर से नववर्ष की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएँ। 
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Thursday, 24 December 2020

मंगल का राशि परिवर्तन

मंगल का राशि परिवर्तन
प्रिय पाठकों, 
24 दिसंबर 2020,गुरुवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज मंगल का राशि परिवर्तन के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ग्रहों के सेनापति माने जाने अत्यंत साहसी, निडर व पराक्रमी मंगल ग्रह का आज 24 दिसंबर को राशि परिवर्तन होगा। मंगल ग्रह मीन राशि से निकलकर अपनी स्वराशि मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल ग्रह मेष राशि में करीब 60 दिनों तक रहेंगे अर्थात 22 फरवरी तक मेष राशि में रहने के बाद शुक्र की वृषभ राशि में चले जाएंगे। 
मेष राशि में मंगल का यह गोचर ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण है। मेष मंगल ग्रह की राशि है और कोई भी ग्रह अपनी स्वराशि में उच्च का होता है और जातक को इसके अच्छे फल भी प्राप्त होते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार मंगल का राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों पर निम्नलिखित परिणाम देगें-
❁मेष राशि - इस राशि वालों की इस गोचर के दौरान अपने लक्ष्यों में सफलता और आर्थिक लाभ की प्राप्ति तथा लव-लाइफ में भी उतार-चढ़ाव। 
❁वृषभ राशि - इस राशि वालों की इस गोचर के दौरान कार्यक्षेत्र में विवाद और मुश्किलें परन्तु वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने की संभावना। 
❁मिथुन राशि -इस राशि वालों की इस गोचर के दौरान आमदनी में वृद्धि, तरक्की, नए लोगों से मुलाकात, यश और मान मे वृद्धि होगी।
❁कर्क राशि - इस राशि वालों की इस गोचर के दौरान आय और एनर्जी लेवल में वृद्धि होगी।
❁सिंह राशि- इस राशि वालों को इस गोचर के दौरान आर्थिक स्थिति और मेहनत का अच्छा परिणाम होगा। 
❁कन्या राशि- इस राशि वालों को इस गोचर के दौरानकरियर और सेहत में थोड़ा उतार-चढ़ाव होगा। 
❁तुला राशि- इस गोचर के दौरान बिजनेस में लाभ, प्रमोशन का योग और आमदनी बढ़ेगी।
❁वृश्चिक राशि- इस राशि वालों को इस गोचर के दौरान आमदनी में इजाफा, नौकरी का योग परन्तु पारिवारिक कलह की संभावना रहेगी।
❁धनु राशि - इस राशि वालों को इस गोचर के दौरान संतान से लाभ और बेवजह खर्चों में वृद्धि की संभावना होगी। 
❁मकर राशि- इस राशि वालों को इस गोचर के दौरान प्रॉपर्टी निवेश से बचे और कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव की संभावना होगी। 
❁कुंभ राशि - इस राशि वालों को इस गोचर के दौरान भाग्य एवं आर्थिक स्थिति मजबूत और रूके हुए कार्य भी बनेगें।
❁मीन राशि - इस राशि वालों को इस गोचर के दौरान तरक्की के योग परन्तु आर्थिक हालात में थोड़ा दवाब रहने की संभावना। 
मंगल के राशि परिवर्तन का विश्व पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिणाम देखने को मिलेगा - 
मंगल के राशि परिवर्तन का रियल स्टेट पर भी सुखद असर पड़ेगा क्योंकि मंगल भूमि के मालिक होते हैं। करोना संकट के बीच जो रियल एस्टेट का काम थम गया है वह अब गति पकड़ेगा। प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े लोगों को भी फायदा होगा। देश के उद्योग धंधों को भी बल मिलेगा और देश में तैयार होने वाले उत्पादों की मांग बढ़ने लगेगी।
मंगल के कारण प्राकृतिक आपदा के साथ अग्नि कांड, भूकंप, गैस दुर्घटना, वायुयान दुर्घटना होने की आशंका रहती है। पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जाएगा। देश के कुछ हिस्सों में हवा के साथ बारिश रहेगी।
मंगल के अशुभ असर से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए -
❖ मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए।
❖ लाल चंदन या सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए। 
❖ तांबे के बर्तन में गेहूं रखकर दान करने चाहिए। 
❖ लाल कपड़ों का दान करें। 
❖ मसूर की दाल का दान करें। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Pandit Anjani Kumar Dadhich
नक्षत्र ज्योतिष हब 
 Nakashtra jyotish Hub
📧panditanjanikumardadhich@gmail.com

Wednesday, 23 December 2020

कैसे होते हैं फरवरी में पैदा हुए लोग

कैसे होते हैं फरवरी में पैदा हुए लोग
प्रिय पाठकों, 
23 दिसंबर 2020,बुधवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज फरवरी में पैदा हुए लोगों के स्वभाव के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष की अवधारणा कहती है कि हर इंसान का जन्म एक तय समय, महीने और साल में होता है। हर महीने और दिन की एक अलग खासियत या प्रकृति होती है। और इसी के आधार पर उस इंसान की खूबी, शौक, अच्छाई- बुराई और उसका स्वभाव तय होता है। फरवरी में पैदा होने वाले लोगों के बारे में जानना रुचिकर होगा। 
फरवरी में पैदा होने वाले जातकों पर शनि की राशि कुम्भ का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। क्योंकि कुंभ राशि के स्वामी शनि होते हैं जिनकी यह दूसरी राशि होती है। यह राशि पुरुष जाति की स्थिर संज्ञक विचित्र वर्ण व त्रिदोष प्रकृति की होती है। 
फरवरी में पैदा हुए लोगों का स्वभाव और विशेषताएं निम्नलिखित हैं
❁फरवरी में पैदा हुए लोग काफी सुंदर,आकर्षक व्यक्तित्व के धनी, परोपकारी, विश्वासयोग्य, काम के प्रति ईमानदार, विनम्र, संवेदनशील, रचनात्मक दिमाग वाले, शांतिप्रिय विचारशील, स्पष्ट वक्ता, वाकपटु और बुद्धिमान प्रवृत्ति के  होते है। 
❁प्यार के मामले में वेलेंटाइन डे के महीने में पैदा हुए लोग बेहद रोमांटिक केयरिंग रिलाएबल लवर होते है। ये लोग अपने पार्टनर का चुनाव खूब सोच समझ कर ही करते हैं। इन्हें मैच्योर, सीधे और सच्चे दिल के लोग पसंद आते हैं।  लेकिन प्यार में इनको छिछोरापन बिल्कुल भी पसंद नहीं होता है प्यार के मामले में ये लोग दोस्ती और प्यार में ही कंफ्यूज रहते हैं। इन लोगों का ईगो इन्हें साथी के सामने झुकने से रोकता है यही वजह है कि 'ब्रेकअप' या फिर 'कोई अफेयर ही नहीं' इनके जीवन की नियति बन जाती है। प्यार में ये लोग अपने दिल की बात सबसे कह देंगे लेकिन जिससे कहना है उससे कभी खुलकर नहीं कह पाएंगे इसी कारण इनका प्यार ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता है और अगर इनका प्यार ज्यादा समय के लिए टिक जाता है तो ये एक- दूसरे के लिए काफी भाग्यशाली भी होते हैं। 
❁आंखे मुंदकर जल्दी ही किसी पर भी विश्वास करने की प्रवृत्ति के कारण अक्सर धोखा खाते हैं और दुखी रहते है।
❁ये लोग खर्चालु व्यक्तित्व के होने के कारण पैसा खर्च करना पसंद करते है। बचत के बारे में कम ही सोचते हैं।❁फरवरी में पैदा होने वाले लोग काफी इंटेलीजेंट होते हैं लेकिन दुनियादारी में इनकी पढ़ाई- लिखाई बिल्कुल काम नहीं आती।
❁फरवरी में पैदा हुए लोग अपना लक्ष्य पहले से ही निर्धारित कर लेते हैं और धीरे- धीरे प्रगति के पथ पर बढ़ते भी रहते हैं। साथ ही अपने कार्य क्षेत्र में एक विशेष मुकाम भी हासिल करते हैं। लेकिन भाग्य के मामले में थोड़े पिछड़े ही माने जाते हैं।
❁फरवरी में जन्मे लोग जीवन के प्रति महत्वाकांक्षी, धैर्य का अभाव अंधविश्वासी,अच्छे श्रोता और मनोरंजन प्रेमी होते हैं। भावुक होना इनकी कमजोरी है लेकिन इसी भावुकता के कारण लोग इनका फायदा उठाकर बदनाम करने के साथ इनके पैसो पर मौज करते हैं।❁फरवरी में पैदा हुए लोगों को फिजूल के रिश्ते और बातें बनाना बिल्कुल भी पसंद नहीं आता है। वैसे इन्हें समझ पाना ज्यादा मुश्किल नहीं है लेकिन ये लोग अपने आस- पास एक ऐसा रहस्य बनाकर चलते हैं जिससे हर कोई इनकी पर्सनैलिटी को लेकर कंफ्यूज रहता है।
❁फरवरी वाले लोग अक्सर डॉक्टर, लेखक, शिक्षक, चित्रकार, कंप्यूटर विशेषज्ञ या नेता होते हैं। इनसे अलग क्षेत्र में कामयाबी हासिल करने के लिए इन्हें खासा संघर्ष करना पड़ता है। 
❁फरवरी में पैदा होने वाले जातक की कुंडली में गुरु या शनि विपरीत होने पर लीवर, आंत व पैरों में तकलीफ होती हैं। ऐसे में इन जातकों को देवगुरु व शनि की आराधना करनी चाहिए। 
फरवरी में पैदा होने वाले लोगों को निम्नलिखित सलाह दी जाती है-
❖ अपना व्यक्तित्व दृढ़ बनाएं। 
❖ अपने आत्मविश्वास को कभी कमजोर ना पड़ने दें। 
❖ समय के साथ जरूरी परिवर्तन को स्वीकार करें। 
❖ पुरानी विचारधारा को त्यागें तो आप जैसा सलोना इंसान कोई नहीं।
❖ भावुक होना कमजोरी है लेकिन कब और किसके सामने भावुक होना है ये भी पता होना चाहिए।
❖ सूर्य को जल चढ़ाएं
❖ देवगुरु बृहस्पति और शनिदेव की आराधना करनी चाहिए। 
★लकी नंबर : 4,8,12, 22 और 28
★लकी कलर : व्हाइट, बेबी पिंक, मेहरून
★लकी डे : सेटरडे, थर्सडे
★लकी स्टोन : एमरल्ड, एमेथिस्ट
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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