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Monday, 10 January 2022

शिव रक्षा स्तोत्र

शिव रक्षा स्तोत्र 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति अपने आपको और अपने परिवार को किसी भी प्रकार की कठिनाईयों, बुरी शक्तियों, रोगों, दुर्घटनाओं और दरिद्रता आदि से रक्षा करना चाहता है तो उसे प्रत्येक सोमवार को शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।शिव रक्षा स्तोत्र के रचयिता याज्ञवल्क्य ऋषि हैं। भगवान विष्णु ने याज्ञवल्क्य ऋषि के सपने में आकर इस स्तोत्र का वर्णन किया था। इसे शिव रक्षा कवच स्तोत्र या शिव अभयंकर कवच के नाम से भी जाना जाता है।
॥ श्री शिव रक्षा स्तोत्र ॥
॥ ओम् गं गणपतये नमः॥
श्री सदाशिवो देवता ॥ अनुष्टुप् छन्दः ।
श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थं शिवरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ॥
चरितं देवदेवस्य महादेवस्य पावनम् ।
अपारं परमोदारं चतुर्वर्गस्य साधनम् ॥ १॥
गौरीविनायकोपेतं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रकम् ।
शिवं ध्यात्वा दशभुजं शिवरक्षां पठेन्नरः ॥ २॥
गंगाधरः शिरः पातु भालं अर्धेन्दुशेखरः ।
नयने मदनध्वंसी कर्णो सर्पविभूषण ॥ ३॥
घ्राणं पातु पुरारातिः मुखं पातु जगत्पतिः ।
जिह्वां वागीश्वरः पातु कंधरां शितिकंधरः ॥ ४॥
श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्वधुरन्धरः ।
भुजौ भूभारसंहर्ता करौ पातु पिनाकधृक् ॥ ५॥
हृदयं शंकरः पातु जठरं गिरिजापतिः एक़़ 3
नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटी व्याघ्राजिनाम्बरः ॥ ६॥
सक्थिनी पातु दीनार्तशरणागतवत्सलः ।
उरू महेश्वरः पातु जानुनी जगदीश्वरः ॥ ७॥
जङ्घे पातु जगत्कर्ता गुल्फौ पातु गणाधिपः ।
चरणौ करुणासिंधुः सर्वाङ्गानि सदाशिवः ॥ ८॥
एतां शिवबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् ।
स भुक्त्वा सकलान्कामान् शिवसायुज्यमाप्नुयात् ॥ ९॥
ग्रहभूतपिशाचाद्यास्त्रैलोक्ये विचरन्ति ये ।
दूरादाशु पलायन्ते शिवनामाभिरक्षणात् ॥ १० ॥
अभयङ्करनामेदं कवचं पार्वतीपतेः ।
भक्त्या बिभर्ति यः कण्ठे तस्य वश्यं जगत्त्रयम् ॥ ११॥
इमां नारायणः स्वप्ने शिवरक्षां यथाऽऽदिशत् ।
प्रातरुत्थाय योगीन्द्रो याज्ञवल्क्यः तथाऽलिखत् ॥ १२॥
॥ इति शिव रक्षा स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
अस्य श्रीशिवरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषिः ।

Saturday, 8 January 2022

श्रीगणेश पंचरत्न स्तोत्र

श्रीगणेश पंचरत्न स्तोत्र 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी भी शुक्ल पक्ष के बुधवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर भगवान गणेशजी की पूजा कर आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा निर्मित श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ करने से हर मनोकामना पूरी होती है और व्यक्ति को रोग,अपयश, और अकाल मृत्यु से भी बचाव होता है।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश पाहिमाम,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश रक्षमाम।
मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं
कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् ।
अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं
नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥१॥
नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं
नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् ।
सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं
महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥२॥
समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरं
दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।
कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं
मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥३॥
अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनं
पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।
प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणम्
कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥४॥
नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजं
अचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम् ।
हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां
तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥५॥
महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं
प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।
अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतां
समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ॥६॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश पाहिमाम,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश रक्षमाम।

Friday, 7 January 2022

सूर्य शनि की युति

सूर्य-शनि की युति के परिणाम एवं उपाय
प्रिय पाठकों, 
07 जनवरी 2022,शुक्रवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज सूर्य-शनि की युति उसका परिणाम एवं उपाय के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वैदिक ज्योतिष के आधार पर सूर्य समस्त जीव-जगत के आत्मा स्वरूप हैं। इसके द्वारा व्यक्ति को जीवन, ऊर्जा प्रकाश एवं बल की प्राप्ति होती है। जबकि वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को एक क्रूर ग्रह माना जाता है। शनि ग्रह को आयु, दुख, रोग, पीड़ा, विज्ञान, तकनीकी, लोहा, खनिज तेल, कर्मचारी, सेवक, जेल आदि का कारक माना जाता है। पंडित अंजनी कुमार के अनुसार वैदिक धर्मशास्‍त्रों में सूर्य और शनि देव के पिता एवं पुत्र का संबंध हैं किंतु इन दोनों के बीच का संबंध अच्‍छा नहीं है।शनि देव अपने पिता सूर्य से नाराज रहते हैं।वैसे भी अगर दोनों की प्रकृति का विचार करें तो ज्ञान और अंधकार साथ मिलने पर शुभ प्रभाव नहीं देते है सूर्य-शनि युति व्यक्ति के जीवन को पूर्णत: संघर्षमय बनती हैं। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार यदि सूर्य शनि की युति हो तो पिता और पुत्र में वैचारिक मतभेद बने रहते हैं। यह युति व्यक्ति के पिता से संबंध, व्यक्ति के स्वास्थ्य तथा व्यक्ति के अपने कार्यक्षेत्र तथा मान-सम्मान में कमी करती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य-शनि की युति से होने वाले परिणाम निम्नलिखित है- सूर्य-शनि की युति से होने पर शनि के दुष्प्रभाव से युति वाले भाव तथा उससे सप्तम भाव के फलादेश में न्यूनता आती है। सूर्य शनि के एक साथ होने के कारण पिता पुत्र के संबंधों में समस्या पैदा होती है और व्यक्ति के के अपने पिता से संबंध अच्छे नहीं रहते है। पिता और पुत्र का आपसी व्यवहार अच्छा नहीं होता है और कभी कभी एक दूसरे से दूर हो जाते हैं। कभी कभी पिता पुत्र में से एक ही उन्नति कर पाता है, अतः इस युति को ‘विच्छेदकारी योग की संज्ञा दी गई हैं।सूर्य के अधिक निर्बल होने पर पिता का साया जल्दी उठ जाता है या व्यक्ति अपने पिता से अलग हो जाता है। इसी प्रकार संबंधियों से भी अलगाव होता है। व्यक्ति का स्वास्थ्य में भी गड़बड़ रहती है। व्यक्ति की वाणी में संयम नहीं रह पाता है इसी कारण काम बिगड़ सकते हैं। व्यक्ति को धन संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं। इस युति के कारण वैवाहिक जीवन खराब होता है। कभी कभी दो विवाहों के योग भी बन जाते हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार जब यह युति लग्न, पंचम, नवम या दशम में हो व दोनों (सूर्य-शनि) में से कोई ग्रह इन भावों का कारक भी हो तो यह योग जीवन में विलंब लाता है। बेहद मेहनत के बाद कठिनाई से सफलता मिलती है।इस युति से ग्रस्त व्यक्ति लागातार संघर्ष से निराश हो जाता है डिप्रेशन में भी आ जाता हैं। यदि शनि उच्च का हो व कारक हो तो 36वें वर्ष के बाद, अपनी दशा-महादशा में सफलता जरूर देता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य शनि युति से होने वाले दुष्प्रभाव से बचने हेतु कुछ उपाय निम्नलिखित है-
☞सूर्य-शनि युति होने पर व्यक्ति को सतत परिश्रम के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। 
☞अपने पिता से मतभेद टालने चाहिए।
☞अपना ज्यादा समय ज्ञानार्जन में उपयोग करें। 
☞आध्यात्मिक साधना से अपना मनोबल मजबूत करना चाहिए। 
☞सूर्य व शनि शांति के उपाय करने चाहिए।
☞शिव पञ्चाक्षरि मंत्र या महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए।
☞प्रतिदिन सुबह-सुबह सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं और आदित्यह्रदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।
☞शनिवार को पीपल वृक्ष की शनिवार के दिन जल में कच्चा दूध मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित कर जड़ में तेल का दीपक जलाएं और पीपल की सात परिक्रमा करें।
☞पितरों की पूजा व तर्पण करें।
☞एक मुखी रूद्राक्ष को लाल धागे में डालकर रविवार के दिन गले में धारण करें या पूजा स्थान में स्थापित करें। 
☞शनिवार के दिन गरीबों को कंबल, चप्पल और कपड़े का दान करें। बंदरो को चने और गुड़ खिलाना ही हितकारी रहेगा।
☞सूर्य और शनि दोनों के दोष को दूर करने के लिए हनुमान जी के मंदिर में बैठकर हनुमान चालीसा या रामरक्षास्त्रोत्र का पाठ करना चाहिए।
☞सूर्य और शनि के मंत्र का जप करें, सूर्य मंत्र- ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नम:, शनि मंत्र- ऊँ शं श्नैश्चराय नम: का नित्य जाप करें।"
☞शनि स्तोत्र" का पाठ करे और असहाय लोगों की मदद करें।
☞शाम को तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाएं।
उपाय करते रहने से सूर्य-शनि के दोष दूर हो जाते हैं।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Hub
नक्षत्र ज्योतिष हब
Panditanjanikumardadhich@gmail.com
Phone No-6377054504,9414863294

Friday, 10 December 2021

गोरोचन और उसके उपाय

गोरोचन और उसके उपाय
प्रिय पाठकों, 
10 दिसंबर 2021,शुक्रवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज गोरोचन और उसके उपयोग के बारे में यहाँ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गोरोचन पीले रंग का एक सुगंधित पदार्थ होता है जिसमें हल्की लालिमा होती है। यह मोम की तरह होता है और सूखने पर कड़ा हो जाता है। इसे गो पित्त भी कहा जाता है क्योंकि यह गाय के पित्त में बनने वाला एक पत्थर है जिसे गाय की मृत्यु के बाद निकाला जाता है। गोराचन सभी गायों में नहीं पाया जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में ही यह गायों के पित्त में बनता है। यह पूजा-पाठ की सामग्री की दुकान पर मिल जाता है। लेकिन इसे हासिल करने के लिए गाय का वध करना सर्वथा वर्जित है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गोरोचन के गुणधर्म एवं प्रभाव निम्नलिखित हैं- गोरोचन का रस तिक्त होता है। यह गुण में रुक्ष है। गोरोचन का वीर्य उष्ण होता है। पचने पर गोरोचन का विपाक कटु होता है। गोरोचन पित्त सारक होता है एवं यह वात एवं कफ का शमन करने वाला होता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गोरोचन का औषधि रुप में उपयोग भी किया जा सकता है जो निम्नलिखित हैं- गोरोचन बच्चों के रोगों में उपयोगी होता है। इसके अलावा शिरोरोग, रक्त की कमी, पीलिया, अपस्मार आदि में गोरोचन का प्रयोग किया जाता है। 
नोट- गोरोचन की सेवन मात्रा-125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम तक प्रयोग कर सकते हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार घर में गोरोचन रखने के लाभ निम्नलिखित हैं-
☞धन की कमी नहीं रहती। 
☞असफलता द्वार पर दस्तक नहीं देती। 
☞ घर में पीड़ा नहीं आती। 
☞ घर में सरस व मधुर वातावरण बना रहता है। 
☞ संतानहीनता, दरिद्रता और क्लेश से छुटकारा मिलता है।   
गोरोचन का उपयोग - गोरोचन एक ऐसी सिद्ध वस्तु है जिसका उपयोग अनेक कर्मों में किया जाता है। धन, संपत्ति, सुख, समृद्धि, जमीन में गड़े धन का पता लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रयोग वशीकरण में किया जाता है। इसका तिलक करने से तीव्र वशीकरण और आकर्षण प्राप्त होता है।
❁ गोरोचन को रवि पुष्य नक्षत्र में सिद्ध किया जाता है। जिस रविवार को पुष्य नक्षत्र हो उस दिन नहाकर अपने पूजा स्थान में बैठकर सोना या चांदी की कटोरी, डिबिया या छोटे पात्र में गोराचन रखकर इसका पंचोपचार पूजन करें। इसके बाद ओम् शांति शांत: सर्वारिष्टनाशिनि स्वाहा: और ओम् श्रीं श्रीयै नम: इन दो मंत्रों की एक-एक माला जाप करने के बाद इसे चांदी की डिबिया में भरकर पुजास्थल पर सुरक्षित रख कर रोज उसका पुजन करे।
❁ आर्थिक स्थिति सुधारने और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए गोरोचन को एक चांदी की डिबिया में भरकर अपने पूजा स्थान में रखें और रोज देवी-देवताओं की तरह इसकी भी पूजा करें। इससे घर में बरकत आने लगती है। घर में यदि कोई वास्तु दोष है तो वह दूर हो जाता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
 घर में कोई सदस्य बीमार है तो रविवार या मंगलवार के दिन एक छोटा चम्मक गुलाब जल में थोड़ा सा गोरोचन मिलाकर उस व्यक्ति को पिला दें। गोरोचन का तिलक प्रतिदिन बीमार व्यक्ति को लगाएं तो जल्द ही वह स्वस्थ होने लगेगा।
 मिर्गी या हिस्टीरिया के मरीज को गुलाबजल में थोड़ा गोराचन घिसकर तीन दिन तक पिलाने से रोग में आराम मिलता है। लेकिन यह प्रयोग किसी जानकार की देखरेख में ही करें।
 समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिए गोरोचन को रवि पुष्य नक्षत्र में पंचोपचार पूजन कर चांदी या तांबे के ताबीज में भरकर अपने गले में धारण कर लें। इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं समाप्त होंगी और सारी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
 गोरोचन की स्याही बनाकर इससे भोजपत्र पर मोरपंख की कलम से सिद्ध बीसा यंत्र लिखकर पंचोपचार पूजन करके चांदी के ताबीज में बांधकर अपने पास रखें। इससे आर्थिक संकट दूर हो जाता है।
 यदि आप अपने आकर्षण प्रभाव में वृद्धि करना चाहते हैं तो गोरोचन के साथ सिंदूर और केसर को बराबर मात्रा में मिलाकर एक चांदी की डिबिया में भरकर रख लें। प्रतिदिन सूर्योदय के समय इसका तिलक करने से आपके वशीकरण प्रभाव में जबर्दस्त तरीके से वृद्धि होगी। हर व्यक्ति आपकी बात मानने लगेगा।
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
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Thursday, 7 October 2021

नवरात्रि मंत्र जाप

✧・゚: *✧・゚:*नवरात्रि मंत्र जाप ✧・゚: *✧・゚:*
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वैसे तो नवरात्रि के दिनों में नौ दिनों तक अपने कष्ट निवारण या मनोवांछित वर पाने के लिए दुर्गा सप्तशती,अर्गला स्त्रोत्र, किलक स्त्रोत्र, दुर्गा चालीसा, दुर्गा कवच आदि का पाठ कर सकते हैं या दुर्गा माता के नाम की माला का जाप कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसका पाठ करने से माता अति प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से परिवार पर आए बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं। अगर आप नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते तो दुर्गा सप्तशती में मौजूद कुछ विशेष मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए।नवरात्रि में करें मां दुर्गा के इन मंत्रों का जाप अवश्य करें जो निम्नलिखित हैं -
यदि मेहनत के बावजूद आपका भाग्य साथ नहीं देता है तो दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदलने के लिए आपको नौ दिनों तक माता के इस मंत्र का जाप करना चाहिए-
❖ देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्‌,
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।
मां दुर्गा का ये चमत्कारिक मंत्र आपको हर विपत्ति से दूर रखता है और आपके आसपास एक रक्षाकवच बनाता है। मां शक्ति की आराधना के नौ दिनों तक इसका जाप करने से आपके सारे संकट दूर होते हैं और आपके बुरे दिन भी अच्छे में बदल जाते हैं -
❖ शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे,
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते। 
मां दुर्गा के इस मंत्र को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। इसका नियमित रूप से जाप करने से महामारी से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को हर तरह के संकट से बचाता है-
❖ ओम् जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी,
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते। 
परिवार को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए नौ दिनों तक मातारानी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए- 
❖ देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य,
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य। 
इन सभी मंत्रों के अलावा दुर्गा सप्तशती के इन मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं -
❖ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
❖ ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
❖ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
❖ माता दुर्गा के नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' का जाप भी अधिक से अधिक कर सकते हैं।
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Wednesday, 6 October 2021

नवरात्रि पर्व विशेष

⋇⋆✦⋆⋇ नवरात्रि पर्व विशेष ⋇⋆✦⋆⋇ 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिंदू धर्म में नवरात्रि के इस त्योहार का बेहद ही खास महत्व होता है।शारदीय नवरात्रि का पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि (नौ दिन) तक मनाया जाता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) की पूजा की जाती है।इस वर्ष नवरात्रि का त्योहार 7 अक्टूबर 2021 से शुरू होगा और नवरात्रि पर्व का समापन 15 अक्टूबर 2021 को होगा। इस बार माता जगदम्बा (दुर्गा)डोली में सवार होकर आएगी। जिसका प्रभाव यह होगा कि इस दौरान भारत के पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध स्थापित होंगे और प्राकृतिक आपदा की आशंका कम होगी।   
देवी भगवद पुराण के अनुसार यदि नवरात्रि गुरुवार या शुक्रवार के दिन से शुरू होती है तो माँ दुर्गा डोली में सवार होकर आती हैं। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कलश(घट)स्थापना महुर्त निम्नलिखित है
नवरात्र पर्व पर कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना का विशेष महत्व है। घट स्थापना के दिन चित्रा नक्षत्र जैसे शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन कन्या राशि में चर्तुग्रही योग का शुभ संयोग बन रहा है। घट स्थापना मुहूर्त 7 अक्टूबर 2021 को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट के बीच है। जो लोग इस शुभ योग में कलश स्थापना न कर पाएं, वे दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक लाभ का चौघड़िया में और 1 बजकर 42 मिनट से शाम 3 बजकर 9 मिनट तक अमृत के चौघड़िया में कलश-पूजन कर सकते हैं।
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Wednesday, 9 June 2021

सूर्य जनित ग्रहण योग

सूर्य जनित ग्रहण योग

पंडित अंजनी कुमार के अनुसार जन्म कुंडली के किसी भी भाव में सूर्य के साथ राहु बैठे हों तो ग्रहण योग बनाते हैं। ग्रहण योग होने से जीवन की शुभता पर ग्रहण लग जाता है। ग्रहण योग से व्यक्ति की मानसिक स्थिति को प्रभावित होती है। इस योग के कारण जीवन में स्थिरता नहीं होती। उसे न चाहते हुए भी नौकरी और व्‍यवसाय में बार-बार बदलाव करते रहना पड़ता है।ग्रहण योग होने से सबसे अधिक प्रभावित जातक की आंखें होती हैं और पिता के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। पिता से प्राप्त होने वाले सुख एवं सहयोग में कमी आती है।पंडित अंजनी कुमार के अनुसार अगर सूर्य के ग्रहण योग हो तो व्‍यक्ति किसी विषय पर गंभीरता से विचार किये बिना कार्य बैठते हैं जिसका इन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे लोग भी विषयों को अधिक समय तक याद नहीं रख पाते हैं। ऐसे लोग पैतृक स्थान से दूर जाकर कैरियर बनाते हैं।
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार यह ग्रहण योग दोष कुंडली में 2,6,8 या 12वें भाव में बन रहा हो तो पितृदोष भी बनाता है।ऐसे जातक को अपने जीवन के तमाम क्षेत्रों में अवरोध का सामना करना पड़ता है। मुसीबतों के पीछा न छोड़ने की वजह से जातक का अपने ऊपर से से भी आत्मविश्वास उठ जाता है।
सूर्य जनित ग्रहण योग के उपाय निम्नलिखित हैं जिनको करने से ग्रहण योग के दोषों का निवारण या उन्हें कम किया जा सकता है -
❁ सूर्य जनित ग्रहण योग की शांति के लिए सूर्य की पूजा करनी चाहिए। प्रतिदिन भगवान सूर्य को "ओम् घृणि सूर्यायः नम:"मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दे साथ ही आदित्‍यहृदय स्‍तोत्र का नि‍यमित पाठ करना चाहिए। इससे ग्रह दोष का प्रभाव कम होता है।
❁ कुंडली में यदि सूर्य ग्रहण या पितृदोष का प्रभाव हो तो जातक को गेहूं, गुड़ व तांबे का दान जरूर करना चाहिए। सूर्य ग्रहण के दौरान ये चीजें दान जरूर करनी चाहिए।
❁ जिसकी कुंडली में सूर्य ग्रहण दोष हो उसे गुड़ खाने से परहेज करना चाहिए।
❁ पितृदोष और ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए बहते जल में छह नारियल अपने सिर पर से वार कर बहा दें।
❁ ऐसे जातकों को अपनी मां की सेवा करनी चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। साथ ही मां के हाथ से दूध और चावल लेकर उसे दान करें।
❁ जिनपर सूर्य ग्रहण हो अथवा पितृदोष हो उसे कभी भी किसी से मुफ्त में कोई चीज नहीं लेनी चाहिए। ऐसे व्यक्ति को खुद नेत्रहीन लोगों की मदद करनी चाहिए।
❁ ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए बहते हुए जल में जौ को दूध या गौ मूत्र से धोकर बहा दें।
❁जिन जातकों पर ऐसा दोष हो उसे प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए साथ ही उसे हमेशा सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
❁पीपल का पेड़ लगाएं अथवा पीपल के पेड़ की सेवा करें। पानी दें और उसकी देखरेख करें।
❁जब भी सूर्य ग्रहण लगे उस समय तिल, नींबू, पका केला बहते पानी में बहा दें।
❁परिवार के सभी सदस्यों के हाथ से सिक्के लें और उसे एकत्र कर किसी भी मंदिर में दान कर आएं। इससे परिवार पर आपके ग्रहण के प्रभाव का असर नहीं होगा।
❁ एकादशी और रविवार का व्रत रखें और नमक का सेवन न करें।
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