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Thursday, 10 December 2020

प्रेम विवाह असफल क्यों?

प्रेम विवाह असफल क्यों? 

मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज कुंडली के अनुसार प्रेम विवाह के असफल होने के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आज के समय में ज्यादातर लोग अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनते है और उस जीवन साथी से प्रेम विवाह भी करते है। लेकिन ऐसा होता है कि प्रेम विवाह(लव मैरिज)करने के बाद से दोनों के विचारों में परिवर्तन हो जाता है।जिसके चलते दोनों में छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगते हैं। अंत में बात तलाक तक पहुंच जाती है। ज्योतिष के अनुसार प्रेम विवाह के योग का निर्माण जातक की कुंडली में बन जाता हैं जिसकी वजह से तथा ग्रहों की दशा के अनुसार प्रेम विवाह के योग बनते हैं। लेकिन यह जरुरी नहीं कि सभी प्रेम विवाह सफल हों। आजकल के समय में अनेकों उदाहरण ऐसे मिल जाते हैं जिसमें लड़का और लड़की प्रेम विवाह तो कर लेते हैं मगर शादी के कुछ समय बाद ही उनमें अनबन होना शुरू हो जाती है। कुछ ग्रहों के कारण ही व्यक्ति प्रेम करता है और इन्हीं ग्रहों के प्रभाव से दिल भी टूटता हैं और प्रेम विवाह असफल भी होता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर किसी का प्रेम विवाह सफल नहीं होता है तो उसकी कुंडली में शुक्र,गुरु बुध और राहु आदि ग्रहों के कमजोर होने की भारी आशंका होती है।इनमें कमजोर शुक्र के कारण व्यक्ति की कामुक और प्रेम भावना कमजोर हो जाती है। वहीं गुरु के पीड़ित या कमजोर होने से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में खुशियां ओझल हो जाती हैं। कमजोर बुध हो तो व्यक्ति को विवाह में फरेब मिलने की संभावना रहती हैं। जबकि कमजोर राहु वैवाहिक जीवन में कल्पना और भ्रम की स्थिति पैदा करता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार इनके अलावा प्रेम विवाह को असफल होने के लिए जो कारण उतरदायी है वो निम्नलिखित हैं -
❁शुक्र व मंगल की स्थिति व प्रभाव प्रेम संबंधों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यदि किसी जातक की कुण्डली में सभी अनुकूल स्थितियाँ होते हुई भी, शुक्र की स्थिति प्रतिकूल हो तो प्रेम संबंध टूटकर दिल टूटने की घटना होती है।
❁पंचम भाव अथवा शुक्र पापक्रान्त हों अर्थात पाप ग्रहों के मध्य में हों तो प्रेम विवाह होने में बाधा आती है। ❁जन्म कुंडली में पंचमेश अथवा प्रेम विवाह कारक ग्रह शुक्र लग्न से छठे,आठवें, बारहवें हों तो प्रेम विवाह नहीं हो पाता अथवा विवाह के पश्चात परेशानियां आती हैं। 
❁पंचमेश और सप्तमेश यदि लग्न और चन्द्र से छठे, आठवें या बारहवें भाव में बैठ जायें और शुभ ग्रहों से किसी भी तरह का दृष्टि युति सम्बंध नहीं बनाते हों तो प्रेमियों को अपने लव लाइफ का बलिदान करना पड़ता है। 
❁सप्तम भाव या सप्तमेश का पाप पीड़ित होना, पापयोग में होना प्रेम विवाह की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। पंचमेश व सप्तमेश दोनों की स्थिति इस प्रकार हो कि उनका सप्तम-पंचम से कोई संबंध न हो तो प्रेम की असफलता दृष्टिगत होती है।
❁एकादश भाव पापी ग्रहों के प्रभाव में होता है तब प्रेमियों का मिलन नहीं होता है। 
❁यदि लड़के की कुंडली का शुक्र लड़की की कुंडली में राहू के साथ स्थित हो जाये तो लड़के के काम विकृति के कारण विवाह विच्छेद के योग बन सकते हैं। 
❁लड़के की कुंडली का राहू यदि लड़की की कुंडली में शुक्र के साथ स्थित हो तो विवाह विच्छेद या दीर्घकालीन विवाद और विषाद के योग बनेंगे। 
❁शुक्र का सूर्य के नक्षत्र में होना और उस पर चन्द्रमा का प्रभाव होने की स्थिति में प्रेम संबंध होने के उपरांत या परिस्थितिवश विवाह हो जाने पर भी सफलता नहीं मिलती। शुक्र का सूर्य-चन्द्रमा के मध्य में होना असफल प्रेम का कारण है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रेम विवाह को मजबूत करने के उपाय निम्नलिखित हैं-
❃शुक्र ग्रह की पूजा करें अथवा शुक्र ग्रह की शांति के उपाय करें।
❃कुंडली में पंचम भाव और पंचमेश को मजबूत करने के लिए पंचमेश का रत्न धारण करें अथवा पंचमेश की पुजा करे। 
❃पन्ना या पुखराज धारण करें। 
❃रोजाना सुबह सूर्य को जल चढ़ाएं
❃शुक्रवार को छोटी कन्याओं का आशीर्वाद लें।
❃सुबह गायत्री मंत्र का जप करें। 
❃शुक्रवार और पूर्णिमा का व्रत रखें 
❃सुखद दाम्पत्य के लिए ब्ल्यू टोपाज पहनें।
❃चन्द्रमणि प्रेम प्रसंग में सफलता प्रदान करती है ।
❃कुंडली में सप्तम भाव और सप्तमेश को मजबूत करने के लिए सप्तमेश की पूजा करें।
❃गुरु की शांति के उपाय करनें।
❃बुध ग्रह की शांति के उपाय करें।
❃राहु की शांति के उपाय करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार आपको अपने प्रेम संबंध का परिणाम सफल विवाह होगा या नहीं यह आप ज्योतिष का आश्रय लेकर काफी हद तक भविष्य के संभावित परिणामों के बारे में जान सकते है।इस हेतु प्रेमी-प्रेमिका को अपनी जन्मपत्रिका के ग्रहों की स्थिति किसी योग्य ज्योतिषी से अवश्य पूछ लेनी चाहिए। प्रेम ईश्वर का वरदान है। प्रेम अवश्य करे लेकिन सोच-समझकर और कुंडली दिखाकर।

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Wednesday, 9 December 2020

अंगारक योग

अंगारक योग

मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज कुंडली में अंगारक योग दोष बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वैदिक ज्योतिष के शास्त्रों में बताया गया कि अगर किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में मंगल और राहु एक साथ किसी घर में बैठकर युति कर रहे हों अथवा मंगल व राहू के बीच दृष्टि संबंध बन रहा हो तो ऐसी जन्मकुंडली में अंगारक योग निर्मित होता है। 
जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में अंगारक दोष पाया जाता है तो उस व्यक्ति का स्वभाव हिंसक पशु जैसा हो जाता है। अंगारक दोष वाले व्यक्तियों के अपने बंधुओं, मित्रों व रिश्तेदारों के साथ कटु संबंध स्थापित होते हैं। वैदिक ज्योतिष के फलित खंड अनुसार अंगारक दोष वाले व्यक्ति शुभाशुभ दशा-अंतर्दशा आने पर अपराधी बन जाते हैं व उसे अपने असामाजिक कार्यों के चलते लंबे समय तक उन्हें जेल में भी रहना पड़ता है। कुंडली में किस भाव में अंगारक दोष बनता है उसके अनुसार ही फल प्राप्त होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के जीवन में कई उतार चढ़ाव आते हैं। जमीन जायदाद से जुड़ी परेशानियां व धन संबंधित परेशानियां बनी रहती हैं। माता के सुख में कमी आती है या संतान प्राप्ति में परेशानियां आती है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार राहू व मंगल की युति अथवा दृष्टि संबंध को लाल किताब में "पागल हाथी" अथवा "खूंखार शेर" कहकर संबोधित किया गया है। लाल किताब ज्योतिष अनुसार अगर यह योग किसी की कुंडली में होता है तो वो व्यक्ति अपनी मेहनत से नाम व पैसा कमाता है। ऐसे लोगों के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। यह योग अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल देने वाला है। वास्तविकता में वैदिक ज्योतिष व लाल किताब में अंगारक दोष की व्याख्या यह है कि व्यक्ति की क्रूर मानसिकता को परिभाषित करना। 
अंगारक दोष का अशुभ फल तब प्राप्त होता है जब कुंडली में मंगल व राहु दोनों ही अशुभ होते हैं। कुंडली में मंगल व राहु में से किसी के शुभ होने की स्थिति में जातक को अशुभ फल प्राप्त नहीं होते। कुंडली में मंगल व राहु दोनों के शुभ होने पर शुभ फलकारी अंगारक योग बनाता है। यह योग शुभ व अशुभ दोनो रूप से फल देता है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार कुंडली में अंगारक की स्थिति होने पर इसकी शांति आवश्यक है अन्यथा लंबे समय तक परेशानियां बनी रहती है। कुंडली में अशुभ मंगल तथा अशुभ राहु अथवा केतु के संयोग से बनने वाला अंगारक योग सबसे अधिक अशुभ फलदायी होता है जबकि इन दोनों ग्रहों में से किसी एक के शुभ हो जाने की स्थिति में यह योग उतना अधिक अशुभ फलदायी नहीं रह जाता।
किसी जातक को अंगारक योग के साथ जोड़े जाने वाले अशुभ फल तभी प्राप्त होते हैं जब कुंडली में अंगारक योग बनाने वाले मंगल तथा राहु अथवा केतु दोनों ही अशुभ हों तथा कुंडली में मंगल तथा राहु केतु में से किसी के शुभ होने की स्थिति में जातक को अधिक अशुभ फल प्राप्त नहीं होते और कुडली में मंगल तथा राहु केतु दोनों के शुभ होने की स्थिति में इन ग्रहों का संबंध अशुभ फल देने वाला अंगारक योग न बना कर शुभ फल देने वाला अंगारक योग बनाता है। उदाहरण के लिए किसी कुंडली के तीसरे घर में अशुभ मंगल का अशुभ राहु अथवा अशुभ केतु के साथ संबंध हो जाने की स्थिति में ऐसी कुंडली में निश्चय ही अशुभ फल प्रदान करने वाले अंगारक योग का निर्माण हो जाता है जिसके चलते इस योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अधिक आक्रामक तथा हिंसक होते हैं तथा कुंडली में कुछ अन्य विशेष प्रकार के अशुभ प्रभाव होने पर ऐसे जातक भयंकर अपराधी जैसे कि पेशेवर हत्यारे तथा आतंकवादी आदि बन सकते हैं। दूसरी ओर किसी कुंडली के तीसरे घर में शुभ मंगल का शुभ राहु अथवा शुभ केतु के साथ संबंध हो जाने से कुंडली में बनने वाला अंगारक योग शुभ फलदायी होगा जिसके प्रभाव में आने वाले जातक उच्च पुलिस अधिकारी, सेना अधिकारी, कुशल योद्धा आदि बन सकते हैं जो अपनी आक्रमकता तथा पराक्रम का प्रयोग केवल मानवता की रक्षा करने के लिए और अपराधियों को दंडित करने के लिए करते हैं।
अंगारक योग हमेशा अशुभ फलदायी न होकर शुभ फलदायी होता है जिसके शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपने साहस पराक्रम तथा युद्ध नीति के चलते संसार भर में ख्याति प्राप्त कर सकते हैं तथा ऐसे जातक अपने साहस और पराक्रम का प्रयोग केवल नैतिक कार्यों के लिए ही करते हैं। इसलिए विभिन्न कुंडलियों में बनने वाला अंगारक योग जातकों को भिन्न भिन्न प्रकार के शुभ अशुभ फल प्रदान कर सकता है तथा इन फलों का निर्धारण मुख्य रूप से कुंडली में मंगल, राहु तथा केतु के स्वभाव, बल तथा स्थिति के आधार पर किया जाता है।
 जन्मकुंडली के द्वादश भाव में आंगरक योग का फल निम्नलिखित हैं -
❁पहले भाव में अंगारक योग होने से पेट रोग, शरीर पर चोट,अस्थिर मानसिकता, क्रूरता होती है। 
❁दूसरे भाव में अंगारक योग होने से धन में उतार-चढ़ाव व व्यक्ति का घर-बार बरबाद हो जाता है।
❁तीसरे भाव में अंगारक योग होने से भाइयों से कटु संबंध बनते हैं परंतु व्यक्ति धोखेबाजी से सफल हो जाता है। 
❁चौथे भाव में अंगारक योग होने से माता को दुख व भूमि संबंधित विवाद होते हैं।
❁पांचवें भाव में अंगारक योग होने से संतानहीनता व जुए-सट्टे से लाभ होता है।
 ❁छठे भाव में अंगारक योग होने से ऋण लेकर उन्नति होती है। व्यक्ति खूनी या शल्य-चिकित्सक भी बन सकता है। 
❁सातवें भाव में अंगारक योग होने से दुखी विवाहित जीवन, नाजायज संबंध, विधवा या विधुर होना परंतु सांझेदारी से लाभ भी मिलता है। 
❁आठवें भाव में अंगारक योग होने से पैतृक सम्पत्ति मिलती है परंतु सड़क दुर्घटना के प्रबल योग बनते हैं।
 ❁नवें भाव में अंगारक योग होने से व्यक्ति भाग्यहीन, वहमी, रूढ़ीवादी व तंत्रमंत्र में लिप्त होते हैं।
 ❁दसवें भाव में अंगारक योग होने से व्यक्ति अति कर्मठ, मेहनतकश, स्पोर्टसमेन व अत्यधिक सफल होते हैं।
 ❁ग्यारवें भाव में अंगारक योग होने से प्रॉपर्टी से लाभ मिलता है। व्यक्ति चोर, कपटी धोखेबाज होते हैं। 
❁बारहवें भाव में अंगारक योग होने से इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट व रिश्वतख़ोरी से लाभ। ऐसे व्यक्ति बलात्कार जैसे अपराधों में भी लिप्त होते हैं।  
अंगारक योग दोष की अशुभता को दूर करने हेतु कुछ उपाय निम्नलिखित हैं -
✾उज्जैन के अंगारेश्वर मंदिर में जाकर भात पूजा कराएं। 
✾मंगलचंडिका में माध्यम से मंगल-राहु अंगारक योग की शांति होती है।
✾मोती या ओपल धारण करना चाहिए।
✾चाँदी का कड़ा या चैन धारण करना चाहिए।
✾"ओम् अंग अंगारकाय नमः" मन्त्र का नियमित जाप करें। 
✾मंगलवार के दिन व्रत करें साथ ही मंगल ग्रह के बीज मन्त्र का जाप करें।
✾भगवान शिव के पुत्र कुमार कार्तिकेय की आराधना करें और मोर को दाना खिलाना चाहिए। 
✾प्रतिदिन अंगारक स्त्रोत का पाठ लाभदायक रहता है।
✾हनुमान जी की आराधना करने से ये दोनों ग्रह पीड़ामुक्त होते हैं। अतः प्रत्येक दिन हनुमानमान चालीसा का पाठ करें। 
✾प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।
✾भगवान शिव का गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करे। 


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हनुमानजी की साधना एवं उपाय

 हनुमानजी की साधना एवं उपाय
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवी-देवताओं में से एक हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के अनुसार माता सीता द्वारा पवनपुत्र हनुमानजी को अमरता का वरदान दिया गया है। इसी वरदान के प्रभाव से इन्हें भी अष्टचिरंजीवी में शामिल किया जाता है। कलयुग में हनुमानजी भक्तों की सभी मनोकामनाएं तुरंत ही पूर्ण करते हैं।
श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी की कृपा प्राप्त होते ही भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं और पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। कोई रोग हो तो वह भी नष्ट हो जाता है। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह दोष हो तो पवनपुत्र की पूजा से वह भी दूर हो जाता है। हनुमानजी की पूजा में पवित्र का पूरा ध्यान रखना चाहिए। बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को विधिवत रुप से किया जाए तो बहुत जल्दी सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।इन्हीं उपायों का निम्नलिखित वर्णन किया जा रहा है -
यदि कोई व्यक्ति पैसों की तंगी का सामना करना रहा है तो उसे प्रति मंगलवार और शनिवार को पीपल के 11 पत्तों का उक्त उपाय अपनाना चाहिए। 
सप्ताह के प्रति मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर किसी पीपल के पेड़ से 11 पत्ते तोड़ लें। ध्यान रखें पत्ते पूरे होने चाहिए, कहीं से टूटे या खंडित नहीं होने चाहिए। इन 11 पत्तों पर स्वच्छ जल में कुमकुम या अष्टगंध या चंदन मिलाकर इससे श्रीराम का नाम लिखें एवं नाम लिखते समय हनुमान चालीसा का पाठ करें।
जब सभी पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम नाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।
ध्यान रखें उपाय करने वाला भक्त किसी भी प्रकार के अधार्मिक कार्य न करें। अन्यथा इस उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा। उचित लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। साथ ही अपने कार्य और कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहें।
हनुमान जी को प्रसन्न करने के अन्य उपायों को भी वर्णित किया जा रहा है
❁नारियल के उपाय
✾किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। मंदिर में नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।
✾शनिवार को हनुमानजी के मंदिर में 1 नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें।
❁हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़वाएं
हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।
❁चौमुखा दीपक का उपाय
हनुमानजी के सामने शनिवार की रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।
❁पीपल का उपाय
किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
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Tuesday, 8 December 2020

सुंदरकांड के पाठ से मिलती है कष्टो से मुक्ति

🍂सुंदरकांड के पाठ से मिलती है कष्टो से मुक्ति🍂 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज सुंदरकांड के पाठ से मिलती है कष्टो से मिलने मुक्ति के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ। 
भगवान हनुमान को कलियुग के देवता कहा जाता है। मान्यता है कि बजरंगबली बड़ी ही जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है और इनकी पूजा आराधना करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। चाहे समस्या कितनी भी बड़ी हो अगर हनुमानजी की सच्चे मन से स्मरण करें तो हर समस्या सुलझ सकती है।
सुंदरकांड का पाठ करने से हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल सकती है जो निम्नलिखित है -
हर मंगलवार और शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर बजरंग बाण का पाठ करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं खत्म हो सकती है।
अगर शनि,राहु और केतु जैसे ग्रहों की महादशा आपके ऊपर चल रही हो तो तिल के तेल का दीपक जलाकर शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करने से ग्रह दशा ठीक हो सकती है।
अगर नौकरी में किसी तरह की परेशानी आ रही हो या फिर नौकरी छूटने का डर हो तो रोज सुंदरकांड का पाठ करें और साथ ही मंगलवार को व्रत भी रखना चाहिए।
अगर घर का कोई सदस्य लंबे समय से बीमार हो तो इसके लिए मंगलवार और शनिवार को सुबह-शाम सुंदरकांड का पाठ करनाचाहिए।
अगर घर बनवाते समय वास्तुदोष रह गए हो अथवा किसी भी वजह से परेशानियां आ रही है तो इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हर मंगलवार के रोज सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार के दिन श्रद्धापूर्वक सुंदरकांड का पाठ चालीस सप्ताह तक लगातार करने से सारे मनोरथ पूर्ण होते है। 
सुंदरकांड करने के भी नियम और एक विशेष विधी है जिसका पालन सभी को करना चाहिए जो कि निम्नलिखित प्रकार से है -
सबसे पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हनुमानजी और श्री राम की प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ायें दीप जलाकर और भोग अर्पित करे। पाठ शुरू करने से पहले गणेश की पूजा करे फिर राम की वंदना करके सुन्दरकाण्ड का पाठ शुरू करे। सुन्दरकाण्ड प्रारम्भ करने के पहले हनुमानजी और प्रभु श्री राम चन्द्र जी का आवाहन जरूर करें। पाठ के पूर्ण होने के बाद श्री हनुमान आरती और श्री राम जी आरती करे,जब सुन्दर कांड पूर्ण हो जाये तो भगवान को भोग लगाकर, आरती करके, उनकी विदाई भी करें। सुन्दर कांड के पाठ में भाग लेने वालो को आरती और प्रसाद दे और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें। सुंदरकांड के पूर्ण होने के बाद पुस्तक को लाल कपड़े में लपेटकर पूजा स्थान पर रख दें।
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Sunday, 6 December 2020

वार्षिक राशिफल 2021

वर्ष 2021 का वार्षिक राशिफल 

प्रिय पाठकों, 
17 दिसम्बर 2020,गुरुवार
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज वर्ष 2021 के वार्षिक राशिफल के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वर्ष 2021 की शुरुआत कन्या लग्न, कर्क राशि, पुष्य नक्षत्र से होने वाली है और इसका अंत कर्क लग्न से होगा। 
वर्ष की शुरुआत का समय वैवाहिक जीवन, करियर, प्रेम, वित्त और शिक्षा के लिए काफी उत्तम रहेगा।
परंतु मार्च में मंगल के साथ राहु का सातवें घर में जाना पारिवारिक जीवन व बिज़नेस के लिए शुभ नहीं होगा और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। बिज़नेस की ग्रोथ के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी होगी। वहीं मार्च के बाद का समय व्यापार और वित्त के लिए अच्छा समय होगा। बिज़नेस, हेल्थ और करियर के लिए वर्ष के मध्य माह यानि जून -जुलाई काफी अच्छा रहने की संभावना है।साल 2021 करियर, वित्त, हेल्थ और पर्सनल लाइफ के लिए शुभ रहने वाला है लेकिन उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इस साल पदोन्नति और व्यापार वृद्धि के लिए जी तोड़ मेहनत करनी पड़ेगी। मेहनत से आप पदोन्नति, प्रॉपर्टी, पैसा, वाहन, पारिवारिक सपोर्ट पा सकते हैं।वार्षिक राशिफल के अनुसार हम यह जान सकते है कि किन राशियों के लिए आने वाला यह साल शुभ रहेगा और किन राशियों के जातको के लिए अशुभ। इस साल कैसी रहेगी आपकी सेहत, किसे मिलेगा अपना प्यार, कैसी रहेगी आपकी धन की स्थिति,परिवार में सुख समृद्धि के लिए कैसा है ये साल,शादीशुदा जिंदगी में क्या आएगा उतार चढ़ाव। इसकी जानकारी पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज वार्षिक राशिफल के अनुसार देंगे तो जानते हैं वर्ष 2021 का राशिफल।


वार्षिक राशिफल 2021 मेष राशि

मेष राशि के जातको के लिए यह साल करियर के लिए लिहाज से काफी अच्छा है। लेकिन फिर भी इन्हें आर्थिक जीवन में उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। यह साल इनकी माता पिता की सेहत के लिए भी ठीक नहीं कहा जा सकता। लेकिन इस साल आपको परिवार की ओर से पूरा सहयोग मिलेगा। लेकिन कई बार जीवनसाथी के साथ बिना किसी का बात का वाद विवाद भी हो सकता है। इसलिए आपको इस ओर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
मेष राशिफल 2021 के अनुसार इस वर्ष शनि देव मेष राशि के दशम भाव में विराजमान रहेंगे। वर्ष के मध्य से अंत तक गुरु बृहस्पति का गोचर भी आपकी राशि के एकादश भाव में होगा। साथ ही छाया ग्रह राहु आपके दूसरे भाव में तो वहीं केतु राशि से अष्टम भाव को प्रभावित करेंगे। मंगल वर्ष की शुरुआत में आपकी ही राशि में प्रवेश करेगा जिससे आपका लग्न भाव सक्रिय होगा। भौतिक सुखों के देवता भी दूसरे माह में गुरु बृहस्पति के साथ युति करने के बाद आपके एकादश भाव में प्रस्थान कर जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप जहां आपको अपने करियर में अच्छे फलों की प्राप्ति होगी तो वहीं आपको अपने आर्थिक जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपको शुरुआती दिनों में प्रतिकूल फल प्राप्त होंगे।लेकिन मध्य जनवरी से फरवरी के मध्य का समय, नौकरी पेशा जातकों के लिए विशेष सावधानी भरा रहने वाला है क्योंकि इस समय में आपके कर्म भाव के स्वामी शनिदेव अस्त रहेंगे। हालांकि व्यापार करने वाले जातकों के लिए समय बेहतर रहेगा। उन्हें अपनी आमदनी को बढ़ाने के कई मौके प्राप्त होंगे। साथ ही विदेशों से धन अर्जित करने में भी अपार सफलता मिलेगी।इसके साथ ही इस वर्ष, दशम भाव में बैठे शनिदेव और प्रथम में बैठे मंगल देव के कारण आपके माता-पिता को स्वास्थ्य संबंधित समस्याएँ परेशान करेंगी। जिसपर आपका अच्छा खासा धन भी खर्च होगा। विशेष रूप से सितंबर से नवंबर के बीच, आपको आर्थिक तंगी से जूझना पड़ सकता है। 
छात्रों के लिए वर्ष मिश्रित परिणाम लेकर आएगा, क्योंकि उनके लिए जनवरी, मार्च, मई, जुलाई और नवंबर का समय जहां बेहद अनुकूल रहेगा, वहीं फरवरी, अप्रैल, जून, अगस्त, सितंबर और दिसंबर का समय आपके लिए सतर्कता बरतने वाला साबित होगा।पारिवारिक जीवन में शनि और मंगल आपको कुछ चुनौतियाँ दे सकते हैं, जिससे आपको पारिवारिक सहयोग मिलने में परेशानी होगी। हालांकि सितंबर से नवंबर तक का समय पारिवारिक जीवन के लिए बेहतर रहेगा। यदि आप विवाहित हैं तो आपके लिए शनि की दृष्टि परेशानी का सबब बनेगी। जिससे आपके और जीवन साथी के बीच विवाद खड़ा हो सकता है।संतान पक्ष के लिए समय अच्छा रहेगा और उन्हें अप्रैल से सितंबर के दौरान भाग्य का साथ प्राप्त होगा जिससे वो उन्नति करने में सफल होंगे। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो आपके लिए वर्ष 2021 बेहद अच्छा रहने वाला है। संभावना है कि आप अपने प्रेमी के साथ प्रेम विवाह में बंधे। स्वास्थ्य के हिसाब से उसमें आपको सामान्य से बेहतर परिणाम मिलेंगे। हालांकि थकान और छोटी-मोटी समस्याएं बनी रहेंगी।

वार्षिक राशिफल 2021 वृषभ राशि

यदि वृषभ राशि के जातको की बात करें तो साल 2021 आपको नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है। आपको आपकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा। लेकिन धन को लेकर आपकी कुछ चिंताएं बढ़ सकती है। जो विद्यार्थी विदेश जाकर पढ़ाई करना चाहते हैं उन्हें विदेश जाने का मौका मिल सकता है। घर में किसी तरह का कोई मांगलिक कार्य भी हो सकता है। वैवाहिक जीवन में आपको कुछ संभलकर चलने की आवश्यकता है। लेकिन प्रेमियों के लिए यह साल काफी अच्छा है।
वृषभ राशिफल 2021 के अनुसार, इस पूरे ही वर्ष शनि देव आपके नवम भाव में विराजमान रहेंगे। इसके साथ ही राहु-केतु क्रमशः आपके प्रथम और सप्तम भाव में उपस्थित रहेंगे। वहीं शुरुआत में लाल ग्रह मंगल भी आपके द्वादश भाव में होगा, जो 2 जून से 6 सितंबर के मध्य अपना गोचर करते हुए आपके तीसरे और चतुर्थ भाव को प्रभावित करेगा। अप्रैल के पहले सप्ताह से मध्य सितंबर के बीच गुरु बृहस्पति का गोचर होने से आपके चतुर्थ भाव पर गुरु की दृष्टि रहेगी। इसके साथ ही 4 मई से 28 मई के बीच शुक्र का गोचर आपकी ही राशि में होगा। जिससे आपका प्रथम भाव प्रभावित होगा। इसके साथ ही सूर्य और बुध भी इस वर्ष अपनी गोचरीय प्रक्रिया करते हुए आपकी राशि के अलग-अलग भावों को सक्रिय करेंगे जिसके चलते आपको अपने करियर में भाग्य का साथ मिलेगा।
आपकी पदोन्नति और प्रगति होगी। व्यापारी जातकों को भी अपनी मेहनत के अनुसार अच्छे फलों की प्राप्ति होगी। हालांकि आर्थिक जीवन में परिणाम थोड़े कम अच्छे प्राप्त होंगे। क्योंकि इस वर्ष आपको कुछ आर्थिक तंगी हो सकती है। हालांकि बीच-बीच में आपके लिए धन प्राप्ति के अलग-अलग योग निर्धारित होते रहेंगे, जिनका लाभ उठाकर आप अपनी आर्थिक तंगी को दूर कर सकते हैं। ग्रहों की स्थिति इशारा करती है कि छात्रों के लिए समय थोड़ा मेहनत करने वाला रहेगा।वर्ष की शुरुआत में, शिक्षा में अच्छे फल प्राप्त करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी, लेकिन धीरे-धीरे स्थितियों में परिवर्तन नजर आएँगे जिससे छात्रों को विदेश जाकर पढ़ाई करने का अवसर प्राप्त होगा। पारिवारिक सुख में कमी आएगी, लेकिन परिवार में कोई मांगलिक कार्यक्रम आयोजन होने पर वातावरण खुशहाल दिखाई देगा। इस वर्ष वैवाहिक जीवन में साथी से कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जिससे आपका मानसिक तनाव बढ़ेगा।यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो आपके लिए ये समय अच्छा है। इस समय आपको प्रेमी का भरपूर सहयोग प्राप्त होने से कार्य क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य के लिहाज से समय थोड़ा चिंताजनक है क्योंकि राहु-केतु की उपस्थिति आपको स्वास्थ्य हानि दे सकती है।

वार्षिक राशिफल 2021 मिथुन राशि

मिथुन राशि के लिए साल 2021 थोड़ी समस्याएं लेकर आ रहा है। शनि के अष्टम भाव में होने के कारण इन्हें शनि की ढैय्या का सामना करना पड़ेगा। जिसकी वजह से इन्हें मानसिक तनाव भी हो सकता है। नौकरी करने वाले जातको को संभलकर चलने की आवश्यकता है। सहकर्मियों के साथ बिना वजह की लड़ाई हो सकती है। खर्चों में अधिकता रहेगा। इसलिए सोच समझकर ही खर्च करें। जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद उत्पन्न होंगे। लेकिन शत्रु पक्ष पर आप हावी रह सकते हैं।
मिथुन राशिफल 2021 के अनुसार इस वर्ष की शुरुआत में आपकी राशि के दशम भाव के स्वामी, गुरु बृहस्पति साल के पहले महीने में आपके अष्टम भाव में विराजमान रहेंगे जिसके बाद वो गोचर करते हुए अप्रैल के महीने में आपके नवम भाव को प्रभावित करेंगे। शनि देव भी इस पूरे वर्ष आपके अष्टम भाव विराजमान रहने वाले हैं। वहीं छाया ग्रह केतु और राहु क्रमश: आपके छठे और दूसरे भाव में साल भर उपस्थित रहेंगे। मंगल भी 6 सितम्बर से 5 दिसंबर के बीच आपके चतुर्थ और पंचम भाव को सक्रिय करेगा जबकि वर्ष की शुरुआत में सूर्य और बुध आपके सप्तम भाव से होते हुए आपकी राशि के अलग-अलग भावों को साल भर प्रभावित करेंगे।ऐसे में ग्रहों की इन स्थितियों के चलते आपको अपने करियर में बहुत उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान नौकरी पेशा जातकों को अपने सहकर्मियों की मदद नहीं मिलने में परेशानी होगी जिससे उनकी पदोन्नति तो होगी। लेकिन इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। व्यापारी जातकों के लिए समय अच्छा रहेगा। लेकिन कोई भी बड़ा लेन-देन करते समय विशेष सावधानी बरतें।आर्थिक जीवन में साल की शुरुआत बहुत अच्छी रहेगी बीच बीच में आपको कुछ निराशा हाथ लगेगी क्योंकि आपको धन हानि होने के योग बनते नजर आ रहे हैं। छात्रों को इस वर्ष मेहनत और प्रयासों के बाद ही सफलता मिलेगी। ऐसे में अपने लक्ष्य पर केंद्रित करते हुए केवल मेहनत करें। पारिवारिक जीवन में घर के सभी सदस्यों का सहयोग मिलेगा। यदि आप शादीशुदा हैं तो जीवनसाथी और आपके बीच अपनी-अपनी बातों को लेकर अहम का टकराव होगा।संतान को मिले-जुले परिणाम मिलेंगे लेकिन प्रेमी जातकों के जीवन में इस वर्ष कई महत्वपूर्ण बदलाव नज़र आएँगे। सेहत के लिए ये वर्ष चिंताजनक है। ऐसे में आपको अपनी सेहत के प्रति विशेष सावधानी बरतनी होगी।

वार्षिक राशिफल 2021 कर्क राशि

कर्क राशि के जातको को इस साल करियर में बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे। जिसकी वजह से आपको प्रमोशन भी मिल सकता है।वहीं व्यापारियों के लिए भी यह साल काफी अच्छा है। लेकिन विद्यार्थियों के लिए यह साल मध्यम है। मेहनत से ही सफलता प्राप्त होगी। परिवार आपका साथ देगा। लेकिन आपके कुछ निर्णयों की वजह से आपका परिवार आपके खिलाफ भी हो सकता है। दांपत्य जीवन को लेकर किसी तरह की समस्या उत्पन्न हो सकती है। स्वास्थय को लेकर भी कुछ चिंताएं हो सकती हैं।
कर्क राशिफल 2021 के अनुसार साल की शुरुआत में लाल ग्रह मंगल आपके दशम भाव में होगा। इसके बाद वह अपना गोचर करते हुए आपके एकादश और द्वादश से होते हुए आपकी ही राशि में विराजमान होगा। इसके साथ ही कर्मफल दाता शनि आपके सप्तम भाव में साल भर विराजमान रहते हुए आपके चतुर्थ भाव को दृष्टि डालेंगे। वहीं राहु-केतु भी इस पूरे वर्ष इस दौरान क्रमश: आपके पांचवें और ग्यारहवें भाव को सक्रिय करेंगे। इसके साथ ही वर्ष की शुरुआत में सूर्य और बुध आपके षष्ठ भाव में अपना गोचर करते हुए, आपके अलग-अलग भावों को प्रभावित करेंगे।
इसी बीच शुक्र की गोचरीय स्थिति भी आपकी राशि को इस पूरे ही वर्ष प्रभावित करने वाली है। ऐसे में आपको अपने करियर में रफ्तार पकड़ने का अवसर मिलेगा जिससे आपकी तरक्की होगी और आपकी पदोन्नति भी संभव है। व्यापारी जातकों के लिए यह वर्ष निवेश के लिए बेहद सफल रहने वाला है। आर्थिक जीवन में कुछ परेशानी होगी लेकिन आप अपनी मेहनत के दम पर हर परेशानी से निकलने में कारगर होंगे।
छात्रों के लिए साल अच्छा है इस साल उन्हें अपने हर विषय को समझने में सफलता मिलेगी। पारिवारिक जीवन में मिले-जुले परिणाम मिलेंगे। जिसके अनुसार जहाँ एक ओर आपको परिवार का सहयोग मिलेगा तो वहीं आपके किसी निर्णय के चलते परिवार वाले आपके विरुद्ध खड़े नजर आएँगे।वैवाहिक जातकों का अपने जीवनसाथी से किसी कारणवश झगड़ा हो सकता है। इस दौरान आपका जीवन साथी धर्म-कर्म के कार्य में अधिक वक्त बिताता नज़र आएगा। दंपति दाम्पत्य जीवन में स्थितियाँ अच्छी नहीं देखी जाएगी।वहीं यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो आपके लिए यह वर्ष बेहद अच्छा रहने वाला है। स्वास्थ्य के मामलों में आपको कुछ सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

वार्षिक राशिफल 2021 सिंह राशि

सिंह राशि के जातको को इस साल अपने शत्रुओं से बचने के लिए आवश्यकता है। वैसे तो आप अपने सभी शुत्रुओं पर हावी रहेंगे। लेकिन गुप्त शत्रु इस समय में आपको परेशान कर सकते हैं। खर्चों की भी अधिकता रह सकता है। वहीं पारिवारिक जीवन में भी परेशानी हो सकती है।जीवनसाथी का सहयोग इस समय में आपको पूर्णत: प्राप्त होगा। संतान के स्वास्थय पर इस साल आपको अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। वहीं इस राशि के जो जातक प्रेम संबंधों में हैं उन्हें प्रेमी की बेरूखी का सामना करन पड़ सकता है।
सिंह राशिफल 2021 के अनुसार इस पूरे वर्ष छाया ग्रह राहु-केतु क्रमश: आपके दसवें और चौथे भाव को प्रभावित करेंगे। इसके साथ ही शनि देव भी साल भर आपके छठे भाव में विराजमान रहेंगे। शुरुआत में शनि देव गुरु बृहस्पति के साथ आपके छठे भाव में होने पर एक अनोखी युति का निर्माण करेंगे। इस दौरान मंगल आपके नवम भाव से होते हुए आपको भाग्य का साथ देंगे और फिर अप्रैल से जुलाई के बीच आपके एकादश और द्वादश भावों में प्रवेश कर जाएंगे।इस दौरान आपको अपने करियर में शत्रुओं से बचकर रहने की जरूरत होगी। हालांकि आप उन पर हावी रहेंगे जिससे सभी कार्य समय पर पूरा करने में सफलता मिलेगी। आर्थिक जीवन में खर्चे बढ़ेंगे जिसका असर आपके आर्थिक जीवन पर पड़ता हुआ दिखाई देगा। राशिफल 2021 संकेत देता है कि छात्रों को परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए पहले से अधिक मेहनत करनी होगी। विदेश जाने की इच्छा रखने वाले छात्रों को इस वर्ष बहुत प्रयास करने के बाद ही सफलता मिलने की संभावना बनेंगी।पारिवारिक जीवन प्रतिकूल रहेगा जिससे आपके कुटुंब में तनाव की वृद्धि होगी। वैवाहिक जातकों को अपने जीवनसाथी का साथ मिलेगा और वो अपने पेशेवर जीवन में बेहतर करने में सफल होंगे। दांपत्य जातकों के लिए संतान का कमजोर स्वास्थ्य परेशानी उत्पन्न कर सकता है। प्रेमी लोगों को प्रियतम की बेरुखी का सामना करना पड़ सकता है।यदि आप अभी तक सिंगल हैं तो आपकी मुलाकात किसी खास से हो सकती है। अपने स्वास्थ्य के प्रति इस वर्ष आपको सावधान रहना होगा, अन्यथा आपको गुर्दे से संबंधित कोई रोग परेशानी दे सकता है।

वार्षिक राशिफल 2021 कन्या राशि

कन्या राशि के जातको को इस साल करियर में उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। नौकरी में परिवर्तन के योग भी बन रहे हैं या फिर आपका कहीं ओर स्थानांतरण हो सकता है। लेकिन व्यापारियों के लिए यह साल अच्छा रहेगा। बिजनेस में पार्टनरशिप से लाभ होगा। परिवार के लोगों का इस समय में आपको सहयोग प्राप्त नहीं होगा। जिसकी वजह से आपका मन दुखी हो सकता है। वहीं इस राशि के जो जातक प्रेम संबंधों में हैं उनके जीवन में भी बदलाव देखा जा सकता है।
 कन्या राशिफल 2021 के अनुसार इस पूरे वर्ष शनि आपकी राशि के पंचम भाव में विराजमान होंगे। इसके साथ ही शुरुआत में मंगल देव आपके अष्टम भाव से होते हुए नवम और दशम भाव को प्रभावित करेंगे। साथ ही राहु और केतु क्रमश: नवम भाव और तीसरे भाव में उपस्थित होंगे। गुरु बृहस्पति भी आपकी राशि के पंचम भाव से होते हुए आपके छठे भाव में गोचर करेंगे और आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगे।
ऐसे में इस दौरान आपको अपने करियर में बहुत सी उतार-चढ़ाव भरी परिस्थितियों से गुजरना पड़ सकता है। राशिफल 2021 के अनुसार इस दौरान नौकरीपेशा जातकों का स्थान परिवर्तन संभव है। वो जातक जो व्यवसाय करते हैं उनके लिए समय अच्छा रहेगा। हालांकि बिज़नेस पार्टनरशिप में कर रहे जातकों को हर सौदे को सोच-समझकर करने की जरूरत होगी। ग्रहों और नक्षत्रों के संयोग से आर्थिक जीवन में समस्या हो सकती है। लेकिन राहु की शुभ दृष्टि आपको शुभ फल देते हुए धन कमाने के कई मौके देगी।
छात्रों को शिक्षा में अधिक मेहनत करनी होगी तभी आपको मेहनत अनुसार सफलता प्राप्त होगी। पारिवारिक जीवन में घरवालों का सहयोग न प्राप्त होने से तनाव की वृद्धि होगी। शादीशुदा जातकों को जीवनसाथी की मदद से कार्यक्षेत्र में फायदा मिलेगा। वहीं संतान को स्वास्थ्य कष्ट संभव है। यदि आप अभी तक सिंगल हैं तो आपके लिए ये समय अच्छा है। लेकिन प्रेम में पड़े जातकों के जीवन में इस वर्ष कई विशेष बदलाव आने की संभावना रहेगी। स्वास्थ्य के नज़रिए से यह वर्ष अच्छा रहेगा। आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होने से आपको स्वास्थ्य से सम्बंधित कोई बड़ा कष्ट नहीं मिलेगा।
बाकी की राशियों का राशिफल अगले लेख में जारी..... 

Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Tuesday, 1 December 2020

कुण्डली में वाणी दोष या गूंगे होने केे योग

कुण्डली में वाणी दोष या गूंगे होने केे योग -

मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज कुंडली में वाणी दोष या गूंगे होने केे बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ। 

कभी-कभी आपकी कुण्डली में वाणी दोष होता है जिस कारण आप गूंगे हो सकते हैं या बोल नहीं पाते हैं। वाणी दोष होने पर आप अपनी अभिव्यक्ति नहीं कर पाते हैं। विचारों की अभिव्यक्ति वाणी द्वारा ही होती है। मधुरभाषी सदैव सबको प्रिय होता है। नाम के बाद वाणी ही उसकी पहचान बनाती है। जिस व्यक्ति की कुंडली में वाणी दोष होता है उसे ऑफिस, घर और परिवार में कई प्रयास करने के बावजूद भी सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं हो पाती है।कई लोगों को इस दोष की वजह से हकलाना, तुतलाना, बोलने में आत्मविश्वास की कमी, त्वचा के रोग, बालों के रोग और खुद को दूसरों से कमतर समझने की समस्या का भी सामना करना पड़ता है।
वाणी दोष हो तो जीवन में एक अभाव सा रहता है, जीवन में एक प्रकार से कुछ खो सा जाता है जो सदेव सालता रहता है। यह दोष व्यक्ति में पूर्व जन्मों के कर्मों के कारण ही होता है। कुंडली में बुध अगर सही स्थिति यानी उच्च स्थिति में न हो तो व्यक्ति को वाणी दोष लग सकता है।
दूसरा भाव वाणी का प्रतिनिधत्व करता है और बुध ग्रह वाणी का कारक कहलाता है। दूसरा भाव, दूसरे भाव का स्वामी एवं वाणी कारक ग्रह बुध यदि पाप ग्रह से युत, दृष्ट या अशुभ भाव में स्थित हो तो वाणी दोष होता है। वाणी दोष जांचने के कुछ ज्योतिष योग इस प्रकार हैं-
दूसरे भाव से त्रिक भाव में वाणी कारक बुध स्थित हो तो यह योग होता है। अथवा द्वितीयेश त्रिक भावों में हो तो वाणी दोष होता है। यहां त्रिक भावों की गिनती द्वितीय भाव से होगी।चन्द्र लग्न या लग्न से त्रिक भाव में द्वितीयेश या वाणी कारक बुध स्थिति हो और पापग्रह से युत या दृष्ट हो और किसी प्रकार की शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो जातक गूंगा होता है।
द्वितीयेश बुध व गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो जातक गूंगा होता है।दूसरे भाव में नीच ग्रह स्थित हो और उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो वाणी दोष होता है।दूसरे भाव में सूर्य,चन्द्र, राहु व पापयुत शुक्र की युति हो तो वाणी दोष होता है।शनि-चन्द्र की युति दूसरे भाव में हो और उस पर सूर्य व मंगल की दृष्टि पड़े तो वाणी दोष होता है।
छठे भाव का स्वामी या बुध चौथे, आठवें या बारहवें स्थित हो और पापग्रह से दृष्ट हो तो वाणी दोष होता है या गूंगा होता है।
कर्क, वृश्चिक व मीन राशि में गए हुए बुध को अमावस का चन्द्रमा  देखे तो जातक गूंगा होता है या वाणी में दोष होता है।बुध एवं छठे भाव का स्वामी जब एक साथ युत होते हैं तो भी वाणी में दोष होता है।
छठे भाव का स्वामी एवं गुरु ग्रह जब पहले भाव में स्थित हो तो जातक की वाणी में दोष होता है।दूसरे भाव से त्रिक भाव का स्वामी जिस राशि या नवांश में स्थित हो उससे त्रिकोण में जब गोचर में शनि आएगा तब जातक को वाणी संबंधी समस्या से ग्रस्त होना पड़ेगा।दूसरे भाव में पापग्रह स्थित हो और दूसरे भाव का स्वामी नीच या अस्त होकर पापग्रहों से दृष्ट हो व सूर्य-बुध की युति सिंह राशि में हो तो जातक को वाणी दोष होता है।
बुधाष्टक वर्ग में बुध से दूसरे भाव में शून्य रेखा हो तो जातक को वाणी दोष होता है या वह गूंगा होता है।छठे भाव का स्वामी और बुध पहले भाव में स्थित हों और पापग्रह से दृष्ट हो तो जातक गूंगा होता है।
उक्त योगों में से एक या एक से अधिक योग होने से वाणी दोष रहता है। जिन ग्रहों से योग बनता है वे योग कारक ग्रह होते हैं। योगकारक ग्रहों की दशान्तर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा में वाणी संबंधी समस्या से ग्रस्त होना पड़ सकता है।यदि ये योग हों और उन पर किसी भी प्रकार से शुभ ग्रह की दृष्टि पड़ती हो या योग कारक ग्रह उच्च या स्वराशि में नवांश में हों तो यह योग भंग भी हो सकता है और वाणी दोष की समस्या नहीं भी हो सकती है।उक्त योगों को किसी भी कुण्डली में विचार करके यह जान सकते हैं कि जातक को वाणी सम्बन्धी दोष होगा या नहीं।

Pandit Anjani Kumar Dadhich
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दिसंबर में ग्रहों का गोचर परिवर्तन और उसका प्रभाव-

दिसंबर में ग्रहों का गोचर परिवर्तन और उसका प्रभाव-
 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज दिसंबर में ग्रहों का गोचर परिवर्तन और उनके प्रभाव केे बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ। 
दिसंबर के महीने में शुक्र, बुध, सूर्य, मंगल आदि का गोचर परिवर्तन होगा। क्योंकि दिसंबर 2020 में सूर्य के गोचर के अलावा अन्य कई ग्रह भी अपना राशि परिवर्तन कर रहे हैं। इन ग्रहों के गोचर परिवर्तन से जहाँ एक तरफ कई लोगों के जीवन में शुभ परिवर्तन देखने को मिलेंगे वहीं कुछ जातकों को ग्रहों के इन गोचरों से कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।अब इस माह ग्रहों का गोचर परिवर्तन कब-कब होगा इसका विवरण निम्नलिखित है-
11 दिसंबर 2020, शुक्र का वृश्चिक राशि में गोचर 
15 दिसंबर 2020, सूर्य का धनु राशि में गोचर 
17 दिसंबर 2020, बुध का धनु राशि में गोचर 
24 दिसंबर 2020, मंगल का मेष राशि में गोचर 
❁बुध ग्रह दिनाँक 17 दिसंबर 2020 को ज्येष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेगा और इसी नक्षत्र में सूर्य के साथ उसकी युति बनेगी। सूर्य और बुध का संयोग भावनाओं में अस्थिरता पैदा करता है। व्यापारियों को सावधानीपूर्वक व्यापार या सट्टा लगाने की सलाह दी जाती है।
❁शुक्र ग्रह दिनाँक 11 दिसंबर 2020 को स्थिर और जल तत्व की राशि वृश्चिक में प्रवेश करेगा। वृश्चिक राशि में शुक्र, सूर्य, बुध और केतु के मिलन से आईटी, सॉफ्टवेयर,फार्मा और कपड़ा क्षेत्र की कंपनियों की मांग बढ़ेगी।
❁मंगल ग्रह दिनाँक 24 दिसंबर 2020 को मेष राशि में प्रवेश करेगा और वृश्चिक राशि में शुक्र और केतु के मिलन पर दृष्टि डालेगा। कॉपर, इन ग्रहों के गोचर से जहाँ एक तरफ कई लोगों के जीवन में शुभ परिवर्तन देखने को मिलेंगे वहीं कुछ जातकों को ग्रहों के इन गोचरों से कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। 
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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