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Friday, 13 June 2025

तुलसी

 तुलसी का महत्व
हिन्दु धर्म में तुलसी का बहुत ही प्रमुख स्थान है।शास्त्रों के अनुसार तुलसी को बहुत ही पूजनीय और पवित्र माना गया है। तुलसी भगवान विष्णु को विशेष प्रिय है इसलिए जिस घर में तुलसी को स्थापित करके उसकी सेवा, पूजा अर्चना की जा ती है उस घर में माँ लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहती है।
आमतौर पर तुलसी का पौधा सभी हिंदू परिवारों के घरों में अवश्य ही होती है। मान्यताओं के अनुसार तुलसी या वृंदा के रूप में माँ लक्ष्मी का अवतरण पृथ्वी पर हुआ। तुलसी या वृन्दा 
इसीलिए भगवान शालिग्राम-तुलसी विवाह की पूजा असीम सुख-समृद्ध प्रदान करने वाली कही गई है। तुलसी घर में होने से उस घर में दैवीय कृपा के साथ साथ घर के सदस्यों को अनेकों चिकित्सकीय लाभ भी प्राप्त होते हैं। म तुलसी के बारे में कुछ आसान सी बातों को ध्यान में रखे तो हमें निश्चित ही माँ लक्ष्मी की कृपा के साथ साथ मनवाँछित फलों की प्राप्ति होती है।यहां हम आपको कुछ ऐसी ही उपायों के बारे में बता रहे है जो आप को निरोगी रखने के साथ साथ मालामाल भी बना सकते है जो आप को निरोगी रखने के साथ साथ मालामाल भी बना सकते है।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार वैसे तो तुलसी पौधा लगाने के लिए आषाढ़ व ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व है, किंतु यह किसी भी पवित्र तिथि, शुक्ल पक्ष, एवं पूर्णिमा व एकादशी तिथि आदि को भी लगाया जा सकता है । इसको लगाने के लिए सुबह के समय किसी भी देव मंदिर या जिस घर मे नित्य तुलसी की पूजा होती हो, वहीँ से तुलसी का छोटा-सा पौधा लाना उचित रहता है। इसे बाजार से भी खरीद कर लगाया जा सकता है। 
पवित्र तुलसी की स्थापना ठीक उसी तरह से करनी चाहिए जैसे हम किसी देवी देवता की मूर्ति की स्थापना करते है । तुलसी के पौधे को घर में जिस जगह लगाना हो उस जगह को पहले गंगाजल से पवित्र करें फिर साफ मिट्टी से भरे गमले में रोपें । लगाने के बाद तुलसी के पौधे को जल, इत्र, फूल, फल, दूर्वा अर्पित करते हुए वस्त्र, चुनरी वा पीला कलावा अर्पित करें एवं मिठाई से भोग लगाएं। उसके पश्चात किसी सुहागिन स्त्री से ही तुलसी के चारों ओर दूध व जल की धारा अर्पित करके उन्हें प्रणाम करें। इस विधि से स्थापना करने से उस घर में माँ तुलसी की असीम कृपा प्राप्त होती है । 
तुलसी को घर के मुख्य दवार के दोनों ओर ऊँचाई पर लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि तुलसी के पौधे को इस स्थान में लगाने से घर वालों को बुरी नजर नहीं लगती है और अन्य किसी भी तरह की बुराइयां भी घर से कोसो दूर रहती है, तुलसी को घर के आँगन में भी लगाया जा सकता है । यह ध्यान रहे की तुलसी का पौधा अथवा गमला नीचे ना हो उसके लिए पर्याप्त ऊँचाई वाला स्थान ही उचित है । 
तुलसी के पौधे के आस पास कुछ भी गन्दगी नहीं रहनी चाहिए, इसके चारो ओर रोज़ उसी तरह से सफाई कराएं जिस तरह आप अपने घर की करते है ।  
रविवार को छोड़कर नित्य सुबह तुलसी में जल चढ़ाना चाहिए । इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा रहती है एवं घर के सदस्यों में प्रेम बना रहता है । 
तुलसी के पत्ते बिना उपयोग कभी भी नहीं तोडने चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति पाप भागी होता है । 
तुलसी को बिना नहाये, संध्या के समय और रविवार, एकादशी, सूर्य एवं चन्द्र ग्रहण , अमावस्या , संक्रांति और रात्रि के समय बिलकुल भी नहीं तोडना चाहिए। रजस्वला स्त्री को भी तुलसी को छूना नहीं चाहिए ।   
जिस घर में प्रत्येक गुरुवार को सुबह तुलसी को दूध से सींचा जाता है उस घर से माता लक्ष्मी कभी भी नहीं जाती है ।जिस घर में संध्या के समय तुलसी पर दीपक जलाया जाता है उस घर में कभी भी कोई भी संकट, किसी भी चीज़ का आभाव नहीं रहता है। जिस घर में प्रभु विष्णु को नित्य तुलसी चढ़ाई जाती है प्रत्येक एकादशी और गुरुवार को उनकी तुलसी दल से विशेष पूजा की जाती है उस घर में कभी भी धन धान्य की कमी नहीं रहती है। 
तुलसी के अचूक उपाय -
एक गमले में एक पौधा तुलसी का तथा एक पौधा काले धतूरे का लगायें। इन दोनों पौधों पर प्रतिदिन स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध जल में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर अर्पित करें। ऐसा करने से व्यक्ति को ब्रहमा, विष्णु, महेश, इन तीनों की संयुक्त पूजा फल मिलता है। क्योंकि तुलसी विष्णु प्रिया है, काला धतूरा शिव रूप है एंव तुलसी की जड़ो में भगवान ब्रहमा का निवास स्थान माना गया है।
जो जातक रविवार, संक्रांति, ग्रहण को छोड़कर नित्य "ॐ तुलस्यै नमः॥" मन्त्र का जाप करते हुए सुबह तुलसी पर जल चढ़ाता है, एवं सांय को दीपक जलाता है उसे जीवन के सभी सुखो की प्राप्ति होती है, उसके पाप नष्ट होते है, पुरखो को स्वर्ग में स्थान मिलता है, सन्तान संस्कारी, आज्ञाकारी होती है, उसके घर से सभी संकट कोसो दूर रहते है । तुलसी के पत्ते बहुत ही पवित्र माने जाते है । यह हमारे जल एवं भोजन को शुद्ध और पवित्र करते हैं। इसीलिए किसी भी सूर्य या चंद्र ग्रहण के समयजल एवं भोजन में तुलसी के पत्ते डालें जाते हैं।
हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार इंसान की मृत्यु के बाद उस शव के मुख में तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं। मान्यता है कि इससे मृतक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।अगर आपको लगता है कि लाख प्रयास के बाद भी आपका व्यापार उन्नति नहीं कर पा रहा है तो आप किसी भी गुरुवार को श्यामा तुलसी के चारो ओर उग आई खर पतवार को किसी पीले वस्त्र में बांधकर अपने व्यापार स्थल में किसी साफ जगह रख दें, व्यापार में गति आ जाएगी । 
किसी भी शुभ मुहूर्त में तुलसी की जड़ लाएं । रविवार या गुरुवार को जब पुष्य नक्षत्र हो तो उस दिन उस जड़ को गंगा जल से धोकर, धूप दीप दिखाकर, तिलक लगाकर पूजा करके पीले कपड़े में लपेटकर अपने दाहिने हाथ में बांध लें इस आसान उपाय से व्यक्ति का तेज बढ़ता है, कार्यों में सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है, अधिकारी वर्ग प्रसन्न रहता है। अगर किसी व्यक्ति की संतान बहुत ज्यादा जिद्दी हो, बड़ो का कहना ना मानती हो तो उसे घर के पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे के तीन पत्ते रविवार को छोड़कर प्रतिदिन किसी भी तरह अवश्य ही खिलाएं, सन्तान का व्यवहार सुधरने लगेगा । 
ऐसी भी मान्यता है कि यदि पूर्व दिशा में खिड़की के पास तुलसी का पौधा रखा जाए तो भी संतान आज्ञाकारी होती है।यह भी माना जाता है कि यदि आपकी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो तो कन्या तुलसी के पौधे को घर के दक्षिण-पूर्व में रखकर उसे नियमित रूप से जल अर्पण करें। इससे भी शीघ्र ही योग्य वर की प्राप्ति होती है ।
तुलसी का पौधा किचन के पास रखने से घर के सदस्यों में आपसी प्रेम, सामंजस्य बना रहता है। नवीन गृह में तुलसी का पौधा, देवता का चित्र, गौमूत्र, गंगाजल, और पानी का कलश लेकर घर के अंदर प्रवेश करना चाहिए । इससे घर में सदैव सुख शांति, प्रसन्नता का वातावरण बना रहता है, घर में धन की कभी भी कमी नहीं रहती है। 
घर से निकलने से पूर्व तुलसी के दर्शन करना बहुत ही शुभ एवं सफलता की निशानी माना जाता है। 
प्रतिदिन दही के साथ चीनी और तुलसी के पत्तों का सेवन करना बहुत ही शुभ माना गया है। तुलसी के पत्तों का घर से निकलते समय सेवन करने से कार्यों में कोई भी संकट नहीं आते है । हिन्दु धर्मशास्त्रों में तुलसी के आठ नाम बताए गए हैं- वृंदा, वृंदावनि, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी। सुबह तुलसी में जल चढ़ाते समय इनका नित्य नाम लेने जातक को जीवन में कोई भी संकट कोई आभाव नहीं रहता है । उसे सभी तरह के भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होती है । तुलसी का पत्तों के नित्य सेवन करना बहुत ही पुण्यदायक लाभदायक माना जाता है। लेकिन ध्यान रहे कि उसे दाँतों के बीच चबाना नहीं चाहिए।

कुण्डली में नवम् भाव में मंगल हो तो जातक क्रोधी स्वभाव का होता है और विद्या (पढ़ाई) अधूरी रहती है।
कुण्डली में नवम् भाव में मंगल हो तो जातक झूठा होता है या
 जातक ईमानदार हो फिर भी बदनामी मिलती है। जातक जीवन के क्षेत्र में सफलता कम मिलती है साथ ही जातक स्त्री की कमाई पर जीवन-यापन करता है।
नौवें भाव में चंद्रमा और मंगल के परिणामस्वरूप जातक उच्च ज्ञान प्राप्त करते हैं और बेहद प्रतिभाशाली और बुद्धिमान होते हैं। ऐसे जातक नाम और प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। वे वास्तव में अपनी पढ़ाई में अच्छे होंगे और इस तरह बहुत सारी छात्रवृत्ति जीतेंगे। उच्च स्तर तक पहुँचने में उन्हें सरकार का सहयोग मिलेगा। यह युति उन्हें ऊर्जावान और चिड़चिड़ा बना देगी लेकिन साथ ही किस्मत को भी चमकाएगी। ये लोग सभी प्रकार के धन, संपत्ति और सुख प्राप्त करेंगे। वे अपने भाग्य के निर्माता बनेंगे। जातक अपने पिता के साथ बहुत प्रेमपूर्ण रिश्ता साझा करेंगे। वे जीवन के हर कदम पर जातक का समर्थन करेंगे। जातक को पैतृक संपत्ति का लाभ भी मिलेगा। जातक अपने परिवार के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े होंगे। समय-समय पर, वे अपने परिवार के सदस्यों की मदद करेंगे और अपने परिवार के सदस्यों की मदद लेंगे।
जब सूर्य मंगल और बुध ग्रह का संयोजन या युति होती है तो जातक शारीरिक रूप से मजबूत, अपने लोगों के बीच लोकप्रिय, कठोर, स्पष्टवादी और विद्वान होता है। निडरता और आत्म-सम्मान वे प्रमुख विशेषताएं हैं जो कुंडली में सूर्य, मंगल और बुध के एक भाव में युति वाले जातकों के व्यक्तित्व को परिभाषित करती हैं। हालांकि, उनके आत्म-मूल्य और अहंकार के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती है।ऐसे लोग व्यावहारिक होते हैं और जीवन की वास्तविकताओं का अनुभव जीवन में बहुत पहले ही कर लेते हैं। हालाँकि, वे अधीर और बातूनी होते हैं। उनके स्वभाव में एक अलगपन होता है। इसके अलावा, वे बहुत कमाते हैं लेकिन जीवन में मिलने वाली विलासिता और धन का आनंद लेने के लिए संघर्ष करते हैं। वे संतान का आनंद तो लेते हैं लेकिन वैवाहिक जीवन में संघर्ष का सामना करते हैं। ऐसे लोग अक्सर विदेश यात्रा पर जाते हैं।
 

मंगल ग्रह

मंगल ग्रह

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वैदिक ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को क्रूर ग्रह माना गया है। जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव पड़ता है। कुंडली में मंगल दोष होने पर तमाम तरह की परेशानियां आने लगती है, जिसमें प्रमुख रूप से विवाह में देरी का होना माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, भूमि और साहस का कारक ग्रह माना गया है। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह होते हैं। मंगल मकर राशि में उच्च के जबकि कर्क राशि में नीच के माने गए हैं। जिन लोगों की कुंडली में मंगल शुभ भाव में होते हैं वह व्यक्ति काफी निडर और साहसी स्वभाव होता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी प्रकार की चुनौती से जल्दी घबराता नहीं है। वहीं जिन जातकों की कुंडली में मंगल अशुभ भाव में विराजमान होते हैं उन्हें कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ज्योतिष में मंगल ग्रह ऊर्जा, भाई, भूमि, शक्ति, साहस, पराक्रम, शौर्य का कारक होता है। मंगल ग्रह को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामित्व प्राप्त है। यह मकर राशि में उच्च होता है, जबकि कर्क इसकी नीच राशि है। वहीं नक्षत्रों में यह मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी होता है। गरुण पुराण के अनुसार मनुष्य के शरीर में नेत्र मंगल ग्रह का स्थान है। यदि किसी जातक का मंगल अच्छा हो तो वह स्वभाव से निडर और साहसी होगा तथा युद्ध में वह विजय प्राप्त करेगा। लेकिन यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में बैठा हो तो जातक को विविध क्षेत्रों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मंगल ग्रह लाल रंग का प्रतिनिधित्व करता है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार  मांगलिक दोष मनुष्य जीवन के दांपत्य जीवन को प्रभावित करता है। मंगल दोष व्यक्ति के विवाह में देरी अथवा अन्य प्रकार की रुकावटों का कारण होता है।ज्योतिष के अनुसार जब किसी जातक की कुंडली में मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में से किसी भी एक भाव में होता है तब मांगलिक दोष की स्थिति बनती है। जिसकी कुंडली में मंगल दोष होता है यानि कुंडली मांगलिक होती है उसके वैवाहिक जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए मांगलिक कुंडली के जातक का विवाह किसी मांगलिक दोष वाले के साथ ही करवाया जाता है।इसके प्रभावों को कम करने के लिए जातक को मंगल दोष के उपाय करने चाहिए।
मनुष्य जीवन पर मंगल का प्रभाव
शारीरिक बनावट एवं स्वभाव - जन्म कुंडली में लग्न भाव में मंगल ग्रह व्यक्ति के चेहरे में सुंदरता एवं तेज़ लाता है। व्यक्ति उम्र के हिसाब से युवा दिखाई देता है। यह जातक को पराक्रमी, साहसी और निडर बनाता है। लग्न में मंगल के प्रभाव से व्यक्ति अभिमान भी होता है। वह किसी प्रकार के दबाव में रहकर कार्य नहीं करता है। शारीरिक रूप से व्यक्ति बलवान होता है। व्यक्ति का स्वभाव क्रोधी होता है। ऐसे जातकों की सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग क्षेत्र में रुचि होती है। मंगल का लग्न भाव होना मंगल दोष भी बनाता है।
बली मंगल के प्रभाव - मंगल की प्रबलता से व्यक्ति निडरता से अपने निर्णय लेता है। वह ऊर्जावान रहता है। इससे जातक उत्पादक क्षमता में वृद्धि होती है। विपरीत परिस्थितियों में भी जातक चुनौतियों को सहर्ष स्वीकार करता है और उन्हें मात भी देता है। बली मंगल का प्रभाव केवल व्यक्ति के ही ऊपर नहीं पड़ता है, बल्कि इसका प्रभाव व्यक्ति के पारिवारिक जीवन पर पड़ता दिखाई देता है। बली मंगल के कारण व्यक्ति के भाई-बहन अपने कार्यक्षेत्र में उन्नति करते हैं।
पीड़ित मंगल के प्रभाव - यदि मंगल ग्रह कुंडली में कमज़ोर अथवा पीड़ित हो तो यह जातक के लिए समस्या पैदा करता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को किसी दुर्घटना का सामना करना पड़ता है। पीड़ित मंगल के कारण जातक के पारिवारिक जीवन में भी समस्याएं आती हैं। जातक को शत्रुओं से पराजय, ज़मीन संबंधी विवाद, क़र्ज़ आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
रोग - कुंडली में मंगल पीड़ित हो तो व्यक्ति को विषजनित, रक्त संबंधी रोग, कुष्ठ, ख़ुजली, रक्तचाप, अल्सर, ट्यूमर, कैंसर, फोड़े-फुंसी, ज्वार आदि रोक होने की संभावना रहती है।
कार्यक्षेत्र - सेना, पुलिस, प्रॉपर्टी डीलिंग, इलेक्ट्रॉनिक संबंधी, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग, स्पोर्ट्स आदि।
उत्पाद - मसूर दाल, रेल वस्त्र, ज़मीन, अचल संपत्ती, विद्युत उत्पाद, तांबें की वस्तुएँ आदि।
स्थान - आर्मी कैंप, पुलिस स्टेशन, फायर बिग्रेड स्टेशन, युद्ध क्षेत्र आदि।
पशु व पक्षी - मेमना, बंदर, भेड़, शेर, भेड़िया, सूअर, कुत्ता, चमगादड़ एवं सभी लाल पक्षी आदि।
जड़ - अनंत मूल।
रत्न - मूंगा।
रुद्राक्ष - तीन मुखी रुद्राक्ष।
यंत्र - मंगल यंत्र।
रंग - लाल।
मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगलवार का व्रत धारण करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा मंगल से संबंधित इन मंत्रों का जाप करें-
मंगल का वैदिक मंत्र -
ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्।
अपां रेतां सि जिन्वति।।
मंगल का तांत्रिक मंत्र -
ॐ अं अंङ्गारकाय नम:
लेखक - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Hub
नक्षत्र ज्योतिष हब
📧panditanjanikumardadhich@gmail.com
फोन नंबर - 9414863294

ध्वजा

हिंदू धर्म में ध्वज का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। आज के समय में लोग अपने घरों की छत पर धार्मिक रूप से ध्वजा लगाते हैं। हिंदू धर्म में मुख्य रूप से केसरिया या पीले रंग का ध्वज लगाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में भी ध्वज से जुड़े कई उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को करने से कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। ध्वजा लगाते समय कई बातों का ध्यान रखा जाता है।
घर के ऊपर ध्वज लगाने से होने वाले लाभ निम्नलिखित है-
आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है
जिस घर के ऊपर भी ध्वज लगाया जाता है़ उस भवन पर दैवीय कृपा हो जाती है़। साथ ही ध्वज के प्रभाव से घर के समस्त वास्तु दोषों का अंत हो जाता है़। जिसके फलस्वरूप आर्थिक समृद्धि के रास्ते खुलने लगते हैं और घर में माँ लक्ष्मी की कृपा दिखाई देने लगती है़।
इसके लिए हमें इस बात को ध्यान अवश्य रखना होगा कि आपके द्वारा छत पर लगाये जाने वाला ध्वज त्रिकोणीय हो और उस पर स्वस्तिक का चिन्ह अवश्य अंकित हो।
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2. सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है़............
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घर के ऊपर ध्वज लगाये जाने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि छत के ऊपर फहरते हुये ध्वज को जब हम और हमारे परिवार के बच्चे देखते हैं तो हमारे अंदर प्रसन्नता का संचार होता है।
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यह प्रसन्नता का संचार ही हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देता है। जिससे की ध्वज वाले घर में रहने वाला हर सदस्य प्रगति की ओर बढ़ता है।
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3. रोग और शोक का नाश होता है़.............
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जब हम अपने घर की छत पर ध्वज को उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाते हैं तो हमारे घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। हमारे आवास की निगेटिव एनर्जी के समाप्त होते ही घर के सारे रोगों ओर शोकों का नाश हो जाता है और दुर्घटनाओं से बच जाते हैं।
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4. बुरी नजर से बचाता है.............
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घर में लगा ध्वज हमारी और हमारे घर की बुरी नजर से रक्षा करता है। किसी भी व्यक्ति द्वारा हमारे आवास पर बुरी नजर डालने पर उसका कोई दुष्प्रभाव हम पर नहीं पड़ पाता है, क्योंकि किसी व्यक्ति के द्वारा दी जाने निगेटिव एनर्जी फहरते हुये ध्वज के माध्यम से दूर कहीं छिटक जाती है़। जिससे की हम उसकी नकारात्मक दृष्टि से बच जाते हैं।
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5. घर पर लगा ध्वज मंगल का प्रतीक है़............
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हम सभी जानते हैं कि किसी भी देव स्थान या मंदिर के ऊपर एक या अनेक ध्वज अवश्य लगाये जाते हैं। लेकिन जब हम अपने घर के ऊपर ध्वज लगा देते हैं तो हमारा घर भी एक मंदिर के समान बन जाता है, जिसके कारण प्रभु की कृपा हमारे घर-आँगन में बरसने लगती है।
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6. पुरूषार्थ को बढ़ाता है़............
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घर के ऊपर ध्वज लगाने से हमारा जीवन पहले से अधिक उत्साही हो जाता है। हम कोई भी बड़ा से बड़ा काम करने से पीछे नहीं हटते बल्कि ऐसी स्थिति में हमें असंभव कार्य को संभव बनाने की प्रेरणा मिलती है। क्योंकि हमारे पुरुषार्थ को बढ़ावा मिलता है।
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ध्वज किस रंग का लगाया जाना चाहिए.............
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बाजार में धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर तरह-तरह के ध्वज बिकते रहते हैं, लेकिन आपको उस रंग और आकार वाला ध्वज खरीदना चाहिए जो आपके लिये सर्वोत्तम हो। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार त्रिकोणीय आकार का केसरिया या पीले रंग का ध्वज आपको अपनी छत पर लगाना चाहिए। आपके ध्वज पर मंगलकारी ॐ या स्वस्तिक का चिन्ह अवश्य बना होना चाहिए।
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ध्वज लगाये जाने में सावधानियाँ-
घर की छत पर ध्वज लगाते समय वास्तु के नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। इसके लिए घर की छत पर ध्वज लगाते समय भी कुछ विशेष सावधानियाँ बरतनी चाहिए। नहीं तो लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है़। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की छत पर कभी भी कटा-फटा अथवा मैला ध्वज नहीं लगाना चाहिए।
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यदि आप अपनी छत पर ध्वज लगा रहें हैं तो वह साफ-सुथरा अवश्य होना चाहिए। साथ ही वह ध्वज उसी समय तक लगाये रखना चाहिए जब तक की उसका वास्तविक रंग बना रहे।
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जब उसका रंग बारिश में धुल -धुलकर फीका हो जाये या ग्रीष्मकाल की तेज धूप में ध्वज का रंग बदरंग हो जाये तो ऐसी दशा में उसे उतार कर नया ध्वज लगा देना चाहिए, क्योंकि फीके रंग का ध्वज आपके जीवन में निराशा लाता है। साथ ही वह घर में नकारात्मक ऊर्जा भी उत्पन्न करता है।

नारायण कवच

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार (बृहस्पतिवार) के दिन भगवान विष्णु की पंचोपचार विधि से पुजा करने के बाद नारायण कवच का पाठ करना चाहिए। नारायण कवच का पाठ नित्य प्रतिदिन करना चाहिए। नारायण कवच भगवान नारायण (विष्णु) को समर्पित एक प्रार्थना है जिसमें भगवान विष्णु से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, हर प्रकार के भय को दूर करने की प्रार्थना की गई है। नारायण कवच के पाठ का न्यास सहित वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवे अध्याय में उल्लेखित किया गया है। नारायण कवच का पाठ अत्यंत प्रभावशाली तथा समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण कर सुख, सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करने वाला भी है।
नारायण कवच का पाठ करने से मिलने वाले अन्य लाभ निम्नलिखित है -
नारायण कवच का पाठ करने से शत्रुओं से और हर एक प्रकार की आपत्तियो से छुटकारा मिलता है।
कोई भी मनुष्य नारायण कवच का पाठ करता है उस मनुष्य को कभी भी प्रेत, पिशाच, राजा आदि से किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता है।
नारायण कवच का पाठ पूरी निष्ठा के साथ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति व सुरक्षा मिलती है।

Friday, 18 April 2025

यदि सप्तम भाव का स्वामी छ्ठे भाव में स्थित हो

यदि सप्तम भाव का स्वामी छ्ठे भाव में स्थित हो 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वैदिक ज्योतिष में सातवें भाव के स्वामी (सातवें भाव के शासक) का छ्ठे भाव में स्थित होना कई तरह के प्रभाव डाल सकता है खास तौर पर रिश्तों, साझेदारी और स्वास्थ्य के संबंध में। यहाँ कुछ मुख्य प्रभाव दिए गए हैं जिन पर विचार किया जाना चाहिए-
1. रिश्तों में चुनौतियाँ- छठा भाव संघर्ष, कर्ज और शत्रुओं से जुड़ा हुआ है। जब सप्तम भाव का स्वामी यहां स्थित होता है, तो यह रिश्तों और साझेदारी में चुनौतियों या संघर्षों का संकेत दे सकता है। जीवनसाथी या व्यावसायिक साझेदारों के साथ गलतफहमी या विवाद हो सकता है।
2. स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे- छठा भाव स्वास्थ्य और सेवा से भी जुड़ा हुआ है। यह स्थिति यह संकेत दे सकती है कि व्यक्ति के रिश्ते स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकते हैं, चाहे वह स्वयं के हों या उसके साथी के। यह रिश्तों में दूसरों की सेवा करने की आवश्यकता को भी इंगित कर सकता है, संभवतः व्यक्तिगत जरूरतों की कीमत पर।
3. कार्यस्थल संबंध- छठा भाव काम, कर्मचारियों और दैनिक दिनचर्या से संबंधित है। यह स्थिति संकेत दे सकती है कि कार्यस्थल पर विवाह सहित महत्वपूर्ण संबंध विकसित हो सकते हैं या भागीदारों का कोई सेवा-उन्मुख या स्वास्थ्य-संबंधी पेशा हो सकता है।
4. कानूनी मामले- छठा भाव मुकदमेबाजी और विवादों से जुड़ा हुआ है। यह साझेदारी या विवाह से संबंधित संभावित कानूनी मुद्दों का संकेत दे सकता है, या व्यक्ति को अपने रिश्तों से संबंधित कानूनी मामलों से निपटना पड़ सकता है।
5. सेवा और त्याग- रिश्तों में त्याग की भावना हो सकती है, जहां एक साथी को अधिक सेवा-उन्मुख भूमिका निभाने की आवश्यकता हो सकती है। इससे एक ऐसी गतिशीलता पैदा हो सकती है जहां एक साथी को अत्यधिक बोझ या कम सराहना महसूस हो।
6. चुनौतियों के माध्यम से विकास- अधिक सकारात्मक रूप से, यह स्थिति यह भी सुझाव दे सकती है कि रिश्तों में चुनौतियों से विकास और गहरी समझ पैदा हो सकती है। यह व्यक्ति को कठिनाइयों से निपटने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे समय के साथ रिश्ते मजबूत होते हैं।
7. संतुलन की आवश्यकता- इस स्थिति वाले व्यक्तियों को अपनी व्यक्तिगत ज़रूरतों को अपने साथी की ज़रूरतों के साथ संतुलित करना सीखना पड़ सकता है, खास तौर पर स्वास्थ्य और सेवा के मामले में। ज़िम्मेदारियों से अभिभूत होने से बचने के लिए एक स्वस्थ गतिशीलता खोजना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा इस स्थिति में निम्नलिखित प्रभाव भी पड़ते हैं 
सातवें भाव का स्वामी छठे भाव में होने से जीवनसाथी को तर्क-वितर्क करने की क्षमता प्राप्त हो सकती है।
जीवनसाथी किसी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी या चिकित्सा संबंधी अध्ययन या कार्य से जुड़ा हो सकता है।
यदि ग्रह की स्थिति मजबूत और छठे भाव में असंबद्ध हो तो जीवनसाथी बहुत धनवान और स्वस्थ हो सकता है।
यदि ग्रह की स्थिति मजबूत हो तो जीवनसाथी बहुत भौतिकवादी हो सकता है।
यदि सप्तम भाव का स्वामी छठे भाव में कमजोर हो या पीड़ित हो या पाप ग्रहों के साथ युति में हो या सूर्य द्वारा अस्त हो तो जीवनसाथी जातक के लिए अदालती मामले या परेशानियां ला सकता है।
निष्कर्ष - कुल मिलाकर, सातवें भाव के स्वामी का छठवें भाव में स्थित होना रिश्तों, स्वास्थ्य और सेवा के जटिल अंतर्संबंध का संकेत देता है। हालांकि, इसमें चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन इन अनुभवों के माध्यम से विकास और गहरी समझ की संभावना भी है। हमेशा की तरह, पूरा प्रभाव विशिष्ट चार्ट और अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करेगा।

लेखक परिचय- Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच [पुरोहित कर्म (यज्ञ-हवन - पुजा-अनुष्ठान) विशेषज्ञ, वैदिक ज्योतिषी, अंक ज्योतिषी एवं वास्तुविद ]
Nakshatra Jyotish Sansthaan
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान
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Saturday, 12 April 2025

हनुमान जन्मोत्सव

हनुमान जन्मोत्सव
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार श्री हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है और श्री हनुमान जी की पूजा करने से हर प्रकार के संकट भय, पीड़ा और बाधाओं से मुक्त हो जाते हैं। हनुमान जी के जन्मोत्सव पर हनुमान जी की पूजा करने का अपना विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। हिंदू पंचांग और धर्म शास्त्रों के मुताबिक अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इस साल 12 अप्रैल 2025 शनिवार के दिन है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी की पूजा करना चाहिए। सर्व प्रथम उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर हनुमान के साथ भगवान राम की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर हनुमान जी को लाल और भगवान राम जी को पीले पुष्प और पुष्प माला अर्पित करते हुए उनकी पंचोपचार विधि से पूजन करना चाहिए। इसके बाद बूंदी, हलवा, लड्डू, और पान के बीडे़ जैसी मीठी चीजों का भोग लगाएं और तुलसी दल भी अर्पित करते हुए हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बंजरग बाण, हनुमान बाहुक, ऋण मोचक मंगल स्तोत्र, एवं हनुमान अष्टक आदि में से कोई एक का पाठ करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित उपाय भी कर सकते हैं - 
✿ हनुमान जी सिंदूर और चमेली तेल मिश्रित चोला चढ़ाएं और लाल पुष्प की माला अर्पित करें।
✿ हनुमान जी के मंदिर में लाल ध्वजा अर्पित करें।
✿ हनुमान जी के मंदिर में चमेली के तेल का दीपक करे।
✿ हनुमान जी के भक्तों को इस दिन व्रत करने के अलावा बूंदी, हलवा, लड्डू, और पान जैसी मीठी चीजों का भोग लगाने से हनुमान की कृपा हमेशा अपने भक्तों पर बनी रहती है।
✿ हनुमान जन्मोत्सव के दिन घी का दीपक जलाकर उसमे दो लौंग डाल दे उसके बाद हनुमान जी का पूजन करे हनुमान चालीसा का पाठ करे कर्ज खत्म होगा।
✿ मंदार के 108 पते पर जय श्री राम लिखकर उन सभी पते को माला बनाकर हनुमान जी को चढ़ाए हनुमान जी प्रसन्न होंगे और सभी समस्या दूर होगी।
लेखक परिचय- Pandit Anjani Kumar Dadhich 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान
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