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Friday, 18 April 2025

यदि सप्तम भाव का स्वामी छ्ठे भाव में स्थित हो

यदि सप्तम भाव का स्वामी छ्ठे भाव में स्थित हो 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार वैदिक ज्योतिष में सातवें भाव के स्वामी (सातवें भाव के शासक) का छ्ठे भाव में स्थित होना कई तरह के प्रभाव डाल सकता है खास तौर पर रिश्तों, साझेदारी और स्वास्थ्य के संबंध में। यहाँ कुछ मुख्य प्रभाव दिए गए हैं जिन पर विचार किया जाना चाहिए-
1. रिश्तों में चुनौतियाँ- छठा भाव संघर्ष, कर्ज और शत्रुओं से जुड़ा हुआ है। जब सप्तम भाव का स्वामी यहां स्थित होता है, तो यह रिश्तों और साझेदारी में चुनौतियों या संघर्षों का संकेत दे सकता है। जीवनसाथी या व्यावसायिक साझेदारों के साथ गलतफहमी या विवाद हो सकता है।
2. स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे- छठा भाव स्वास्थ्य और सेवा से भी जुड़ा हुआ है। यह स्थिति यह संकेत दे सकती है कि व्यक्ति के रिश्ते स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकते हैं, चाहे वह स्वयं के हों या उसके साथी के। यह रिश्तों में दूसरों की सेवा करने की आवश्यकता को भी इंगित कर सकता है, संभवतः व्यक्तिगत जरूरतों की कीमत पर।
3. कार्यस्थल संबंध- छठा भाव काम, कर्मचारियों और दैनिक दिनचर्या से संबंधित है। यह स्थिति संकेत दे सकती है कि कार्यस्थल पर विवाह सहित महत्वपूर्ण संबंध विकसित हो सकते हैं या भागीदारों का कोई सेवा-उन्मुख या स्वास्थ्य-संबंधी पेशा हो सकता है।
4. कानूनी मामले- छठा भाव मुकदमेबाजी और विवादों से जुड़ा हुआ है। यह साझेदारी या विवाह से संबंधित संभावित कानूनी मुद्दों का संकेत दे सकता है, या व्यक्ति को अपने रिश्तों से संबंधित कानूनी मामलों से निपटना पड़ सकता है।
5. सेवा और त्याग- रिश्तों में त्याग की भावना हो सकती है, जहां एक साथी को अधिक सेवा-उन्मुख भूमिका निभाने की आवश्यकता हो सकती है। इससे एक ऐसी गतिशीलता पैदा हो सकती है जहां एक साथी को अत्यधिक बोझ या कम सराहना महसूस हो।
6. चुनौतियों के माध्यम से विकास- अधिक सकारात्मक रूप से, यह स्थिति यह भी सुझाव दे सकती है कि रिश्तों में चुनौतियों से विकास और गहरी समझ पैदा हो सकती है। यह व्यक्ति को कठिनाइयों से निपटने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे समय के साथ रिश्ते मजबूत होते हैं।
7. संतुलन की आवश्यकता- इस स्थिति वाले व्यक्तियों को अपनी व्यक्तिगत ज़रूरतों को अपने साथी की ज़रूरतों के साथ संतुलित करना सीखना पड़ सकता है, खास तौर पर स्वास्थ्य और सेवा के मामले में। ज़िम्मेदारियों से अभिभूत होने से बचने के लिए एक स्वस्थ गतिशीलता खोजना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा इस स्थिति में निम्नलिखित प्रभाव भी पड़ते हैं 
सातवें भाव का स्वामी छठे भाव में होने से जीवनसाथी को तर्क-वितर्क करने की क्षमता प्राप्त हो सकती है।
जीवनसाथी किसी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी या चिकित्सा संबंधी अध्ययन या कार्य से जुड़ा हो सकता है।
यदि ग्रह की स्थिति मजबूत और छठे भाव में असंबद्ध हो तो जीवनसाथी बहुत धनवान और स्वस्थ हो सकता है।
यदि ग्रह की स्थिति मजबूत हो तो जीवनसाथी बहुत भौतिकवादी हो सकता है।
यदि सप्तम भाव का स्वामी छठे भाव में कमजोर हो या पीड़ित हो या पाप ग्रहों के साथ युति में हो या सूर्य द्वारा अस्त हो तो जीवनसाथी जातक के लिए अदालती मामले या परेशानियां ला सकता है।
निष्कर्ष - कुल मिलाकर, सातवें भाव के स्वामी का छठवें भाव में स्थित होना रिश्तों, स्वास्थ्य और सेवा के जटिल अंतर्संबंध का संकेत देता है। हालांकि, इसमें चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन इन अनुभवों के माध्यम से विकास और गहरी समझ की संभावना भी है। हमेशा की तरह, पूरा प्रभाव विशिष्ट चार्ट और अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करेगा।

लेखक परिचय- Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच [पुरोहित कर्म (यज्ञ-हवन - पुजा-अनुष्ठान) विशेषज्ञ, वैदिक ज्योतिषी, अंक ज्योतिषी एवं वास्तुविद ]
Nakshatra Jyotish Sansthaan
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान
panditanjanikumardadhich@gmail.com
सम्पर्क सूत्र - 063770 54504, 9772380963

Saturday, 12 April 2025

हनुमान जन्मोत्सव

हनुमान जन्मोत्सव
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार श्री हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है और श्री हनुमान जी की पूजा करने से हर प्रकार के संकट भय, पीड़ा और बाधाओं से मुक्त हो जाते हैं। हनुमान जी के जन्मोत्सव पर हनुमान जी की पूजा करने का अपना विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। हिंदू पंचांग और धर्म शास्त्रों के मुताबिक अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इस साल 12 अप्रैल 2025 शनिवार के दिन है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी की पूजा करना चाहिए। सर्व प्रथम उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर हनुमान के साथ भगवान राम की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर हनुमान जी को लाल और भगवान राम जी को पीले पुष्प और पुष्प माला अर्पित करते हुए उनकी पंचोपचार विधि से पूजन करना चाहिए। इसके बाद बूंदी, हलवा, लड्डू, और पान के बीडे़ जैसी मीठी चीजों का भोग लगाएं और तुलसी दल भी अर्पित करते हुए हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बंजरग बाण, हनुमान बाहुक, ऋण मोचक मंगल स्तोत्र, एवं हनुमान अष्टक आदि में से कोई एक का पाठ करें।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित उपाय भी कर सकते हैं - 
✿ हनुमान जी सिंदूर और चमेली तेल मिश्रित चोला चढ़ाएं और लाल पुष्प की माला अर्पित करें।
✿ हनुमान जी के मंदिर में लाल ध्वजा अर्पित करें।
✿ हनुमान जी के मंदिर में चमेली के तेल का दीपक करे।
✿ हनुमान जी के भक्तों को इस दिन व्रत करने के अलावा बूंदी, हलवा, लड्डू, और पान जैसी मीठी चीजों का भोग लगाने से हनुमान की कृपा हमेशा अपने भक्तों पर बनी रहती है।
✿ हनुमान जन्मोत्सव के दिन घी का दीपक जलाकर उसमे दो लौंग डाल दे उसके बाद हनुमान जी का पूजन करे हनुमान चालीसा का पाठ करे कर्ज खत्म होगा।
✿ मंदार के 108 पते पर जय श्री राम लिखकर उन सभी पते को माला बनाकर हनुमान जी को चढ़ाए हनुमान जी प्रसन्न होंगे और सभी समस्या दूर होगी।
लेखक परिचय- Pandit Anjani Kumar Dadhich 
 पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान
panditanjanikumardadhich@gmail.com
📱9414863294, 6377054504

Sunday, 30 March 2025

हिन्दू नववर्ष 2082, राजा मंत्री कौन और उनका देश दुनिया पर प्रभाव

हिन्दू नववर्ष 2082, राजा मंत्री कौन और उनका देश दुनिया पर प्रभाव 

प्रिय पाठकों 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज इस लेख में हिन्दू नववर्ष पर जानकारी दे रहा हूं।

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रत्येक हिन्दू नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। हिन्दू नववर्ष को विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है। ब्रह्मपुराण के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि का निर्माण किया था। अथर्ववेद में भी इस बात का संकेत मिलता है। एक हिन्दू नववर्ष या एक विक्रम संवत में 12 महीने होते हैं जिसका आरंभ चैत्र माह से होता है और वहीं फाल्गुन महीना हिंदू कैलेंडर का आखिरी माह होता है। इस बार 30 मार्च 2025 रविवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन विक्रम संवत 2082 शुरू हो जाएगा और इस नव संवत्सर को ''कालयुक्त" नाम से जाना जाएगा। जो ज्योतिषीय दृष्टि से काफी उग्र और प्रभावशाली माना जा रहा है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिंदू नव वर्ष के दिन सिंधि समाज के लोग चेटीचंड का पर्व, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक में युगादि और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में उगादी, गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय के लोग संवत्सर पड़वो कश्मीर में नवरेह, मणिपुर में सजिबु नोंगमा पानबा का पर्व आदि मनाते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार प्रत्येक वर्ष का एक राजा और एक मंत्री होता है जिनकी स्थिति आपसी सामंजस्य देश दुनिया पर अपना प्रभाव डालती है। अतः इस साल का राजा और मंत्री ज्ञात करे -

इस वर्ष का राजा कौन ?

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को जो वार होता है वही वारेश वर्ष का राजा नियुक्त होता है। इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की शुरुआत 30 मार्च 2025 रविवार को होगी अतः इस वर्ष का वारेश या राजा सूर्य ही होगा 

इस वर्ष का मंत्री कौन ?

सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के अनुसार वर्ष का मंत्री नियुक्त होता है। इसके अनुसार इस वर्ष का मंत्री भी सूर्य ही होगा। 

ग्रहों की स्थिति और विशेषताएं

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति नए साल के दिन सूर्य सहित शुक्र, बुध, शनि और राहु मीन राशि में रहेगा जो पंचग्रही योग बना रहे है। सूर्य का मीन राशि में होना आध्यात्मिकता, अंतर्ज्ञान और मानसिक शांति को बढ़ावा देगा। चंद्रमा मेष राशि में रहेगा जो आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ाएगा।शनि और बृहस्पति का प्रभाव शनि मकर राशि में रहेगा, जो कर्म प्रधानता और अनुशासन बढ़ाएगा। बृहस्पति (बृहस्पति) वृषभ राशि में स्थित होगा जो आर्थिक मामलों में स्थिरता और व्यावसायिक प्रगति का संकेत देता है। मंगल और राहु-केतु की भूमिका मंगल मिथुन राशि में रहेगा जो संचार और प्रौद्योगिकी से जुड़े क्षेत्रों में तेजी लाएगा। राहु मीन राशि में और केतु कन्या राशि में रहेंगे जिससे आध्यात्मिकता में वृद्धि होगी और राजनीतिक क्षेत्र में कुछ उथल-पुथल होगी।
-हिंदू नववर्ष में बन रहा खप्पर योग-
 वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस संवत का राजा और मंत्री दोनों सूर्य होते हैं तो उस साल खप्पर योग बनता है। ये योग काफी अशुभ माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, जिस साल यह योग बनता है उस साल सरकार और जनता में टकराव बढ़ता है जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग गैर जिम्मेदाराना काम करते हैं। इसके अलावा महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों पर संकट आता है और बहुत लोगों की मृत्यु या हत्या भी होती है। महंगाई तेजी से बढ़ती है और आर्थिक संकट बढ़ जाता है। कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही बहुत ही ज्यादा गर्मी बढ़ेगी। लेकिन इसके अलावा कुछ अच्छी चीजें भी हो सकती है।
मंत्री और राजा सूर्य का विश्व पटल पर प्रकाश 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सूर्य का प्रभाव हमेशा राजसत्ता, प्रशासन, शक्ति और उग्रता से जुड़ा होता है। ऐसे में इस वर्ष राजनीतिक अस्थिरता, प्रशासन में कठोर फैसले और उग्र आंदोलनों का प्रभाव दिख सकता है। सूर्य के प्रभाव से शासक वर्ग मजबूत रहेगा और नए सुधारों की संभावनाएं बनेंगी। यह वर्ष काफी कुछ उथल-पुथल वाला हो सकता है। अग्निकांड, प्राकृतिक आपदा आदि से धन जन की हानि के आसार हैं। इस वर्ष वृक्षों पर अपेक्षाकृत फल कम आने की संभावना है। चैत्र व वैशाख मास कष्टकारी व आषाढ़ मास में हवा की गति में तेजी आएगी। सावन मास में अनाजों में तेजी, आश्विन मास में समानता व कार्तिक में मंदी का दौर रहेगा। अगहण, पौष, माघ व फाल्गुन में अशांति, शासकीय विरोध झेलने पड़ेंगे।
बुध के प्रभाव से वर्षा की स्थिति संतोष जनक रहेगी। चौमासी फसलों का स्वामी बुध के होने से गेंहू, धान, गन्ना आदि की उपज में बढ़ोतरी होगी। शीतकालीन फसलों का स्वामी चंद्रमा होने से मूंग, बाजरा, सरसों की उपज अच्छी होगी। नए संवत्सर का निवास वैश्य के घर होने से व्यापार में प्रगति होगी। अन्न, भूमि, भवन, शिक्षा, सोना, वाहन, तकीनक के क्षेत्रों में तेजी रहेगी। 
भारतीय राजनीति पर पड़ेगा असर
इस वर्ष त्वचा व संक्रमण की बीमारियों का प्रकोप के आसार हैं।
सूर्य के विशेष प्रभाव होने के कारण भारतीय राजनीति पर असर पड़ेगा।
विदेशी कूटनीति से लाभ मिलेगा।
देश के कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन की संभावना बनेगी।
कई स्थानीय राजनीतिक पार्टियों का विलय होगा।
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ध्यान रखने योग्य - पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नव वर्ष राजा के निर्धारण के विषय पर चर्चा करनी इसलिए आवश्यक है क्योंकि प्रायः इसकी वजह से वर्षेश भिन्न हो जाता है। सही में कुछ और होता है और गणनात्मक त्रुटि की वजह से कुछ और हो जाता है। इसको बहुत स्पष्टता से समझने की जरूरत है। इस घालमेल की वजह से गलत वर्षेश का निर्धारण हो जाता है। गलत तथ्य के प्रकाशन के साथ साथ भ्रम की स्थिति बन जाती है।

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लेखक परिचय - Pandit Anjani Kumar Dadhich
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Saturday, 29 March 2025

नवरात्रि पर्व विशेष

नवरात्रि पर्व विशेष
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज इस लेख में चैत्र नवरात्रि के बारे में जानकारी दे रहा हूं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिंदू धर्म में नवरात्रि के इस त्योहार का बेहद ही खास महत्व होता है। वर्ष में कुल चार नवरात्रि पड़ती हैं जिसमें से दो गुप्त नवरात्रि होती है और शारदीय और चैत्र नवरात्रि होती है। गुप्त नवरात्रि को तंत्र साधना के लिए शुभ माना जाता है। वहीं चैत्र और शारदीय नवरात्रि गृहस्थ लोग रखते हैं। चैत्र नवरात्रि का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि (नौ दिन) तक मनाया जाता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। 
घट स्थापना मुहुर्त
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 30 मार्च 2025 रविवार के दिन नवरात्रि है। नवरात्रि में घट स्थापना या कलश स्थापना का अपना अलग ही महत्व है।
घट स्थापना मुहुर्त निम्नलिखित हैं 
6:00 बजे से 6:48 तक ( महेंद्र योग मुहुर्त )
6:48 बजे से 9:52 तक (अमृत योग मुहुर्त)
8:07 बजे से 9:39 तक (चंचल मुहुर्त)
9:39 बजे से 12 :43 तक (लाभ-अमृत योग मुहुर्त) 
12:18 बजे से 1:07 तक (अभिजीत मुहूर्त)
अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना या घट स्थापना करना शुभ माना गया है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार घटस्थापना में निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए -
⁠✿ कलश स्थापना या घटस्थापना में हमेशा सोने, चांदी, तांबे या फिर मिट्टी से बने कलश का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
✿ पूजा के लिए लोहे के कलश या स्टील से बने कलश का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
⁠✿ कलश की स्थापना के दौरान दिशा का भी विशेष ख्याल रखें। कलश की स्थापना या तो उत्तर दिशा में या फिर पूर्व दिशा में ही करनी चाहिए।
⁠✿ कलश स्थापना करने से पहले उस स्थान को अच्छे से साफ सफाई कर लें और वहां पर गंगाजल का छिड़काव करने के बाद ही कलश की स्थापना करें।
⁠✿ कलश स्थापना के लिए चिकनी मिट्टी और रेतीली मिट्टी को फैला लें और अष्टदल बनाएं।
⁠✿ कलश में सप्त मृत्तिका, सुपारी, सिक्का, सुगंध, सर्व औषधी, कौड़ी, शहद, गंगाजल, पंच पल्लव, पीपल, आम बरगद, गूलर और पाखर के पल्लव यदि उपलब्ध न हो तो आम के पल्लव डाल लें।
⁠✿ लाल रंग के कपड़े में नारियल लपेटकर कलश के ऊपर रख दें।
⁠✿ सिंदूर से कलश में स्वास्तिक लगाएं। कलश के ऊपर मिट्टी के बर्तन में धान या चावल डालकर उसके ऊपर ही नारियल स्थापित करें।
✿ पूजा के बाद वेदी के ऊपर एक मिट्टी का कुंडा लेकर उसमें जौं को बो देना चाहिए।
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पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा की आराधना करना चाहते हैं और कोई भी मंत्र नहीं आता हो तो दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र "ओम् ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे" मंत्र की माला का जाप करना चाहिए। 
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Wednesday, 5 February 2025

रामचरितमानस की चौपाई का जाप तो बनेंगे बिगड़े काम

रामचरितमानस की चौपाई का जाप तो बनेंगे बिगड़े काम
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस महाकाव्य की हर एक चौपाई अपने आप में एक सिद्ध मंत्र है अतः हमे भी इनका जाप कर अपने कार्यो को सिद्ध करना चाहिए।
कई बार लोग किसी काम को पूरी मेहनत और लगन से करते हैं लेकिन वो काम बनते-बनते बिगड़़ जाता है अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो सिर्फ एक चौपाई के जाप से आपका काम बन सकते हैं। यह चौपाई सुंदर काण्ड में दी गई है। 
चौपाई
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥ 
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
भावार्थ - किसी भी काम की करने से पहले प्रभु श्रीराम का स्मरण करने से सफलता मिलेगी। जो भी ऐसा करता है उसके लिए विष भी अमृत हो जाता है, शत्रु मित्र बन जाता है, समुद्र गाय के खुर के बराबर हो जाता है, अग्नि में शीतलता आ जाती है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ऐसा माना जाता है कि रामचरितमानस की इस चौपाई का पाठ करने से कई फ़ायदे होते हैं जो कि निम्नलिखित है 
इस चौपाई का जाप करने से व्यक्ति का कठिन से कठिन काम में सफलता मिलती है और साथ ही यात्रा प्रवास भी सुरक्षित होता है।
इस चौपाई का जाप करने से श्रीराम और हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और समस्याओं का भी निदान हो जाता है।
इस चौपाई के बारे में कुछ जानकारी है जो निम्नलिखित है -
इस चौपाई का पाठ करने के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे अच्छा होता है।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद, अपने इष्ट का ध्यान करके चौपाई का पाठ 108 बार करना चाहिए।
जिस स्थान की यात्रा करनी हो, वहां पहुंचते ही उक्त चौपाई को सात बार बोलें।
कहा जाता है कि रामचरितमानस की चौपाइयां इतनी प्रभावशाली हैं कि इसके पाठ मात्र से धन की कामना रखने वाले को धन की प्राप्ति होती है।
मान्यता के अनुसार जब लंका में सीता माता का पता लगाने के लिए हनुमान जी गए थे तब उनके मन में संदेह था कि वो अपने काम में सफल होंगे या नहीं। तब उन्होंने प्रभु श्री राम का ध्यान किया और लंका में प्रवेश किया साथ ही अपने कार्य में सफल भी हुए इसलिए माना जाता है कि अगर आपको भी मन में किसी काम को लेकर अनजाना डर समाए तो इस चौपाई का पाठ करने और श्रीराम के स्मरण मात्र से काम सफल होते हैं।
अतः अगर आप भी किसी भी काम को करने से पहले या इंटरव्यू आदि से पहले भगवान श्रीराम और हनुमान जी को याद कर इस चौपाई को बोलने हर काम बन जाएगा।
रामचरितमानस की रचना तुलसीदास ने महार्षि वाल्मिकी की रामायण को आधार बनाकर की है। सुंदरकांड रामचरितमानस का ही पंचम सोपान है। इसमें हनुमान जी के गुणों और यश के बारे में बताया गया है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच 
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Monday, 30 December 2024

सोमवती पोष अमावस्या

सोमवती अमावस्या
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज सोमवती अमावस्या के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।

पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार हिन्दू धर्म में अमावस्या का अपना महत्व है और जो सोमवार के दिन अमावस्या की तिथि पड़ती है उसके कारण उस अमावस्या को सोमवती अमावस्या भी कहा जाता है।
इस बार पौष की अमावस्या तिथि 30 दिसंबर 2024 के दिन सोमवार को मनाई जाएगी।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार नारद पुराण में पोष मास की अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और दीपदान करने का बहुत महत्व है। धर्म शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ पीपल वृक्ष को कहते है।सोमवार का दिन भगवान शिव का माना जाता है। इस दिन विवाहित स्त्री अपने पति की लम्बी आयु के लिए व्रत रखती हैं साथ ही इस दिन पितृ दोष व काल सर्प दोष के निवारण के लिए पूजा की जाती है। इस दिन व्यक्ति अपने मृतक रिश्तेदारों की आत्मा की शांति के लिए पवित्र नदी में डुबकी लगाकर प्रार्थना करते हैं और उनके नाम का दान करते हैं।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन निम्नलिखित उपाय कर सकते है- 
❁ सोमवती अमावस्‍या का व्रत विवाहित स्त्रियां अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दिन मौन व्रत करने का विधान है। ऐसा करने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां पीपल के पेड़ की दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा करती हैं। इसके बाद 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा कर अपने पति की लम्बी उम्र प्रार्थना करती हैं।
❁ सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य हर रूप से सुखी और समृद्ध होता है।वह पूर्ण रूप से स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त भी होता है। इस दिन पवित्र नदियों के जल में स्नान और तर्पण करने पर पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन किया गया दान खासकर पितृकर्म के निमित्त किया गया दान-धर्म विशेष फल प्रदान करता है।
❁ सोमवती अमावस्या के दिन शिवलिंग पर कच्चे दूध और दही से अभिषेक करे और चौमुखा दीपक जलाकर ओम् नमः शिवाय की 108 बार माला जाप करने से सारे बिगड़े काम बनते हैं और गरीबी दूर होती है।
❁ सोमवती अमावस्या को स्नान और ध्यान के बाद तुलसी की 108 परिक्रमा की जाए तो इससे दरिद्रता दूर होती है।
❁ सोमवती अमावस्या के दिन आप भगवान गणेश को भी सुपारी चढ़ाएं तथा अमावस्या की रात को गणेश प्रतिमा के आगे दीपक जलाकर रखे और ओम् गं गणपतये नमः मंत्र की कम से कम 11 बार माला फेरे इससे आपको धन लाभ होगा। 
❁ अमावस्या की रात को आप किसी कुएं में एक चम्मच दूध और एक रुपए का सिक्का डाल दें। इससे आपको धन लाभ होने लगेगा। 
❁ सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनि मंत्र का जाप करने से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
❁ विष योग मतलब यह है कि जिन लोगों की कुंडली में शनि और चंद्रमा की युति विष योग का निर्माण करती है।जिन लोगों की कुंडली में विष योग है वे सभी सोमवती अमावस्या के दिन बहुत उपाय कर सकते हैं जिससे उनको लाभ मिलता है। 
❁ सोमवती अमावस्या के दिन अच्छे कर्म और दान धर्म करके जातक अपने बाधित जीवन को गति प्रदान कर सकते है। 
❁ सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे रात के समय जाकर एक नारियल ले और वह अपने ऊपर से सीधा वार के 7 बार उसे पीपल के नीचे ही तोड़ दें। वह नारियल दो टुकड़े हुए हुए वहीं पर छोड़ कर आए उसे आप नहीं खाएं। इससे आप पर किये कराया और टोने टोटके का प्रभाव खत्म होगा। 
❁ जो एक रुपया, दो रुपये, पांच रुपये या 10 रूपये के सिक्के होते हैं वह सिक्के अपने सर के ऊपर से वार कर गायों के लिए को दान करने चाहिए। आपकी सारी बाधाएं दूर होगी। 
❁ सोमवती अमावस्या के दिन किसी भुखे और गरीब व्यक्ति को खाना खिलाने से पितरो को शांति और तृप्ति मिलती है।   
❁ सोमवती अमावस्ता पर पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और शाम को वहां तेल का दीपक लगाकर पीपल के नीचे बैठकर पितृ सूक्त का पाठ करने से पितर प्रसन्न होते हैं और दरिद्रता का नाश होता है।
❁ सोमवती अमावस्या पर सूर्यास्त के बाद सरोवर या नदी में आटे से बने दीपक प्रवाहित करें। अमावस्या पर पितर गण धरती पर आते हैं और सूर्यास्त पर अपने लोक लौटते हैं। अतः जब पितृ अपने लोक में लौटते समय उनके रास्ते में अंधेरा न हो इस वजह से ही पितरों के लिए दीप जलाना चाहिए।
❁ सोमवती अमावस्या पर हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करने से शत्रुओं का विनाश होता है।
❁ सोमवती अमावस्या के दिन रात को घर के ईशान कोण यानी उत्तर और पूर्व दिशा के बीच में दीपक जलाने से पितरों और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा मिलती है जिससे धन की समस्या हल होती है।
❁ सोमवती अमावस्या की शाम को लाल रंग के धागे के इस्तेमाल से केसर डालकर घी का दीपक जलाना चाहिए और इसके बाद श्रीसूक्त का पाठ करने से लक्ष्मी जी घर में वास करती हैं।
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Tuesday, 10 December 2024

कैसा होगा 2025

अंक ज्योतिष अनुसार कैसा रहेगा 2025
प्रिय पाठकों, 
10 दिसंबर 2024, मंगलवार 
मैं पंडित अंजनी कुमार दाधीच आज इस लेख में अंक ज्योतिष के अनुसार आने वाला नव वर्ष 2025 के वार्षिकफल के बारे में यहाँ कुछ जानकारी दे रहा हूँ।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अंक हमारे जीवन को अलग-अलग रूपों से या अलग-अलग तरह से प्रभावित करते हैं। कभी कोई अंक हमें शुभ परिणाम देता है तो कभी कोई अंक हमारे लिए अशुभ परिणाम भी देता है। प्रत्येक वर्ष का अपना एक विशेष अंक होता है वो अंक आपके मूलांक अंक के साथ जैसा संबंध रखता है उसी तरह के परिणाम आपको मिलते हैं। साथ ही साथ वह अंक आपके मूलांक या नामांक के साथ जिस तरह के संबंध रखता है उस तरह का भी प्रभाव भी आप पर पड़ता है। इस साल का अंक आपके लिए आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं के लिए किस तरह से प्रभावित करेगा। इन सभी पहलुओं पर अंक शास्त्र के माध्यम से जानकारी दे रहा हूं जोकि निम्नलिखित है -
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार अगर अंक शास्त्र के हिसाब से आने वाला नया ईस्वी साल 2025 जिसका कुल योग 9 (2+0+2+5=9) हो रहा है। अंक ज्योतिष शास्त्र के अंक 9 का स्वामी मंगल को अंक माना गया है जोकि अपने आप में एक पूर्ण अंक हैं। मंगल ग्रह को उर्जा,साहस और पराक्रम के साथ-साथ क्रोध का कारक माना जाता है। 
साल 2025 के अंको में 2 और 5 अंकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
अंक शास्त्र में मूलांक 2 का स्वामी चंद्रमा और मूलांक 5 का स्वामी बुध ग्रह को माना जाता है।
ऐसी स्थिति में इस नए साल 2025 पर मंगल, चंद्रमा और बुध की युति का सम्मिलित प्रभाव दिखाई देगा। क्योंकि 2025 में अंक 2 सबसे ज्यादा बार आवृत्ति में है जिनके सहयोग से मंगल का अंक बन रहा है। ऐसे में चंद्र मंगल की युति कुछ मामलों में अच्छी तो कुछ मामलों में खराब मानी गई है। क्योंकि ऐसी युति व्यक्ति को भावुक करने वाली मानी गई है। अंक ज्योतिष के अनुसार साल 2025 यह साल नई ऊर्जा, जोश, संतुलित सोच,वाकपटुता देने के साथ भावनात्मक असंतुलन, क्रोध, उपद्रवी तत्वों को बढ़ावा देने वाला हो सकता है। 
इन सबके बीच अनुकूल बात यह है कि बुध का प्रभाव यानि संतुलन देने का काम कर सकता है। इस वर्ष व्यक्ति उन्नादी हो सकते हैं। धर्म कर्म और जाति के नाम पर विवाद हो सकते हैं। अदालत या फिर सरकार के कुछ ऐसे निर्णय हो सकते हैं जिनसे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। भावनात्मक रूप से आहत होकर बहुत सारे लोग सड़कों पर उतरकर उन निर्णयों का विरोध भी कर सकते हैं लेकिन देर सबेर बिना किसी बड़े उपद्रव के लोग संतुलित भी हो जाएंगे। क्योंकि अंक 5 संतुलन देने का काम करेगा।
यह साल युवाओं में आक्रोश की भावना भी दे सकता है। विशेषकर बेरोजगार युवक सड़कों पर उतरने का काम कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में इस वर्ष सरकारें भी युवाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेने का काम कर सकती हैं। इसके अलावा धार्मिक आधार पर भी कुछ निर्णय किए जा सकते हैं। स्त्रियों के हित के लिए भी इस वर्ष कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। सामान्य तौर पर इस साल को हम औसत से कुछ हद तक बेहतर भी कह सकते हैं। छोटे-मोटे विवादों या अव्यवस्था के बाद सब कुछ संतुलित हो जाने की संभावना है।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान 
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