google24482cba33272f17.html Pandit Anjani Kumar Dadhich : त्योहार पुजा पाठ
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Saturday, 24 October 2020

शमी पुजन

पूर्व की पोस्ट http://astroanjanikumardadhich.blogspot.com/2020/10/blog-post_24.html
विजयदशमी और शमी वृक्षपंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार विजयदशमी के दिन माँ अपराजिता का पूजन करने के बाद शमी अर्थात खेजड़ी वृक्ष का पूजन करना चाहिए।   
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शमी के कांटों का प्रयोग तंत्र, मंत्र बाधा और नकारात्‍मक शक्तियों के नाश के लिए होता है। शमी के फूल, पत्‍ते, जड़ें, टहनी और रस का प्रयोग शनि संबंधी दोषों को दूर करने के लिए भी किया जाता है। आयुर्वेद में शमी के वृक्ष का प्रयोग गुणकारी औषधि के रूप में भी किया जाता है। माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास शमी वृक्ष को ही माना जाता है। शमी वृक्ष की पूजा दशहरा वाले दिन प्रदोष काल में की जाती है। शमी को दृढ़ता तथा तेजस्विता का प्रतीक माना जाता है। उसमें अन्य वृक्षों की तुलना में अग्नि तत्व ज्यादा होता है। हम भी शमी की तरह ही तेजस्वी तथा दृढ़ हों, इसलिए इसकी पूजा की जाती है।शमी के वृक्ष की पूजन परंपरा हमारे यहां प्राचीन समय से चली आ रही है। पौराणिक मान्यता है कि मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने के पूर्व शमी वृक्ष के सामने शीश नवाकर अपनी विजय हेतु प्रार्थना की थी। महाभारत के समय में पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्ष में अपने हथियार शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे और इसी कारण उन्हें विजय प्राप्त हुई।
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार सर्वप्रथम शमी वृक्ष के पास जाकर नमन करते हुए शमी वृक्ष का रोली से तिलक कर चावल चढाये। उसके बाद गुड़ का भोग लगाए। मौली चढाते हुए शमी वृक्ष के चारों ओर मौली से बांधे और फिर धुप दीप के साथ शमी वृक्ष की पुजा आरती करे उसके बाद सारी पूजा सामग्री को शमी वृक्ष की जड़ों में मिट्टी को अर्पित करें। फिर शमी वृक्ष के पत्ते और जड़ के पास की थोड़ी सी मिट्टी लेकर उसे नए लाल कपड़े मे बांध कर घर के पवित्र स्थान अर्थात भगवान के मंदिर अथवा तिजोरी में रखकर माँ महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए अपने घर में अक्षुण्ण धनलक्ष्मी के वास की प्रार्थना करे। 
इस दिन शमी के कटे हुए पत्ते और डालियों की पूजा नहीं करनी चाहिए।रात्रि में देवी मां के मंदिर में जाकर दीपक जलाएं साथ ही पूरे घर में रोशनी रखें।नवरात्र में विजयादशमी के दिन शमी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि का स्थाई वास होता है। शमी का पौधा जीवन से टोने-टोटके के दुष्प्रभाव व नकारात्मक प्रभाव को दूर करता है।इस दिन संध्या के समय शमी के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से युद्ध और मुक़दमो में विजय मिलती है शत्रुओं का भय समाप्त होता है। आरोग्य व धन की प्राप्ति होती है। शमी वृक्ष तेजस्विता एवं दृढता का प्रतीक भी माना गया है, जिसमें अग्नि तत्व की प्रचुरता होती है। घर में ईशान कोण (पूर्वोत्तर) में स्थित शमी का वृक्ष विशेष लाभकारी माना गया है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार रात्रि में देवी मां के मंदिर में जाकर दीपक जलाएं साथ ही पूरे घर में रोशनी रखें।नवरात्र में विजयादशमी के दिन शमी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि का स्थाई वास होता है। शमी का पौधा जीवन से टोने-टोटके के दुष्प्रभाव व नकारात्मक प्रभाव को दूर करता है।इस दिन संध्या के समय शमी के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से युद्ध और मुक़दमो में विजय मिलती है शत्रुओं का भय समाप्त होता है। आरोग्य व धन की प्राप्ति होती है। शमी वृक्ष तेजस्विता एवं दृढता का प्रतीक भी माना गया है, जिसमें अग्नि तत्व की प्रचुरता होती है। इसी कारण यज्ञ में अगि्न प्रकट करने हेतु शमी की लकड़ी के उपकरण बनाए जाते हैं।घर में ईशान कोण (पूर्वोत्तर) में स्थित शमी का वृक्ष विशेष लाभकारी माना गया है। पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार ध्यान रखने योग्य बात यह है कि इस दिन शमी के कटे हुए पत्ते और डालियों की पूजा नहीं करनी चाहिए।
Pandit Anjani Kumar Dadhich
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