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Sunday, 21 September 2025

नवरात्रि पर्व

शारदीय नवरात्र 
पंडित अंजनी कुमार के अनुसार भारतीय हिन्दू पंचांग के मुताबिक हर वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्र महोत्सव 22 सितंबर 2025 सोमवार के दिन है इस दिन नवरात्रि का पहला दिन है। 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार शारदीय नवरात्र आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तिथि में संपन्न हो जाता है। किन्तु इस साल शारदीय नवरात्र पूरे दस दिनों का होगा।
नवरात्रि के दिन शुभ/अशुभ योग 
नवरात्रि पर इस बार बुधादित्य राजयोग, भद्र राजयोग, धन योग (चंद्र मंगल युति तुला राशि में), त्रिग्रह योग (चंद्रमा बुध और सूर्य की युति कन्या राशि में), और गजेसरी राजयोग का शुभ संयोग रहने वाला है। नवरात्रि का आरंभ गजकेसरी राजयोग से हो रहा है क्योंकि, गुरु और चंद्रमा एक दूसरे से केंद्र भाव में होंगे। गुरु मिथुन राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेंगे जिससे गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा।
मां का आगमन और उसका प्रभाव -
हर साल मां दुर्गा का आगमन अलग-अलग सवारी पर होता है और उसका विशेष महत्व माना जाता है। इस साल मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। हाथी को बहुत शुभ माना जाता है, जो समृद्धि, प्रगति और खुशहाली का प्रतीक है। भक्तों का विश्वास है कि इस वर्ष मां की कृपा से घर-परिवार और समाज में शांति और बरकत बढ़ेगी।
कलश स्थापना का महत्व -
वैदिक ग्रंथों एवं पुराणों में बताया गया है कि किसी भी पुजा में कलश स्थापना का अपना विशेष महत्व होता है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, नवग्रह समेत चौसठ योगिनियों सहित सभी देवी-देवताओं का वास होता है और धर्मशास्त्रों के अनुसार नवरात्र में कलश की पूजा करने से सुख- समृद्धि, धन, वैभव, ऐश्वर्य, शांति, पारिवारिक उन्नति तथा रोग-शोक का नाश होता है।
शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं -
1) सुबह 6:09 मिनट से आरंभ हो रहा है जो 8:06 मिनट तक।
2) सुबह 09:11 मिनट से सुबह 10:43 मिनट तक।
3) दोपहर 11:49 मिनट से 12:38 मिनट तक (अभिजीत मुहूर्त)।
दिनांक  तिथि  व माँ का स्वरूप
22 सितंबर 2025 प्रथमा माँ शैलपुत्री की पूजा
23 सितंबर 2025 द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा
24 सितंबर 2025 तृतीया माँ चंद्रघंटा की पूजा
25 सितंबर 2025 तृतीया माँ चंद्रघंटा की पूजा
26 सितंबर 2025 चतुर्थी माँ कूष्मांडा की पूजा
27 सितंबर 2025 पंचमी माँ स्कंदमाता की पूजा
28 सितंबर 2025 षष्ठी मां कात्यायनी की पूजा
29 सितंबर 2025 सप्तमी माँ कालरात्रि की पूजा
30 सितंबर 2025 अष्टमी माँ सिद्धिदात्री की पूजा
01 अक्टूबर 2025 नवमी माँ महागौरी की पूजा
02 अक्टूबर 2025 विजयादशमी (दशहरा)
नवरात्रि में मां की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु दुर्गा सप्तशती,सिद्ध कुंजिका स्तोत्र दुर्गा चालीसा, देवी कवच, अर्गलास्तोत्र, दुर्गा चालीसा आदि का पाठ करें या 
"ओम् ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्यै" माला का जाप करें।

लेखक परिचय - Pandit Anjani Kumar Dadhich
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakshatra jyotish Hub
नक्षत्र ज्योतिष हब
📧panditanjanikumardadhich@gmail.com
फोन नंबर - 9414863294, 637705450

Saturday, 6 September 2025

चन्द्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच के अनुसार भारतीय पंचांग की काल गणना के आधार पर कल 7 सितंबर 2025 रविवार के दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लग रहा है। चंद्रमा के ग्रहण का समय रात्रि 9:58 मिनट से शुरू होगा और ग्रहण का समापन रात्रि 1:26 मिनट पर होगा। खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। ग्रहण काल से 9 घंटे पहले ही ग्रहण का सूतक काल शुरु हो जाता है। दोपहर 12: 59 मिनट से सूतक काल शुरू होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, पश्चिमी और उत्तरी अमेरिका तथा दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी नजर आएगा। 
यह चंद्र ग्रहण न्याय के कारक शनि की राशि कुंभ और गुरु के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में लगने वाला है। ऐसे में जिन भी जातकों का जन्म इस नक्षत्र में हुआ है उनपर विशेष कृपा बनी रहेगी। करियर-कारोबार में मनचाहा लाभ मिलने की संभावना है। नई नौकरी की प्राप्ति होगी, जिससे भौतिक सुख में वृद्धि होना संभव है। स्वास्थ्य समस्याएं दूर होंगी और रिश्तों में प्रेम-विश्वास का संचार होने के योग है।
यह चंद्र ग्रहण मेष, वृषभ, कन्या और धनु राशि वालों के लिए शुभ रहने वाला है। इन राशियों वालों को धन लाभ, करियर-कारोबार में सफलता, वैवाहिक सुख और निवेश में मनचाहा लाभ संभव है। इसके अलावा अटके काम पूरे और भाग्योदय के भी योग बन रहे हैं। 
यह चंद्र ग्रहण मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए कष्टकारी या पीड़ादायक हो सकता है। सभी क्षेत्रों में कार्य बाधा, यात्राओं में दुर्घटना कारक या कष्टकारी होगा। किसी नए कार्य को शुरू करने का अगर विचार बना रहे हैं तो अभी ठहराव बेहतर रहेगा। व्यापार में चुनौतियां आ सकती हैं। काम को पूरा करने में दिक्कतें आएंगी। किसी से भी कोई जानकारी साझा न करें। 
⁠ ग्रहण में क्या नहीं करना चाहिए - 
✷ग्रहण की अवधि में सोना नहीं चाहिए।
✷बाल या नाखून भी नहीं काटना चाहिए।
✷ग्रहण में रसोई का कोई काम नहीं करना चाहिए।
✷भोजन ग्रहण भी नहीं करना चाहिए।
✷पूजा-पाठ और भगवान की मूर्तियों को नहीं छूना चाहिए।
✷कोई भी खरीदारी ग्रहण में न करें।
✷शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए।
✷गर्भवती महिलाएं बाहर जाने की भूल न करें।
✷आसमान को नहीं देखना चाहिए।
✷ सुई से जुड़ा कोई भी काम न करें।
✿ ग्रहण में क्या करना चाहिए -
✷ ग्रहण काल में नाम जप, मंत्र जप, और भगवान भजन कीर्तन करना चाहिए।
✷ कपड़े, अनाज, अन्न - धन आदि का दान करना चाहिए।
लेखक परिचय - Pandit Anjani Kumar Dadhich 
पंडित अंजनी कुमार दाधीच
Nakastra Jyotish Sansthan 
नक्षत्र ज्योतिष संस्थान 
E-mail anjanikumardadhich@gmail.com 
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